12 सप्ताह का बच्चा – विकास, पड़ाव और देखभाल

आपका 12 सप्ताह का शिशु - विकास, विशेष उपलब्धियाँ और देखभाल

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जी हाँ आपके नन्हे से शिशु ने अपने 3 महीने यानी 90 दिन पूरे कर लिए हैं और उसके इस सफर को पूरा करने में आपने भी अपने दिन रात एक कर दिए होंगे, फिर चाहे वो बच्चे को दूध पिलाना हो, उसके साथ रात भर जागना हो या उसके गंदे डायपर बदलने हों। लेकिन आपका यह संघर्ष बेकार नहीं जाने वाला, जब अपने बच्चे को बड़ा होते हुए देखेंगी और उसे अपने परिवार वालों से जुड़ते हुए देखेंगी तो आप आनंद महसूस करेंगी। 

12 सप्ताह के शिशु का विकास

आप और आपके बच्चे के लिए, उसके यह तीन महीने पूरा होना एक बड़े विकास के तौर पर देखा जा सकता। यहाँ तक कि बच्चे के शरीर को भी पता होता है कि उसने कितना विकास किया है और अभी कितना विकास करना बाकि है। यह तब होता है जब आपका बच्चा विकास के दूसरे चरण की ओर तेजी से बढ़ रहा होता है। जिसका अर्थ है आपको कई बार या फिर किसी भी समय बच्चे को दूध पिलाना पड़ सकता है, जिस कारण उसके भोजन के बीच बहुत कम समय का अंतराल रहेगा और वो ऐसा रात के समय में भी कर सकता है।

12 सप्ताह के शिशु की विकासात्मक उपलब्धियां

3 माह का शिशु अपने आसपास के माहौल से बहुत कुछ सीखने लगता है, परिवार के लोगों की बातें समझने लगता है और उससे बातचीत करने पर प्रतिक्रिया भी देता है। शारीरिक रूप से, 12 सप्ताह के बच्चे का औसत वजन लगभग 1.5-1.8 किलोग्राम होता है जो पहले से अधिक बढ़ता है, लेकिन उसका शारीरिक विकास अभी भी जारी है।

12 सप्ताह तक, शिशु अपने आसपास की होने वाली गतिविधियों को समझने की कोशिश करता है और जानना चाहता है कि वे सारी चीजें कैसे काम कर रही हैं। ऐसे ही जब उसका दूध पीने का समय हो जाएगा, तो वह आपकी तरफ देखकर स्वाभाविक रूप से समझ जाएगा कि उसे दूध पिलाया जाने वाला है और वह उसके लिए तैयार हो जाएगा। इसी तरह, उसके सोने का समय भी प्रभावित हो सकता है, वह एक ही समय पर हर रोज सोने लगेगा जैसे की वह पहले सोता था । ऐसा इसलिए है क्योंकि अभी आपका बच्चा विकास कर रहा है।

यदि आपका बच्चा अपनी संपूर्ण नींद लेने लगता है, तो पिछले 3 महीनों से आप जो अपनी नींद पूरी नहीं कर पाई है उसे पूरा करने का यह एक अच्छा समय है। क्योंकि आगे चलकर आपको अपने बच्चे की देखभाल करना है इसलिए खुद का ख्याल रखना और नींद पूरी करना बेहद जरूरी है, ताकि आप अपने बच्चे की देखभाल और बेहतर तरीके से करें।

स्तनपान

इस चरण में बच्चे का विकास तेजी से होता है और हो सकता है इसके साथ बच्चे की दूध पीने की मांग थोड़ी और बढ़ सकती है। चूंकि, यह वृद्धि तेजी से हो रही है तो ऐसा हो सकता है कि आप एक बार में ही ठीक से दूध न पिला पाएं और बच्चे के दोबारा दूध पीने का समय हो जाए । बच्चे को बड़ा होने और उसकी दैनिक गतिविधियों में बहुत सारी ऊर्जा खर्च होती है। शिशु जितना अधिक सोता है उसका शरीर उतना अधिक विकास करता है, यही कारण है कि इस बीच वह तीव्र भूख से जाग सकता है और भूख की वजह से रोने लग सकता है।

खाने की अधिक मांग करने का अर्थ यह बिलकुल भी नहीं है कि आप बच्चे को दूध के अलावा कोई अन्य खाद्य पदार्थ देना शुरू कर दें । प्रारंभ में, हो सकता है कि आपकी दूध की आपूर्ति बच्चे के लिए पर्याप्त न हो और ऐसे में बच्चे कि भूख शांत करने के लिए आपको उसे ऊपरी दूध देना पड़ेगा। लेकिन ज्यादातर मामलों में, कुछ दिनों के भीतर, आपके शरीर में दूध का उत्पादन बच्चे की भूख के हिसाब बढ़ जाता है।

नींद

चूंकि वह विकास की ओर अग्रसर है, इसलिए थोड़ी संभावना है कि आपका बच्चा रात में जाग जाए और दूध मांगे। इसके अलावा, 12 सप्ताह का बच्चा बहुत अधिक सोता है, ज्यादातर रात में वह एक बार दूध पीने के लिए उठता है और उसके पश्चात वह दोबारा अच्छी नींद लेकर सो जाता है।

नींद

बच्चे को आप गोदी में थपकी देते हुए सुला सकती हैं पर यह जल्द ही आपके लिए एक समस्या पैदा कर सकता है, वह तब तक नहीं सोएगा जब तक कि आप उसे गोद में लेकर नहीं सुलाएंगी। ऐसा करें, जैसे ही उसे नींद आ जाए उसे बिस्तर पर लिटाएं और उसके सो जाने पर उसे धीमे धीमे थपकी दें। कुछ दिन तक ऐसा करें, फिर जल्द ही उसे बिना गोदी के सोने की आदत हो जाएगी। यदि आप अत्यधिक थकी हुई हैं और कई रातों से नींद नहीं ले रही हैं, तो अपने पति को रात में बच्चे के लिए फार्मूला दूध तैयार करने तथा बोतल से उसे दूध पिलाने के लिए कह सकती हैं। यदि आप इसके बजाय स्तनपान को चुनती हैं, तो अपने बच्चे को स्तन पर लेकर न सोएं क्योंकि इससे आप दोनों को नुकसान होने का खतरा हो सकता है।

12 सप्ताह की उम्र के बच्चे करवट लेने लगते हैं । इसलिए, जब वे सोते हैं तो उन्हें अच्छे से लपेट कर रखना चाहिए और उन्हें उनकी पीठ के बल सुरक्षित रूप से लेटाना पहले से ज्यादा जरूरी है। बच्चे के चेहरे को ऊपर की ओर रखने के लिए छोटे तकियों का उपयोग करके उनकी स्थिति को ठीक कर सकते हैं।

व्यवहार

इस समय कारण और प्रभाव की अवधारणा आपके बच्चे के मस्तिष्क के अंदर विकसित होना शुरू हो जाती है और वह समझने लगता है कि चीजे जैसे काम कर रही हैं वह क्यों करती हैं । यदि वह खड़खड़ाहट या अन्य शोर वाले खिलौनों को लगातार देखता तो वह ये समझना शुरू कर देता है कि इसे हिलाने से खड़खड़ाहट की ध्वनि निकलती, जिसे वो पसंद करता है।

इसमें कोई शक नहीं कि उनके हाथों में अभी वह समन्वय नहीं होगा जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है और खिलौने को हिलाने की इस प्रक्रिया में वह खुद के चेहरे पर खिलौना मार सकते हैं। इसलिए ख्याल रखें कि आपका बच्चा इससे खुद को नुकसान न पहुँचाए, इसलिए आप उसे इसके बजाय नरम खिलौने दें। आपके बच्चे के ताकत बढ़ने के साथ साथ आप देखेंगी कि उसकी हाथ की पकड़ भी मजबूत हो रही है साथ ही वो आपकी अंगुली भी पकड़ने लग जाएगा जिसे वो काफी मजबूती से पकड़ता है। आप देखेंगी कि वह अपने पैर बहुत हिलाने लगा है और उसे अपने मुँह में डालने की कोशिश करता है।

यदि आपका शिशु कई बार उत्तेजित हो जाता है, या कंठ से आवाज निकालने लगता है, तो आप अपने दूध की कुछ बूंदें उसके मुँह में डाल दें जिसे वो उसे उगल देगा, जो कि सामान्य बात है बशर्ते इसकी मात्रा अधिक नहीं होनी चाहिए अन्यथा यह उसकी उल्टी का संकेत है। आपके बच्चे का यह व्यवहार उसके लिए एक अच्छा संकेत है।

रोना

आपका शिशु केवल किसी प्रकार की समस्या होने पर ही रोए, ऐसा होने में अभी थोड़ा समय है। लेकिन, अब तक आप यह बेहतर रूप से समझ चुकी होंगी कि आपका शिशु किस वक्त किस चीज के लिए रो रहा है। यदि आपका बच्चा हर समय रोता रहता है तो, यह जल्द ही आपके लिए परेशानी का विषय बन सकता है। बच्चे को अकेला न छोड़े, आराम करें तो बच्चे को परिवार के किसी अन्य सदस्य को संभालने के लिए दे दें । अपने बच्चे के रोने से नाराज होना या चिढ़ना उसके रोने को बढ़ा देगा इसलिए बच्चे पर गुस्सा न निकाले न ही उस पर नाराज हों।

12 सप्ताह के बच्चे की देखभाल के टिप्स

  • शिशु के विकास में वृद्धि से उसके भोजन की मांग अधिक बढ़ जाएगी। फार्मूला दूध अपने नजदीक रखें या स्तन के दूध को निकाल कर एक बोतल में रख लें और रात में जरूरत पड़ने पर इसे बच्चे को दें ।
  • सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे के आस-पास कोई भी कठोर या नुकीली चीज न पड़ी हुई हो, क्योंकि उसके उत्सुक हाथ कुछ ही समय में उसे ढूंढ लेंगे और वह उससे खेलना शुरू कर देगा।
  • भोजन, शौच, खेल और नींद की एक दिनचर्या बनाएं, जिसे प्रतिदिन दोहराए । धीरे-धीरे आपके शिशु को इसकी आदत पड़नी शुरू हो जाएगी और उसे पता होगा कि किस समय उसे क्या करना है ।

परीक्षण और टीकाकरण

तीन महीने का होने पर, डॉक्टर द्वारा किसी अन्य टीकाकरण की आवश्यकता नहीं होती, अगर दो महीने का होने पर सभी पिछले टीके सफलतापूर्वक लग चुके हों।

खेल और गतिविधियां

जैसे-जैसे आपका शिशु बड़ा होता जाता है, उसे ध्वनियां समझ में आने लगती है और जिसे आप बच्चे में महसूस कर सकती हैं। आप उनके साथ खेलते हुए उन्हें ताली बजाना सिखाएं, आप देखेंगी कि जब आप ताली बजाती हैं तो बच्चा भी आपको देख कर ताली बजाने का प्रयास करता है । बच्चे हमसे नकल करके बहुत कुछ सीखते हैं और इसलिए हम उन्हें बहुत कुछ सिखा सकतें है। आप ऐसा उन्हें नर्सरी राइम सिखाने या बच्चे के किसी भी पसंदीदा गाने के साथ ऐसा कर सकती  है।

यदि आपका शिशु अपने सिर को टिकाने में सक्षम है, तो आप एक नरम गद्दे पर पैर मोड़कर बैठे, अपने बच्चे को अपने पेट और पैर के बीच में बैठाएं। फिर,उसे ऊपर नीचे झुलाएं। एक कंबल से दोनों को ढंक दें और तरह तरह की आवाजे निकाल कर बच्चे को हसाएं। यदि आपके पति या दूसरा बच्चा आस-पास है, तो आप उनके साथ मिलकर लुका छिपी खेल सकती हैं और इसके साथ अपने शिशु को भी इसमें शामिल करें।

चिकित्सक से परामर्श कब करें

कुछ बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में चीजों को देर से पकड़ना सीखते हैं। लेकिन अगर आपके बच्चे में विकास के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं, जैसे कि प्रतिक्रिया देना, पहचान करना, या आपके बुलाने पर आपको न देख पाना, संगीत या ध्वनियों से अप्रभावित होना आदि। तो बिना देरी किए अपने डॉक्टर को दिखाएं।

3 महीने पहले ही पूरे हो चुके हैं और हो सकता है आप ऐसा सोचे कि आपके बच्चे की देखभाल यहीं समाप्त हुई लेकिन ऐसा नहीं है यह प्रक्रिया तो असली मायने में अभी शुरू हुई है और जैसे-जैसे आपका बच्चा बढ़ता जाएगा आपके सामने वैसे वैसे नई चुनौतियां आने लगेंगी जो आपके लिए अपने बच्चे के साथ एक यादगार यात्रा के रूप में होगी ।