शिशु

23 सप्ताह का बच्चा – विकास, पड़ाव और देखभाल

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अपने बच्चे को अपने सामने बढ़ते हुए देखना एक माता-पिता के लिए उनके सबसे खूबसूरत पलों में से एक होता है । 23वां सप्ताह हर बच्चे के जीवन का बहुत रोमांचक समय होता है, क्योंकि यह वह समय होता है जब बच्चा अपनी क्षमता और आसपास के लोग, दोनों को पहचानने लगता है। यह उनके लिए एक अद्भुत अहसास है जिसके चलते वह बहुत सारी नई चीजों को करने की कोशिश करते हैं । माता-पिता होने के नाते आपसे बेहतर अपने बच्चे द्वारा दिए गए संकेतों को कोई और नहीं समझ सकता और न ही आपसे बेहतर उनकी देखभाल कर सकता है । इसलिए अपने बच्चे के 23वें सप्ताह से जुड़ी जानकारी इस लेख से प्राप्त करें।

23 सप्ताह के शिशु का विकास

23 सप्ताह की उम्र में, बच्चे अधिक व्यवस्थित हो जाते हैं और विकास के अगले चरण के लिए तैयार हो रहे होते हैं। 23 सप्ताह के शिशु का विकास एक ऐसा चरण होता है जहाँ वह अगले कुछ महीनों में बड़े स्तर पर खुद को शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों से गुजरने के लिए तैयार करते हैं।

अधिकांश शिशु इस वक्त तक काफी गतिशील होते जाते हैं और जमीन पर घुटनों के बल चलने में पहले से और ज्यादा कौशल प्राप्त कर लेते हैं। इस गतिविधि को करने में वह अपनी अंदरूनी ताकत का भी इस्तेमाल करते हैं। अब तक बच्चे सीधे बैठने में भी सक्षम हो जाते हैं और अगर उन्हें कुर्सी पर बिठाकर खाना खिलाया जाए तो इसका आनंद भी उठाते हैं।

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अब आप देखेंगी की बच्चा खुद से खाना खाने का प्रयास करता है और खाते समय ज्यादा नखरे भी नहीं करता है। चूंकि इस समय हो सकता है कि कुछ बच्चे ठोस खाद्य पदार्थ भी खाना पसंद करें, इस कारण उनके लार का उत्पादन भी बढ़ सकता है।

आप बच्चे के वजन की जाँच चिकित्सक के पास जाकर करा लें, कि आपका 23 सप्ताह का बच्चा अपनी आयु के हिसाब से ठीक से विकास कर रहा है या नहीं, कहीं उन्हें अधिक भोजन खिलाने की आवश्यकता तो नहीं है।

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23 सप्ताह के शिशु की विकासात्मक उपलब्धियां

चूंकि बच्चे का संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव स्किल) कौशल बढ़ रहा है, ऐसे में 23 सप्ताह का बच्चा उसमें होने वाले विकास के संकेतों को प्रदर्शित करना शुरू कर देता है। इनमें से कुछ इस प्रकार है :

  • बच्चे अपने खिलौने, जैसे गाड़ी को अपने हाथों से धक्का मार के उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा और उसे यह करने में इतना मजा आता है कि वह इस गतिविधि को घंटों भर तक कर सकता है। जिन खिलौनों से गाने बजते या उनसे किसी प्रकार की ध्वनि निकलती है, उसे बच्चे बार-बार बटन दबाकर सुनना पसंद करते हैं ।
  • बच्चा अब अपने खोए हुए खिलौने और अन्य वस्तुओं को ढूँढने के लिए उन्हें अपने आसपास देखेगा या फिर कपड़े और कंबल के नीचे तलाश करने की कोशिश करेगा।
  • बच्चा खुद का प्रतिबिंब दर्पण में देखकर उत्साहित होता है और उसके साथ खेलना पसंद करता है जो उसे बहुत आकर्षित करता है।
  • उन चीजों को पकड़ने की कोशिश करता है जो उनकी पहुँच से दूर होता है।

इस उम्र में बच्चे बहुत रोचक क्रियाएं करते हैं, जो यह साबित करता है कि वे अपने आसपास की दुनिया को समझ रहे हैं। उन्हें देखें और उनकी इन छोटी-छोटी गतिविधियों को पूरा करने में मदद करें, लेकिन साथ ही, ख्याल रहे कि इन गतिविधियों को उन्हें खुद ही पूरा करें दें।

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स्तनपान

आमतौर पर इस उम्र में, बच्चे ठोस आहार का सेवन शुरू करने के लिए तैयार हो जाते हैं, इसलिए माता-पिता बच्चे को पहले नरम आहार देने से शुरूआत कर सकते हैं। आप बच्चे को थोड़ा-थोड़ा आहार दें और देखे की वह कैसी प्रतिक्रिया देता है यदि वह इसे और खाने के लिए हाथ बढ़ाता है तो इसका मतलब है कि बच्चे को उसका स्वाद अच्छा लगा है। आप बच्चे को फलों की स्मूदी या फिंगर फूड्स जैसी ठोस चीज खिला सकती हैं और आप देखेंगी कि वह इसे खाने के लिए उत्साहित रहेंगे ।

भले ही आप अब उन्हें भोजन में ठोस खाद्य पदार्थ खिला रही हों, लेकिन प्राथमिक पूरक के तौर पर उन्हे दूध देना जारी रखना चाहिए। आप चाहे तो बच्चे को ठोस आहार के साथ माँ का दूध मिलाकर दे सकती हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद शिशुओं को अपने आहार से संपूर्ण पोषण मिलने लगेगा । भोजन से पहले उन्हें दूध पिलाने से यह सुनिश्चित होता है कि, उनकी भूख मिट गई है और यह उनके मल त्याग की क्रिया को भी पहले जैसा रखता है।

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भोजन को मुँह में ठीक से लेना, उसे चबाना, काटना और निगलने जैसे सभी कौशल का उन्हें ठीक से अभ्यास करने देना चाहिए। बच्चे ठीक से खाना निगल रहे हैं इस पर ध्यान रखें । समय के साथ, उनके मसूड़े मजबूत हो जाएंगे और वे भोजन को ठीक से खाने को चबाने लगेंगे। चूंकि स्मूदी, बनावट में गाढ़ी होती है जिसे बच्चे को काटने या चबाने की जरूरत नहीं होती है, ऐसे में बच्चा भोजन पचा पा रहा है या नहीं, इसका पता नहीं चल पाता है ।

नींद

इस समय बच्चे के सोने में थोड़ा बदलाव आ सकता है जिसके कारण वह आधी रात में भी जाग सकते हैं, हालांकि यह बात कोई नई बात नहीं है।

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यहाँ आपके 23 सप्ताह के बच्चे के सोने से जुड़े कुछ बदलाव बताए गए हैं जो इस प्रकार हैं:

  • ज्यादातर चिकित्सकों का कहना है कि छह महीने की उम्र तक बच्चों को खुद से सोना सीख लेना चाहिए, लेकिन ज्यादातर बच्चे ऐसा करने में ज्यादा समय लेते हैं। चिंता न करें, क्योंकि 6-12 महीनों के बीच 78% बच्चे कम से कम एक बार रात में जागते ही हैं।
  • करीब 61% बच्चे अभी भी रात में दूध पीने के लिए उठते हैं।
  • बच्चा अपनी नींद के एक चक्र जो 40 मिनट का लगभग होता है, उसे पूरा करने के बाद उठ सकते हैं और फिर दोबारा सोने में दिलचस्पी भी न लें ऐसा हो सकता है।
  • कुछ बच्चों को तीन से चार घंटे या उससे अधिक घंटों की नींद की आवश्यकता होती है, जबकि कुछ बच्चे छोटी सी झपकी से ही संतुष्ट हो जाते हैं। जब तक बच्चा संतुष्ट है और सोकर उठने के बाद बहुत ज्यादा नहीं रोता है, तब तक चिंता की कोई बात नहीं है।

बच्चे सोने का एक रूटीन अपनाने के लिए समय लेते हैं और माता-पिता को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार होने की आवश्यकता है। इसमें महीनों भी लग सकते हैं, लेकिन यह धीरे-धीरे होगा और एक बार जब बच्चे की नींद का रूटीन निर्धारित हो जाता है तो आपके लिए बहुत राहत भरा प्रतीत होगा।

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23 सप्ताह के बच्चे की देखभाल के टिप्स

यहाँ दिए गए तरीकों की मदद से आप अपना और बच्चे का बेहतर तरीके से ध्यान रख सकती हैं :

  • बच्चे को आसान तरीकों से पढ़ने की कोशिश करें और उन्हें रंगों और वस्तुओं से खेलने दें, ताकि उनकी समझ और पकड़ मजबूत हो सके।
  • जब आप अपने बच्चे को विभिन्न वस्तुओं जैसे कि रबर की बत्तख, मग, साबुन के बुलबुले, तो वे उसे देखकर खुश होते हैं और उसके साथ खेलने की कोशिश करते हैं।
  • बच्चे को खेल कूद वाली गतिविधियों में लगाए रखने से यह उनके संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास करने का एक बेहतरीन तरीका है।

जाँच और टीकाकरण

इस उम्र में बच्चे को कुछ टीकाकरण की जरूरत होती है जि सके लिए आपको टीका लगवाने के लिए पहले से ही समय निर्धारित करना बहुत जरूरी है।टीकाकरण के बाद बच्चे को थोड़ा बुखार हो सकता है जिसके कारण वह थोड़े चिड़चिड़े हो सकते हैं, इसलिए बच्चे साथ ही रहे और उनका ध्यान रखें ।

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लगभग 6 महीने के आसपास बच्चे को अपनी पहली सर्दी का सामना करना पड़ सकता है और उनका इस तरह पहली बार बीमार पड़ना, माता-पिता के लिए एक डरावना अनुभव हो सकता है। यदि आपको लगता है कि आपका बच्चा अस्वस्थ महसूस कर रहा है, तो आपको अपनी मन की बात सुन्नी चाहिए।चकते, उल्टी, उच्च तापमान, दस्त और व्यवहार में बदलाव आदि कुछ ऐसे संकेत है, जिससे पता चलता है कि आपका बच्चा ठीक नहीं है।

खेल और गतिविधियां

कुछ ऐसे खेल हैं, जिसे इस उम्र में आप अपने बच्चे को परिचय करा सकती हैं:

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१.  पैरों पर बैठाकर कर सवारी करना:

आप एक कुर्सी पर बैठकर अपने दोनों घुटनों को जोड़कर उसपर अपने बच्चे को बैठाएं। आप उसे अपने घुटनों पर बैठाकर झूला झुला सकती हैं और अचानक से झूला झुलते हुए नीचे उतार दें, बच्चों को इस तरह के खेल में बहुत मजा आता है। यह खेल गतिविधि बच्चे की समझ को विकसित करने में मदद करता है जो खेल के साथ साथ बच्चे का विकास भी करता है।

२. गुदगुदी और मस्ती वाला खेल:

स्नान के दौरान आप बच्चे के साथ मस्ती वाले खेल खेल सकती हैं, इससे बच्चे के बोलना और उसकी मोटर स्किल में सुधार होगा। जब वे स्नान कर रहे हों, तो पानी से स्पंज को गीला कर लें और थोड़ा साबुन लगाकर कहें, “मैं आपके पैर की उंगलियों को गुदगुदी करने जा रही हूँ,” और उन्हें धीरे से गुदगुदी करने के लिए आगे बढ़ें। इसी तरह शरीर के विभिन्न हिस्सों की ओर इशारा करते हुए, ऐसा करना जारी रखें। फिर स्पंज को बच्चे के हाथ में दें, आप देखेंगी की बच्चा आपकी तरह खुद को गुदगुदी करने की कोशिश कर रहा है, वह पानी के साथ तब तक खेलना पसंद करेगा जब तक आप उसे टब से बाहर नहीं निकाल लेती।

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चिकित्सक से परामर्श कब करें

आपके बच्चे में बार-बार बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं और उसे लगातार खाँसी या छींक आ रही हो, तो हो सकता है कि बच्चे को किसी चीज से एलर्जी हो रही हो। यदि ऐसा लगातार बना रहता है तो अपने चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें।

इसके अलावा, अगर आपको लगता है कि बच्चा भोजन को ठीक से पचा नहीं पा रहा है या लगातार रो रहा है, तो यह किसी आंतरिक दर्द के कारण हो सकता है, जिसे वह किसी अन्य तरीके से व्यक्त नहीं कर सकता । इसलिए बच्चे को बिना देरी करे चिकित्सक के पास ले जाएं।

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अब 23 सप्ताह का इस वक्त अपने विकास के एक महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है, इसलिए माता-पिता को यह जानने की आवश्यकता है कि वे उन्हें कैसे व्यस्त और स्वस्थ रख सकते हैं। समय के साथ, जब बच्चे अपनी चीजों को खुद करने का प्रयास करेंगे और उनकी मांसपेशियों में ताकत बढ़नी शुरू हो जाएगी, तब आप देखेंगी की आपके किए गए प्रयास रंग ला रहे हैं ।

समर नक़वी

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