शिशु

बच्चों के आहार में अंडा कब और कैसे शामिल करें

अंडे को अक्सर सुपर फूड के रूप में भी जाना जाता है और बहुत सारे लोग इसे प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत भी मानते हैं, लेकिन इसके बावजूद माता-पिता के मन में हमेशा ये संशय बना रहता है कि वे इसे कब अपने बच्चे के आहार में शामिल कर सकते हैं। अपने शिशु के आहार में अंडा शामिल करने से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए यह लेख आगे पढ़ें।

बच्चे अंडा कब खा सकते हैं?

हाल के अध्ययनों से पता चला है कि अंडे की जर्दी को आठ महीने की उम्र के शिशुओं के आहार में सुरक्षित रूप से शामिल किया जा सकता है, हालांकि अंडे का सफेद भाग बारह महीने पूरे हो जाने के बाद ही दिया जाना चाहिए। 

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अंडे का पोषण मान

माँ के दूध के बाद, अंडे को सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत माना गया है, यहाँ तक कि मात्र एक ही अंडे में तेरह अत्यावश्यक विटामिन पाए जाते हैं। अंडे में कॉपर, जिंक, सेलेनियम, कैल्शियम और आयरन जैसे आवश्यक खनिज होते हैं। इसमें प्रोटीन, कोलेस्ट्रॉल, वसा, फैटी एसिड और विटामिन डी, बी12, ई, कोलीन और फोलेट भी मौजूद होता है, उपरोक्त सभी पोषक तत्व बच्चे के विकास के लिए बेहद जरूरी होते हैं।

1 अंडा (50 ग्राम) का पोषण मान 

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कैलोरी 70
कुल वसा 5 ग्रा / 6%
संतृप्त वसा 1.5 ग्रा / 8%
ट्रांस वसा 0 ग्रा
कोलेस्ट्रॉल 185 मि.ग्रा / 62%
सोडियम 70 मि.ग्रा / 3%
कुल कार्बोहाइड्रेट 0 मि.ग्रा / 0%
आहारीय रेशा 0 ग्रा
कुल शर्करा 0 ग्रा
प्रोटीन 6 ग्रा / 12%
विटामिन डी 1 माइक्रोग्राम / 6%
कैल्शियम 28 मि.ग्रा / 2%
आयरन 1 मि.ग्रा / 6%
पोटैशियम 69 मि.ग्रा / 2%

अंडे की जर्दी और अंडे की सफेदी के बीच अंतर

हालांकि, अंडे की जर्दी और अंडे की सफेदी, दोनों में ही काफी पोषक तत्व होते है, फिर भी अंडे के सफेद भाग में कम कैलोरी होती है और इसमें कार्बोहाइड्रेट और वसा नहीं होता है। इसके अलावा, अंडों में पाए जाने वाले सभी पोषक तत्वों में से आधे से अधिक उनके सफेद भाग में मौजूद होते हैं। अंडे का सेवन करने से एलर्जी होने का खतरा रहता है, इसलिए शुरू में शिशु को केवल अंडे की जर्दी देने की सलाह दी जाती है।

आइए, दोनों पर विस्तार से एक नजर डालते हैं ।

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अंडे की सफेदी:

जैसा कि ऊपर बताया गया है, अंडे के सफेद भाग में, अंडों द्वारा पाए जाने वाले सभी पोषक तत्वों में से लगभग आधे से ज्यादा इसमें मौजूद होते हैं और इसके साथ साथ इसमें कार्बोहाइड्रेट और वसा नहीं होता है। अंडे के सफेद भाग में मौजूद चार ग्राम प्रोटीन में लगभग अधिकांश प्रोटीन शामिल होते हैं।

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अंडे की जर्दी:

अंडे की जर्दी में वसा, संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल होता है जिसकी वजह से कई माता-पिता चिंतित होते हैं। एक महत्वपूर्ण तथ्य, जिसे लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं, वो यह है कि जर्दी में आवश्यक फैटी एसिड और वसा में घुलनशील विटामिन होते हैं और इसमें भरपूर आयरन और कैल्शियम भी होता है।

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नीचे दी गई तालिका अंडे की सफेदी और अंडे की जर्दी के पोषक गुणों को समझने में मदद करेगी।

पोषक तत्‍व सफेद जर्दी सफेदी में कुल % जर्दी में कुल %
प्रोटीन 3.6 ग्रा 2.7 ग्रा 57% 43%
वसा 0.05 ग्रा 4.5 ग्रा 1% 99%
कैल्शियम 2.3 मि.ग्रा 21.9 मि.ग्रा 9.5% 90.5%
मैग्नीशियम 3.6 मि.ग्रा 0.85 मि.ग्रा 80.8% 19.2%
आयरन 0.03 मि.ग्रा 0.4 मि.ग्रा 6.2% 93.8%
फॉस्फोरस 5 मि.ग्रा 66.3 मि.ग्रा 7% 93%
पोटैशियम 53.8 मि.ग्रा 18.5 मि.ग्रा 74.4% 25.6%
सोडियम 54.8 मि.ग्रा 8.2 मि.ग्रा 87% 13%
जिंक 0.01 मि.ग्रा 0.4 मि.ग्रा 0.2% 99.8%
कॉपर 0.008 मि.ग्रा 0.013 मि.ग्रा 38% 62%
मैंगनीज 0.004 मि.ग्रा 0.009 मि.ग्रा 30.8% 69.2%
सेलेनियम 6.6 माइक्रोग्राम 9.5 माइक्रोग्राम 41% 59%
थायमिन 0.01 मि.ग्रा 0.03 मि.ग्रा 3.2% 96.8%
राइबोफ्लेविन 0.145 मि.ग्रा 0.09 मि.ग्रा 61.7% 48.3%
नियासिन 0.035 मि.ग्रा 0.004 मि.ग्रा 89.7% 9.3%
पैंटोथैनिक एसिड 0.63 मि.ग्रा 0.51 मि.ग्रा 11% 89%
बी 6 0.002 मि.ग्रा 0.059 मि.ग्रा 3.3% 96.7%
फोलेट 1.3 माइक्रोग्राम 24.8 माइक्रोग्राम 5% 95%
बी 12 0.03 माइक्रोग्राम 0.331 माइक्रोग्राम 8.3% 91.7%
विटामिन ए 0 आई.यू 245 आई.यू 0% 100%
विटामिन ई 0 मि.ग्रा 0.684 मि.ग्रा 0% 100%
विटामिन डी 0 आई.यू 18.3 आई.यू 0% 100%
विटामिन के 0 आई.यू 0.119 आई.यू 0% 100%
डी.एच.ए और ए.ए 0 94 मि.ग्रा 0% 100%
कैरोटीनॉयड 0 माइक्रोग्राम 21 माइक्रोग्राम 0% 100%

बच्चों के लिए अंडे से होने वाले फायदे

माँ के दूध में प्रोटीन ‘लैक्टलब्युमिन’ की उच्चतम गुणवत्ता पाई जाती है और उसके बाद अंडे को ही प्रोटीन का दूसरा सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। अंडे खनिज, विटामिन और कई अन्य पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं जो शिशुओं के लिए कई तरह से फायदेमंद होते हैं। अंडे की सफेदी, पोटैशियम और प्रोटीन में समृद्ध होने के कारण अंगों को कार्य करने में मदद करती है।

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 1. पाचन और प्रतिरक्षा

अंडे आयरन, सेलेनियम और जिंक जैसे खनिज पदार्थों से भरपूर होते हैं। इस प्रकार, वे एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली बनाने में मदद करते हैं। शिशुओं में नई कोशिकाओं का बनना महत्वपूर्ण है और अंडे फोलेट में समृद्ध होने के कारण कोशिकाओं के पुनर्जनन में मदद करते और सहारा देते हैं। अंडे की सफेदी शिशुओं के शरीर में सोडियम और पोटैशियम की सही मात्रा को बनाए रखने में मदद करती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंडे, विशेष रूप से जर्दी, बच्चों के लिए खाने और पचाने में आसान होती है।

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2. मस्तिष्क का विकास

अंडे की जर्दी में कोलीन और कोलेस्ट्रॉल होता है, जो बच्चे के मस्तिष्क का विकास करने में मदद करते हैं। कोलेस्ट्रॉल वसा के पाचन में सहायता करता है और हॉर्मोन भी उत्पन्न करता है। कोलीन हृदय और तंत्रिका तंत्र को सही तरीके से कार्य करने में सहायता करता है।

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3. ऊर्जा और हड्डियों का विकास

जहाँ अंडे की सफेदी में मौजूद प्रोटीन महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रदान करते हैं, वहीं अंडे की सफेदी में राइबोफ़्लेविन भी मौजूद होता है, जो कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा उन्मुक्त करने के लिए महत्वपूर्ण होता है। विटामिन ए, डी, ई और के वसा में घुलनशील विटामिन हैं, जो हड्डियों के विकास में सहायता करते हैं।

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4. ह्रदय का स्वास्थ्य

अंडे की जर्दी में फॉस्फोलिपिड होता है जो संवहनी (वैस्कुलर) को सही तरीके से कार्य करने में मदद करते हैं और बच्चे के शरीर में कोलेस्ट्रॉल को प्रबंधन करने में सहायता करते हैं।

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5. यकृत (लिवर) के कार्य

अंडे में सल्फर की मात्रा विटामिन बी 12 को अवशोषित करने में मदद करने के अलावा केराटिन और कोलेजन के उत्पादन में भी मदद करती है जो यकृत के समुचित कार्य के लिए महत्वपूर्ण है।

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6. नेत्र का स्वास्थ्य

अंडे में ल्यूटीन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट भी पाए जाते हैं, ल्यूटीन आँखों को हानिकारक खराब रौशनी और पराबैंगनी (अल्ट्रावायलेट) प्रकाश से होने वाली क्षति से बचाता है, ये दोनों एंटीऑक्सिडेंट दृष्टि की हानि को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और यह अंडे की जर्दी में पाए जाते हैं।

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अच्छे अंडों का चुनाव कैसे करें

  • ताजे अंडे फ्रिज में रखे हुए अंडों की तुलना में ज्यादा बेहतर होते हैं।अंडे बेचने वाले विक्रेता अंडों को खुले में रखते हैं क्योंकि वे ताजे होते हैं, इसलिए उन लोगों से ही अंडे खरीदने की सलाह दी जाती है।
  • ताजे अंडे कटोरी में पानी में डालने पर डूब जाते हैं। अंडे में हवा की एक थैली होती है और जैसे-जैसे अंडे पुराने होते जाते हैं ये हवा की थैली बढ़ती जाती है जिससे वे तैरने लगते हैं।
  • पुराने अंडों की जर्दी अधिक आसानी से टूट जाती है जबकि ताजे अंडे की जर्दी मजबूत होती है, जो एक स्पष्ट सफेदी से घिरी हुई होती है।
  • यह पता लगाने के लिए कि अंडे का जर्दी वाला भाग ठीक से पक गया है या कच्चा है, उसे मेज या किचन काउंटर पर घुमाएं, अच्छे से उबला हुआ अंडा देर तक घूमता है और इस प्रक्रिया से आप पता लगा सकती हैं कि अंडा ठीक से पक गया है या नहीं ।

अंडों को स्टोर कैसे करें

बच्चा एक दिन में खरीदे गए सभी अंडों का उपभोग एक साथ एक ही दिन में नहीं कर सकते हैं, इसलिए, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आपके बच्चे द्वारा अंडों का उपभोग किए जाने तक उनको ताजा बनाए रखने के लिए, उन्हें सही तरीके से स्टोर किया जाए।

  • अंडों को उनकी मूल पैकेजिंग में स्टोर किया जाना चाहिए और फ्रिज के सबसे ठंडे हिस्से में रखा जाना चाहिए; मूल पैकेजिंग अंडे को रेफ्रीजिरेटर में मौजूद किसी भी तरह के स्वाद या गंध को अवशोषित करने से रोकेगी।
  • अंडों को स्टोर करते समय उसका बड़ा हिस्सा ऊपर की तरफ रखने से अंडे की जर्दी बीच में ही रहेगी।
  • दी गई समाप्ति तिथि से पहले या खरीद के सात दिनों के भीतर अंडों का उपयोग करने का प्रयास करें।

बच्चों के लिए अंडे पकाने के सुझाव

एक बार शिशु जब एक वर्ष या उससे अधिक उम्र का हो जाते है, तो वे उबले हुए, तले हुए, भुर्जी या ऑमलेट के रूप में पूरा अंडा खा सकता है। जो शिशु एक वर्ष या उससे अधिक उम्र के होते हैं, उन्हें कस्टर्ड जैसे व्यंजन खिलाए जा सकते हैं जिनमें अंडा होता है। आप जब बच्चे के लिए अंडा पकाएं तो कुछ बातों का ध्यान दें । वे खाद्य पदार्थ, जिनमें कच्चा अंडा होता है जैसे कि मेयोनीज, घर की बनी आइस्क्रीम या बेक की हुई चीजें आदि, इन्हें बच्चों को खिलाने से बचें, क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी भी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। बच्चे को अंडे की जर्दी के प्राकृतिक स्वाद का आदी होने के लिए थोड़ा समय दें। जर्दी में चीनी या नमक न डालें। चूंकि आधे उबले अंडे रोगजनक हो सकते हैं और इसका प्रतिरोध करने के लिए एक बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होती है, इसलिए बच्चों को अंडा पूरी तरह से उबाल कर देने की सलाह दी जाती है।

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बच्चों के लिए अंडों के स्वस्थ व स्वादिस्ट रेसिपीस

1. उबले अंडे

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि बच्चों को एक वर्ष या उससे अधिक उम्र के होने पर ही उबले अंडे दिए जा सकते हैं। अंडे का असली स्वाद का आदी होने के लिए, उसे बिना नमक या चीनी मिलाए उबले अंडे देने की सलाह दी जाती है, अगर बच्चे को यह बिल्कुल पसंद नहीं आता है तो आप स्वाद के लिए इसमें एक चुटकी नमक मिला सकती हैं।

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दस मिनट या उससे अधिक समय तक अंडे को उबालने से यह अंडे की सफेदी के स्वाद और बनावट को खराब कर देता है और फिर इसे खाने में मुश्किल होती है। अंडे को बेहतर तरीके से उबालने का एक तरीका नीचे दिया हुआ है।

  • एक पैन में ठंडा पानी लें और उसमें अंडे डाल दें और फिर इसे आँच पर रखकर उबालें।
  • आँच धीमी करें और एक मिनट के लिए उबलने दें, फिर बंद कर दें और पैन को बीस मिनट के लिए ढक कर छोड़ दें।
  • अंडे को छील लें, छोटे टुकड़ों में काटें और परोसें।

2. अंडे की भुर्जी

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बच्चों के लिए अंडे की भुर्जी बनाने के लिए इन चरणों का पालन करें।

  • एक कटोरे में एक अंडा तोड़ के डालें।
  • फिर जर्दी को हल्के हाथों से फेंटे और सफेदी के साथ मिलाएं।
  • एक छोटा तवा गरम होने तक इसे मध्यम आँच पर रखें।
  • एक चम्मच तेल डाल कर फेंटा हुआ अंडा डालें।
  • उसे एक चम्मच द्वारा हल्के से फेंटकर चलाती रहें और अच्छे से पकने तक भूनें।
  • एक चुटकी नमक और काली मिर्च के साथ परोसें। 

3. अंडे की जर्दी का मैश 

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बच्चे को अंडे की जर्दी देने का एक सरल तरीका है कि आप अंडे की जर्दी को मैश बना लें। इसे तैयार करने के लिए, बस पूरी तरह से उबले अंडे को दो भागों में काट लें, फिर जर्दी को निकालें और इसे दूध या दही के साथ मिलाएं।

4. अंडा चावल – सब्जियों के साथ

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शिशुओं के लिए अंडा चावल बनाने का तरीका यहाँ दिया गया है:

  • पहले से भांप में पकाई गई या उबली हुई गाजर और ब्रोकोली जैसी सब्जियां 1/4 कप लें और एक कप पके हुए चावल लें और इसे उबले अंडे को छोटे छोटे टुकड़े करके साथ मिलाएं और परोसें।

5. ऑमलेट

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एक अंडे को एक चौथाई कप दूध, नमक और काली मिर्च के साथ मिलाएं और अच्छी तरह से फेंटे। एक गर्म तवे में तेल डालें और इसमें ऑमलेट का मिश्रण डालें। इसे जमने दें और परोसें। इसे स्पॉन्जी बनाने के लिए आप तेल के बजाय बटर का भी उपयोग कर सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. अंडे का कौन सा हिस्सा बच्चों के लिए एलर्जी का कारण बन सकता है?

अंडे के सफेद भाग में चार प्रोटीन होते हैं, जो एलर्जी का कारण बन सकते हैं। अंडे की जर्दी से होने वाली एलर्जी बहुत ही कम पाई जाती है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि कई वैज्ञानिक अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि बच्चे पाँच साल की उम्र तक आते आते अंडे से होने वाली एलर्जी से बचने में सक्षम हो जाते हैं।

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2. क्या आप अपने बच्चे को प्रतिदिन अंडा दे सकती हैं?

हाँ, बच्चों को प्रतिदिन अंडे दिए जा सकते हैं।

3. आप 8 महीने के बच्चे को कितने अंडे की जर्दी दे सकती हैं?

यह सलाह दी जाती है कि आठ महीने की उम्र के बच्चे को प्रतिदिन केवल एक अंडे की जर्दी खिलाई जानी चाहिए।

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4. यदि आपका शिशु अंडे की जर्दी पसंद नहीं करता है, तो क्या करें?

आप शिशु के स्वाद के अनुरूप नमक और काली मिर्च मिला सकती हैं। इसके अतिरिक्त, आप शिशु के लिए उबले अंडे की जर्दी को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसे दूध या दही में मिला सकती हैं। आप अंडे की सफेदी के साथ जर्दी को मिलाकर शिशु को अंडे की भुर्जी भी दे सकती हैं। अंडे के साथ पुडिंग या कस्टर्ड बनाना भी एक अच्छा विचार है । यदि आपका शिशु अभी भी अंडे की जर्दी को पसंद नहीं करता है, तो आप उसे सिर्फ सफेदी भी दे सकती हैं।

5. क्या आप अपने शिशु को कम उबली हुई जर्दी दे सकती हैं?

बच्चों को कम उबली हुई बहती हुई जर्दी देने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि अंडे की जर्दी में साल्मोनेला एंटरिटाइडिस नाम का एक बैक्टीरिया होता है। ये बैक्टीरिया बच्चों में संक्रमण पैदा कर सकते हैं। साल्मोनेला एंटरिटाइडिस अंडे के पूरी तरह से पक जाने पर नष्ट हो जाता है। कम उबले अंडे की जर्दी ठीक से पकी हुई नहीं होती है और यह साल्मोनेला एंटरिटाइडिस  जीवाणु को मारने के लिए पर्याप्त नहीं होती है।

संक्रमण की जाँच के लिए, व्यक्ति को साल्मोनेला के लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए। इससे संक्रमित व्यक्ति में दस्त, बुखार और पेट में ऐंठन के लक्षण दिखाई देंगे जो कि चार से सात दिनों तक रहेंगे।

हालांकि, अधिकांश अभिभावकों को अपने बच्चे के आहार में अंडे शामिल करने से पहले डर और आशंका महसूस होती है, बच्चे को लगभग एक वर्ष की आयु के होने के बाद अंडे का सेवन कराना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। जैसे कि पहले भी चर्चा की जा चुकी है, यदि कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो अंडे का सेवन आपके शिशु के लिए न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि वे कई तरह से बच्चे को फायदा भी पहुँचाता है।

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श्रेयसी चाफेकर

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