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माता-पिता होने के नाते अपने बच्चे को अच्छा आहार देना आपकी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बच्चे को उसकी शुरूआती आयु में ही सभी पौष्टिक आहार खिलाना शुरू कर देना चाहिए ताकि उसे अच्छे भोजन और इसके स्वाद की आदत पड़ सके। एक बार जब बच्चे के दाँत निकलने शुरू हो जाते हैं तो आपको उसके आहार में सॉलिड फूड शामिल करना शुरू कर देना चाहिए जिनमें से एक है ‘हरी मटर’।
एक बार जब आपका बच्चा 6 महीने की आयु को पूर्ण कर लेता है तो आप उसे सही मात्रा में सॉलिड फूड खिलाना शुरू कर सकती हैं। हालांकि यह माना जाता है कि मटर बच्चों में गैस और परेशानी का कारण बनती है। इससे अधिक, मटर खाना यूरिक एसिड से भी जुड़ा हुआ है।
इसलिए बच्चे की सेहत के लिए उसे लगभग 8 महीने की आयु में मटर खिलाने की सलाह दी जाती है।
मटर में विटामिन, मिनरल और फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। इसमें विटामिन ‘ए’, ‘बी1’, ‘बी6’, ‘के’, और विटामिन ‘सी’ भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। मटर में मिनरल भी होते हैं, जैसे मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन और फॉस्फोरस। यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, नियासिन और फोलेट से भी भरपूर है इसलिए बच्चों को मटर खिलाने की सलाह दी जाती है।
क्या आप विचार कर रही हैं कि आपको बच्चे के आहार में मटर शामिल क्यों करनी चाहिए? इसके अद्भुत फायदे जानने के लिए आगे पढ़ें;
अध्ययन से पता चलता है कि मटर वह खाद्य पदार्थ नहीं है जो पेस्टिसाइड द्वारा बहुत दूषित होता है। इसलिए यदि आप सोच रही हैं कि बच्चे को किस तरह की मटर देना सही होगा तो बताना चाहेंगे कि सामान्य रूप से ऑर्गैनिक मटर चुनना ही आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
मार्केट से मटर खरीदते समय, हरी मटर ही चुनें। मटर की फली हरी व थोड़ी सी सख्त होनी चाहिए और साथ ही इसमें कोई भी दाग या सूखापन भी नहीं दिखाई देना चाहिए। मटर छूने में बहुत मुलायम और नर्म लगनी जरूरी है। हमेशा सामान्य आकार की मटर ही खरीदें क्योंकि यह बड़ी मटर से ज्यादा ताजी और मीठी होती है।
जब बात मटर को स्टोर करने की आती है तो ध्यान रखें कि बिना देर लगाए इसे पका लें क्योंकि यह सब्जी अधिक दिनों तक फ्रेश नहीं रहती है। हालांकि आप मटर को फ्रीजर में स्टोर करके रख सकती हैं पर यदि आप बच्चे के लिए मटर बनाना चाहती हैं तो आपके लिए ताजी मटर चुनना ही बेहतर उपाय है।
जब यह सवाल उठता है कि बच्चे को हरी मटर कैसे खिलाएं तो इसे उबालकर या स्टीम करके छोटे बच्चों को खिलाने की सलाह दी जाती है। स्टीम की गई या उबली हुई मटर बहुत सॉफ्ट और घुलनशील होती हैं जिसके कारण इसे बच्चे के आहार में शामिल किया जा सकता है।
यदि आपका बच्चा सॉलिड मटर को चबाने के लिए तैयार नहीं है तो आप उसे मटर की प्यूरी बनाकर खिला सकती हैं। इसे बनाने की रेसिपी यहाँ दी गई है, आइए जानते हैं;
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बच्चों के लिए मटर की अन्य रेसिपीज भी पकाने का प्रयास करें, वे कौन सी हैं आइए जानते हैं;
बच्चे को मटर के साथ मलाई देने से उसे कैल्शियम के कई फायदे मिल सकते हैं।
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क्या आपके बच्चे को अभी भी सॉलिड फूड खाने की आदत नहीं हुई है? उसे मटर का सूप बनाकर खिलाएं, यह पकाने और पचाने में भी सरल है।
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बच्चे के आहार में प्रोटीन शामिल करने का यह एक बेहतरीन तरीका है।
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इसमें गाजर मिलाने से यह बच्चे की दृष्टि के विकास में मदद करती है।
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मटर के साथ चावल और चिकन का कॉम्बिनेशन आपके बच्चे को स्वाद देने के साथ-साथ उसका पेट भी भरेगा।
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यह सब आपके बच्चे को मटर और उससे जुड़े स्वाद से परिचित कराने के बारे में था। आज ही इन रेसिपीज में से किसी एक को पकाने का प्रयास करें और इसके साथ अपने बच्चे को आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर और एक मजेदार स्वाद प्रदान करें।
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