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फलों की प्यूरी सरलता से बनाई जा सकती है और सरलता से खाई भी जा सकती है,साथ ही इसमें पोषण तत्वों की मात्रा भी अत्यधिक होती है जो कि शिशु के संपूर्ण विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन अगर आप हर दूसरे दिन एक ही तरह के फल की प्यूरी परोसेंगी,तो आपका शिशु नखरे कर सकता है। इस लेख में हम कुछ सुझाव देंगे कि शिशु को फलों की प्यूरी कैसे और कब खिलाना शुरू करना है।
फलों की प्यूरी आमतौर पर पचाने में आसान होती है। फिर भी, आपको यह जानने की ज़रूरत है कि अन्य सभी ठोस खाद्य पदार्थों की तरह ही आपके बच्चे के आहार में फलों को शामिल करने का सबसे अच्छा समय कब है। आप एक फल, एक चम्मच और दिन में दो बार खिलाने के साथ शुरुआत कर सकती हैं, धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं।
अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है कि शिशु के लगभग 6-8 महीनों का होने पर इसकी शुरुआत धीरे-धीरे कर सकती हैं। इस समय तक शिशु आमतौर पर स्तनपान कम करने लगता है। इसलिए, सम्पूर्ण पोषण के लिए उन्हें अपने आहार में अन्य खाद्य पदार्थों की आवश्यकता होती है।
फलों की प्यूरी का अधिकतम लाभ उठाने के लिए, नीचे दिए गए सुझावों का पालन करें और शिशु के लिए प्यूरी बनाना सीखें।
जैसा कि हमने पहले ही कहा है, एक ही तरह के फल से प्यूरी बनाने की शुरुआत करें। शिशु को एक प्रकार के फल सुहाने के बाद ही आप दूसरे को चुन सकती हैं और फिर मिश्रित फलों की प्यूरी भी बनाकर दे सकती हैं।
नर्म और मीठा चीकू 7 महीने के शिशुओं के लिए बेहतरीन फल है। यह विटामिन ए और सी से भरपूर होता है।
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8 महीने से अधिक उम्र के बच्चों के लिए खजूर की प्यूरी उपयुक्त है। यह बी काम्प्लेक्स विटामिन्स और सेलेनियम, कॉपर, पोटैश्यिम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, कैल्शियम और लौह तत्व जैसे खनिजों का अच्छे स्रोत हैं।
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मिश्रित फल की प्यूरी एक उत्तम पौष्टिक भोजन है, खासकर 8 महीने से अधिक उम्र के शिशुओं के लिए। इसमें संतरे से बहुत अधिक मात्रा में विटामिन ए और अन्य फलों की तुलना में अधिक मात्रा में विटामिन सी होता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और फॉलेट भी होता है जिसे अक्सर ‘फलों की रानी’ या ‘सुपर फल’ भी कहते हैं क्योंकि इसमें अन्य फलों की तुलना में अधिक पोषक तत्व होते हैं इसलिए ही यह प्यूरी शिशु के भोजन का एक अनिवार्य हिस्सा है।
पपीता कैरोटीन जैसे एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन सी और फ्लेवोनॉइड का एक बेहतर स्रोत है। इसमें विटामिन बी, फॉलेट, पैंटोथेनिक एसिड, पोटैशियम, कॉपर, और मैग्नीशियम भी हैं। इसमें फाइबर होता है और इसलिए यह पचाने में आसान होता है। क्रिस्टोफर कोलंबस ने इसकी अच्छाई और स्वाद को देखते हुए इसे “फ़रिश्तों का फल” कहा था।
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शिशु के 6-8 महीने की उम्र में, उसे यह प्यूरी दी जा सकती है। आलूबुखारा हल्का रेचक होता है इसलिए इसे पहले छह महीनों में नहीं देना चाहिए।
नाशपाती में विटामिन ए, सी, फॉलेट और पोटैशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे खनिज होते हैं। आलूबुखारा शक्कर, प्रोटीन, विटामिन सी और विटामिन के का अच्छा स्रोत है। चूंकि इन दोनों फलों में उच्च मात्रा में फाइबर होता है, इसका गाढ़ा प्यूरी आपके शिशु को कब्ज़से राहत दिला सकता है।
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यह प्यूरी बच्चे के पेट को लंबे समय तक भरा रख सकता है क्योंकि प्रत्येक अंगूर में लगभग 5 कैलोरी होती है।
इसमें तीन बेहतरीन स्रोतों के पोषक तत्व मौजूद हैं। अंगूर केवल कैलोरी से परिपूर्ण नहीं होते हैं बल्कि इनमें विटामिन ए, सी, बी-6,विटामिन के तथा पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, लौह तत्व जैसे खनिज भी होते हैं, इसमें रेसवेराट्रॉल और फाइबर भी मौजूद हैं। तरबूज़ में विटामिन ए, बी 6 और सी, लाइकोपीन, एंटीऑक्सिडेंट, अमीनो एसिड की बेहतर मात्रा और पौटेशियम कुछ पोटेशियम भी होता है। नींबू विटामिन सी के लिए जाना जाता है, इसमें फॉलेट और पोटैशियम भी मौजूद होता है।
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यह प्यूरी, शुद्ध, प्राकृतिक तत्वों से परिपूर्ण होती हैं जो आपके शिशु के सेहतमंद विकास के लिए काफी लाभदायक हैं।
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