प्रीस्कूलर (3-5 वर्ष)

बच्चों को पढ़ना कैसे सिखाएं

रीडिंग यानी पढ़ना एक बच्चे विकास के पड़ाव का एक अहम हिस्सा है। मोटर स्किल्स के विपरीत, रीडिंग स्किल्स एक बच्चे में अपने आप विकसित नहीं होती है। पढ़ने के कौशल को जल्दी विकसित करने के लिए दिए गए उपाय बच्चे की पढ़ने की क्षमता को जल्दी पनपने में मदद कर सकते हैं। 

बच्चों को पढ़ना सिखाने के बेहतरीन तरीके

पढ़ना एक ऐसा कौशल है जिसे कई बच्चे चार से छह साल की उम्र के बीच में सीखते हैं। उम्र के ग्रुप को खासतौर पर बड़ा रखा गया है क्योंकि अलग-अलग क्षमता वाले बच्चों को एडजस्ट किया जा सके। इस समय कुछ माता-पिता अपने बच्चे की पढ़ने की स्किल्स को लेकर चिंतित हो जाते हैं। वे क्रैश कोर्स और शॉर्टकट की तलाश शुरू करते हैं कि कैसे एक बच्चे को घर पर पढ़ना सिखाया जाए। यहाँ दस प्रभावी तरीके दिए गए हैं जिनके द्वारा आप अपने प्री-स्कूलर बच्चे को रीडिंग के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।

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1. फोनिक से शुरू करें

फोनिक अक्षर से निकलने वाली ध्वनि को कहते हैं जो पढ़ने के कौशल का आधार माना जाता है। फोनिक रीडिंग स्किल्स विकसित करने के लिए बहुत जरूरी होता है। प्री-स्कूल जाने वाले बच्चों को आमतौर पर स्कूल के पहले साल में अक्षर की ध्वनि से परिचित कराया जाता है। लगभग उसी समय, माता-पिता बच्चे को क्रिएटिव बनाने और फन गेम में शामिल कर सकते हैं जो उनकी समझ को और विकसित कर सकता है। आप उसके पसंदीदा खिलौनों या कैरेक्टर के शुरुआती अक्षर के फोनिक की पहचान करने में उपयोग कर सकती हैं। आपको बच्चे के साथ फोनिक सॉन्ग गाने में बहुत मजा आएगा। गाने के जरिए बच्चे को रीडिंग सिखाना एक बेहतरीन तरीका है। कविताएं जो वर्णमाला की राइम्स सिखाती हैं, निश्चित रूप से बच्चों को इसे बेहतर ढंग से समझने में मदद करती हैं। धीरे-धीरे आप उसे सरल शब्द बनाने के लिए फोनिक साउंड सिखाना शुरू कर सकती हैं।

2. किताबों से परिचित कराएं

जब बच्चे पहली बार किताबों को देखते हैं, तो वे पढ़ने के लिए कोई भी एक पेज चुनते हैं, सबसे अधिक संभावना है कि वे चमकीले और रंगीन चित्रों वाले पेज को चुनें। पहले पेज से शुरू होकर आखिरी पेज पर जाने का कंसेप्ट उनके लिए अलग है। आप धीरे-धीरे बाएं से दाएं पढ़ने के कंसेप्ट को उसे समझा सकती हैं और उसे पहले पेज से आखिरी पेज तक पिक्चर के जरिए किताब की कहानी सुनाएं। उस प्रकार आप उसे किताब पढ़ने के लिए तैयार कर सकती हैं। और उसे किताब संभालने की बारीकियों के बारे में सिखा सकती हैं। रीडिंग के बाद बच्चे के साथ किताब में मौजूद करैक्टर के बारे में बात करें, इससे उसे पढ़ा हुआ फिर से याद करने या दोहराने में मदद मिलती है।

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3. छोटी शुरुआत करें

जब बच्चों की बात आती है, तो किसी बात पर उनके ध्यान देने का हिसाब आमतौर पर उनकी उम्र में तीन मिनट और जोड़कर निकाला जाता है। कई माता-पिता अपने बच्चे से किताबों के ढेर में बैठने और धैर्य से उनकी बात सुनने की अपेक्षा करने की गलती करते हैं। यह बच्चे के लिए काफी मुश्किल है और थोड़ी थोड़ी रीडिंग से वो ज्यादा बेहतर रूप से इससे जुड़ सकेंगे। आप सरल और छोटी कहानियों वाली किताब पढ़ने से शुरू कर सकती हैं जिससे बच्चे की रुचि बढ़ती है।

4. जोर से पढ़ें

कम उम्र से बच्चे के लिए रीडिंग एक बहुत ही अच्छी बात है जिसका पालन कई माता-पिता करते हैं। यह पढ़ने के लिए बच्चे को प्रोत्साहित करता है और किताबों से लगाव की अच्छी आदत विकसित करता है। 3 से 4 महीने तक के बच्चे तस्वीरों को देख कर प्रतिक्रिया देते हैं। आप उन्हें पढ़ने के लिए रंगबिरंगे पिक्चर और अक्षरों वाली किताबों का एक सेट दे सकती हैं, बच्चा इनसे अच्छी तरह परिचित हो जाए, इसके लिए कई बार इसे दोहराएं। अपने पसंदीदा कैरेक्टर के साथ एनिमेटेड तरीके से किताब पढ़ना उनके लिए बहुत दिलचस्प होगा और इसकी वजह से वो और भी ज्यादा किताब पढ़ना पसंद करेंगे। जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है आप उसके लेवल को मुश्किल करती जाएं। अगर बच्चे जोर से पढ़ते हैं तो उन्हें अपनी शब्दावली और स्पेलिंग सुधारने में मदद मिलती है। समय के साथ, बच्चों को हर अक्षर के फोनिक को एक शब्द में पिरोने और जोर से पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। जब टॉडलर और प्री-स्कूल जाने वाले बच्चों को रीडिंग सिखाने की बात आती है, तो उनके लिए बोल-बोलकर पढ़ने से बेहतर कुछ नहीं होता।

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5. ड्रामा साथ जोड़ें

जब आप बच्चे को रीडिंग करवाती हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपने उसे एक स्टोरी की कल्पना करने में मदद करती हैं। ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसे एनिमेटेड तरीके से सुनाएं या जोर से पढ़ें। आप अपने बच्चे को जो भाव बताती हैं, उससे उसे प्रत्येक शब्द के पीछे की भावना को समझने में मदद मिलती है। शब्दों का अर्थ इस तरह से बेहतर समझा जा सकता है। किताब में शब्दों से परिचित होना बच्चों के लिए स्पेलिंग और बेहतर उच्चारण में मदद करता है।

6. चलते-फिरते सीखें

ज्यादातर समय, हम खुद को किताबों से पढ़ने तक ही सीमित रखते हैं। कुछ बच्चे कुछ मिनटों से अधिक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अपने आसपास की चीजों के साथ जुड़ाव करके उनसे सीखा जाए। ट्रैवल करते समय या किसी जगह पर जाते समय, हमें बहुत सारी चीजें मिलती हैं। आप अपने बच्चे को आस-पास के स्थानों या दुकानों के नाम, उसकी पसंदीदा कारों के नाम आदि लिखना और पढ़ना सिखा सकती हैं। इस तरह, आप अपने आसपास की चीजों को देखने में उसकी रुचि जगा सकती हैं और उसे रीडिंग में और ज्यादा आत्मविश्वासी बना सकती हैं।

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7. सीखने के मजेदार तरीके खोजें

मजेदार तरीके से पढ़ाए जाने पर बच्चे चीजें जल्दी सीखते हैं। आप इसके लिए कोई गेम प्लान कर सकती हैं। इस प्रकार बच्चों को प्रभावी ढंग से सिखाया जा सकता है। बच्चों को पढ़ने की कला सिखाने के लिए प्ले डफ, रेत और मैग्नेटिक लेटर्स कुछ बेहतरीन टूल्स हैं, जिनकी आप मदद ले सकती हैं। बच्चे इसे एन्जॉय करते हैं और जल्दी सीखते हैं। आप प्ले डफ मे लेटर बना सकती हैं और शब्दों को बनाने के लिए बच्चे को एक साथ जोड़कर इसे फोनिक रूप से पढ़ने के लिए कहें। आप स्क्रैबल का एक सिंपल फॉर्म खेल सकती हैं और उसे सिखा सकती हैं कि अलग-अलग अर्थों के साथ अलग-अलग शब्दों को बनाने के लिए अक्षरों को कैसे उपयोग किया जा सकता है। आप फोम सेशन के साथ उसके नहाने के समय को एक मजेदार लर्निंग सेशन में भी बदल सकती हैं, जिससे उसे नए शब्द सिखाए जा सकते हैं।

8. अक्षरों को दें जान

अक्षरों को रूप लेते और बात करते देखना बच्चों के लिए बहुत रोमांचक हो सकता है। आप प्रत्येक अक्षर के लिए छोटी कठपुतली बना सकती हैं और उसके लिए फोनिक सॉन्ग बना सकती हैं। ऐसा करने से बच्चों के मन में पढ़ने के प्रति एक सकारात्मक छवि विकसित होती है। यह एक बेहतरीन तरीका है। इस ट्रिक का उपयोग करके आप बच्चे को आसानी से दो और तीन अक्षर के शब्द सीखा सकती हैं। यह अब तक छोटे बच्चों के लिए सबसे इंगेजिंग लर्निंग टूल्स में से एक है।

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9. एक अच्छी रोल मॉडल बनें

बच्चे बड़ों को देखकर सीखते हैं। इसलिए उनकी परवरिश के लिए आपको उनको डील करने का सही तरीका चुनना बहुत जरूरी है। अगर आप चाहती हैं कि आपका बच्चा किताब पढ़े, तो उससे पहले आपको उसके सामने किताब पढ़नी होगी। बच्चे जो देखते हैं, वही करते हैं, इसलिए आप जो उनसे कराना चाहती हैं वो आपको पहले खुद आदत में लाना होगा। जब बच्चे आपको किताब पढ़ते हुए देखते हैं, तो वे समझते हैं कि यह दिनचर्या का हिस्सा है और इस प्रकार उनके अंदर हर दिन पढ़ने की आदत विकसित होती है।

10. रीडिंग ऐप्स का उपयोग करें

हालांकि स्क्रीन टाइम बच्चों के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन कुछ मोबाइल और कंप्यूटर एप्लीकेशन बच्चों को रीडिंग सिखाने में काफी कारगर साबित होते हैं। बच्चा अपने पसंदीदा एनिमेटेड कैरेक्टर के जरिए जल्दी और बेहतर रूप से अक्षर व फोनिक सीखता है। हालांकि, माता-पिता के रूप में, आपको बच्चे का स्क्रीन टाइम दिन में एक घंटे से ज्यादा नहीं रखना चाहिए।

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आप बच्चे में रीडिंग स्किल को रातों-रात पैदा या विकसित नहीं कर सकतीं और यह बच्चे की वर्णमाला, उसकी फोनिक, शब्दावली में समय के साथ सुधरता है। एक सही तरीके से पढ़ना, बात करना और लिखना बच्चे के अंदर रीडिंग स्किल्स विकसित करने का काम करता है।

एक बच्चे में रीडिंग स्किल्स अपने आप विकसित नहीं होती है, इसलिए, पेरेंट्स के रूप में, आपको शुरुआत से ही अपने बच्चे की मदद करनी होगी। फोनिक से शुरू करें और धीरे-धीरे अक्षरों और शब्दों की ओर बढ़ें। अपने बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए हर महीने आप इंटेलिकिट यूनिक थीम एक्टिविटी बॉक्स का सब्सक्रिप्शन ले सकती हैं। कई प्रकार के गेम पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रत्येक बॉक्स में एक्टिविटी आपके बच्चे की ओवरआल ग्रोथ में मदद करेगी और हर कदम पर उसे कुछ नया सीखने को मिलेगा। आज ही अपने बच्चे के लिए फन लर्निंग बॉक्स को सब्सक्राइब करें!

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यह भी पढ़ें:

बच्चों को अक्षर कैसे सिखाएं
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समर नक़वी

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