बड़े बच्चे (5-8 वर्ष)

बच्चों में एलर्जी – कारण, लक्षण और उपचार

किसी भी माता-पिता के लिए वह पल बेहद डरावना होता है, जब उनका बच्चा किसी एलर्जी के कारण छींकना या खांसना शुरू कर देता है। एलर्जी बच्चे के इम्यून सिस्टम को बहुत नुकसान पहुंचा सकती है और यह परेशानी उसके वयस्क होने पर भी रह सकती है। एलर्जी कई प्रकार की होती हैं, इसलिए आइए इनके बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं और इनसे संबंधित जरूरी बातें जानते हैं। साथ ही हम इस आर्टिकल में आपके बच्चे में एलर्जी की शुरुआत को रोकने के तरीके भी बताएंगे। 

एलर्जी क्या होती है?

साधारण शब्दों में कहा जाए, तो एलर्जी एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति के शरीर का इम्यून सिस्टम किसी बाहरी वस्तु या पदार्थ के प्रति विचित्र ढंग से प्रतिक्रिया देता है। बच्चों में एलर्जी का खतरा सबसे अधिक होता है, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम पूरी तरह से विकसित नहीं होता है और इसका मतलब है कि उनमें एलर्जी के संपर्क में आने का खतरा अधिक होता है। 

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ऐसी कई तरह के एलर्जी होती हैं जिनके संपर्क में बच्चे आ सकते हैं, जैसे कि आम सर्दी जुकाम की एलर्जी, खांसी, सांस से संबंधित एलर्जी, स्किन एलर्जी एवं अन्य। जब आप किसी खास एलर्जी के पीछे के कारण का पता लगा लेते हैं, तो उसके प्रति बच्चे के इम्यून सिस्टम को तैयार करना आसान हो जाता है, हालांकि इसके बाद भी पूरी तरह से इससे निजात पाना कठिन महसूस हो सकता है। 

एलर्जी कैसे होती है?

आमतौर पर जब बच्चा किसी एलर्जेन के संबंध में आता है, तब एलर्जी होती है। ये एलर्जेन संपर्क के विभिन्न प्रकार के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जैसे छूना, सांस लेना या खाना। ये स्टिंग या दवाओं के द्वारा इंजेक्ट भी हो सकती है और इतनी कम उम्र में बच्चों के लिए यह बेहद दर्दनाक हो सकता है। 

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जब बच्चे खेलने के लिए बाहर जाते हैं या किसी सार्वजनिक जगह पर होते हैं, तब उनकी देखभाल करने की जरूरत होती है, ताकि वे अधिकतर एलर्जेन से सुरक्षित रह सकें। जब उनका इम्यून सिस्टम इनसे लड़ने के लिए पर्याप्त मजबूत हो जाता है, तब उन्हें और आजादी दी जा सकती है। 

किन बच्चों को एलर्जी होने का खतरा होता है?

बच्चों में एलर्जी होने का सबसे आम कारण होता है इम्यून सिस्टम का कमजोर होना। लेकिन ऐसे भी कुछ बच्चे होते हैं, जो जेनेटिक कारणों से एलर्जी के शिकार हो जाते हैं। ऐसे कई मामले देखे गए हैं, जहां किसी बच्चे के माता-पिता या दादा-दादी को भी ऐसी ही एलर्जी होती है। साथ ही जो बच्चे सी-सेक्शन डिलीवरी द्वारा जन्म लेते हैं या जिन बच्चों को अस्थमा होता है, उनमें दूसरी एलर्जी होने की संभावना अधिक होती है। 

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बच्चों में एलर्जी के कारण

एलर्जी विभिन्न कारणों से हो सकती है और विभिन्न माध्यमों से भी हो सकती है, जिनमें हवा, पानी और खाना शामिल हैं। 

1. आम फूड एलर्जेन

फूड एलर्जी आमतौर पर कुछ विशेष खाद्य पदार्थों के सेवन से या उनके संपर्क में आने से होती है। फूड एलर्जेन कई प्रकार के होते हैं और इनके सेवन की मात्रा के आधार पर इनकी गंभीरता बढ़ सकती है:

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  • अंडे: अंडे कॉमन एलर्जेन होते हैं, जो बहुत से बच्चों को उनके शुरुआती वर्षों में बहुत प्रभावित करते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों के खानपान को लेकर बहुत सावधान रहने की जरूरत होती है, क्योंकि दुकानों से खरीदी गई बहुत सी खाद्य सामग्रियों में अंडे हो सकते हैं। ज्यादातर बच्चे जब बड़े हो जाते हैं, तब उनकी एलर्जी खत्म हो जाती है।
  • गाय का दूध: यह बहुत ही आम स्थिति है, जिसमें जिन लोगों को गाय के दूध से एलर्जी होती है, उन्हें ‘लेक्टोज इन्टॉलरेंट’ यानी दूध के प्रति असहिष्णु कहा जाता है। जो बच्चे डेयरी एलर्जी से ग्रस्त होते हैं उनकी उम्र अक्सर तीन वर्ष से कम होती है और अगर यह एलर्जी दूध से बने प्रोडक्ट और फार्मूला से भी होती है, तो बच्चों में अगली बार इसके संकेतों की शुरुआत होने पर आपको सावधान रहना चाहिए।
  • फिश और शेलफिश: यह एक बहुत ही आम एलर्जी है, जो कि बहुत से बच्चों में हमेशा के लिए रह जाती है। फिश एलर्जी वयस्क होने पर भी रह सकती है, लेकिन यह समझना जरूरी है, कि शेलफिश और फिश भिन्न परिवारों से आते हैं। अगर आपको इनमें से किसी एक से एलर्जी है, तो इसका यह मतलब नहीं है कि आपको दूसरे से भी एलर्जी होगी।
  • मूंगफली और ट्री-नट्स: यह एलर्जी संभवतः पूरी दुनिया में सबसे आम एलर्जी है। मूंगफली और ट्री-नट्स एलर्जेन जीवन भर रह सकते हैं और इस प्रकार की एलर्जी दुनिया भर में देखी जाती है।
  • सोया: जिन बच्चों को दूध से एलर्जी होती है, उनमें से ज्यादातर बच्चों को सोया दूध से भी एलर्जी हो सकती है। हालांकि यह एलर्जी लंबे समय तक नहीं रहती है और बड़े होने पर धीरे-धीरे यह खत्म हो जाती है।

2. आम एयर बोर्न एलर्जेन

एयर बोर्न एलर्जी आपके आसपास के वातावरण या माहौल में मौजूद विभिन्न पदार्थों के कारण हो सकती है। इनके कारण आमतौर पर व्यक्ति में छींकने, खांसने या फिर अस्थमा के अटैक के लक्षण देखे जाते हैं। बच्चों में कुछ मामलों में गंभीर एलर्जी भी देखी जा सकती है:

  • डस्ट माइट्स: डस्ट माइट्स हमारे आसपास मौजूद बेहद छोटे माइक्रोस्कोपिक इंसेक्ट होते हैं और वे आमतौर पर उन डेड स्किन सेल को खाते हैं, जो नियमित रूप से इंसान के शरीर से निकलते हैं। ये घरों में आमतौर पर पाए जाते हैं और इनसे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल होता है।
  • पोलेन: पोलेन एक यूनिवर्सल एलर्जेन है, जो आमतौर पर मौसम के आधार पर होती है। जब पेड़-पौधे या पत्ते अन्य पौधों को फर्टिलाइज करने के लिए अपने बारीक पार्टिकल्स को रिलीज करते हैं, तब ये लोगों की आंखों में जा सकते हैं।
  • माउल्ड्स: माउल्ड्स फंगस होते हैं, जो मुख्य रूप से नमी वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये मुख्य रूप से खराब ड्रेनेज या गीलेपन वाले क्षेत्रों में देखे जाते हैं। ये भी मौसमी होते हैं, लेकिन ये पूरे साल भी देखे जा सकते हैं।
  • पेट डेन्डर: पालतू जानवर अपने फर को चाटते हैं और उनकी लार उनके डेंडर (झड़े हुए फर) पर चिपक जाती है, जो कि घर के घरेलू कपड़ों में चिपक जाते हैं। इससे भारी एयर बोर्न एलर्जी होती है, जिसके कारण नेजल पैसेज में इरिटेशन हो सकती है।

3. अन्य आम एलर्जेन

हमारे आसपास के वातावरण में अन्य कई एलर्जेन मौजूद हो सकते हैं। ये जीवन भर भी रह सकते हैं या फिर एक सीमा तक रह सकते हैं:

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  • इंसेक्ट एलर्जी: इंसेक्ट एलर्जी के कारण खुजली, सूजन और लालीपन की समस्या हो सकती है। लेकिन आमतौर पर ये कुछ समय के बाद चली जाती हैं। हालांकि जिन बच्चों को वेनोम एलर्जी होती है, उनके लिए यह गंभीर भी हो सकती है।
  • दवाएं: कई बच्चों में एंटीबायोटिक के कारण एलर्जी हो सकती है। बच्चे को एंटीबायोटिक देने से पहले डॉक्टर द्वारा प्रिसक्राइब किया जाना जरूरी है।
  • केमिकल: डिटर्जेंट और साबुन में मौजूद केमिकल के कारण भी एलर्जी हो सकती है, क्योंकि कुछ लोगों को इन चीजों में मौजूद पदार्थों से बुरी तरह से एलर्जी हो जाती है।
  • क्रॉस-रिएक्शन: अगर बच्चों को किसी एंजाइम या प्रोटीन से एलर्जी हो, तो खाद्य पदार्थों में इन चीजों की मौजूदगी से बच्चों में क्रॉस रिएक्शन हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी बच्चे को बर्च पोलेन से एलर्जी है, तो सेब खाने से उसमें एलर्जी के संकेत दिख सकते हैं, क्योंकि उसमें भी वही प्रोटीन मौजूद होता है।

एलर्जी के क्या लक्षण होते हैं?

एलर्जी कई प्रकार की होती हैं और चूंकि इनमें से कुछ आम होती हैं, ऐसे में बहुत सी एलर्जी हर व्यक्ति में अलग तरह से दिखती हैं। एलर्जी के प्रकार के आधार पर, आप बच्चे में अधिक नियमित रूप से होने वाली एलर्जी और मौसमी एलर्जी के लक्षणों से इनमें भेद कर सकते हैं: 

1. एयरबोर्न एलर्जी के संकेत

एलर्जिक राइनाइटिस एक ऐसी स्थिति है, जो कि एयर बोर्न एलर्जी के कारण होती है। आमतौर पर ये 10 साल की उम्र में विकसित होती हैं और टीनएज और शुरुआती ट्वेंटीज के दौरान अपने शिखर पर होती है। समय और उम्र के साथ आम तौर पर ये ठीक हो जाती हैं। इनके लक्षण इस प्रकार हैं:

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  • गले और/या नेजल पैसेज में खुजली
  • छींकना
  • खांसना
  • बंद नाक
  • लाल आंखें, आंखों में खुजली (मुख्यतः पोलेन के कारण)। यह स्थिति एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस भी कहलाती है और कभी-कभी डार्क सर्कल्स भी हो जाते हैं, जिसे ‘शाइनर्स’ कहा जाता है।

2. फूड, मेडिसिन और इंसेक्ट एलर्जी के संकेत

भोजन और दवाओं से भी बहुत सी एलर्जी देखी जाती हैं और इनके लक्षण भी स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। अगली बार खाना खाने के बाद या कोई गोली खाने के बाद आपके बच्चे के शरीर में एलर्जी होती है, तो उसमें कुछ लक्षण दिख सकते हैं, जो कि इस प्रकार हैं: 

  • सांस लेने में कठिनाई
  • खांसना
  • आवाज में भारीपन
  • घरघराहट
  • गले में कसावट
  • पेट में दर्द
  • उल्टी
  • डायरिया
  • आंखों का लाल होना और उनमें खुजली होना
  • सूजन
  • हाइव्स (चकत्ते)
  • ब्लड प्रेशर में गिरावट, जिसके कारण चक्कर आ सकते हैं या गंभीर मामलों में बेहोशी भी देखी जा सकती है।

हर व्यक्ति में एलर्जी की गंभीरता अलग होती है। कुछ लोगों में सौम्य रिएक्शन दिखते हैं, जैसे त्वचा पर छोटे हाइव्स होना। लेकिन कुछ लोगों में गंभीर रिएक्शन भी दिख सकते हैं और उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत पड़ सकती है। 

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बच्चों में एलर्जी की पहचान कैसे की जाती है?

एलर्जी को आसानी से पहचाना जा सकता है, लेकिन बच्चों में एलर्जी टेस्टिंग के द्वारा यह निर्धारण करने में मदद मिल सकती है, कि उन्हें किसी खास पदार्थ से गंभीर रिएक्शन हुआ है या नहीं। आप एक एलर्जिस्ट के पास जा सकते हैं और वह इसके कारण का पता लगाने के लिए स्किन टेस्ट और अन्य जांच कर सकते हैं। स्किन टेस्ट में एलर्जिस्ट निम्नलिखित तरीके से जांच करेंगे:

  1. त्वचा पर प्योर लिक्विड फॉर्म की एक बूंद डाली जाती है और फिर एक प्रिकिंग डिवाइस के द्वारा उस क्षेत्र को छुआ या खुरचा जाता है।
  2. एलर्जेन की थोड़ी सी मात्रा त्वचा के अंदर भी डाली जा सकती है। इस टेस्ट में थोड़ा दर्द हो सकता है, लेकिन इसमें कोई नुकसान नहीं होता है और अधिक दर्द भी नहीं होता है।

15 मिनट में अगर वहां पर गांठ बन जाती है और उसके आसपास की जगह लाल हो जाती है, तब यह टेस्ट पॉजिटिव होता है और दवाएं और नियंत्रण के अन्य तरीके प्रिसक्राइब किए जाते हैं। 

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अगर बच्चे को त्वचा की बीमारी या कोई समस्या हो या उसकी त्वचा सेंसिटिव हो, तो ऐसे में डॉक्टर को ब्लड टेस्ट कराने की जरूरत होगी। यह टेस्ट उन बच्चों के लिए भी किया जाता है, जो कुछ विशेष दवाओं के प्रति बुरी तरह से रिएक्ट करते हैं। 

एलर्जी का इलाज कैसे किया जाता है?

ऐसे कई तरीके हैं, जिनके द्वारा एलर्जी को नियंत्रित किया जा सकता है, पर इसका इलाज नहीं किया जा सकता। बच्चों के लिए एलर्जी को नियंत्रित करने का सबसे आसान तरीका होता है, सभी एलर्जेन से बचना। पेरेंट्स को अपने बच्चों को एलर्जेन से दूर रहना जरूर सिखाना चाहिए, ताकि वे इनसे बच सकें। साथ ही यह जरूरी है, कि बच्चे के शिक्षकों, परिवार के सदस्यों या अन्य पेरेंट्स को भी इसकी जानकारी दी जाए। 

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वातावरण में किसी एलर्जेन से बचना कठिन हो सकता है। ऐसे में बच्चों को एलर्जी की दवाएं दी जा सकती हैं। इनमें दवाएं, एंटीहिस्टामाइन, आई ड्रॉप के साथ-साथ नेजल स्प्रे भी शामिल हैं। कुछ दवाओं के लिए प्रिसक्रिप्शन की जरूरत नहीं होती है। डॉक्टर एलर्जी शॉट्स भी दे सकते हैं और बच्चे को एलर्जेन के प्रति डिसेन्सीटाइज करने में मदद कर सकते हैं, जैसे कि धूल, मिट्टी, पोलेन, माउल्ड, स्टिंग्स और पशु। 

बच्चों में एलर्जी से बचाव के तरीके

एलर्जी से बचाव कई तरीकों से किया जा सकता है और यदि माता पिता सावधानी बरतें और यह सुनिश्चित करें कि एलर्जी की संभावना न के बराबर है, तो छोटे बच्चों को एलर्जी से बचाया जा सकता है। 

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प्रकार के आधार पर, एलर्जी से बचने के तरीके यहाँ पर दिए गए हैं: 

1. एयर बोर्न एलर्जेन से कैसे बचें?

अगर माता-पिता अपने बच्चों को इन एलर्जी का कारण बनने वाले तत्वों से दूर रख सकते हैं, तो एयर बोर्न एलर्जेन से बचा जा सकता है। इसका ध्यान घर पर और बाहर यात्रा करने के दौरान रखना चाहिए। एलर्जी से बचने के कुछ सबसे बेहतरीन तरीके नीचे दिए गए हैं:

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  • अगर घर के पालतू जानवर के कारण एलर्जी होती है, तो उसे बच्चे के कमरे से दूर रखें।
  • अगर घर के किसी कारपेट या रग को लंबे समय से साफ नहीं किया गया है, तो उसे साफ करें। जरूरत हो तो आप इन्हें हटा भी सकते हैं, क्योंकि सख्त फर्श पर इतनी धूल इकट्ठी नहीं होती है, जितनी कालीनों पर होती है।
  • भारी पर्दों को हटा दें या ऐसी चीजों को हटा दें, जिनमें अनावश्यक रूप से धूल इकट्ठी होती है।
  • कमरे को तब साफ करें, जब बच्चा वहां न हो।
  • अगर बच्चे को डस्ट माइट से एलर्जी है, तो इस बात का ध्यान रखें कि आप खास कवर खरीदें, जो तकियों और गद्दों को सील करने में मदद कर सकें।
  • जिन बच्चों को पॉलेन एलर्जी है, उन्हें इस मौसम के दौरान खिड़कियों को बंद रखना चाहिए और इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि बच्चा नियमित रूप से नहाए, ताकि वह साफ रह सके। साथ ही उसे बगीचे में घूमने न दें, क्योंकि ऐसे में एलर्जी होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
  • जिन बच्चों को माउल्ड से एलर्जी है, उन्हें गीली जगहों से दूर रहना चाहिए, जैसे कि बेसमेंट, ड्रेनेज या बाथरूम ताकि वे एलर्जी से बच सकें।

2. फूड एलर्जी से कैसे बचें?

अगर माता-पिता इस बात का खास ध्यान रखते हैं, कि वे अपने बच्चों को क्या खिलाते हैं या इस बात पर नजर रखते हैं कि वह क्या खा रहा है, तो फूड एलर्जी से भी बचा जा सकता है। इस प्रकार बच्चे किसी भी तरह की एलर्जी से सुरक्षित रह सकते हैं। यहां पर ऐसे कुछ तरीके दिए गए हैं, जिनके द्वारा ऐसा किया जा सकता है:

  • खाद्य सामग्रियों के लेबल को ध्यान से पढ़ें और देखें कि उनमें ऐसा कोई एलर्जेन मौजूद है या नहीं, जिससे आपके बच्चे को परेशानी होती है। अगर ऐसा है तो उससे दूर रहें।
  • सुरक्षित खाद्य सामग्रियों को अधिक मात्रा में खरीदा जा सकता है और आप सुनिश्चित कर सकते हैं, कि आप इन्हीं चीजों से एक डाइट प्लान तैयार करें, ताकि बच्चे बीमार न हों।
  • आठ आम एलर्जेन में से कुछ आमतौर पर इन खाद्य सामग्रियों के लेबल पर उल्लिखित होते हैं। बदलते हुए इनग्रेडिएंट पर ध्यान रखें, क्योंकि कुछ कंपनियां कभी-कभी अपने फार्मूला को बदल देती हैं।
  • अन्य महत्वपूर्ण पहलू जिसकी जानकारी माता-पिता को होनी चाहिए, वह है क्रॉस कन्टेमिनेशन। कभी-कभी प्रोडक्ट के पैक पर दिए गए वाक्य में कुछ ऐसे एलर्जेन का जिक्र होता है, जो बच्चों को प्रभावित कर सकते हैं। ज्यादातर कंपनियां इनका उल्लेख नहीं करती हैं, लेकिन कुछ ऐसा करती हैं। ऐसे संकेतों पर नजर रखें, जैसे ‘मे कंटेन….’, ‘प्रोसेस्ड इन ए फैसिलिटी दैट ऑल्सो प्रोसेसेस….’ या ‘मैन्युफैक्चर्ड विद इक्विपमेंट यूज्ड फॉर…’ आदि।
  • रेस्टोरेंट में भी पता करें, कि कुछ खास खाद्य सामग्री आम किचन में पकाई गई हैं या ऐसे बर्तनों में पकाए गई हैं, जिनमें एलर्जेन हो सकते हैं।

अगर आप दुविधा में हैं, तो बेहतर होगा कि कंपनी से सीधा संपर्क करें और सभी संदेहों को स्पष्ट करें। खतरा उठाने से बेहतर है, कि इससे बचा जाए, क्योंकि खतरे उठाने से बच्चे के लिए कभी-कभी एलर्जी से निपट पाना कठिन हो सकता है। 

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बच्चों के लिए एलर्जी काफी दर्दनाक अनुभव हो सकता है। इसलिए जब एलर्जी से बचने की बात आती है, तो इस बात का ध्यान रखें, कि आपको हमेशा तैयार रहना चाहिए, क्योंकि आपको यह समझना बहुत जरूरी है कि कुछ एलर्जी कितनी गंभीर हो सकती हैं। 

ऐसे भी कई मामले देखे गए हैं, जहां कुछ बच्चों ने जानलेवा स्थितियों को करीब से देखा है, जो कि माता-पिता में जागरूकता की कमी के कारण हुआ है और इसके बारे में जानकारी हासिल करके और डॉक्टर से बात करके आसानी से इससे बचा जा सकता है। 

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जब आप एलर्जी को पहचान जाते हैं, तब आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए, कि बच्चे इनके संपर्क में न आएं और साथ ही उनके इम्यूनिटी सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद भी करनी चाहिए। 

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पूजा ठाकुर

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