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छोटे बच्चों और टॉडलर को सीजनल इन्फेक्शन होना आम है और इसकी वजह से उन्हें रैशेज, खांसी और बुखार भी आता है। आप सोचती होंगी कि यदि बच्चे की नाक बहती है या खांसी और बुखार आता है तो उसे किस तरह का इन्फेक्शन होने की संभावना है। वैसे यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। पर कभी-कभी पेरेंट्स को समझने में कन्फ्यूजन हो जाता है कि यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन है या फंगल इन्फेक्शन। इस आर्टिकल में दी हुई जानकारी से आप बच्चे में हुए बैक्टीरियल या फंगल इन्फेक्शन को समझ पाएंगी और इसका ट्रीटमेंट करवा पाएंगी।
बैक्टीरियल इन्फेक्शन अक्सर शरीर या त्वचा में हानिकारक बैक्टीरिया के बढ़ने से होता है। चूंकि बच्चे का इम्यून सिस्टम अब भी विकसित हो रहा है इसलिए उसमें इन्फेक्शन से लड़ने की ताकत नहीं होगी और उसे कोई भी इन्फेक्शन बहुत जल्दी हो सकता है।
बच्चों में आमतौर पर कई प्रकार के बैक्टीरियल इन्फेक्शन होते हैं और इसके कुछ कारण निम्नलिखित हैं।
इम्युनिटी कमजोर होने और बैक्टीरिया वाली जगहों, जैसे डे केयर सेंटर्स और प्लेग्राउंड के संपर्क में आने से बच्चे को आसानी से बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो सकता है।
बच्चों में यह इन्फेक्शन होने के कुछ सामान्य कारण यहाँ बताए गए हैं, आइए जानें;
बच्चों में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लक्षण और संकेत समझने से इसे जल्दी ठीक करने में मदद मिलती है। इसके कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं, आइए जानें;
कभी-कभी यह बता पाना कठिन होता है कि बच्चे में बैक्टीरियल इन्फेक्शन हुआ है या वायरल इन्फेक्शन। डॉक्टर बच्चों में बैक्टीरियल इन्फेक्शन का डायग्नोसिस टिश्यू और खून के सैंपल से करते हैं। इसके लिए क्लिनिक में तेजी से टेस्ट होते हैं और जांच के लिए सैंपल को माइक्रोस्कोप में देखा जाता है। यदि बैक्टीरिया बहुत छोटा है और इसे समझ पाना कठिन है तो डॉक्टर पहले इसे लैब में बड़ा करते हैं फिर इसकी जांच करते हैं। बैक्टीरिया को लैब में बड़ा करने में लगभग 24 से 48 घंटे लगते हैं।
बच्चों में बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाव के कुछ निम्नलिखित तरीके हैं, आइए जानें;
यदि आपके बच्चे को बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है तो डॉक्टर उसे एंटीबायोटिक्स प्रिस्क्राइब कर सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि बच्चा सही समय पर एंटीबायोटिक्स की सही डोज ले ताकि उसका बैक्टीरियल इन्फेक्शन ठीक हो सके। यदि आप बच्चे में वायरल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन पहचानने में सक्षम नहीं है तो इसे बारे में डॉक्टर से चर्चा करें व उनकी सलाह को सही से सुनें। क्योंकि वायरल इन्फेक्शन के लिए सिर्फ एंटीबायोटिक्स ही पर्याप्त नहीं होते हैं।
फंगल इन्फेक्शन की वजह से बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। सभी प्रकार के फंगी पैथोजेनिक नहीं होते हैं और ज्यादातर फंगी से शरीर में इन्फेक्शन हो सकता है। फंगी अक्सर शरीर के भीतर, बाहर और बायोलॉजिकल सिस्टम के गहरे भाग में भी रह सकते हैं।
बच्चों को कई प्रकार के फंगल इन्फेक्शन होते हैं जो इस प्रकार हैं;
बच्चों में फंगल इन्फेक्शन होने के आम कारण निम्नलिखित हैं, आइए जानें;
कपड़ों से – बच्चे को टाइट कपड़े पहनाने से उसके शरीर में हवा का आदान-प्रदान नहीं हो पाता है। गर्मियों में पसीना आने से नमी बढ़ती है जिसकी वजह से फंगल इन्फेक्शन होना संभव है।
तौलिया शेयर करने से – फंगी कई दिनों तक नमी वाली जगहों पर रहता और बढ़ता है। किसी अन्य व्यक्ति की तौलिया का उपयोग करने से यह इन्फेक्शन एक से दूसरे की त्वचा में फैल सकता है।
इंफ्लेमेटरी इन्फेक्शन से – शरीर में इंफ्लेमेटरी इन्फेक्शन होने से इंफ्लेमेटरी प्रभाव बढ़ता है और इसके कारण बच्चे का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और उसके हॉर्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं। इसी के परिणामस्वरूप फंगल इन्फेक्शन होता है।
फंगल इन्फेक्शन होने के कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं, आइए जानें;
यदि बच्चे को फंगल इन्फेक्शन है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उसके लिए प्रिस्क्राइब की हुई एंटीफंगल क्रीम लाएं। एक या दो सप्ताह तक एंटीफंगल क्रीम लगाएं और बच्चे को स्कूल न भेजें क्योंकि यह इन्फेक्शन फैल सकता है। यदि एंटीफंगल क्रीम काम नहीं करती है तो बच्चे को डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब की हुई दवा दें। बच्चे को प्रभावी जगह पर खुजली करने से रोकें और इस बात का ध्यान रखें कि बच्चा हर समय कॉटन के ढीले कपड़े पहने या इसके जैसा कोई भी कपड़ा पहनें ताकि उसके शरीर के प्रभावी जगहों पर नमी न हो। बच्चे को स्कूल भेजने से पहले फंगल इन्फेक्शन को ठीक करने के लिए लगभग 48 घंटे का समय लें।
हाँ, यदि बच्चों में फंगल इन्फेक्शन ठीक नहीं किया गया तो इससे खतरा हो सकता है और यहाँ तक कि यदि आगे तक बच्चे का इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होता है और उसका इंफ्लेमेटरी रेस्पॉन्स कमजोर रहता है तो इससे मृत्यु भी हो सकती है।
फंगल इन्फेक्शन का बचाव शुरुआत में ही कर लेने से बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ रहता है। फंगल इन्फेक्शन को खत्म करने के लिए यहाँ कुछ टिप्स बताए गए हैं, आइए जानें;
यद्यपि कभी-कभी बच्चों में वायरल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन गंभीर रूप से हो सकता है और इससे कई जोखिम हो सकते हैं पर बचाव के कुछ आसान तरीकों का उपयोग करें इससे कई फायदे हो सकते हैं और इस समस्या को शुरुआत में ही ठीक किया जा सकता है। यदि आपके बच्चे को इन्फेक्शन है तो शुरूआती दिनों में ही डॉक्टर की मदद से इसे ठीक करें और उसे सही एंटीबायोटिक्स की डोज दें। इसे ठीक करने के लिए उचित रूप से हाइजीन बनाए रखें, नमी से बचें और गंदगी से दूर रहें। इसके अलावा हेल्दी डायट लेने, उचित कपड़े व जूते पहनने से बच्चे में फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन कभी भी नहीं होगा।
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