शिशु

शिशुओं में दस्त की समस्या

जब शिशु बारबार पानी जैसा पतला और श्लेमयुक्त मलत्याग करता है, तो उसे दस्त लगना कहते हैं। यह आमतौर पर किसी जीवाणु या विषाणु के संक्रमण या कुछ खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता के कारण होता है। अगर शिशु के शरीर मे पानी की कमी हो जाए तो नवजात शिशुओं में दस्त बहुत गंभीर हो सकते हैं। यदि शिशु के शरीर में पानी की कमी होने लगे, तो आपको शिशु को अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है। इसके बावजूद कुछ सावधानियाँ बरतने से आप दस्त लगने और शरीर में पानी की कमी होने को टाल सकते हैं।

कारण

शिशुओं को दस्त लगने के कई कारण हो सकते हैं, और उनमें से अधिकांश सूक्ष्मजीव से संक्रमण होते हैं। शिशुओं को दस्त लगने के प्रमुख कारक हैं :

1. जीवाणु संक्रमण

कुछ संक्रामक जीवाणु जैसे की साल्मोनेला, स्टैफिलोकोकस, शिगेला, कैम्पिलोबैक्टर और ई. कोलाई दस्त का कारण बन सकते हैं। यदि संक्रमण जीवाणु से है, तो गंभीर दस्त के साथ पेट में मरोड़, बुखार और मल में रक्त जैसे लक्षण हो सकते हैं।

2. विषाणुजनित संक्रमण

शिशुओं में विषाणु दस्त लगने का कारण हो सकते हैं जहाँ उल्टी, बुखार, ठंड लगना, पेट दर्द और शरीर में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ विषाणु हैं रोटावायरस, कैलीवायरस, एडेनोवायरस, एस्ट्रोवायरस और इन्फ्लूएंजा।

3. परजीवी कीटाणु

दस्त परजीवी कीटाणुओं की वजह से भी लग सकते हैं। उदाहरण के लिए, जिआर्डियासिस का कारण सूक्ष्म परजीवी कीटाणु है। आमतौर पर इसके लक्षण हैं गैस, दस्त, फुलावट और चिकना मल। जहाँ शिशुओं की सामूहिक देखभाल होती है, उन स्थितियों में परजीवी संक्रमण काफी आसानी से फैलता है।

4. खाद्य एलर्जी

अगर शिशु का प्रतिरक्षा तंत्र आमतौर पर हानिरहित माने जाने वाले खाद्य प्रोटीन के प्रतिकूल प्रतिक्रिया करता है, जिससे गैस, पेट दर्द, दस्त और मल में रक्त जैसे लक्षण पैदा होते हैं, उसे खाद्य एलर्जी कहते हैं। सबसे आम एलर्जी पैदा जरने वाले खाद्यों में से एक है दूध का प्रोटीन जो डेयरी उत्पादों और डेयरी उत्पाद युक्त बेबी फार्म्यूला में होता है।

5. खाद्य असहिष्णुता

यह एलर्जी से अलग हैं, और इन खाद्य असहिष्णुता प्रतिक्रियाओं में प्रतिरक्षा तंत्र शामिल नहीं होता। सबसे जानीमानी है लैक्टोज़ असहिष्णुता। हालांकि शिशुओं में ये असामान्य है, लैक्टोज़ असहिष्णुता, लैक्टेज़ एंज़ाइम के उत्पादन में कमी के कारण होता है। गाय के दूध और डेयरी उत्पादों में मौजूद लैक्टोज नाम की शक्कर को पचाने के लिए लैक्टेज़ आवश्यक होता है। इसके लक्षण हैं दस्त, फुलाव, पेट में मरोड़ और गैस।

6. एंटीबायोटिक्स

जब शिशुओं को एंटीबायोटिक दवाओं के एक कोर्स के बाद दस्त लगते हैं, तो इसकी वजह यह है कि वह दवा हानिकारक जीवाणुओं के साथ साथ आँत के अच्छे जीवाणुओं को भी मार देती है।

7. अत्यधिक कृत्रिम रस

शिशु को बहुत ज्यादा मीठे पेय देने से फ्रुक्टोज़ और मीठा करने वाले कृत्रिम पदार्थ जैसे कि सोर्बिटोल पेट में गड़बड़ी कर सकते हैं और दस्त का कारण बन सकते हैं।

शिशु में दस्त के संकेत और लक्षण

नवजात शिशु अक्सर मल करते हैं और यदि वे स्तनपान कर रहे हैं तो मल आमतौर पर नरम होता है। अगर शिशु को फार्म्यूला खिलाया जाता है, तो मल थोड़ा कठोर होता है।

दस्त लगने के लक्षण हैं :

  • बच्चा सामान्यसे अधिक बार मल कर रहा है
  • मल बहताहुआ, बदबूदार और श्लेमयुक्त है
  • शिशु को बुखार है और उसका वजन कम होता जा रहा है
  • शिशु चिड़चिड़ा हो गया है और उसे भूख नही लगती
  • शरीर में पानी की कमी होने के लक्षण जैसे कि धँसी हुई आँखें, सूखा मुँह, गहरे पीले रंग का मूत्र और रोने पर कोई आँसू न आना
  • बुखार और उल्टी

इलाज

शिशु के पेट को फिर से स्थिर करने और दस्त का दौरा ठीक करने में कुछ दिन लगते हैं। उचित जलयोजन और पोषण से इस प्रक्रिया को गति मिल सकती है। यहाँ शिशुओं के दस्त के लिए कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं :

1. बहुत सारे तरल पदार्थ दें

दस्त का सबसे खतरनाक पहलू है पानी की कमी होना और अगर इसका समय पर इलाज न हो तो शिशु को अस्पताल भी पहुँचा सकता है। शरीर के खोए हुए तरल पदार्थों की फिर से पूर्ती करना, दस्त के इलाज का पहला कदम है। यदि शिशु उल्टी किए बिना दूध या फॉर्मूला दूध पी रहा है, तो उसे अक्सर दूध पिलाते रहें। थोड़े बड़े शिशु को पानी के छोटेछोटे घूंट, इलेक्ट्रोलाइट घोल, या नमकचीनी का घोल (.आर.एस.) दिया जा सकता है। ताज़ा नारियल पानी भी इलेक्ट्रोलाइट्स का एक समृद्ध स्रोत है। अपने शिशु को समयसमय पर नारियल का पानी पिलाते रहें।

2. चीनी वाले पेय से बचें

शिशु को कोई भी मीठा पेय या फलों का गाढ़ा रस देने से बचना चाहिए। उनमें मौजूद चीनी अधिक मात्रा में आंत में पानी खींचती है और दस्त को बिगाड़ देती है।

3. छोटे शिशुओं को अच्छी तरह से संतुलित भोजन दें

जिन शिशुओं ने पहले ही हाथों से खाने लायक या मेज़ पर खाने लायक भोजन खाना शुरु कर दिया है, उन्हें दस्त के दौरान भी ठोस आहार दिया जा सकता है। एक अच्छा, स्वस्थ आहार शिशु में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति कर संक्रमण से लड़कर शिशु के दस्त के दौरे को छोटा कर सकता है और उससे मुकाबला कर सकता है। रोटी, अनाज, चावल, दही, फल और सब्ज़ियाँ जैसे खाद्य पदार्थ कम मात्रा में पूरे दिन भर दिए जा सकते हैं।

4. दही खिलाएं

दही लैक्टोबैसिलस में समृद्ध है, जो आंत के लिए एक आवश्यक जीवाणु है। दही खिलाना इस जीवाणु वनस्पति को पुनर्स्थापित करता है जो दस्त के दौरान खो जाता है और इस तरह यह आंत को स्थिर करती है। शिशु को बिना किसी कृत्रिम स्वाद या मिठास वाली दही ही खिलाए।

5. डॉक्टर के सलाह बिना दवा देने से बचें

शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह के बिना शिशु को कोई जड़ीबूटी या दवाई न दें। इसके अलावा, अपने चिकित्सक से परामर्श के बिना 12 महीने से कम उम्र के शिशुओं को एंटीडायरियल दवा न दें।

.आर.एस. के घोल से अपने शिशु में पानी की कमी को कैसे दूर करें?

शिशु में कम हुए पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स को बहाल करने के लिए नमकचीनी घोल का समाधान सबसे सरल तरीका है और सभी दवा विक्रेताओं और डॉक्टरों के पास उपलब्ध है। इसे 8 चम्मच चीनी और एक चम्मच नमक को उबले हुए ठंडे पानी में घोलकर, घर पर भी तैयार किया जा सकता है।

  • शिशु में पानी की कमी न हो उसके लिए, उन्हें चार घंटे की अवधि में अक्सर ओ.आर.एस. की छोटीछोटी मात्रा दी जानी चाहिए।

  • यदि शिशु को स्तनपान कराया जा रहा है, तो उसे दो बार के स्तनपान के बीच में यह दिया जाना चाहिए और कोई और पेय पदार्थ नहीं दिया जाना चाहिए जब तक डॉक्टर इसकी अनुमति न दे।

  • .आर.एस. दिए जाने के दौरान शिशु को कुछ भी और चीज़ न खिलाएं।

निवारण

शिशुओं में सभी तरह के संक्रमणों को रोकने के लिए स्वच्छता की कुंजी है। शिशु की देखभाल में स्वच्छता प्रक्रियाओं का पालन करके शिशुओं में दस्त के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • संक्रमण का कारण बनने वाले रोगाणु बड़ी आसानी से हाथ से मुँह तक फैल जाते हैं। इसलिए, शिशुओं को संभालने से पहले जीवाणुरोधी साबुन से अच्छी तरह से हाथ जरूर धोएं।

  • रसोई के उपकरणों को साफ रखें, और सफाई बरतते हुए भोजन तैयार करें।

  • दस्त के एक प्रकरण के दौरान और इसके समाप्त होने के 48 घंटे बाद तक अपने शिशु को खेल के मैदान या बालवाडी में न ले जाएं।

  • अपने शिशु के हाथों को मद्यरहित वाइप्स से साफ करें, खासकर जब वे चारों ओर घुटनों पर भाग रहे हों।

  • मांस अच्छी तरह से पका होना चाहिए, और फल और सब्ज़ियाँ खिलाने से पहले अच्छी तरह से धुली होनी चाहिए।

  • जीवाणु को बढ़ने से बचाने के लिए गुसलखाने की सतहों को साफ रखना चाहिए।

क्या स्तनपान करने वाले शिशुओं को दस्त लगने की संभावना कम है

हाँ, स्तनपान करने वाले शिशु उन संक्रमणों के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं, जो पीने के पानी और दूध पिलाने वाली बोतलों से होते हैं। इसके अलावा, स्तनपान करने वाले शिशुओं में दस्त कम समय के लिए होते हैं क्योंकि स्तनदूध में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो सूक्ष्मजीवों की वृद्धि और क्रिया को रोकते हैं और शिशु की प्रतिरक्षा को बढ़ावा देते हैं।

क्या आपके शिशु को दस्त के लिए वयस्कों की दवा देना सुरक्षित है?

12 महीने से कम उम्र के शिशुओं को दस्त के लिए दवाएं देना, सुरक्षित नहीं है, खासकर वे दवाइयाँ जो वयस्कों के लिए होती हैं। उनके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

क्या शिशु को ठोस आहार देना ठीक है?

हाँ, यदि आपका बच्चा ठोस आहार खाने की उम्र का है, और बारबार उल्टी नहीं कर रहा तो इसे जारी रखा जा सकता है। यदि नहीं, तो 6 महीने से अधिक उम्र के शिशुओं को केला, पिसा सेब, चावल और सूखा टोस्ट जैसे ठोस पदार्थ दिए जा सकते हैं। छोटे शिशुओं के लिए, कम मात्रा में माँड युक्त पदार्थ जैसे सूप, मसले हुए आलू, पास्ता, उबले हुए चावल और मूंग दाल दिए जा सकते हैं। यदि दस्त के दौरान शिशु को भूख कम लगती है, तो भी कोई बात नहीं है, लेकिन बस शिशु को पानी की कमी से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ मिलते रहें।

शिशु को चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता कब होती है?

यदि आपका शिशु 3 महीने से कम उम्र का है और उसे दस्त है, तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए, यदि शिशु 3 महीने से अधिक का है और 24 घंटे के बाद भी हालत में सुधार नहीं होता है, तो डॉक्टर से बात की जानी चाहिए। यदि निम्नलिखित लक्षणों के साथ दस्त हों तो चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता है :

  • बारबार उल्टी होना
  • कुछ घंटों के भीतर ही 3-4 बार पानी जैसा पतला मल होना
  • पानी की कमी के लक्षण जैसे कि शुष्क मुँह, बिना आँसू के रोना, आँखें धँसी होना, 6 घंटे तक लंगोट गीला न होना, धँसा हुआ तालू
  • हाथपैर का रंग उड़ना
  • बुखार जो 24 घंटे से अधिक समय तक रहता है
  • दूध, पानी या कोई अन्य तरल पदार्थ पीने से इंकार कर देता है
  • मल में खून आता है
  • पेट में सूजन है

शिशुओं में दस्त लगना आम है। यदि आपके शिशु को दस्त हो जाते हैं, तो आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि शिशु में पानी की कमी न हो। कुछ सरल घरेलू उपचार दस्त को रोकने और उसका इलाज करने में मदद कर सकते हैं।

जया कुमारी

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