In this Article
अच्छा पोषण आपके बच्चे के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर शुरुआती वर्षों के दौरान। वैसे तो हर व्यक्ति को पौष्टिक भोजन लेना बहुत जरूरी होता है, लेकिन यह गर्भावस्था के समय में लेना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इससे आपके बच्चे की सेहत भी जुड़ी होती है । जन्म के बाद भी बच्चे को कम कम दो साल तक केवल पौष्टिक आहार ही देना चाहिए, क्योंकि गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती वर्ष मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।बच्चे के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करने के लिए विटामिन, कैल्शियम, आयरन, वसा और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार बच्चे को देना बहुत महत्वपूर्ण है।
कुपोषण वह स्थिति है जब आपके बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व, खनिज और कैलोरी प्राप्त नहीं होते हैं, जो पर्याप्त मात्रा में बच्चे के महत्वपूर्ण अंगों के विकास में मदद करते हैं। आपके बच्चे को रोग मुक्त और स्वस्थ जीवन जीने के लिए पोषक तत्व महत्वपूर्ण है। पर्याप्त पोषण की कमी से, शारीरिक और व्यवहारात्मक, दोनों से संबंधित कई विकार हो सकते हैं। कुपोषण और भूख एक समान नहीं है, हालांकि दोनों संबंधित हो सकते हैं। भूख तब लगती है जब पेट खाली होता है, जबकि कुपोषण पर्याप्त पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है। कुपोषित बच्चों को शारीरिक कमियों का खतरा हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप विकास अवरुद्ध हो सकता है या कोई रोग हो सकता है ।
जब हर साल काफी मात्रा में बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं, यह विश्व स्तर पर गंभीर चिंता का कारण हो गया है। कुपोषण के प्रभाव विनाशकारी और दूरगामी हो सकते हैं और इसके कारण बच्चे के विकास में रुकावट आना, मानसिक विकलांगता, जी.आई. ट्रैक्ट संक्रमण, एनीमिया और यहाँ तक कि मृत्यु भी हो सकती है। कुपोषण न केवल पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है, बल्कि इसके अत्यधिक सेवन के कारण भी होता है और इसलिए बच्चे को पोषित और स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी है।
कुपोषण आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों के अपर्याप्त सेवन के कारण होता है और कुपोषण के प्रकार को चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है।
जैसा कि नाम से पता चलता है, यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ वेस्टिंग या स्टंटिंग या दोनों के कारण बच्चे का उसकी उम्र के अनुसार वजन / लंबाई में नहीं बढ़ता है । कुपोषण के इस प्रकार को असफल विकास कुपोषण के रूप में भी जाना जाता है। यदि बच्चे के पोषण की जरूरतों में सुधार किया जाए, तो बच्चे में वजन संबंधी कमियों को ठीक किया जा सकता है, पर बच्चे की लंबाई में आई कमियों को सही करना मुश्किल होता है।
बच्चे में स्टंटिंग की स्थिति जन्म से पहले गर्भावस्था के दौरान माँ के खराब स्वास्थ्य के कारण शुरू होती है, जिससे बच्चे में असामान्य और अनुपातहीन वृद्धि होती है, यह दीर्घकालिक कुपोषण के रूप में भी जाना जाता है। स्टंटिंग लंबे समय तक होने वाली प्रक्रिया है और इसीलिए लंबे समय तक इसके परिणाम भी दिखाई देते हैं । बच्चे में स्टंटिंग होने के पीछे मुख्य कारण खराब स्तनपान, शरीर को पोषक तत्वों की अपर्याप्त आपूर्ति और निरंतर संक्रमण होना आदि है। स्टंटिंग बच्चे के लिए खतरनाक है, क्योंकि एक विशेष उम्र के बाद इसे ठीक नहीं किया जा सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए गर्भावस्था के दौरान उचित स्वास्थ्य और जन्म के बाद बच्चे की व्यापक देखभाल सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।
सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी या कुपोषण, शरीर में विटामिन ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ और ‘डी’ जैसे आवश्यक विटामिनों की कमी के साथ-साथ, फोलेट, कैल्शियम, आयोडीन, जिंक और सेलेनियम की कमी को दर्शाता है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी शरीर में इन पोषक तत्वों की लंबे समय तक कमी के कारण होती है। इन पोषक तत्वों में से प्रत्येक शरीर में महत्वपूर्ण अंगों के विकास और कार्य में सहायता करता है और इसकी कमी से अपर्याप्त विकास और एनीमिया, अपर्याप्त मस्तिष्क विकास, थायरॉयड की समस्या, रिकेट्स, इम्युनिटी कमजोर होना, तंत्रिका का अध: पतन, नजर कमजोर होना और हड्डियों के अपर्याप्त विकास आदि जैसे रोग हो सकते हैं।
वेस्टिंग या तीव्र कुपोषण अचानक व बहुत अधिक वजन घटने की स्थिति है और इससे कुपोषण के तीन प्रकार होते हैं:
एक कुपोषित बच्चे का सही निदान और सही समय पर कुपोषण की पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि कुपोषण से बच्चे पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को रोका जा सके और समय रहते बेहतर इलाज किया जा सके।
कुपोषण आवश्यक पोषक तत्वों की कमी या इसके अत्यधिक सेवन के कारण भी हो सकता है। शरीर में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों के स्तर को बनाए रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है। वे कारण जिनसे आपके बच्चे को कुपोषण हो सकता है, निम्नलिखित हैं।
पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण के अन्य कारणों में, समय से पहले जन्म, अत्यधिक उल्टी या दस्त, जन्म से हृदय विकार और अन्य दीर्घकालिक रोग शामिल हैं।
शिशुओं और बच्चों में कुपोषण के संकेत और लक्षण बच्चे की पोषण संबंधी कमी पर निर्भर करते हैं। कुपोषण के कुछ संकेतों और लक्षणों में शामिल हैं:
कुपोषण का समय पर निदान करना बहुत महत्वपूर्ण है। क्या किसी व्यक्ति को कुपोषण का खतरा है, यह पहचानने के लिए, मालन्यूट्रीशनल यूनिवर्सल स्क्रीनिंग टूल (एम.यू.एस.टी.) एक जांच उपकरण है, जो कुपोषण का पता लगाने में मदद करता है। बच्चों के मामले में, डॉक्टर बच्चे की लंबाई और वजन का परीक्षण करते हैं ।
बच्चों में कुपोषण को निर्धारित करने के लिए नैदानिक प्रक्रियाओं में शामिल हैं:
हाथ के मध्य-ऊपरी व्यास का मापन: यदि मध्य-ऊपरी बांह की परिधि 110 मिमी से नीचे है, तो यह आपके बच्चे में कुपोषण का एक स्पष्ट संकेत है।
रक्त परीक्षण: विशिष्ट रक्त परीक्षण, जैसे रक्त कोशिकाओं की गिनती, रक्त शर्करा, रक्त प्रोटीन या एल्बुमिन स्तर और अन्य नियमित रक्त परीक्षण बच्चों में कुपोषण की पहचान करने में मदद करते हैं।
अन्य परीक्षण जैसे कि थायरॉयड परीक्षण, कैल्शियम, जिंक और विटामिन की जांच करना आदि। यह सभी परीक्षण करने के लिए डॉक्टर बताते हैं, क्योंकि यह बच्चों में कुपोषण को पहचानने में मदद करते हैं।
यदि समय पर कुपोषण का निदान और उपचार नहीं किया जाता है, तो यह समस्या बच्चों पर बुरा प्रभाव डाल सकती है। बच्चों में कुपोषण के परिणाम निम्न हैं:
कुपोषण के इलाज के लिए पहले मूल कारण की पहचान करना महत्वपूर्ण है। एक बार मूल कारण पता हो जाने के बाद, डॉक्टर कुपोषण या अतिपोषण की समस्या को ठीक करने के लिए सप्लीमेंट और आहार में भोजन की सही मात्रा को शामिल करने के लिए विशेष बदलाव का सुझाव देंगे। यदि समय रहते अच्छे से इलाज किया जाए, तो कुपोषण से होने वाले कई दुष्परिणामों से बचा जा सकता है।
कुपोषण के शुरुआती चरणों के दौरान, घर पर एक संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन और उचित देखभाल आपके बच्चे को इस स्थिति से उबरने में मदद करेगी। कुपोषण से उबरने के कुछ घरेलू उपचार इस प्रकार हैं:
कुपोषण की गंभीरता और कारण के आधार पर, डॉक्टर इस हालत से उबरने के लिए आवश्यक बातें अमल करने के लिए कह सकते हैं।
बच्चों में कुपोषण का सबसे आम कारण पोषक तत्वों का अपर्याप्त सेवन और व्यायाम की कमी है। बच्चों में कुपोषण की रोकथाम के लिए माता-पिता को चाहिए कि वे निम्न बातों का पालन करें:
बच्चे के आहार में कुपोषण को रोकने के लिए निम्नलिखित पोषक तत्व शामिल होने चाहिए:
बच्चों की दैनिक पोषण संबंधी आवश्यकताएं निम्नलिखित हैं:
यह एक मिथक है कि खाने में नखरे करने से बच्चों को कुपोषण का सामना करना पड़ता है। बच्चे भले ही खाने में नखरे दिखाएं और अपने आहार योजना का पालन करने के लिए कोई खास रूचि न लें, लेकिन उन्हें आमतौर पर पर्याप्त पोषक तत्व प्राप्त हो जाते हैं। यह जरूरी नहीं है कि बच्चा बहुत अधिक खाए लेकिन वह जितना भी खा रहा हो उससे बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होने चाहिए।आपको माता-पिता होने के नाते बच्चे के लिए स्वस्थ खाद्य पदार्थों का उचित मिश्रण सुनिश्चित करना चाहिए और बच्चे को अस्वास्थ्यकर और फास्ट फूड जैसे खाद्य पदार्थों को देने से बचना चाहिए।
एक बेहतर और संतुलित आहार योजना का पालन करके बच्चों में कुपोषण को रोका जा सकता है, आपको अपने बच्चे के खाने की आदतों पर नजर रखना बहुत जरूरी है। यदि बच्चा कुपोषण का शिकार होता है, तो इसे रोकने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इस समस्या के मूल कारण का पता लगाया जाए और तत्काल इसका इलाज किया जाए।
आज के समय में माता-पिता अपने बच्चों के लिए कुछ अलग और दूसरों से बेहतर…
लगभग हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे का नाम सबसे अलग और…
एक अच्छा और सच्चा साथी जिसे मिल जाए उसका जीवन आसान हो जाता है। कहते…
माँ वह इंसान होती है, जिसका हमारे जीवन में स्थान सबसे ऊपर होता है। माँ…
यह बात हर कोई जानता है कि बेटियों से घर की रौनक होती है। चाहे…
माता-पिता बनना किसी भी शादीशुदा जोड़े की जिंदगी में एक बेहद यादगार और अनमोल पल…