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हृदय की एक विशेष प्रकार की लय (रिदम) होती है, जिससे यह जानने में मदद मिलती है कि हृदय अपना काम ठीक से कर रहा है या नहीं। हालांकि, कभी-कभी, विभिन्न कारणों से, हृदय की लय या दिल की धड़कन की दर भिन्न होती है, जो किसी समस्या का संकेत हो सकता है। इस स्थिति को हृदय अतालता या एरिथमिया भी कहा जाता है। हालांकि बच्चों में दिल की धड़कन की दर में उतार-चढ़ाव देखना असामान्य नहीं है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक ऐसे ही बनी रहती है, तो आपके बच्चे पर मेडिकली ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है।

यह लेख अतालता के बारे में आपको कुछ अहम जानकारी प्रदान करेगा, जिससे माता-पिता को यह ध्यान रहेगा कि उन्हें कब अपने बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाने की जरूरत होती है। आइए यह समझने के साथ शुरू करें कि बच्चों में सामान्य हृदय गति क्या होती है।

बच्चों में सामान्य हार्ट रेट क्या होता है

बच्चों के लिए सामान्य हृदय/पल्स रेट उनकी उम्र के अनुसार बदलती रहती है। यह नींद के दौरान थोड़ी धीमी हो जाने के लिए भी जानी जाती है। हृदय गति भी बच्चे की गतिविधि पर निर्भर करती है। यदि आपका बच्चा पल्स रेट चेक करने से ठीक पहले शारीरिक रूप से सक्रिय रहा हो, तो इसका मतलब है कि पल्स रेट बढ़ी हुई होना तय है। बच्चे के पूरे स्वास्थ्य और बच्चे की भावनात्मक स्थिति भी पल्स रेट में योगदान कर सकती है।

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विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों के लिए सामान्य हृदय गति का चार्ट नीचे दिया गया है:

उम्र

जागते समय दर 

(प्रति मिनट के अनुसार धकड़न)

सोते समय दर

(प्रति मिनट के अनुसार धकड़न)

28 दिनों के अंदर 100-205 90-160
1 माह से 1 वर्ष 100-190 90-160
1 से 2 वर्ष 98-140 80-120
3 से 5 वर्ष 80-120 65-100
6 से 11 वर्ष 75-118 58-90
12 से 15 वर्ष 60-100 50-90

अतालता क्या है?

अतालता हृदय की लय या धड़कन में अनियमितता होना है। यह हृदय की मांसपेशियों के संकुचन को नियंत्रित करने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल में असामान्यता के कारण होता है। बच्चों में कुछ प्रकार के अतालता का होना आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होता है और उन्हें मेडिकल देखभाल की आवश्यकता उतनी नहीं होती है, क्योंकि यह बच्चे द्वारा की जाने वाली एक्टिविटी पर आधारित हो सकता है। लेकिन अगर यह पाया जाता है कि बच्चे की हृदय गति उसके द्वारा की जाने वाली एक्टिविटी से मेल नहीं खा रही है और कोई भी एक्टिविटी करने के बाद या तो बहुत तेज हो जाती है या धीमी, तो डॉक्टर के पास निदान के लिए जाना समझदारी होगी।

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किन लोगों को अतालता का खतरा ज्यादा होता है?

यह स्थिति उन बच्चों में देखी जा सकती है जो जन्मजात हृदय रोगों से पीड़ित होते हैं, हृदय का संकीर्ण होना या किसी प्रकार की अन्य हृदय से जुड़ी समस्या के साथ पैदा होने वाले बच्चों में इस तरह की प्रॉब्लम देखी जा सकती है। इन्फेक्शन, डायबिटीज और स्लीप एपनिया की समस्या हृदय के आसपास की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे ऐसे बच्चों में अतालता विकसित होने का खतरा भी हो सकता है। इसके अलावा, यदि आपके बच्चे की हार्ट सर्जरी हुई है, दवा दी जा रही है या वो केमिकल असंतुलन से पीड़ित है, तो उसकी हृदय गति अनियमित होने की संभावना हो सकती है।

अतालता के प्रकार

अतालता को हृदय गति में पाई जाने वाली भिन्नता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। अतालता के कई प्रकार हैं, जो ज्यादातर हानिरहित होते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो बच्चे के जीवन के लिए खतरा हो सकते हैं।

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यदि हृदय गति बढ़ने लगती है और बहुत ज्यादा तेज हो जाती है, तो इसे टैचीकार्डिया के रूप में जाना जाता है। यदि हृदय गति काफी धीमी हो जाती है, तो इसे ब्रैडीकार्डिया कहा जाता है। दोनों स्थितियों को नीचे विस्तार से समझाया गया है:

1. टैचीकार्डिया

टैचीकार्डिया में हृदय गति सामान्य गति से बहुत तेज हो जाती है, जो हृदय की समस्या, दवाओं या शरीर में होने वाले कुछ परिवर्तनों के कारण हो सकती है। यह समस्या ज्यादा समय तक नहीं बनी रहती है जिससे अंगों को कोई गंभीर नुकसान पहुंचता है। टैचीकार्डिया के भी दो प्रकार हैं।

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  • वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया

वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया वेंट्रिकल्स या हृदय के लोअर चैम्बर में उत्पन्न होता है। ये बच्चों में होना बहुत आम नहीं हैं, लेकिन इससे हृदय संबंधित गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।

  • सुप्रावेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया (एसवीटी)

सुप्रावेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया दिल के अपर चैम्बर (एट्रिया) और लोअर (वेंट्रिकल्स) दोनों में शुरू होता है। एसवीटी के कारण हृदय गति असामान्य रूप से बढ़ जाती है, जो 220 प्रति मिनट के दर से बढ़ जाती है। इसे पैरॉक्सिस्मल एट्रियल टैचीकार्डिया के रूप में भी जाना जाता है और ये अचानक शुरू होकर खुद ही समाप्त हो जाता है।

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एसवीटी वोल्फ-पार्किंसंस-व्हाइट सिंड्रोम के कारण हो सकता है, जहाँ हृदय के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में एक अतिरिक्त मार्ग होता है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे को कंपकंपी, चक्कर आना और सांस लेने में समस्या हो सकती है।

कई प्रकार के एसवीटी होते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

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  • एट्रियोवेंट्रिकुलर रीएंट्री टैचीकार्डिया (एवीआरटी) – एवीआरटी एक अतिरिक्त मार्ग की उपस्थिति के कारण होता है, जिसके कारण इलेक्ट्रिकल सिग्नल एवी नोड से नहीं गुजर पाते हैं, जो हृदय गति को नियंत्रित करता है। हृदय गति इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि दो रास्ते एक ही समय में इलेक्ट्रिकल सिग्नल ले जाते हैं।
  • एट्रियोवेंट्रिकुलर नोडल रिएंट्री टैचीकार्डिया (एवीएनआरटी) – यह स्थिति एवीआरटी के समान ही है, लेकिन यहाँ इलेक्ट्रिकल सिग्नल एवी-नोड से होकर गुजरते हैं।
  • अट्रायल फ्लाटर – यह कंडीशन अटरिया में एक अनियमित सर्किट के चलने के कारण पैदा होती है, जिससे दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाती है। यह रक्त को वेंट्रिकल्स में जाने से रोक सकता है और ब्लड फ्लो को बॉडी सेल्स में जाने से रोकता है।
  • एट्रियल एक्टोपिक टैचीकार्डिया – इसके कारण इलेक्ट्रिकल इम्पल्स अपने ओरिजिन (साइनस नोड) की तुलना में एक अलग हिस्से (सेल्स का एक असामान्य समूह) से उत्पन्न होने लगता है, इसके परिणामस्वरूप एट्रियम में  संकुचन और दिल की धड़कन के तेज होने की समस्या हो सकती है।
  • जंक्शनल एक्टोपिक टैचीकार्डिया – इस मामले में, इम्पल्स सेल्स के एब्नॉर्मल क्लस्टर से उत्पन्न होता है जो एवी-नोड के पास स्थित होता है, जिससे वेंट्रिकल उनके समय से पहले सिकुड़ जाते हैं। इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है।

साइनस टैचीकार्डिया नामक एक शब्द है, जो शारीरिक गतिविधि या बच्चे द्वारा की जाने वाली एक्टिविटी के स्तर में बदलाव होने के कारण हृदय गति में वृद्धि करने के रूप में जाना जाता है। यहाँ साइनस नोड, जिसे इसके फंक्शन यानी इलेक्ट्रिकल इम्पल्स के उत्पन्न करने के कारण हार्ट पेसमेकर के नाम से भी जाता है, यह इम्पल्स को तेज कर देता है जिससे हार्ट रेट बढ़ जाता है।  

2. ब्रैडीकार्डिया

ब्रैडीकार्डिया को बच्चे की हृदय गति में होने वाली भारी गिरावट के तौर पर जाना जाता है (ज्यादातर मामलों में, प्रति मिनट 50 बीट्स से नीचे) यह दर गिर सकता है। यह फॉल्टी इलेक्ट्रिकल सर्किट के कारण हो सकता है या यह संकेत दे सकता है कि साइनस नोड अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रहा है। कुछ मामलों में, चूंकि हृदय गति काफी कम हो जाती है, इसलिए हार्ट सेल्स में ब्लड पंप करने में सक्षम नहीं हो पाता है, जिससे डेफिशियेंसी हो सकती है और जान तक खतरा बन सकता है।

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अनियमित हार्ट बीट होने के कारण

दिल की धड़कन का अनियमित होना विभिन्न कारणों से हो सकता है, जिसमें जन्मजात हृदय रोग, शरीर में केमिकल इंबैलेंस, छाती पर किसी प्रकार का ट्रामा, हार्ट सर्जरी, बुखार या इन्फेक्शन जैसी समस्या हो सकती है। यह कार्डियोमायोपैथी के कारण भी हो सकता है, जो हृदय की मांसपेशियों की एक बीमारी है।

असामान्य हृदय गति के संकेत और लक्षण

असामान्य हृदय गति के संकेतों और लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण है, खासकर छोटे बच्चों के लिए जो अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम नहीं होते हैं। शिशुओं औ बच्चों में, यह चिड़चिड़ापन, पीलापन और खाने में रुचि की कमी के रूप में दिखाई दे सकता है। बड़े बच्चे आपको बता सकते हैं यदि उन्हें चक्कर आ रहा है या ऐसा महसूस हो रहा है कि उनके दिल की धड़कन रुक गई है। अनियमित पल्स रेट होने के  कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

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  • चक्कर आना
  • कमजोरी या थकान
  • झटके
  • छाती में दर्द
  • बेहोशी
  • पसीना आना
  • छोटे बच्चों में चिड़चिड़ापन और पीलापन
  • सांसों की कमी

बच्चों में अतालता का निदान

बच्चे की हृदय गति में असामान्यता का निदान करने के लिए डॉक्टर विभिन्न तरीकों का उपयोग करते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री और सभी जरूरी जानकारी डॉक्टर को दें, ताकि वे इसका बेहतर रूप से मूल्यांकन कर सकें और इसके लिए डॉक्टर बच्चे का फिजिकल एग्जामिनेशन कर सकते हैं और उसके आधार पर तय किया जाएगा कि आगे के टेस्ट किए जाना चाहिए या नहीं ।

यहाँ कुछ परीक्षण के बारे में बताया गया है:

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1. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी)

यह टेस्ट आपके बच्चे के दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को मापता है। यह दर्द रहित है और इसे रेस्टिंग ईसीजी या एक्सरसाइज ईसीजी के रूप में किया जा सकता है। रेस्टिंग ईसीजी दिल को तब मापता है जब आपका बच्चा आराम कर रहा होता है या लेटा हुआ होता है। एक एक्सरसाइज ईसीजी ट्रेडमिल पर चलने या दौड़ने जैसी एक्टिविटी के दौरान बच्चे की हृदय गति को मापता है।

2. होल्टर मॉनिटर

यह एक ईसीजी टेस्ट है, जो 24 घंटे या उससे अधिक की अवधि में किया जाता है। ईसीजी इलेक्ट्रोड और बच्चे की छाती से जुड़ा होता है और एक पोर्टेबल रिकॉर्डर का उपयोग करके मापा जाता है। बच्चे को रोजाना की नॉर्मल एक्टिविटी में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। टेस्ट के दौरान इलेक्ट्रोड को गीला होने से बचाने के लिए देखभाल की जानी चाहिए।

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होल्टर मॉनिटर में दो प्रकार के टेस्ट शामिल होते हैं:

  • जहाँ पूरे समय ईसीजी रिकॉर्ड किया जाता है और लगातार निगरानी की जाती है।
  • इवेंट मॉनिटर जहाँ असामान्य हृदय गति का पता चलने पर ईसीजी रिकॉर्ड किया जाता है।

3. इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी

इस इनवेसिव टेस्ट में, ब्लड वेसल्स में एक कैथेटर डाला जाता है जो बच्चे की बाहों या पैरों के माध्यम से हृदय की ओर जाता है। यह हृदय में अतालता की उत्पत्ति को जानने में मदद करता है और फिर इलाज के लिए उस हिसाब से उपचार का तरीका चुना जाता है।

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4. टिल्ट टेबल टेस्ट

उन बच्चों के लिए टिल्ट टेबल टेस्ट की सलाह दी जाती है जिनके दिल की धड़कन अनियमित होने के कारण उन्हें बेहोशी की समस्या होती है। टेस्ट में बच्चे को बैठने, लेटने और खड़े होने की पोजीशन में बदलाव के दौरान हृदय गति, ऑक्सीजन सप्लाई और ब्लड फ्लो के दौरान होने वाली भिन्नता को मापा जाता है।

यदि आवश्यक हुआ तो कुछ डॉक्टर आपके बच्चे के लिए छाती का एक्स-रे, एमआरआई या ब्लड टेस्ट करने के लिए भी कह सकते हैं।

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बच्चों में अतालता का उपचार

बच्चों में अतालता का उपचार बच्चे की उम्र, अतालता के प्रकार, लक्षण और इसके होने की आवृत्ति पर आधारित होता है। उपचार के कुछ सामान्य ट्रीटमेंट में शामिल हैं:

1. दवाएं

असामान्य हृदय गति को ठीक करने के लिए स्थिति और उम्र के आधार पर बच्चे को एंटी-एरिथमिक दवाएं दी जा सकती हैं।

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2. पेसमेकर

ये उपकरण साइनस नोड द्वारा उत्पादित इलेक्ट्रिकल सिग्नल की नकल करते हैं। हृदय गति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए उन्हें सर्जिकली इम्प्लांट करके बच्चे के शरीर (आमतौर पर कॉलरबोन के पास) में हार्ट रेट को रेगुलेट किया जाता है।

3. डिफाइब्रिलेटर

एक इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर-डिफाइब्रिलेटर (आईसीडी) को कॉलरबोन के पास डाला जाता है, जिससे तार दिल तक जाते हैं। जब एक असामान्य हृदय गति का पता चलता है, तो डिवाइस इसे सामान्य हृदय गति में रिस्टोर करता है।

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4. कैथेटर एब्लेशन

इस प्रक्रिया में ब्लड वेसल्स के माध्यम से एक कैथेटर डाला जाता है जो हृदय की ओर जाता है। यह हृदय के उस क्षेत्र का पता लगाता है और संकुचित करता है जहाँ अनियमितता उत्पन्न होती है, और उन डिफेक्टिव सेल्स को फ्रीज कर देता है या नष्ट कर देता है।

5. सर्जरी

यदि अन्य सभी विकल्प से कोई परिणाम नहीं मिल रहा है, तो ऐसे में सर्जरी की सिफारिश की जाती है जहाँ बच्चे को एनेस्थीसिया के तहत रखा जाता है और अतालता पैदा करने वाले टिश्यू को सर्जरी के द्वारा हटा दिया जाता है।

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अपने बच्चे की पल्स रेट कब और कैसे चेक करें

आपात स्थिति के लिए अपने बच्चे की नब्ज की जांच कैसे करें, यह जानने का आईडिया अच्छा है। यदि आपके बच्चे को दिल की बीमारी है, तो हो सकता है कि आपके डॉक्टर ने आपको पहले से ही नब्ज की जांच करने के तरीके बताए हों। हालांकि, भले ही आपके बच्चे को दिल की बीमारी न हो, फिर यह चेक करते रहना कि उसका पल्स रेट कितना है, अच्छी बात है, खासकर जब आपको निम्नलिखित में से कोई लक्षण दिखाई दे:

  • सीने में दर्द
  • झटके
  • बच्चे का अचानक पीला या नीला हो जाना
  • ठीक से सांस न ले पाना

आप अपने बच्चे की नब्ज की जांच करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप का पालन कर सकती हैं:

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  1. पल्स पॉइंट को जानें: वो पॉइंट जहाँ आर्टरी त्वचा के सबसे करीब होती है जैसे गर्दन और कलाई, इन्हें पल्स चेक करने का सबसे अच्छा पॉइंट माना जाता है।
  2. सुनिश्चित करें कि पल्स रेट लेने से पहले आपके बच्चे को कम से कम 10 मिनट तक आराम मिले।
  3. नब्ज को चेक करने के लिए अपनी तर्जनी और बीच की अंगुली को कलाई पर जहाँ पल्स पॉइंट होता है वहाँ रखें ।
  4. 15 सेकंड के लिए बीट्स की कुल संख्या गिनें।
  5. पल्स रेट जानने के लिए बीट्स की कुल संख्या को 4 से गुणा करें।

पल्स ढूंढने के लिए अपने अंगूठे का उपयोग करने से बचें क्योंकि अंगूठे में भी पल्स पॉइंट होता है।

अपने बच्चे की देखभाल कैसे करें

यदि आपके बच्चे में अतालता का निदान किया गया है, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप उसके स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए एक सख्त दिनचर्या का पालन करें।

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  1. अपने बच्चे को नियमित जांच के लिए डॉक्टर के पास ले जाएं।
  2. बार-बार पल्स रेट चेक करती रहें।
  3. हेल्दी हार्ट के लिए कम कोलेस्ट्रॉल और कम फैट वाले स्वस्थ आहार का पालन करें।
  4. सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा हृदय गति को नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करता है।
  5. अतालता के उपचार के दौरान होने वाले सुधार पर नजर रखें।

डॉक्टर से कब परामर्श करें

बहुत फिजिकल एक्टिविटी के बाद ज्यादातर  बच्चों की हृदय गति अनियमित हो जाती है। हालांकि, यदि आप अपने बच्चे में तेज या धीमी हृदय गति को नोटिस करती हैं, जो किसी एक्टिविटी से संबंधित नहीं है, तो आपको बाद में कॉम्प्लिकेशन से बचने के लिए डॉक्टर से परामर्श करने की आवश्यकता होगी।

बच्चे आमतौर पर बहुत अधिक फिजिकल एक्टिविटी करते हैं जिससे उनकी हृदय गति में भिन्नता हो सकती है। माता-पिता को अपने बच्चे में अनियमित हृदय गति को पहचानने के लिए लक्षणों के बारे में अच्छी तरह से अवगत होना बेहद जरूरी है।

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समर नक़वी

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