टॉडलर (1-3 वर्ष)

शिशुओं और टॉडलर के गले में खराश होना – कारण और ट्रीटमेंट

वैसे तो गले में खराश होना एक आम समस्या है पर यह छोटे बच्चों, टॉडलर और पेरेंट्स के लिए इरिटेटिंग हो जाती है। यह समस्या होने पर बच्चा बहुत रोता है, चिड़चिड़ा हो जाता है, उसे थकान होती है और वह ठीक से न खा पाता है व न ही बोल पाता है और यहाँ तक कि उसे सांस लेने में भी दिक्कत होती है। यद्यपि गले में खराश कोई भी नहीं चाहता है पर यह बहुत ज्यादा गंभीर समस्या नहीं है। बच्चों में होने के इसके कारण और ट्रीटमेंट जानने के लिए यह आर्टिकल पूरा पढ़ें। 

गले में खराश होना क्या है?

गले में खराश होना एक आम समस्या हैं जो लोगों के साथ-साथ छोटे बच्चों को भी प्रभावित करता है। इसमें म्यूकस की परत बन जाती है जिसमें सूजन होती है और इससे गले में बेचैनी होती है। जिन बच्चों के गले में खराश होती है उन्हें अक्सर खांसी आती है, वे चिड़चिड़ाते हैं और इसकी वजह से उनका मूड भी खराब रहता है। 

छोटे बच्चों और टॉडलर में गले का इन्फेक्शन

छोटे बच्चों और बेबी के गले में खराश होना बहुत आम समस्या है। इसके कई कारण हो सकते हैं पर मुख्य रूप से यह जुकाम या फ्लू की वजह से होता है। अन्य गंभीर समस्याएं हैं, जैसे मीजल्स, चिकन पॉक्स और खांसी – यह सभी वायरल समस्याएं हैं जिसकी वजह से गले में खराश होती है। 

गले में खराश होने पर काली खांसी होना थोड़ा कम आम है। 

बच्चों की ज्यादातर बीमारियों में अक्सर बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन होता है जो गले में म्यूकस की परत और ऊपर के रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित करता है। दांत निकलते समय, थ्रश जिंजोवोस्टोमेटाइटिस (जिंजिवाइटिस और स्टोमेटाइटिस का कॉम्बिनेशन) या हाथ, पैर और मुंह के रोगों से अक्सर बच्चों के गले में खराश होती है। 

छोटे बच्चों के गले में खराश पौधों व फूलों के पौलन एलर्जी, घर में धुआं (खाना पकाने और टोबैको के का धुआं), धूल, बिल्ली या कुत्ते की रूसी से होता है। इस समस्या को एलर्जिक रायनाइटिस कहते हैं। 

बच्चे के गले में खराश होने पर उसे निगलने में दिक्कत हो सकती है और गले में दर्द या खरोंच का अनुभव होता है। उसके जबड़े के नीच लिम्फ ग्लैंड्स पर सूजन व दर्द, टॉन्सिल में सूजन के साथ लालपन, सफेद रंग के पैच या पस और गले में कर्कश हो सकती है। 

क्या गले में खराश होना संक्रामक है?

गले में खराश होना संक्रामक है या नहीं ये उसके कारण पर निर्भर करता है। यदि बच्चे के दांत निकलने या जिंजिवोस्टोमेटाइटिस, थ्रश या हाथ, पैर और मुंह के रोगों की वजह से गले में खराश होती है तो इससे इन्फेक्शन होने की संभावना कम रहती है। 

एलर्जी की वजह से गले में खराश भी गंभीर नहीं होती है यद्यपि परिवार के सदस्य भी समान एलर्जेन के प्रति बच्चे के जितने ही सेंसिटिव हैं तो दोनों में एक साथ एलर्जी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ज्यादातर मामलों में ये बच्चे से नहीं फैलता है। 

यदि बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन की वजह से गले में खराश हुई है तो यह गंभीर होगी। इसकी गंभीरता इन्फेक्टेड म्यूकस के साथ एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है। म्यूकस, नेजल डिस्चार्ज और सलाइवा में वायरस या बैक्टीरिया होते हैं जिससे गले में खराश हो सकती है। बच्चों को किस करने, उन्हें उठाने या उसकी नाक पोंछने और हाथ न धोने से यह समस्या गंभीर रूप से फैल सकती है। 

यदि बड़ा बच्चा छोटे बच्चे के साथ रहता है तो इससे भी इन्फेक्शन होने की संभावना अधिक रहती है। आमतौर पर बड़ों में बच्चों से गले में खराश होने की संभावना कम होती है क्योंकि उनका इम्यून रिस्पॉन्स पहले से ही इस इन्फेक्शन हैंडल कर चुका है जिससे बच्चा अब भी ग्रसित है। कुछ चीजों को साफ करना बहुत जरूरी है, जैसे तौलिया, कपड़े ताकि तबीयत ठीक होने के बाद यह इन्फेक्शन दोबारा से न हो सके। 

छोटे बच्चों में गले में खराश होने के लक्षण

बेबी और टॉडलर के गले में खराश आमतौर पर कुछ प्रकार के इन्फेक्शन या शरीर के रिएक्शन की वजह से होती है। गले में खराश होने के कुछ विशेष लक्षण हैं जिससे पेरेंट्स को यह इन्फेक्शन खत्म करने में मदद मिलती है। 

  • निगलने में दिक्कत: छोटे बच्चों में म्यूकस के मेम्ब्रेन में सूजन होने की वजह से गले में खराश होती जिससे खाना निगलने और यहाँ तक कि सलाइवा से भी इरिटेशन और दर्द होता है। बच्चे दर्द होने की वजह से भूखा रहने पर भी दूध पीने के लिए मना करेगा और रोएगा।
  • गले में लालपन: गले में म्यूकस की परत सूज जाती है। इसे छोटे बच्चों व बेबी में ऑब्जर्व करना कठिन है। डॉक्टर बच्चे को उजाले में ले जा कर मुंह खोलने के लिए कह सकते हैं ताकि वे गले में दिक्कत को देख सकें और इसके लक्षण, जैसे दर्द, जीभ में पीलापन और टॉन्सिल्स में सूजन को देख सकें क्योंकि इन लक्षणों से उन समस्याओं का पता चलता है जिससे गले में खराश होती है।
  • लिम्फ ग्लैंड में सूजन: गले में खराश एक इन्फेक्शन है जिससे लिम्फ ग्लैंड में सूजन होती है जो इस बात का संकेत है कि शरीर इन्फेक्शन से लड़ रहा है।
  • चिड़चिड़ापन और बेचैनी: इन्फेक्शन और खाने से में दिक्कत होने से बच्चे को इरिटेशन और बेचैनी होती है। लगातार इरिटेशन और बेचैनी नींद पूरी न होने और भूख लगने की वजह से होती है।
  • बुखार: गले में खराश और बुखार इन्फेक्शन पर निर्भर करता है।
  • सांस की गंध: बच्चा बिना दर्द के खाना नहीं खा पाता है जिससे मुंह ड्राई रहता है और मुंह से गंध आती है। यह ज्यादतर जिंजीवोस्टोमेटाइटिस, थ्रश, हाथ, पैर और मुंह के रोगों से होता है।
  • गले में संक्रमण के लक्षण: टॉडलर के गले में खराश होने के लक्षण गले में लाल और सफेद पैच और टॉन्सिल्स बढ़ जाना है। इससे निगलने में कठिनाई होती है। इसकी वजह से बुखार, संवेदनशीलता या लिम्फ नोड्स ग्लैंड्स में सूजन, सिर में दर्द और पेट में दर्द होता है।

छोटे बच्चों और टॉडलर के गले में खराश होने के कारण

बच्चे के गले में खराश होने के कई कारण हो सकते हैं। कुछ आम कारण निम्नलिखित हैं, आइए जानें;

  • जुकाम: बच्चे को जुकाम होने से यह समस्या कई दिनों तक रहती है। इसमें नाक बंद हो जाती है, गले में खराश होती है, गले और नाक में कफ होता है, सिर में दर्द और बुखार होता है – बुखार अक्सर 101 फारेनहाइट तक रहता है – यह ज्यादातर बेचैनी और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में इरिटेशन होने से होता है।
  • फ्लू: फ्लू आमतौर पर जुकाम से ज्यादा गंभीर है और इससे बच्चे को तेज बुखार होता है, नाक से म्यूकस बहता है और गले, सिर, शरीर व मांसपेशियों में दर्द रहता है। बुखार और मांसपेशियों में दर्द अक्सर 2 से 4 दिनों तक रहता है पर इसमें खांसी और थकान एक सप्ताह से ज्यादा दिनों तक रहती है।
  • इन्फेक्टेड गला: यह समस्या छोटे बच्चों और टॉडलर्स में आमतौर पर होती है और इसके लक्षण, सूजन, लालपन व गले और टॉन्सिल में सूजन है। इस समस्या में दर्द होता है और खाना खाने, निगलने व बोलने में तकलीफ होती है।
  • वायरल इन्फेक्शन: चिकन पॉक्स, क्रूप, मीजल्स, जिंजिवोस्टोमेटाइटिस और हाथ, पैर व मुंह का रोग (एचएफएमडी) सभी वायरल इन्फेक्शन हैं जो बच्चे व टॉडलर में आमतौर पर होते हैं। यह इन्फेक्शन गंभीरता और निम्नलिखित लक्षणों पर निर्भर करते हैं, जैसे;
  • बच्चे के मुंह और गले में लाल रंग के स्पॉट्स और छाले होना।
  • बच्चे के हाथ पैरों में रैशेज होना।
  • बच्चे के हिप्स और अन्य निजी अंगों में लाल धब्बे या रैशेज होना।
  • इरिटेशन होना।
  • भूख लगने पर भी खाने में तकलीफ होना।

चूंकि इन लक्षणों से इन्फेक्शन का पता चलता है जिन्हें बिना मेडिकल सलाह के ठीक करना कठिन है इसलिए यदि यह समस्याएं होती हैं तो आप डॉक्टर से बात करें। 

  • एलर्जी: आम पॉल्यूटेंट्स जैसे, धूल, जानवरों की रूसी, धुआं, खाना पकाने की गंध और पेंट की गंध से अक्सर छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है। यदि एलर्जिक रिस्पॉन्स बहुत ज्यादा होता है तो आंखों में सूजन, सांस लेने में तकलीफ और बहुत ज्यादा म्यूकस आने की शिकायत होती है जिसमें तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और आगे से बच्चे को एलर्जेन से दूर ही रखना चाहिए। किसी भी बच्चे में वृद्धि होने से भी थोड़ी बहुत एलर्जी हो सकती है।

 

बड़े व छोटे बच्चों के गले में खराश के लिए उपाय

बच्चे के गले में खराश के ट्रीटमेंट के लिए कुछ रेमेडीज निम्नलिखित हैं, आइए जानें;

  • बच्चे को स्वस्थ खाना खिलाएं और कम्फर्टेबल रखें।
  • यदि बच्चे को बुखार या कान में दर्द भी होता है तो डॉक्टर से संपर्क करें।
  • बच्चे को थोड़ा-थोड़ा और लगातार खिलाएं।
  • हवा गर्म और ह्यूमिड करने के लिए आप ह्यूमिडिफायर ऑन करें या बाथरूम में गर्म पानी रख कर बैठ जाएं ताकि गले में इरिटेशन को खत्म हो सके।
  • टॉडलर को गले में खराश के लिए माउथवॉश दिया जा सकता है या उन्हें नमक, हल्दी के गुनगुने पानी से गरारे करने के लिए कहा जा सकता है।
  • टॉडलर के गले में खराश को ठीक करने के लिए आप उन्हें पोप्सिकल थ्रोट लोजेनगेस भी दे सकती हैं।
  • यदि बच्चे को कुछ भी निगलने में दिक्कत होती है तो गले में खराश की रेमेडीज में एनेस्थेटिक या एंटीसेप्टिक गले का गरारा भी शामिल है।

बड़े व छोटे बच्चों में गले में खराश होने की पहचान

गले में खराश के डायग्नोसिस में गले, कान, नाक और मुंह की जांच शामिल है। यदि बच्चे में निम्नलिखित संकेत दिखाई देते हैं तो उसे गले में समस्या है, आइए जानें;

  • यदि बच्चे को निगलने में दिक्कत होती है।
  • यदि गले में दर्द या स्क्रैच होने जैसा महसूस होता है।
  • यदि जबड़े के नीचे के लिम्फ ग्लैंड में दर्द व सूजन होती है।
  • यदि लाल, सफेद पैच या पस होने के साथ टॉन्सिल्स में सूजन आ जाती है।
  • यदि गले में खराश होने के साथ-साथ खरखरी आवाज या बोलने में दिक्कत होती है।

बच्चों में गले में खराश होने से संबंधित कॉम्प्लिकेशंस

गले में खराश होने के लक्षण होने के साथ बच्चे में अन्य कुछ कॉम्प्लिकेशंस हो सकती हैं। यदि लक्षणों के साथ अन्य समस्याएं भी होती हैं तो इसे ठीक करना जरूरी है ताकि बैक्टीरिया शरीर के अन्य भागों में न फाइलें, जैसे;

  • यदि मुंह में दर्द होता है।
  • यदि सूजन, लालपन, पैचेज और पस के साथ गले में इन्फेक्शन होता है।
  • यदि निगलने या मुंह खोलने में तकलीफ होती है।
  • यदि सांस लेने में दिक्कत होती है।
  • यदि भूख कम लगने के साथ डिहाइड्रेशन, बहुत ज्यादा ड्रूलिंग या गले में जकड़न होती है।
  • यदि बच्चे सामान्य से ज्यादा रोता, इरिटेट और चिड़चिड़ा होता है।

दर्द को ठीक करने के लिए रेमेडीज

  • टॉडलर के गले में खराश होने की दवाएं सीमित हैं और इसमें डॉक्टर सिर्फ ओटीसी दर्द की दवा या बुखार कम होने की दवा प्रिस्क्राइब कर देते हैं। इसमें शरीर को इन्फेक्शन से लड़ने और ठीक होने के साथ-साथ असुविधा, दर्द और चिड़चिड़ेपन का खयाल रखने की जरूरत है।
  • बेबी और टॉडलर के गले में खराश के लिए होम रेमेडी सिर्फ आराम करना और हाइड्रेटेड रहना ही है। बच्चे को ज्यादा गुनगुना फ्लूइड देने से म्यूकस पतला होगा और बाहर निकलने में भी मदद मिलेगी। यह बच्चे के गले की खराश को ठीक कर देगा।
  • गुनगुना और लाइट सूप पीने से न्यूट्रिशन मिलता है और गले में खराश व दर्द भी कम होता है।
  • यदि आप सोचती हैं कि बच्चे के गले में खराश को ठीक करने के लिए कौन सी होम रेमेडी का उपयोग किया जाए तो आप थोड़ी सी तुलसी को क्रश करके शहद में मिलाएं या अदरक, काली मिर्च, हल्दी, शहद और नींबू के साथ हर्बल टी बना लें।

गले में खराश होने से संबंधित सावधानियां

निम्नलिखित सावधानियां बरतकर गले में खराश की समस्या से बचा जा सकता है, आइए जानें;

  • आप नियमित रूप से विशेषकर छींक, खांसी आने पर या किसी भी इन्फेक्टेड चीज के संपर्क में आने पर हाथ धोएं।
  • जहाँ पर इन्फेक्शन होना आम है उस जगह पर बिलकुल भी न जाएं।
  • बच्चा इन्फेक्टेड केयरगिवर के संपर्क में आने से नहीं बच सकता है इसलिए केयरगिवर को हाइजीन बनाए रखना चाहिए और जिन लोगों के गले में खराश है उनके संपर्क में नहीं आना चाहिए।
  • इन्फेक्टेड लोगों से चम्मच, गिलास और तौलिया शेयर न करने से गले में खराश होने से बचा जा सकता है।

क्या बच्चों के गले में खराश होना कोई इमरजेंसी है?

यदि बच्चे को निम्नलिखित समस्याएं भी होती हैं तो गले में खराश होना एक इमरजेंसी समस्या हो सकती है। वे कौन सी समस्याएं हैं, आइए जानें; 

  • यदि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होती है।
  • यदि कम सांसे आती हैं और बच्चा हांफने लगता है।
  • यदि 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को 100.4 डिग्री से ज्यादा और 3 महीने से ज्यादा उम्र के बच्चे को 102.2 डिग्री से ज्यादा बुखार होता है।
  • यदि खांसी के साथ थूक में खून भी आता है।
  • यदि खनकने की आवाज होती है।
  • यदि बच्चा किसी भी प्रकार से अपना मुंह नहीं खोल पाता है।
  • यदि गले के एक तरफ सूजन हो जाती है (यह टॉन्सिल होने का संकेत भी हो सकता है)।

डॉक्टर से कब मिलें

डॉक्टर से मिलने का सही समय तभी है जब ऊपर बताए सभी लक्षण गले में खराश होने के साथ मौजूद हैं ताकि बच्चे में कोई भी गंभीर समस्या न फैले। यहाँ तक कि बच्चे को कोई भी गंभीर समस्या नहीं भी होती है तो डॉक्टर उसे लक्षणों से निजात पाने के लिए कुछ तरीके बता सकते हैं। 

गले में खराश होना बच्चे की समस्याओं के दिन हैं इसके अलावा आपको इससे कोई भी परेशानी नहीं होती है। इस बात का ध्यान रखें कि यह समस्या फैले न। इस चरण में जितना ज्यादा हो सके उतना ज्यादा बच्चे को कम्फर्टेबल रखें। आप बच्चे के इम्यून सिस्टम का ध्यान रखें ताकि आगे से गले में खराश की समस्या न हो। 

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सुरक्षा कटियार

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