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अपने बच्चे को सुलाना शायद सबसे कठिन कार्यों में से एक है जिसे आपको हर दिन करना होता है। बच्चे रात में अक्सर जागते हैं और उनका देर तक रात में सोना मुश्किल हो जाता है। इससे आपके हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ता है, क्योंकि बच्चे के साथ साथ आपको भी रिलैक्स होने और अपनी नींद पूरी करने की जरूरत होती है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि आपका बच्चा रात भर जगता है और सुबह होने पर सो जाता है, इस तरह आपके लिए तो नए दिन की शुरुआत हो जाती हैं! लेकिन जरा सोचिए अगर हम आपको बताएं कि अगर आप बच्चे के डिनर फूड में कुछ चेंजेस कर के उन्हें जल्दी सोने के लिए प्रेरित कर सकती हैं तो? जी हाँ ऐसे कुछ भोजन हैं जिन्हे बच्चे को रात में दिए जाने से उन्हें रात को अच्छे से नींद आती है, तो आइए जानते हैं कि कैसे आपकी समस्या का हल मिलता है।
यदि आपने बच्चे को अपना दूध छुड़ा दिया है और उस सॉलिड फूड देना शुरू कर दिया है, तो आप उसे उसके डिनर फूड में बहुत साड़ी चीजों को ऐड कर सकती हैं। प्यूरी, पॉरिज, चावल, फल! इन सभी चीजों को बच्चे की डाइट में शामिल करने का मकसद सिर्फ यह है कि उन्हें डिनर फूड को न्यूट्रिशियस बनाना है साथ वो इसे आसानी से डाइजेस्ट भी कर सकें। लेकिन यहाँ दिलचस्प बात यह है कि रिसर्च से पता चलता है कि आपके बच्चे की स्लीप साइकिल में उसकी डाइट की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है!
हम जिस भी खाद्य पदार्थ का सेवन करते हैं उसका प्रभाव हमारे ओवरऑल हेल्थ पर पड़ता है। जबकि कुछ खाद्य पदार्थ हमें जगाए रखने में मदद करते हैं और अलर्ट कर देते हैं (जैसे बड़ों के लिए कॉफी यही काम करती है), कुछ ऐसे फूड प्रोडक्ट भी हैं जो नींद को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। काम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट के साथ मिलकर ये खाद्य पदार्थ शरीर में नींद को बढ़ावा देने वाले सबटेंस को छोड़ने में मदद करते हैं। यह आपके बच्चे को रात के खाने के बाद नींद और रिलैक्स फील कराते हैं। सीधे शब्दों में कहें, तो इसका मतलब है कि बच्चा जल्दी और लंबे समय तक अपनी नीड को जारी रखेगा!
क्या आप जानती हैं कि चाइल्ड डेवलपमेंट की कुछ स्टडीज के अनुसार, रात में नींद न आने का प्रत्येक घंटा एक बच्चे में संभावित रूप से दो कॉग्निटिव साल को कम कर सकता है?
यहाँ बच्चों के लिए रात के खाने के 9 खाद्य पदार्थ हैं जो न केवल न्यूट्रिशियस और आसानी से डाइजेस्ट होते हैं, बल्कि आपके बच्चे को अच्छी नींद लेने में भी मदद करते हैं!
ओट्स अपने आप में एक बहुत ही फायदेमंद हेल्थी फूड ऑप्शन है। सबसे अच्छी बात यह है कि मेलाटोनिन का भी एक बेहतरीन स्रोत है, जो इंसुलिन प्रोडक्शन में मदद करता है। बदले में इंसुलिन बच्चे की नींद को प्रेरित करने में मदद करता है! आप ओट्स को कई अलग-अलग तरीकों से तैयार कर सकती हैं, जिनमें से सबसे आसान पॉरिज बनाना होता है, यह बच्चे के लिए हल्का होता है और यह डाइजेस्ट होने में भी आसान होता है। हम टेस्ट और न्यूट्रिएंट दोनों देने के लिए इसके साथ सेब भी मिला सकती हैं।
यह रेसिपी ओट्स और एप्पल के साथ तैयार की गई हैं जो इसे फाइबर रिच बनाती है। बच्चों से लेकर बड़ों तक परिवार के सभी सदस्य इस रेसिपी को ट्राई कर सकते हैं। हालांकि, बच्चों के लिए बनाते समय, आप सेब की प्यूरी का इस्तेमाल करें, तो ज्यादा बेहतर होगा।
सर्विंग | प्रिपरेशन टाइम | कुकिंग टाइम |
1 बेबी | 35 मिनट | 15 मिनट |
(1 कप के हिसाब से यानि 250 मिलीलीटर)
सर्विंग साइज 33 ग्राम
कैलोरी | 120 | कैलोरी से फैट | 13 |
टोटल फैट | 1.5 ग्राम 2% | सैचुरेटेड फैट | 0.3 ग्राम 1% |
पॉलीअनसेचुरेटेड फैट | 0 ग्राम | मोनोअनसैचुरेटेड फैट | 0 ग्राम |
सोडियम | 160 मिलीग्राम 7% | कार्बोहाइड्रेट | 26 ग्राम 9% |
डाइटरी फाइबर | 2 ग्राम 8% | शुगर | 9 ग्राम |
प्रोटीन | 3 ग्राम | विटामिन ए | 0% |
कैल्शियम | 6% | आयरन | 30% |
*2000 कैलोरी डाइट पर आधारित
टिप्स:
चावल में ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई होता है। कई साइंटिफिक स्टडीज के अनुसार, लोगों को बेहतर तरीके से और जल्दी सोने में मदद करता है। अब आप जान गई होंगी कि चावल खाने के बाद बहुत से लोगों को नींद क्यों आती है! हालांकि ब्राउन राइस अपने हाई न्यूट्रिएंट के कारण बच्चों को देने के लिए कहा जाता है, सफेद चावल में ब्राउन की तुलना में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है। बच्चे चावल को आसानी से डाइजेस्ट कर लेते हैं और यह पेट के लिए भी हल्का होता है। आप इस राइस पुडिंग सेब के साथ आजमा सकती हैं। यह डिश स्वाद में काफी अच्छी होती है और बच्चे को जल्दी सोने में मदद करती है, तो जानते हैं यह सफेद चावल से बनी रेसिपी!
शॉर्ट ग्रेन राइस के स्वादिष्ट सेब का क्रीमी टेक्सचर और ऊपर से दालचीनी का स्वाद! इतनी साड़ी चीजें इस रेसिपी में शामिल की गई हैं, तो आपके बच्चे को भला यह रेसिपी क्यों नहीं पसंद आएगी। आप छोटे बच्चों के लिए, इसमें सेब की प्यूरी भी मिला सकती हैं ताकि यह उनके लिए खाने में बिलकुल सॉफ्ट रहे, अगर आप सेब के टुकड़े ले रही हैं तो इसे अच्छे से पका लें ताकि यह सॉफ्ट हो जाए और खाने में आसानी हो। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका बच्चा कितने अच्छे से अपने भोजन को डाइजेस्ट कर पाता है।
सर्व | प्रिपरेशन टाइम | कुकिंग टाइम |
1 लोग | 35 मिनट | 15 मिनट |
सर्विंग साइज 1 पॉट (190 ग्राम)
कैलोरी | 205 |
टोटल फाइट | 4.4 ग्राम 7% |
सोडियम | 190 मिलीग्राम 8% |
डाइटरी फाइबर | 0.8 ग्राम 3% |
प्रोटीन | 6.1 ग्राम |
कैलोरी से फैट | 39 |
सैचुरेटेड फैट | 2.5 ग्राम 12% |
कार्बोहाइड्रेट | 35.3 ग्राम 12% |
शुगर | 24.7 ग्राम |
*2000 कैलोरी डाइट पर आधारित।
माँ होने के नाते, हम अपने बच्चों को फ्रेश ग्रीन वेजिटेबल देने पर जोर देते हैं। ताकि उन्हें आयरन, विटामिन और मिनरल जैसे न्यूट्रिएंट अच्छी मात्रा में मिल सके। लेकिन क्या आप जानती हैं कि ग्रीन वेजिटेबल जरूरी न्यूट्रिएंट प्रदान करने के अलावा ट्रिप्टोफैन से भी भरपूर होते हैं। वो अमीनो एसिड जिसका उपयोग हमारे शरीर में प्रोटीन को सिंथेसाइज करने के लिए करते हैं। ट्रिप्टोफैन मेलाटोनिन के प्रोडक्शन में भी मदद करता है – जो शरीर में ‘स्लीप हार्मोन’ के रूप में काम करते हैं! इसे बॉडी क्लॉक हार्मोन भी कहा जाता है क्योंकि यह बच्चे के सोने-जागने की साइकिल को निर्धारित करता है। अगर बात की जाए पालक की तो इसमें इतने सारे हेल्थ बेनिफिट होते हैं साथ ही इसमें नींद को प्रेरित करने वाले गुण भी होते हैं जिससे बच्चे को जल्दी नींद आती है!
चेरी आपके बच्चे के खाने में शामिल करने के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है, पालक की तरह ही यह मेलाटोनिन प्रोडूस करता है, जो स्लीप हार्मोन रिलीज करते हैं! ये काफी स्वादिष्ट भी होते हैं जिसका मतलब है कि आपका बच्चे इन्हें आसानी से खाएगा और पसंद भी करेगा। ध्यान रखें कि टार्ट चेरी में सबसे अधिक मात्रा में मेलाटोनिन होता है, इसलिए उन्हें चुनना ज्यादा बेहतर है।
कैसे खिलाएं: अपने बच्चे को खिलाने से पहले चेरी की बीज निकाल दें और इसकी प्यूरी बना लें। इससे उन्हें खाने और डाइजेस्ट करने में आसानी होती है।
ध्यान रखें:
ज्यादातर बच्चों को केला खाना पसंद होता है क्योंकि इनका टेक्सचर सॉफ्ट होता है और टेस्ट मीठा होता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि केले में मैग्नीशियम की मात्रा काफी अच्छी होती है जो नेचुरल मसल्स रिलैक्सेंट होता हैँ? मसल्स का रिलैक्स होना मतलब बच्चा डिनर के बाद जल्दी नींद में आने लगता है इसके अलावा केले में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन भी अच्छी मात्रा में मौजूद होता है। हम आपके बच्चे के लिए यहाँ केले की प्यूरी की बनाने की रेसिपी ले कर आए हैं, जिसे आप भी आजमा सकती हैं।
केला एनर्जी से भरपूर होता है। इसे कैरी करना और छीलने में भी आसान होता है। साथ ही यह बच्चे के पेट के हिसाब से भी अच्छा होता है, इतना ही नहीं केला दस्त और कब्ज दोनों का इलाज के लिए उपयोगी होता है। जब आप बच्चे दूध छुड़ाने सोच रही हो तो ऐसे में यह फूड ऑप्शन बहुत बेस्ट होता है। केले की प्यूरी बनाना सबसे सरल होता है। यह रेसिपी बहुत जल्दी तैयार हो जाती है और इसका टेस्ट भी बहुत अच्छा होता है, जो बच्चों को जरूर पसंद आएगा।
सर्व | प्रिपरेशन टाइम | कुकिंग टाइम |
1 लोग | 35 मिनट | 15 मिनट |
एक मीडियम साइज का केला लगभग 118 ग्राम के हिसाब से
कैलोरी | 105 | फैट से कैलोरी | 4 |
टोटल फैट | 0.4 ग्राम 1% | सैचुरेटेड फैट | 0.1 ग्राम 1% |
पॉलीअनसेचुरेटेड फैट | 0.1 ग्राम | मोनोअनसैचुरेटेड फैट | 0 g |
कोलेस्ट्रॉल | 0 मिलीग्राम 0% | सोडियम | 1 मिलीग्राम 0% |
पोटैशियम | 422.44 मिलीग्राम 12% | कार्बोहाइड्रेट | 27 ग्राम 9% |
डाइटरी फाइबर | 3.1 ग्राम 12% | शुगर | 14.4 ग्राम |
प्रोटीन | 1.3 ग्राम | विटामिन ए | 2% |
विटामिन सी | कैल्शियम | कैल्शियम | 1% |
आयरन | 2% |
*2000 कैलोरी डाइट पर आधारित।
यदि आप नॉन-वेजिटेरियन हैं, तो आप अपने बच्चे की डाइट में चिकन को शामिल करने के बारे में सोच सकती हैं। इसका कारण यह है कि चिकन में ट्रिप्टोफैन का लेवल हाई होता है और जैसा कि हमने पहले भी बताया है कि अमीनो एसिड के कारण निश्चित रूप से आपके बच्चे को रात के खाने के बाद जल्दी नींद आने में मदद करता है! यह सभी जानते हैं कि चिकन का सेवन करने से आपके बच्चे को प्रोटीन मिलता है, जो बच्चे के विकास के जरूरी होता है। 8 महीने की उम्र के बाद आप बच्चे को चिकन सूप दे सकती हैं जिसमें चिकन के छोटे टुकड़े डाल दें, तो अच्छा रहेगा। यहाँ आपको एक रेसिपी दी गई है जिससे आप चिकन और दाल दोनों से प्रोटीन का फायदा उठा सकती हैं। यदि आपका बच्चा खुद से खाने लगा है, तो आप इसे बच्चे के पसंदीदा कार्टून वाले कटोरे में इसे परोसें ताकि बच्चा इसे खाना एन्जॉय करे!
अखरोट शरीर को सेरोटोनिन के प्रोडक्शन में मदद करता है, यह एक केमिकल है जो बच्चे के दिमाग को रिलैक्स करता है और किसी व्यक्ति के मूड को प्रभावित करता है, जिससे उन्हें और ज्यादा रिलैक्स फील होता है। इससे बच्चा लंबे समय तक और अच्छी तरह से अपनी नींद पूरी करता है। अखरोट में मेलाटोनिन भी होता है, जो नींद लाता है। इसलिए आपका अपने बच्चे की डाइट में इसे शामिल कर सकती हैं, लेकिन आप इस बात का ध्यान रखें कि उसे छोटा टुकड़ा न दें, क्योंकि इससे बच्चे को चोकिंग होने का खतरा होता है। एलर्जी के खतरे से बचने के लिए आप बच्चे को एक साल का हो जाने दें। अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर की सलाह लें।
फलियां, में प्रोटीन के साथ-साथ ट्रिप्टोफैन भी उच्च मात्रा में मौजूद होती हैं और इसलिए यह नींद को बढ़ावा देती है। लेकिन हाई प्रोटीन कंटेंट के अलावा, छोले में आयरन, पोटैशियम, फाइबर और विटामिन के, सी और बी-6 भी अधिक होता हैं। यह उन्हें एक बढ़िया, न्यूट्रिशियस डिनर होता है! आपको यह सलाह दी जाती है कि बीन्स को उबालकर मैश करके अपने बच्चे के आहार में शामिल करें। इससे उनके लिए छोले का सेवन करना और डाइजेस्ट करना आसान होता है।
जी हाँ! डेयरी प्रोडक्ट का नाम सुनकर आप हैरान न हों, बच्चे को सुलाने से पहले दूध देना एक अच्छा आइडिया है। लेकिन दूध के अलावा भी आप चीज़ और पनीर जैसे अन्य डेयरी प्रोडक्ट भी बच्चे को दे सकती हैं जो ट्रिप्टोफैन से भरपूर होते हैं। इसलिए, आप बच्चे के सोने से एक घंटे पहले उसके दूध में एक कटोरी केले को मैश करके दें, तो आपका बच्चा रात भर आराम से सोएगा। इसके अलावा, अगर आप चीज़ का चुनती हैं, तो स्विस और चेडर का विकल्प चुनें क्योंकि उनमें ट्रिप्टोफैन की मात्रा ज्यादा होती है। आप इसकी रेसिपी बनाकर कभी-कभी अपने बच्चे के खाने को एक स्पेशल ट्रीट में बदल सकती हैं! इसका स्वाद बच्चों को पसंद आता है और यह डाइजेस्टिव पॉवर को बढ़ाता है।
क्या आप जानती हैं: चीनी और कैफीन जैसे कुछ खाद्य पदार्थ का नेचर उत्तेजक होता है और इसलिए ‘शुगर रश’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसलिए आपको यह सलाह दी जाती है कि सोने से ठीक पहले आप शुगर को बच्चे के खाने में शामिल न करें। इससे बच्चे के दाँतों में सड़न पैदा नहीं होती है और साथ ही उनके अंदर गलत ईटिंग हैबिट डेवलप नहीं होती है।
जब बच्चे पहली बार सॉलिड फूड खाना शुरू करते हैं, तो उन्हें असुविधा होती है, जिससे उनकी नींद प्रभावित होती है। इसके कई कारण हो सकते हैं। पहला तो यह कि बच्चे का डाइजेस्टिव सिस्टम अभी लिक्विड चीजों का आदि होता है और उसे सॉलिड फूड में शिफ्ट करने की वजह से परेशानी होती है। सॉलिड फूड देने में और मिल्क फीडिंग के बीच का समय शायद अभी तक ठीक से तय नहीं किया गया है। कभी-कभी, खाने की क्वालिटी ज्यादा मायने रखती है इस बात से कि बच्चा कितनी क्वांटिटी में खा रहा है। इसके अलावा, बच्चे के ब्रेस्टफीडिंग रूटीन में कुछ चीजें ऐसे होती हैं जो उनके स्लीपिंग शेड्यूल को रोकती हैं। आप अपने बच्चे को रात में लंबी नींद लेने के लिए इन नीचे बताई गई टिप्स का पालन कर सकती हैं!
बच्चे के खाने की आदतों के साथ-साथ, कुछ ऐसी चीज है, जो आपके बच्चे की स्लीप रूटीन में मदद कर सकती है, वह है आपके पार्टनर का सपोर्ट। डॉ. डायना जूलियन, चाइल्ड स्लीप कंसल्टेंट, इस बारे में बात करती हैं कि कैसे पिता बच्चे को एक कम्फर्टेबल नींद लेने में कर सकते हैं। रात के भोजन के दौरान पिता बच्चे को ब्रेस्ट मिल्क की एक बोतल से फीड करा सकते हैं, जिससे बच्चे और पिता के बीच की बॉन्डिंग भी मजबूत होती है। कुछ माओं का यह भी कहना है कि जब से उनके पार्टनर ने अपने बच्चे को सुलाने की जिम्मेदारी ली है, उनका यह प्रयास सफल साबित हुआ है! ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि बच्चा माँ को फीडिंग से जोड़ता है और उम्मीद करता है कि जब वह रात के बीच में उठे तो उसे फीड कराया जाए। आप यह तरीका भी अपना कर देख सकती हैं!
जब आपका ब्रेस्टफीडिंग करने वाला बच्चा रात में नहीं सोता है, तो आपके मन में यह संदेह पैदा हो सकता है कि आपके ब्रेस्ट मिल्क के कारण बच्चे की नींद इफेक्ट हो रही है। हालांकि कोई ठोस रिसर्च नहीं मिलती है, जो बताए कि आपकी डाइट में शामिल होने वाली चीजों के कारण बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करने से प्रभावित होती है, कुछ तकनीकें हैं जो कई माओं ने बच्चों के सोने के पैटर्न में बदलते देखा है।
सबसे पहले ध्यान देने वाली बात यह है कि ब्रेस्ट मिल्क आप जो खाती हैं उससे नहीं बनता है, बल्कि आपके खून में क्या होता है यह मायने रखता है। इसलिए उन खाद्य पदार्थों की कोई स्पेशल लिस्ट नहीं है, जिससे माओं को परहेज करना चाहिए। हालांकि, यदि आप अपने डेली रूटीन में कैफीन और चीनी को हेल्दी अमाउंट शामिल कर सकती हैं, लेकिन बेहतर यही है कि कुछ समय आप इसका सेवन न करें, यह निश्चित रूप से बच्चे की ओवरॉल हेल्थ को प्रभावित करता है!
कुछ माएं ऐसी भी हैं जिन्होंने कैफीन/चीनी का सेवन कम करने के बाद अपने बच्चों की नींद के पैटर्न में थोड़ा सुधार देखा है। यह भी संभावना हो सकती है कि कुछ फूड न्यूट्रिएंट्स से एलर्जी रिएक्शन होने के चांसेस होते हैं, जो ब्रेस्टफीडिंग के जरिए बच्चे में ट्रांसफर हो सकते हैं। अगर आपको बच्चे में दस्त, रैशेज, उधम मचाना, गैस, पेट का दर्द आदि जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो इसके कारण बच्चा रात भर जाग सकता है, तो आप क्या खाती हैं और ये लक्षण कब दिखाई देते हैं, इस पर नजर रखें। यदि आपको अपने खाने की वजह से बच्चे के रात में जागने का संदेह है तो आप इस विषय पर अपने डॉक्टर से बात करें।
तो इस में दिए गए फूड आइटम को जरूर ट्राई करें, खासकर वो माएं जिनका बच्चा रात-रात भर नहीं सोता है। अगर आपका बच्चा अपनी नींद पूरी करेगा, तभी वो खुश रहेगा और आप भी यही चाहती हैं न! क्या आप इन रेसिपी के अलावा भी कोई फूड रेसिपी जानती हैं, जो बच्चे को बेहतर नींद लेने में मदद करेगा। यदि हाँ! तो आप अपनी रेसिपी हमारे साथ कमेंट बॉक्स के जरिए शेयर कर सकती हैं।
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