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शिशुओं की कर्कश आवाज – कारण और उपचार

हम जानते हैं कि बच्चे रोते हैं, लेकिन कुछ बच्चे लंबे समय तक रोते रहते हैं और बहुत जोर-जोर से रोते हैं। इनमें से किसी भी मामले में बच्चे की आवाज कर्कश हो सकती है। लेकिन ऐसा होने का केवल यही कारण नहीं है। दांत निकलने के समय और बीमार पड़ने से भी शिशु की आवाज प्रभावित हो सकती है। इस लेख में, हम बच्चों की आवाज भारी होने या दूसरे शब्दों में आवाज बैठ जाने के कुछ और कारणों के बारे में जानेंगे और इसका उपचार कैसे किया जाए यह भी जानने का प्रयास करेंगे। अधिक जानने के लिए पढ़ें।

छोटे बच्चों की आवाज कर्कश होने के क्या कारण होते हैं

बच्चे की आवाज कर्कश होने या बैठने की वजहों में बेहद मामूली कारणों से लेकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के संकेत तक शामिल हैं। यहाँ उनमें से कुछ के बारे में आपको बताया गया है।

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1. वोकल कॉर्ड में सूजन और नोड्यूल्स बनना

बच्चे की आवाज रोने के कारण कर्कश हो जाती है, हालांकि यह छोटे बच्चों में बहुत कॉमन नहीं है। बड़ों की तरह जब उनके वोकल कॉर्ड पर बहुत दबाव आता है, तो बेबी कॉर्ड में सूजन आ जाती है, इससे नोड्यूल्स डेवलप होते हैं जो उसकी आवाज को कर्कश बना सकते हैं।

2. कफ / इंफेक्शन  होना

वोकल ट्रैक्ट नाक से भी जुड़ा हुआ होता है, यही वजह है कि नाक में आने वाली कोई भी बाधा आपकी आवाज को प्रभावित करती है। अगर बच्चे को खांसी या सर्दी है, तो गले में जमा कफ उसकी आवाज को प्रभावित कर सकता है। वायरल इंफेक्शन, जैसे कि लैरींगाइटिस भी वॉइस बॉक्स में सूजन का कारण बन सकता है जिससे कुछ समय के लिए आवाज बैठ जाती है। 

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3. एसिड रिफ्लक्स का रिजल्ट

एसिड रिफ्लक्स बच्चों में बहुत कॉमन है, क्योंकि अभी उनका डाइजेस्टिव सिस्टम ठीक से डेवलप हो ही रहा होता है। हालांकि, जब रिफ्लक्स की समस्या बार-बार होने लगती है, तो गले में ऊपर आने वाला एसिड वोकल कॉर्ड तक इंटरैक्ट करता है जिससे गले में खिंचाव महसूस होता है।

4. रेस्पिरेटरी सिस्टम का लगातार पेपिलोमाटोसिस होना

वैसे यह समस्या छोटे बच्चों में बहुत दुर्लभ है, लेकिन जब होती है तो बच्चे की आवाज कर्कश हो जाती है। एचपीवी वायरस या ह्यूमन पेपिलोमा वायरस के कारण रिकरेंट रेस्पिरेटरी या आरआरपी होता है। इसे वोकल कॉर्ड में मस्से जैसे कुछ बनने लगता है, जिसकी वजह से आवाज बैठी हुई सुनाई देती है।

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5. ट्यूमर होने की संभावना

यह काफी गंभीर है और अगर इसका जल्दी निदान नहीं किया गया तो यह घातक साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में, बच्चे आमतौर पर बहुत रोते हैं और फिर उन्हें सांस लेने में समस्या होने लगती है। ट्यूमर का मतलब यह जरूरी नहीं है कि कैंसर हो, लेकिन यह वोकल कॉर्ड की नॉर्मल फंक्शनिंग में बाधा डालता है।

6. डिहाइड्रेशन

डिहाइड्रेशन इसका एक और कारण हो सकता है, जो बच्चे की आवाज को कर्कश बनाता है। फीड्स के बीच में ज्यादा अंतर होने से बच्चे का गला सूखने लगता है और जब बच्चा लंबे समय तक तेज आवाज में रोता है, तो उसके वोकल कॉर्ड पर स्ट्रेस पड़ता है।

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ऊपर बताए गए ज्यादातर कारणों से बच्चे की आवाज कुछ समय के लिए कर्कश हो जाती है। इसलिए, आपको इंतजार करना चाहिए और बच्चे को तब तक फीड कराना जारी रखना चाहिए, जब तक उसका गला अच्छी तरह फ्लूइड से तर न हो जाए। हालांकि, कुछ मामलों में मेडिकल अटेंशन की आवश्यकता हो सकती है। यह जानने के लिए पढ़ना जारी रखें कि आपको इलाज के लिए डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए।

आवाज बैठ जाने पर आपके बेबी को कब ट्रीटमेंट के लिए ले जाना चाहिए?

जब आवाज किसी नेचुरल कारण की वजह से बैठ जाती है, तो यह कुछ घंटों में या कुछ दिनों में अपने आप ही ठीक हो जाती है। लेकिन, अगर ऐसा लंबे समय तक जारी रहता है, तो आपको इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर ये 2 से 3 दिनों में ठीक नहीं होता है तो यह किस कारण से हो रहा है इसका पता लगाने के लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, और बेहतर ट्रीटमेंट लेना चाहिए। अगर आप नीचे दिए गए किसी भी संकेत को नोटिस करती हैं, तब भी आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

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  • आवाज दो दिनों के अंदर तेजी से बदल जाती है ।
  • लगभग एक महीने के लिए आवाज बैठ जाती है।
  • बच्चे को ठीक से सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
  • गले में गांठ जैसा महसूस होना।
  • बच्चे को कफ आ रहा हो और साथ में खून भी आ रहा हो।

अगले सेक्शन में, हम बात करेंगे कि बच्चों में इस समस्या का ट्रीटमेंट कैसे किया जाए और इसके क्या ऑप्शन मौजूद हैं।

छोटे बच्चों में कर्कश आवाज का उपचार

बच्चे की आवाज कर्कश होना आपको परेशान कर सकता है और बच्चा खुद भी इससे इर्रिटेट होता है।इसका ट्रीटमेंट कैसे किया जाना है ये निदान पर निर्भर करता है और फिर इस समस्या को ठीक किया जाता है।

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1. रोने के कारण आवाज बैठना

वो बच्चे जिनके बहुत ज्यादा रोने से उनकी आवाज बैठ जाती है, उनके कॉर्ड पर और ज्यादा स्ट्रेस न पड़े इस बात पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। अपने बच्चे को गोद में उठाएं और लोरी गाकर या कुछ गुनगुना कर जितना जल्दी हो सके बच्चे को शांत कराएं। बेबी को सुलाने की कोशिश करें ताकि उसे कुछ आराम मिल सके या शांत करने के लिए दूध की बोतल दें।

2. नोड्यूल्स के कारण आवाज बैठना

बच्चों के लिए ज्यादातर सर्जरी से बचा जाता है और सारा फोकस वोकल कॉर्ड को राहत देने पर किया जाता है। ह्यूमिडिफिकेशन प्रोसीजर का ऑप्शन चुनने से एलर्जी की समस्या कम हो जाती है साथ-साथ साइनस को साफ करते हुए, वोकल कॉर्ड में मौजूद नोड्यूल्स कम होता है। हालांकि, फाइनल कॉल अलग-अलग केस के आधार होता और ट्रीटमेंट करने वाले डॉक्टर पर निर्भर करता है।

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3. बलगम के कारण आवाज बैठना

सबसे पहले बलगम नेजल पैसेज में अड़चन डालता है। तो, यह बहुत जरूरी है कि आप नेजल स्प्रे /सेलाइन सॉल्यूशन और एक नेजल एस्पिरेटर का उपयोग करके बेबी के नाक के जमाव को साफ करें। बलगम के कारण अक्सर वायरल इंफेक्शन होने का खतरा होता है, जो ट्रीटमेंट के बाद कम हो जाता है।

4. एसिड रिफ्लक्स के कारण आवाज बैठना

इस तरह के मामले में होने वाली परेशानी को तुरंत नहीं ठीक किया जा सकता है। एसिड रिफ्लक्स को कम करने के यही तरीके हैं कि आप बच्चे के लिए एक फिक्स्ड डाइट प्लान बनाएं, ताकि उसका पाचन तंत्र सही से काम कर सके। 

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5. आरआरपी के कारण आवाज बैठना

क्योंकि यह इंफेक्शन वायरस के कारण फैलता है, इसलिए आपके डॉक्टर वायरस से लड़ने के लिए मेडिकेशन लेने का सुझाव देते हैं । गंभीर मामलों में, सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है।

6. ट्यूमर के कारण आवाज बैठना

ट्यूमर का पता लगाने पर, डॉक्टर यह चेक करने के लिए और टेस्ट करेंगे कि यह कैंसर का ट्यूमर तो नहीं। उस पर निर्भर करते हुए, ट्यूमर को हटाने के लिए इसका उपचार शुरू किया जाएगा जिसमें गंभीर मामलों में सर्जरी भी की जा सकती है।

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छोटे बच्चों की आवाज कर्कश हो जाने पर देखभाल करने के टिप्स

हालांकि, आपको यह सलाह दी जाती है कि आप बच्चे की आवाज बैठने की समस्या को लेकर डॉक्टर से परामर्श करें, लेकिन कुछ ऐसे ट्रीटमेंट और सावधानियां हैं, जो इससे जल्दी राहत प्रदान कर सकते हैं और बच्चे की तकलीफ को दूर कर सकते हैं।

1. वोकल कॉर्ड पर पड़ने वाला तनाव रोकें

अपने बच्चे को उसके वोकल कॉर्ड पर जोर डालने या उसके ज्यादा इस्तेमाल से बचाने के लिए, आप कई रिलैक्सिंग मेथड अपना सकती हैं, स्वैडल करने, लोरी या कुछ गुनगुनाने आदि से बच्चा शांत होता है। जब वह बड़ा होने लगे तो आप उसे कुछ देर शांत रहकर टाइम बिताना सिखाएं जहां वह बिना शोर किए किताब पढ़ सकता है या शांति से कुछ वक्त के लिए खेल सकता है। बच्चे को हमेशा धीमी आवाज में बोलने के लिए कहें।

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2. सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा हाइड्रेटेड रहे

यह सुनिश्चित करना कि आपका बच्चा हाइड्रेटेड है, बहुत ज्यादा जरूरी है, क्योंकि इससे आवाज बैठने की परेशानी कम होती है। छोटे बच्चों के ब्रेस्टफीडिंग के छोटे-छोटे सेशन रखने चाहिए और जो बच्चे थोड़े बड़े हैं, उन्हें नियमित अंतराल पर पानी देते रहना चाहिए ताकि वो दिन भर हाइड्रेटेड रहें।

3. प्रदूषित वातावरण से बचें और नियमित रूप से टीकाकरण करवाएं

सिगरेट और गाड़ियों से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आने से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है, साथ ही ऐसी स्थिति भी पैदा हो सकती है जिससे बच्चे की आवाज बैठ सकती है, इसलिए ऐसे माहौल में बेबी को ले जाने से बचें। इसके अलावा, नियमित टीकाकरण करवाने से बच्चों का इम्यून सिस्टम अच्छा होता है और वायरस और जर्म्स के खिलाफ लड़ने में शरीर की मदद करता है, जो अक्सर हमारी बीमारी का कारण बनते हैं।

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जब बच्चों की आवाज बैठने की समस्या को समझने की बात आती है, तो हो सकता है कि समस्या के पीछे का कारण जानने के लिए कोई दूसरे लक्षण नजर नहीं आते हों, जिससे इसका कारण जानने में थोड़ी परेशानी हो सकती है। आमतौर पर बच्चे के व्यवहार से आप समझ सकती हैं कि उसकी आवाज कर्कश होने के पीछे का क्या कारण है। इसके आधार पर ट्रीटमेंट करना आसान है। इन सबके बावजूद हम आपको यह सलाह देते हैं कि कोई भी उपचार अपनाने से पहले अपने बेबी के डॉक्टर से जरूर बात करें।

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समर नक़वी

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