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छोटे बच्चों में स्टार्टल रिफ्लेक्स

पेरेंटिंग के दौरान आने वाली चुनौतियों को देखते हुए हो सकता है कि आप कभी सोचती होंगी कि काश आपका बच्चा एक मैनुअल के साथ आता ताकि आप उसे बेहतर ढंग से समझ सकती। आप अपने नन्हे बच्चे की हर हरकत के बारे में सोचकर परेशान होती होंगी और सोचती होंगी कि आखिर उसकी हरकतों का क्या मतलब है। उसकी कुछ हरकतों और रिफ्लेक्स को समझना मुश्किल होता होगा। 

आप अपने बच्चे में जितने रिफ्लेक्सेस देखती हैं, उनमें से ज्यादातर नुकसान पहुंचाने वाले नहीं होते हैं। रूटिंग और सकिंग यानी सहानुभूति और चूसने वाले रिफ्लेक्स से बच्चे को स्तनपान करने में मदद मिलती है, और माता-पिता के लिए इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है। हालांकि, कुछ रिफ्लेक्स थोड़ा परेशान करने वाले हो सकते हैं, जैसे कि मोरो रिफ्लेक्स या स्टार्टल रिफ्लेक्स।

छोटे बच्चों में स्टार्टल रिफ्लेक्स क्या है?

बच्चे आमतौर पर पैदा होने के समय से ही लगभग नौ तरह के रिफ्लेक्स या फिर यह कह लें कि हरकतें करते हैं और मोरो रिफ्लेक्स उनमें से एक है। इसे स्टार्टल रिफ्लेक्स भी कहा जाता है, ऐसा तब होता है जब बच्चा अचानक अपनी नींद से जाग जाता है। ऐसा होना नेचुरल नहीं है और इससे नुकसान भी हो सकता है, क्योंकि यह बच्चे के सामान्य रूप से जागने के तरीके की तरह नहीं है, वह अपने घुटनों को खींच सकता है और अपनी बाहों को उठा सकता है, केवल फिर से भ्रूण की स्थिति में वापस जाने के लिए।

क्या न्यूबॉर्न बच्चों में स्टार्टल रिफ्लेक्स एक समस्या है?

मोरो रिफ्लेक्स से बच्चे को किसी भी तरह का खतरा नहीं होता है, यह वास्तव में स्वस्थ नर्वस सिस्टम को दर्शाता है। अगर बच्चा नींद से चौंक जाए, तो इसका मतलब है कि बच्चे का नर्वस सिस्टम पूरी तरह से काम कर रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे का ऐसे अचानक से जागना सही है, ऐसा होने पर ज्यादातर बच्चे रोने लगते हैं या फिर से सोने के लिए मना भी करते हैं।

बेबी मोरो रिफ्लेक्स कैसा दिखता है?

नींद के दौरान बेबी स्टार्टल रिफ्लेक्स के दो फेज होते हैं। पहले फेज में, बच्चे की बाहें फैलने लगती हैं और बच्चा अचानक से तेज सांस लेने लगता है। इसके बाद जोर से रोना शुरू कर देता है या फिर चिड़चिड़ाने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बच्चे को महसूस होता है कि वह गिरने वाला है और अपनी बाहों को फैलाकर उस पर रिएक्ट करता है। दूसरे फेज में बच्चा फिर से अपने भ्रूण की स्थिति में वापस जाने लगता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बच्चा खुद को ‘गिरने’ से बचाने के लिए बांध लेता है और फीटल पोजीशन उसे ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका लगती है।

बेबी स्टार्टल रिफ्लेक्स को क्या ट्रिगर करता है?

कुछ बाहरी रिस्पांस के कारण स्टार्टल रिफ्लेक्स ट्रिगर होता है, और उनमें से कुछ नीचे दिए गए हैं। जानिए वे क्यों होते हैं:

1. सुनने संबंधी

यदि अचानक कोई आवाज आती है जैसे कि दरवाजा पटकना या बर्तन का बजना, तो रिफ्लेक्स हो सकता है।

2. देखने संबंधी

कमरे में किसी भी रोशनी का अधिक होना भी रिफ्लेक्स को किक करने का कारण बनता है।

3. स्पर्श

यदि आप अपने बच्चे को पकड़ रही हैं और उसे अचानक खड़ा करती हैं तो यह बच्चे में प्रतिक्रिया का कारण बन सकता है।

4. शिफ्टिंग

यदि आप बच्चे को अपनी हरकत से असमर्थ महसूस कराती हैं, जैसे कि यदि आप अपने बच्चे को बिस्तर पर लिटाने जा रही हैं, तो यह उसके अंदर मोरो रिफ्लेक्स को ट्रिगर कर सकता है।

स्टार्टल रिफ्लेक्स कब शुरू होता है?

बच्चों में जन्म से ही स्टार्टल रिफ्लेक्स मौजूद होता है। आपका बच्चा पैदा होने के समय से ही इसका प्रदर्शन करेगा, और यह पूरी तरह से सामान्य भी है।

छोटे बच्चों में मोरो रिफ्लेक्स कितने समय तक रहता है?

बच्चों में यह पैदा होने से ही रहता है और बच्चे के छह महीने के हो जाने पर यह धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। जैसे-जैसे बच्चे की मांसपेशियां विकसित होती हैं, वह बेहतर संतुलन बनाने में सक्षम होता है और इस दौरान आपको उसे अच्छी नींद लेने में मदद करनी चाहिए।

उम्र के अनुसार स्टार्टल रिफ्लेक्स की स्टेज

मोरो रिफ्लेक्स की स्टेज बच्चे की उम्र के अनुसार बदलती हैं, जैसा कि नीचे बताया गया है।

0 से 1 महीना

इस अवस्था में बच्चे के लिए दुनिया कुछ अजीब होती है। इसमें स्टार्टल रिफ्लेक्स अक्सर होता है, और स्वैडलिंग से बच्चे को बेहतर नींद लेने में मदद मिल सकती है।

2 से 3 महीने

बच्चा आपके स्पर्श का अधिक आदी है, इसलिए वह इस उम्र तक शांत हो जाएगा और आपके पास बेहतर सोएगा। यहां तक ​​​​कि अगर वह नींद के दौरान अचानक से उठता है, तो आपका कोमल स्पर्श उसे जल्दी सोने में मदद कर सकता है।

4 से 6 महीने

इस समय तक गर्दन और पीठ की मांसपेशियां विकसित हो जाती हैं, जिससे बेबी अपनी नींद के दौरान खुद को संतुलित कर पाता है। इसका मतलब है कि उसके सोने की संभावना अधिक है और मोरो रिफ्लेक्स धीरे-धीरे कम हो जाता है।

छोटे बच्चों में मोरो रिफ्लेक्स को कैसे कम करें

स्टार्टल रिफ्लेक्स को कम करने के कुछ तरीके यहां दिए गए हैं:

1. स्वैडलिंग

कंबल की गर्माहट में बच्चा अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है, इसलिए यदि आप बच्चे को स्वैडल करती हैं तो चौंकने वाली घटनाएं कम हो सकती हैं।

2. बेबीवियरिंग

यह तरीका स्वैडलिंग से भी बेहतर है, क्योंकि बेबी अपनी नींद के दौरान हमेशा अपनी माँ या पिता के पास रहना चाहता है। बेबीवियरिंग बच्चे के चौंकने वाली घटनाओं को काफी हद तक कम करता है।

3. बच्चे के साथ सोएं

साथ में सोने से न केवल बच्चा अपनी नींद शांति से लेता है, बल्कि माता-पिता के लिए रात के बीच में बिना अपनी नींद ज्यादा खराब किए बच्चे की देखभाल करना आसान होता है।

4. ट्रांसफर करने के तरीके

ज्यादातर मामलों में, बच्चे के सोते समय अचानक होने वाली हलचलों के कारण मोरो रिफ्लेक्स शुरू हो जाता है। इसलिए आप बच्चे के सोने के बाद उसे बेहद धीरे से संभाल कर ही उठाए या हिलाएं ताकि उसकी नींद में खलल न पड़े।

डॉक्टर से कब परामर्श करें

यदि आप देखती हैं कि रिफ्लेक्स बच्चे के शरीर के एक हिस्से को दूसरे की तुलना में अधिक प्रभावित करता है, तो यह नर्वस सिस्टम में किसी समस्या के होने का संकेत हो सकता है। इस लेवल पर डॉक्टर से मिलना जरूरी है। यहां तक ​​​​कि अगर आपने अभी तक बच्चे में इस तरह की हरकत को नहीं देखा है, तो भी डॉक्टर  पर वह इसका निरीक्षण करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या होगा यदि बच्चे में स्टार्टल रिफ्लेक्स नहीं है?

बच्चे में मोरो रिफ्लेक्स की कमी मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी या यहां तक ​​कि दोनों ही समस्याओं का संकेत हो सकती है। क्योंकि बच्चे में रिफ्लेक्स एक अच्छे नर्वस सिस्टम को दर्शाता है, इसलिए आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए यदि आपको लगता है कि यह आपके बच्चे में मौजूद नहीं है।

2. क्या हो अगर एक बच्चा शायद ही कभी चौंकता है?

ज्यादातर पेरेंट्स इस तरह की हरकतों को शुरुआती दिनों में ही नोटिस करते हैं, कुछ बच्चे कभी धीमे से चौंकते हैं, शायद इसलिए माता-पिता ये देख नहीं पाते होंगे। इसलिए, जब भी आपका बेबी सो रहा हो तो आपको उसे जानबूझकर चौंकाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यदि आपको इस रिफ्लेक्स पर कोई संदेह है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें।

मोरो रिफ्लेक्स न्यूबॉर्न बेबी में एक प्राकृतिक स्थिति है और इसका होना नर्वस सिस्टम का अच्छे से काम करने का जरूरी संकेत है। अगर आपको लगता है कि यह आपके बच्चे में मौजूद नहीं है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। हालांकि, टेंशन न लें, क्योंकि यह शायद ही कभी कोई बड़ी समस्या हो सकती है।

यह भी पढ़ें:

बेबी का नींद में रोना – कारण और शांत करने के तरीके
बच्चों की नींद संबंधी समस्याएं और उनसे निपटने के प्रभावी उपाय
छोटे बच्चों का नींद से लड़ना: कारण और बेबी को सुलाने के टिप्स

समर नक़वी

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