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घमंडी हाथी और चींटी की कहानी में दुष्ट हाथी सबको बहुत परेशान किया करता था और सोचता कि कोई उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। दिन पर दिन सभी जानवर हाथी की तानाशाही से परेशान हो गए। एक दिन हाथी ने चींटी से बैर मोल ले लिया और चींटी ने उसे सबक सिखाने की ठान ली और फिर हाथी को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ।
एक समय की बात है, जंगल में एक विशाल हाथी रहता था। उस हाथी को अपने विशाल शरीर और ताकत को लेकर खुद पर बहुत गुरूर हुआ करता था। जंगल के रस्ते हाथी को जो भी जानवर मिलता वो उसे तंग करता और भगा दिया करता था।
एक बार हाथी कहीं जा रहा उसने देखा एक पेड़ पर तोता बैठा हुआ है हर बार की तरह उसने सोचा तोते को परेशान किया जाए और उसने तोते को आदेश दिया कि वो उसके सामने झुके। तोते ने हाथी के सामने झुकने से साफ इंकार कर दिया। हाथी से यह इंकार सहा नहीं गया और उसने गुस्से में आकर पेड़ को जड़ से उखाड़ दिया जिस पर तोता बैठा हुआ था। तोता वहां से उड़ गया, यह देख हाथी आनंदित महसूस हुआ।
इसी तरह एक दिन हाथी पानी पीने के लिए नदी किनारे जाता है, तो देखता है वहां पर चीटियों ने अपना छोटा सा घर बनाया हुआ है। एक चींटी बहुत लगन से अपना खाना जमा कर रही थी। हाथी ने चींटी से पूछा -” यह तुम क्या कर रही हो?” चींटी ने उत्तर देते हुए कहा- “मैं बारिश का मौसम आने से पहले अपने लिए खाने का प्रबंध कर रही हूँ, ताकि हमें खाने की परेशानी न हो।”
चींटी की यह बात सुनकर हाथी को शरारत सूझी, उसने अपनी सूंड में पानी भरा और चींटी के ऊपर फेंक दिया। जिससे चींटी की सारी मेहनत खराब हो गई और उसका जमा किया सारा खाना बेकार हो गया। अब चींटी ने भी उस घमंडी हाथी को सबक सिखाने की ठान ली। बस चींटी को अब एक मौके की तलाश थी जो उसे एक दिन मिल गया।
एक हाथी भोजन कर के आराम कर रहा था, हाथी को सोता हुआ देख कर चींटी उसकी सूंड में घुस कर काटने लगी। हाथी चौंक कर उठ गया और दर्द से छटपटाने लगा और मदद की गुहार लगाने लगा।
रोते हुए हाथी की आवाज सुनकर चींटी हाथी की सूड़ से बाहर आई। हाथी ने जब चींटी को देखा तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और वो अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हुआ। हाथी न चींटी से माफी मांगी। हाथी ने अपनी गलती से सीख ली और उसने जंगल में रहने वाले बाकि जनवरों को परेशान करना बंद कर दिया।
घमंडी हाथी और चींटी की इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें दूसरों को कमजोर नहीं समझना चाहिए और अपनी ताकत का कभी गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए।
यह कहनी पंचतंत्र की कहनियों के अंतर्गत आती है, जो बच्चों को खासकर बेहद पसंद होती है।
एक घमंडी हाथी और चींटी की नैतिक कहानी ये है कि हमें हमेशा खुद को बलवान और दूसरों को कमजोर नहीं समझना चाहिए। अक्सर हमारा घमंड ही हमें ले डूबता है।
चींटी बारिश की वजह से अधिक मात्रा में अपने खाने का प्रबंध कर रही थी जिसे देख हाथी को शरारत सूझी और उसके चीटियों के ऊपर अपनी सूंड से पानी फेंक कर उनका सारा खाना खराब कर दिया। एक दिन मौका मिलते ही चींटी हाथी की सूंड में घुस गई और वो बहुत परेशान हो गया फिर उसे अपनी गलती का अहसास हुआ।
इस कहानी का तात्पर्य यह है कि अगर हम दूसरों को छोटा समझकर परेशान करेंगे तो हालात बदलते ही और मौका मिलते ही वो हम पर भी प्रहार करेंगे। किसी को कमजोर समझने की गलती न करें और बेवजह किसी निर्दोष को परेशान न करें। वरना आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उम्मीद है आपको यह कहानी बहुत पसंद आई होगी और ऐसी ही अन्य कहानियों को पढ़ने और सुनाने के लिए हमें पढ़ते रहे।
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