शिशु

शिशु जन्म दोष – प्रकार, कारण, पहचान और इलाज

हर माँ एक स्वस्थ और प्रसन्न बच्चे को जन्म देना चाहती है और ज्यादातर बच्चे ऐसे ही होते भी हैं। लेकिन आंकड़ों  से यह पता चलता है, कि लगभग 100 बच्चों में से 3 बच्चों के बर्थ डिफेक्ट या विकृति के साथ जन्म लेने की संभावना होती है। हालांकि, ऐसी किसी विसंगति के कारण, आपके बच्चे के विकास में रुकावट आ सकती है, लेकिन ऐसे कुछ तरीके हैं, जिनके माध्यम से कुछ खास कमियों का इलाज किया जा सकता है या फिर इनसे बचने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान कुछ मापदंडों को अपनाया जा सकता है। 

बर्थ डिफेक्ट क्या है?

अगर सबसे आसान शब्दों में कहा जाए, तो बच्चे के शरीर के विभिन्न अंदरूनी हिस्सों या अंगों के विकास या सामान्य कार्य प्रणाली में आने वाली समस्याओं को बर्थ डिफेक्ट के नाम से जाना जाता है। इनमें हाथ पैरों के मूवमेंट से लेकर आंतरिक शरीर की प्रक्रियाएं और लॉन्ग टर्म विकृतियां भी शामिल हो सकती हैं। 

बच्चों में आम बर्थ डिफेक्ट

ऐसे लगभग 5000 प्रकार के बर्थ डिफेक्ट हैं, जो कि बच्चे को हो सकते हैं। इनमें से कुछ, ज्यादा खतरनाक नहीं होते हैं, इनमें से कुछ बच्चे की दुर्बलता का कारण बन सकते हैं, वहीं, बाकी स्थितियों से बचाव और इलाज संभव है। इनमें से कुछ आम जन्मजात विकृतियां नीचे दी गई हैं: 

1. फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम

यह क्रोमोसोम की एक विकृति है, जो कि आमतौर पर छोटे लड़कों में देखी जाती है। 1500 में से एक बच्चे के इस सिंड्रोम से ग्रस्त होने की संभावना काफी अधिक होती है। 

जिन शिशुओं को यह सिंड्रोम होता है, उनका चेहरा लंबा होता है, उनके कान बड़े होते हैं, उनके पैर चपटे होते हैं, उनके दाँत एक साथ चिपके होते हैं, उन्हें दिल की बीमारियां हो सकती है या फिर ऑटिज्म के हल्के लक्षण भी दिख सकते हैं। कई बार इन लक्षणों की पहचान तुरंत नहीं हो पाती है और बच्चा जन्म के बाद भी बिल्कुल स्वस्थ दिख सकता है। जब वह 1.5 से 2 साल का हो जाता है, केवल तब ही इस सिंड्रोम की पहचान हो पाती है। 

2. डाउन सिंड्रोम

यह भी क्रोमोसोम का ही एक डिफेक्ट है, जो कि शिशुओं में आम है। हर 800 में से 1 बच्चे में यह विकृति देखी जाती है।

इसमें तिरछी आँखें, छोटे कान जो कि ऊपरी हिस्से में मुड़ जाते हैं, छोटा मुँह, छोटी नाक, छोटी गर्दन, छोटी उंगलियां और ऐसे ही लक्षण प्रमुख रूप से दिखते हैं। आंतरिक रूप से ऐसे बच्चे आमतौर पर कान के इंफेक्शन से जूझते हैं और उनके दिल और आंतों के विकास में समस्याएं आती हैं। कई बच्चों को देखने और सुनने में भी दिक्कतें आती हैं। 

3. फिनायलकेटोन्यूरिया

इसे पीकेयू के नाम से भी जाना जाता है और यह एक बायोकेमिकल डिफेक्ट है, जो कि दूसरे देशों की तुलना में यहाँ काफी कम देखी जाती है। लगभग 15000 बच्चों में से एक बच्चे में यह स्थिति पाई जाती है। 

पीकेयू से ग्रस्त बच्चे का शरीर ऐसा होता है, जिसमें फनीलालानिने नामक महत्वपूर्ण एंजाइम मौजूद नहीं होता है। यह एंजाइम शरीर में आगे की प्रक्रिया के लिए प्रोटीन को ब्रेकडाउन करने के महत्वपूर्ण फंक्शन के लिए जिम्मेदार होता है। जैसा कि पीकेयू के मामले में होता है, अगर यह एंजाइम मौजूद न हो, तो प्रोटीन शरीर के अंदर बनने लगता है। यह खतरनाक हो सकता है और बच्चा मानसिक रूप से कमजोर हो सकता है। 

4. सिकल सेल

यह भी एक बायोकेमिकल डिफेक्ट है और यह भी हमारे क्षेत्र में बाकी देशों की तुलना में काफी दुर्लभ है। दूसरे देशों में 625 बच्चों में से 1 बच्चे में यह स्थिति देखी जाती है। 

यह स्थिति खून में हीमोग्लोबिन के सेल्स के रूप को बदल देती है। इससे इनकी आकृति में बदलाव आ जाता है और यह सामान्य गोल आकृति के बजाय एक हंसिये की आकृति जैसा दिखने लगता है। इन असामान्य सेल्स को लिवर या स्प्लीन खत्म कर देते हैं, जिसके कारण आयरन की कमी हो जाती है और एनीमिया हो जाता है। चूंकि ये सेल्स दूसरे ब्लड वेसल्स को ब्लॉक कर सकते हैं और ऑक्सीजन की सप्लाई को घटा सकते हैं, इसके कारण बहुत दर्द हो सकता है। बच्चे को थकावट, सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और उसका रंग पीला पड़ सकता है। 

5. शरीर में हाथ या पैर न होना

यह एक शारीरिक कमी है और इसके पीछे का कारण अभी भी ज्ञात नहीं है। कई डॉक्टर ऐसा मानते हैं, कि यह शारीरिक विसंगति, गर्भस्थ शिशु में तब होती है, जब गर्भवती माँ किसी विशेष वायरस या किसी केमिकल कंपाउंड के संपर्क में आती है, जो कि माँ को तो कोई नुकसान नहीं पहुँचाता, लेकिन यह पेट में पल रहे शिशु को प्रभावित करता है। 

ऐसे बच्चों में हाथ, पैर या इनकी उंगलियां या तो नहीं होती है या फिर इनकी संरचना में कोई विकृति होती है। कई बच्चे अपनी इस कमी को स्वीकार करके इसके साथ जीना सीख लेते हैं, लेकिन ज्यादातर डॉक्टर जीवन के शुरुआती समय में ही प्रोस्थेसिस के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। 

6. स्पाइना बिफिडा

यह भी एक शारीरिक कमी है और यह आमतौर पर 2000 बच्चों में से 1 में देखी जाती है। विश्व के उत्तरी हिस्से में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं। 

बच्चे के विकास के दौरान, जब स्पाइन का निर्माण हो रहा होता है, तब मस्तिष्क और स्पाइन के बीच का न्यूरल ट्यूब सामान्य रूप से विकसित नहीं होता है, इससे बैकबोन खुली रह जाती है। आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान ही इस स्थिति का पता चल जाता है और बच्चे को सही तरीके से हैंडल करने के लिए सावधानी के तौर पर सिजेरियन डिलीवरी का चुनाव किया जाता है। कुछ मामलों में इस स्थिति के कारण बच्चे के पैरों में लकवा और आंतों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। 

7. क्लेफ्ट लिप

यह एक शारीरिक डिफेक्ट है और लगभग 700 बच्चों में से 1 बच्चे में यह विसंगति देखी जाती है। इसके पीछे का कारण वंशानुगत या पर्यावरण की स्थितियों के बीच कुछ भी हो सकता है। 

इस स्थिति में मुँह की छत यानी कि हार्ड पैलेट (तालु), मुँह के पीछे का हिस्सा यानी कि शार्ट पैलेट और ऊपरी होंठ ठीक से बंद नहीं हो पाते हैं। गर्भ में बढ़ने के दौरान, ये तीन हिस्से आमतौर पर शुरुआती स्तर में ही अलग हो जाते हैं। इसके कारण बच्चे के ऊपरी होंठ में छोटी सी दरार पड़ सकती है या मसूड़ों से लेकर नाक तक का हिस्सा दो हिस्सों में बंट सकता है। ऐसे शिशुओं को बात करने में परेशानी होती है और शुरुआती दौर में खाने या ब्रेस्टफीडिंग में भी दिक्कतें आती हैं। ऐसे बच्चों में कान का इन्फेक्शन भी आम होता है। 

8. क्लबफुट

यह एक शारीरिक विकृति है, जिसका खतरा लड़कियों की तुलना में लड़कों को दोगुना होता है। यह स्थिति 1000 बच्चों में से 1 बच्चे में देखी जाती है, जिसमें पैर या एड़ी के विकास में रुकावट आती है। 

हर बच्चे में इस बीमारी की गंभीरता अलग-अलग हो सकती है और ज्यादातर बच्चे जब तक खड़ा होना या दूसरों से बात करना सीखने की शुरुआत नहीं करते हैं, तब तक उन्हें क्लबफुट से किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है। ऐसे मामलों में, कभी-कभी सही पोजीशन के लिए पैर पर दबाव डालना पड़ता है, ताकि उसका विकास सही तरह से हो सके। 

9. हार्ट डिफेक्ट

सुनने में तो यह काफी खतरनाक लगता है, पर कुछ मामलों में कुछ डिफेक्ट के कोई भी स्ट्रांग प्रभाव शिशु पर नहीं दिखते हैं। 110 बच्चों में से 1 में ऐसी स्थिति देखी जाती है और यह आमतौर पर वंशानुगत कारणों या गर्भस्थ शिशु में विकास संबंधी विसंगति के कारण होती है। 

इसे केवल एक अनुभवी डॉक्टर ही पहचान सकता है, जो कि मरमर नामक दिल की एक असामान्य आवाज को नोटिस कर सके। अगर दिल की विकृति गंभीर हो, तो इसका पता तुरंत चल सकता है। दिल की धड़कन बहुत तेज हो सकती है, बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो सकती है, शरीर के विभिन्न अंगों में सूजन आ सकती है और त्वचा का रंग हल्का नीला पड़ सकता है। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो दिल शरीर में पर्याप्त खून को सर्कुलेट नहीं कर पाता है और यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। 

बर्थ डिफेक्ट होने के क्या कारण हैं?

बच्चों में बर्थ डिफेक्ट के कुछ आम कारण इस प्रकार हैं: 

1. पर्यावरण संबंधी फैक्टर

इसके कारणों में, बच्चे के विकास के दौरान इन्फेक्शन से लेकर अपमानजनक और अनुचित व्यवहार तक, कुछ भी हो सकता है। अगर माँ ने अपने बचपन में वैक्सीन नहीं ली हैं, तो उसे टॉक्सोप्लाज्मोसिस, चिकन पॉक्स, रूबेला और ऐसी ही कई बीमारियों के होने का खतरा हो सकता है। ये इन्फेक्शन पेट में पल रहे शिशु को भी प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं, जिसके कारण विकास में असामान्यता और जन्मजात विकृति हो सकती है। 

इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन या धूम्रपान के साथ-साथ, डॉक्टर की सलाह के बिना कठोर दवाएं लेने से भी बच्चे को नुकसान हो सकता है। 

2. वंशानुगत कारण

बच्चे के निर्माण में, माता और पिता के एक-एक क्रोमोसोम से बच्चे का क्रोमोसोम बनता है। दोनों क्रोमोसोम का मिलन बहुत अच्छी तरह से होना जरूरी है, क्योंकि इसी से इंसान की विशेषताओं का निर्माण होता है। क्रोमोसोम की संख्या गलत होने पर या इनके मिलन के दौरान किसी तरह का डिफेक्ट होने पर, वंशानुगत जन्मजात विकृतियां हो सकती हैं। जब बच्चा एक एक्स्ट्रा क्रोमोसोम ले लेता है, तो उसमें डाउन सिंड्रोम देखा जाता है। कुछ बीमारियां बच्चे को पेरेंट्स से भी हो सकती हैं, क्योंकि उनमें भी वही डिफेक्ट होते हैं। कई स्थितियां, ‘एक्स’ क्रोमोसोम से जुड़ी होती हैं और इसलिए अगर गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है तो वह अपनी माँ से विरासत में इन्हें ले सकता है। 

बर्थ डिफेक्ट के खतरे

यहाँ पर शिशुओं में बर्थ डिफेक्ट के कुछ खतरे दिए गए हैं: 

  • गर्भावस्था के दौरान कठोर दवाओं या गोलियों का सेवन नुकसानदायक होता है, जैसे कि लिथियम या आइसोट्रेटिनोइन।
  • शरीर में इन्फेक्शन या फिर यौन जनित बीमारियों (सेक्शुअली ट्रांसमिटेड बीमारियां) की मौजूदगी।
  • गर्भावस्था के दौरान देखभाल की कमी होना या देखभाल न होना।
  • गर्भावस्था के दौरान ड्रग या शराब का सेवन करना या स्मोक करना।
  • गर्भावस्था के दौरान माँ की उम्र 35 या उससे अधिक होना।
  • पेरेंट्स को या परिवार में, जन्मजात विकृति या वंशानुगत बीमारियां होना।

पहचान

गर्भावस्था के दौरान, जन्मजात बीमारियों की पहचान और विश्लेषण के लिए, माँ को टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है। ये टेस्ट आमतौर पर किसी डिफेक्ट की संभावना का संकेत देते हैं और ये पूरी तरह से निर्णायक नहीं होते हैं। कुछ खास खराबियों का पता केवल बच्चे के जन्म के बाद ही लग पाता है। बाद में शिशु पर कुछ टेस्ट किए जा सकते हैं और जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं। 

इलाज

एक बार जब गर्भावस्था के दौरान बर्थ डिफेक्ट का पता चल जाता है, तब डॉक्टर उसकी गंभीरता के अनुसार संभावित इलाज के बारे में बात कर सकते हैं। बच्चे के जन्म से पहले डिफेक्ट को ठीक करने के लिए, माँ को कुछ खास दवाएं दी जा सकती हैं। इनमें से कुछ को बाद में भी दिया जा सकता है, ताकि उस बीमारी के कारण पैदा होने वाले खतरे को कम किया जा सके। शारीरिक विसंगतियों की गंभीरता के अनुसार, सर्जरी का चुनाव करके, उन्हें ठीक किया जा सकता है। ऐसे शिशुओं को घर लौटने के बाद उचित देखभाल और ध्यान की जरूरत होती है। 

बर्थ डिफेक्ट से कैसे बचें?

कुछ खास विसंगतियों से बचना संभव नहीं है, लेकिन सही कदम उठाकर कुछ बर्थ डिफेक्ट से बचाव किया जा सकता है। वैक्सीन लगवा कर, इन्फेक्शन से बचकर, एक संतुलित पौष्टिक आहार लेकर, दवाओं से बचकर और उचित एक्सरसाइज करके अपने बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित किया जा सकता है। 

बर्थ डिफेक्ट का अर्थ हमेशा यह नहीं होता है, कि वह अब एक सामान्य जीवन नहीं जी पाएगा। ऐसे कई लोग हैं, जो कि अपनी शारीरिक कमी के साथ भी एक अच्छा जीवन जी रहे हैं। इसके लिए उन्हें केवल दूसरों से थोड़ी मदद और थोड़े सपोर्ट की जरूरत होती है। सही निर्देश और देखभाल के साथ, ज्यादातर बच्चे एक स्वस्थ वयस्क के रूप में बड़े हो सकते हैं और एक अच्छी जिंदगी जी सकते हैं। 

यह भी पढ़ें: 

शिशुओं और बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी
शिशुओं और बच्चों में सिस्टिक फाइब्रोसिस
शिशुओं में ऑटिज्म – लक्षण, कारण और इलाज

पूजा ठाकुर

Recent Posts

बाल शोषण – माता-पिता और देखभाल करने वालों के लिए जरूरी जानकारी l Bal Shoshan – Mata-Pita Aur Dekhbhal Karne Walo Ke liye Jaruri Jankari

बच्‍चों के साथ दुर्व्यवहार उनके मन को एक गहरी चोट पहुंचाने वाला अनुभव होता है,…

1 day ago

ज्ञ अक्षर से शुरू होने वाले शब्द | Gya Akshar Se Shuru Hone Wale Shabd

‘ज्ञ’ अक्षर की जानकारी बच्चों के लिए बहुत जरूरी होती है। जहां ‘ज्ञ’ जैसे विशेष…

1 day ago

त्र अक्षर से शुरू होने वाले शब्द | Tra Akshar Se Shuru Hone Wale Shabd

भाषा हमारे विचारों को व्यक्त करने और दूसरों से जुड़ने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।…

1 day ago

क्ष अक्षर से शुरू होने वाले शब्द | Ksha Akshar Se Shuru Hone Wale Shabd

बच्चों के विकास में भाषा एक मजबूत आधार प्रदान करती है। हिंदी में ‘क्ष’ अक्षर…

1 day ago

ह अक्षर से शुरू होने वाले शब्द | Ha Akshar Se Shuru Hone Wale Shabd

जब हम बात करते हैं भाषा की, तो हम संवाद के लिए अक्षरों की मदद…

1 day ago

स अक्षर से शुरू होने वाले शब्द | Sa Akshar Se Shuru Hone Wale Shabd

जब हम किसी से बात करते हैं, कहानी सुनते हैं या कोई किताब पढ़ते हैं,…

1 day ago