अगर आप जुड़वां बच्चों की माँ बनने वाली हैं या आप पहले से ही जुड़वां बच्चों की माँ हैं, तो निश्चित रूप से आपकी खुशी दूसरों की तुलना में दोगुनी होगी। लेकिन यह भी सच है, कि एक ही समय पर, एक ही उम्र के दो बच्चों को बड़ा करने में, आपको प्रयास भी दोगुने करने की जरूरत होगी। ऐसे कई जाने-माने सेलिब्रिटीज हैं, जिनके जुड़वां भाई या बहन हैं, जैसे हॉलीवुड एक्ट्रेस स्कारलेट जोहान्सन, जिनकी एक जुड़वां बहन है हंटर, बॉलीवुड में तारा सुतारिया और उनकी बहन पिया, रोडीज फेम रघु और राजीव।
जुड़वां बच्चे न केवल उनके माता-पिता के लिए, बल्कि दुनिया भर के लिए और खासकर वैज्ञानिक समूह के लिए भी हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहे हैं। उनके बर्ताव और लाइफस्टाइल का विश्लेषण करने वाली अनगिनत स्टडीज हो चुकी हैं।
जुड़वां लोगों के बारे में आपने एक बार जरूर सुनी होगी, वे या तो फ्रेटरनल होते हैं या फिर आईडेंटिकल होते हैं। जहाँ आईडेंटिकल जुड़वां का डीएनए समान होता है, वहीं फ्रेटरनल जुड़वां के साथ ऐसा नहीं है। इसका यह निश्चित अर्थ नहीं है, कि आईडेंटिकल जुड़वां एक जैसे ही दिखेंगे, हालांकि, अधिकतर मामलों में वे एक जैसे ही दिखते हैं। यहाँ पर, जुड़वां लोगों के बारे में कुछ और रोचक तथ्य दिए गए हैं, जिनके बारे में आपको पता नहीं होगा:
आईडेंटिकल जुड़वां (एक जैसे दिखने वाले जुड़वां) के बारे में जो एक बात बहुत कम लोग जानते हैं, वो ये है, कि उनमें अंतर करने के कुछ तरीके हैं और पहला तरीका है उनके फिंगरप्रिंट, क्योंकि हर व्यक्ति का फिंगरप्रिंट अलग होता है और जुड़वां लोगों के साथ भी ऐसा ही है। हालांकि आईडेंटिकल जुड़वां का डीएनए एक ही हो सकता है, क्योंकि विकास के दौरान वे गर्भ के अलग-अलग क्षेत्रों में रहते हैं, तो ऐसे में उनके फिंगरप्रिंट्स के निशान अलग ही होंगे। जुड़वां लोगों में अंतर करने का एक और तरीका है, उनकी नाभि। चूंकि, जन्म के समय गर्भनाल से अलग होने के बाद निशान पड़ जाते हैं, तो ऐसे में इनमें अंतर किया जा सकता है।
जी हाँ, आपने सही पढ़ा! जुड़वां लोगों के बारे में यह एक और अजीब तथ्य है। ऐसा तब हो सकता है, जब एक महिला एक महीने में एक के बजाय दो अंडे रिलीज करे। अगर इन दो अंडों का निषेचन दो अलग-अलग पुरुषों के वीर्य से हो, तब महिला जुड़वां बच्चों को जन्म देती है, जिनके पिता अलग होते हैं। पर यह बहुत ही दुर्लभ स्थिति होती है।
आपने सुना होगा, कि कुछ परिवारों में कुछ जनरेशन में कई जुड़वां बच्चे होते हैं। हाइपर-ओवुलेशन नामक एक प्रक्रिया को इसका कारण माना जाता है। हाइपर-ओवुलेशन में एक महिला हर महीने एक से अधिक अंडे रिलीज करती है। ऐसा माना जाता है, कि इस तरह के हाइपर-ओवुलेशन के पीछे जो जीन्स होते हैं, वे वंशानुगत होते हैं और इस तरह जुड़वां बच्चों की संतानें भी जुड़वां होने की संभावना ज्यादा होती है। चूंकि इस तरह के जुड़वां दो अलग अंडों से पैदा होते हैं, इसलिए ये फ्रेटरनल पैटर्न होते हैं। आईडेंटिकल जुड़वां एक अंडे के दो हिस्सों में बंटने से पैदा होते हैं और यह एक वंशानुगत घटना नहीं होती है।
अगर आपको जुड़वां बच्चे आपस में बातचीत करते दिखें और आप इसे आमतौर पर शिशुओं का बड़बड़ाना समझ लें, तो आप सच्चाई से ज्यादा दूर नहीं हैं। इंस्टिट्यूट ऑफ जनरल लिंग्विस्टिक के एक जर्नल में छपे रिसर्च लेख के अनुसार, जुड़वां बच्चे क्रिप्टोफेसिया नामक एक भाषा में बात करते हैं, जिसे केवल वे ही समझ सकते हैं। यह भाषा उल्टे शब्दों और ओनोमाटोपोइक हाव-भाव (जो ‘बू’, ‘चू’ आदि जैसा सुनाई देता है) से बनी होती है। ऐसा अनुमान है, कि लगभग 40% जुड़वां बच्चों की एक अपनी निजी भाषा होती है, पर बड़े होने के बाद यह गायब हो जाती है और बच्चे दूसरी भाषाएं सीखने लगते हैं।
2016 में यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के द्वारा की गई एक स्टडी से पता चलता है, कि जुड़वां बच्चे दूसरों से अधिक समय तक जीते हैं, क्योंकि जुड़वां बच्चों को सभी पहलुओं में एक दूसरे से जो सपोर्ट मिलता है, उससे उन्हें अधिक जीने में मदद मिलती है। यूनिवर्सिटी ऑफ उटा के द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन से पता चलता है, कि जो महिलाएं जुड़वां बच्चों को जन्म देती हैं, वे दूसरों से कुछ वर्ष अधिक जीती हैं। 1807 और 1899 के बीच की महिलाओं पर किए गए रिसर्च से यह भी पता चला, कि जो महिलाएं जुड़वां बच्चों को जन्म देती हैं, वे अधिक ताकतवर और स्वस्थ होती हैं और दूसरी माँओं की तुलना में लंबी उम्र जीती हैं। इससे यह भी पता चलता है, कि जुड़वां बच्चों की माँओं का फर्टिलिटी रेट भी अधिक होता है।
आईडेंटिकल और फ्रेटरनल जुड़वां के अलावा, एक तीसरी श्रेणी भी होती है, जिसे मिरर इमेज जुड़वां कहते हैं। आईडेंटिकल जुड़वां के हर चौथे हिस्से में इसे देखा जा सकता है। यह तब होता है, जब गर्भ में जुड़वां बच्चों के चेहरे आमने सामने होते हैं। इससे वे एक दूसरे की परछाई बन जाते हैं। ऐसे मामलों में एक ट्विन राइट हैंडेड हो, तो दूसरा लेफ्ट हैंडेड हो सकता है या बर्थ मार्क शरीर की उल्टी तरफ हो सकते हैं। आमतौर पर, मिरर जुड़वां तब बनते हैं, जब गर्भधारण के लगभग एक सप्ताह के बाद एक निषेचित अंडा दो भागों में बंट जाता है।
यूनिवर्सिटी आफ पदोवा, इटली, के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन से यह पता चलता है, कि गर्भकाल के 14 सप्ताह की अवधि में ही, जुड़वां बच्चे एक दूसरे तक अपनी पहुँच बना लेते हैं। वे अपने शरीर से ज्यादा एक दूसरे के शरीर को छूते हैं, बल्कि, वे अपने समय का लगभग 30% अपने जुड़वां को महसूस करने में बिता देते हैं। और ऐसा भी देखा गया है, कि वे अपने जुड़वां की आँख को हल्के से छूते हैं, जो कि नाजुक होती है और उसके लिए सावधानी बरतते हैं।
ऐसा देखा गया है, कि अलग रंगत वाले जोड़ों के जुड़वां बच्चों की त्वचा का रंग भी अलग होता है। पर यह केवल इंटर-रेशियल जोड़ों में नहीं देखी जाती है। जिस कपल में दोनों का रंग एक जैसा होता है, पर उनके पेरेंट्स अलग-अलग रंग के होते हैं, उनके जुड़वां बच्चे भी अलग रंगत के हो सकते हैं। मिक्स ट्विन्स नामक यह स्थिति बहुत कम देखी जाती है।
आमतौर पर, यह विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के मामलों में देखा जाता है, जिसमें एम्ब्र्यो का निर्माण एक लैबोरेट्री में होता है और फिर उसे माँ के गर्भ में डाला जाता है। ऐसे मामलों में आमतौर पर एक से अधिक एम्ब्र्यो बनाए जाते हैं और कुछ लोग कुछ एम्ब्र्यो को बाद के इस्तेमाल के लिए फ्रीज करने को चुनते हैं। ऐसे में अगर आप आईवीएफ के साथ इस साल प्रेग्नेंट होती हैं और 2 साल के बाद फ्रोजन एंब्रायो के साथ फिर से प्रेग्नेंट होती हैं, तो टेक्निकली आपके जुड़वां बच्चों की उम्र में अंतर होगा।
इसे वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है, जिसमें एक बच्चा गर्भावस्था के शुरुआती समय में जीवित नहीं रह पाता है। एम्ब्र्यो या तो आपके शरीर द्वारा सोख लिया जाता है या फिर दूसरे बच्चे के शरीर द्वारा सोख लिया जाता है और बचे हुए गर्भकाल में इससे कोई परेशानी नहीं होती है। यह अक्सर होता है, क्योंकि हर 8 गर्भावस्थाओं में से एक गर्भावस्था, जुड़वां प्रेगनेंसी के रूप में शुरू होती है, लेकिन केवल 70 में से एक मामले में ही जुड़वां बच्चों का जन्म होता है।
लेफ्ट-हैंडेड जुड़वां की घटना 22% से अधिक मामलों में देखे जाती है, जो कि बाकी की आबादी के 5 जोड़ों में से एक या उसका दोगुना है। सिंगल बच्चों में लेफ्ट हैंडेड होने की संभावना केवल 10% के आसपास होती है।
हालांकि, आमतौर पर ऐसा नहीं होता है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान समस्याएं या बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता के कारण जुड़वां बच्चों में से एक बच्चे का जन्म समय से पहले हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी पानी की थैली नियत समय से पहले फट जाती है, तो एक बच्चा बाहर आ सकता है, जबकि दूसरा और कुछ दिनों या हफ्तों के लिए अंदर ही रह सकता है। हालांकि, जुड़वां बच्चों के जन्म के बीच का एवरेज अंतराल 17 मिनट है, पर इसकी सबसे लंबी अवधि 87 दिनों की रिकॉर्ड की गई है।
आईडेंटिकल जुड़वां बच्चों के डीएनए पैटर्न एक दूसरे से 99.9% मैच करते हैं। उनके मस्तिष्क की तरंगों का पैटर्न भी लगभग एक जैसा ही होता है। इससे फॉरेंसिक्स के लिए, केवल डीएनए के माध्यम से जुड़वां में से अपराधी का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, फिंगरप्रिंट और दाँतों के निशान एक जैसे नहीं होते हैं और इससे आईडेंटिकल जुड़वां के बीच अंतर करने में मदद मिल सकती है। बल्कि ऐसी कई वास्तविक अपराधिक घटनाएं घट चुकी हैं, जिनमें आईडेंटिकल जुड़वां शामिल थे और वे कानून तोड़कर भाग निकले।
जुड़वां बच्चों के जन्म की संख्या पिछले 30 वर्षों में तेजी से बढ़ी है। यूएस में 1980 से जुड़वां बच्चों के जन्म की संख्या में 76% का उछाल आया है। इसका जिम्मेवार माँओं की अधिक उम्र को जाता है, जो कि अब एक चलन बन चुका है। ऐसा माना जाता है, कि माँ की उम्र जितनी ज्यादा होगी, उनके जुड़वां या एक से अधिक बच्चे होने की संभावना भी उतनी ही बढ़ेगी। जुड़वां बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी का एक दूसरा कारण है, गर्भधारण के लिए फर्टिलिटी इलाज का बढ़ा हुआ इस्तेमाल, जिसमें आईवीएफ जैसी पद्धति शामिल है।
आईडेंटिकल और फ्रेटरनल जुड़वां के बीच अंतर करना आसान नहीं है। बिल्कुल, अगर जुड़वां बच्चे अलग-अलग लिंग के हों, तो कोई शक नहीं है, कि वे फ्रेटरनल हैं। प्लेसेंटा या एमनियोटिक सैक शेयर करने से वे एक जैसे दिखते हैं, लेकिन एक जैसा दिखने से यह निश्चित नहीं होता है। इसलिए इसे सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका है, उनकी जांच कराना। इस टेस्ट में एक स्वैब को हर जुड़वां के गाल से लिया जाता है, जिसे फिर जायगोसिटी जेनेटिक टेस्टिंग नामक जांच के लिए भेजा जाता है। मुख्य रूप से इसका इस्तेमाल, स्वास्थ्य संबंधी वैसी विशेष स्थितियों की जानकारी के लिए किया जाता है, जिसका जुड़वां को खतरा अधिक होता है।
जुड़वां बच्चों के होने की संभावना कुछ खास तथ्यों पर निर्भर करती है, लेकिन ऐसी कुछ अन्य बातें भी होती हैं, जिनसे जुड़वां बच्चे होने की संभावना बढ़ जाती है, जैसे नियमित रूप से बड़ी मात्रा में डेयरी प्रोडक्ट का सेवन। ऊंचे कद की महिलाओं में भी इन्सुलिन लाइक ग्रोथ फैक्टर (आईजीएफ) की अधिक मात्रा में उपस्थिति के कारण, जुड़वां बच्चों से गर्भधारण की संभावना अधिक होती है, जो कि लीवर से रिलीज होने वाला एक प्रोटीन होता है।
जुड़वां बच्चों या एक से अधिक बच्चों का पालन पोषण, आपको हर दिन एक रोलर कोस्टर जैसा महसूस करा सकता है। लेकिन यह एक ऐसा अनुभव है, जो हर किसी को नहीं मिलता और यह उत्साह से भरपूर एक मजेदार सवारी भी साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल एक गाइड है और यह किसी क्वालिफाइड प्रोफेशनल की मेडिकल एडवाइस का विकल्प नहीं है।
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