बड़े बच्चे (5-8 वर्ष)

किस उम्र में बच्चे को डे केयर / चाइल्ड केयर सेंटर भेजें

आज कल की तेज-तर्रार लाइफ ज्यादातर घरों में माँ और पिता, दोनों के कामकाजी होने के कारण वे अपने बच्चे को किसी न किसी डे केयर सेंटर भेजते हैं। हालांकि, ज्यादातर पेरेंट्स के मन में यह सवाल रहता है कि बच्चे को डे-केयर सेंटर में भेजने की सही उम्र क्या है? तो ये आर्टिकल आपको सही निर्णय लेने में मदद करेगा।

डे केयर / चाइल्ड केयर सेंटर में अपने बच्चे को भेजने की सही उम्र क्या है?

आपको अपने बच्चे को डे केयर में भेजना है या नहीं, यह आपकी अपनी पर्सनल चॉइस है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में, यह आपके वर्क शेड्यूल पर निर्भर करता है और आपके बच्चे की क्या डिमांड है उस पर भी निर्भर करता है। इस विषय में कोई भी निर्णय लेने से पहले आप अपने आप से कुछ प्रश्न पूछें:

ADVERTISEMENTS

  • क्या मेरा बच्चा अजनबियों के साथ में असहज महसूस करता है?
  • क्या मेरा बच्चा शोर भरे माहौल में व्यग्र महसूस करेगा ?
  • क्या नए माहौल में मेरा बच्चा सहज महसूस करेगा और आसानी से एडजस्ट हो पाएगा?
  • क्या मेरा बच्चा अपने एज ग्रुप के बच्चों के साथ विभिन्न प्रकार की एक्टिविटी और गेम में शामिल होगा?

इन सवालों से आपको यह तय करने में मदद मिलेगी कि आपके बच्चे को डे केयर भेजना का फैसला सही रहेगा या नहीं। हालांकि, यदि आप ये जानना चाहती हैं कि बच्चे को चाइल्ड केयर सेंटर में भेजने के लिए उसकी  मिनिमम एज क्या होनी चाहिए, तो यह हर सेंटर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। कुछ सेंटर में छोटे शिशुओं को भी लिए जाने की अनुमति होती जिसमें वे कुछ महीने के होते हैं, तो वहीं कुछ सेंटर टॉडलर और थोड़े बड़े बच्चे ही लिए उपयुक्त होते हैं। इसलिए, आपको एक ऐसा डे केयर सेंटर ढूंढना होगा जो आपके बच्चे की उम्र और उसकी अन्य आवश्यकताओं के लिए सबसे उपयुक्त हो।

डे केयर / चाइल्ड केयर सेंटर से आपके बच्चे को मिलने वाला लाभ

एक माँ को अपने बच्चे की खातिर उसकी देखभाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ती है। माँ अपने बच्चे से कभी दूर नहीं रहना चाहती है, लेकिन आज के समय में यह संभव नहीं है, क्योंकि ज्यादातर न्यूक्लियर फैमिली में दोनों पेरेंट्स वर्किंग होते हैं। ऐसी स्थिति में, घर पर रहना और बच्चे की देखभाल करना मुश्किल हो जाता है और माता-पिता के पास एक ही विकल्प बचता है कि वे अपने बच्चे को डे केयर में भेजें। हालांकि, अगर आपको अपने बच्चे को डे केयर सेंटर में भेजने को लेकर कोई डाउट है, तो आपको नीचे बताई गई बातों पर विचार करना चाहिए:

ADVERTISEMENTS

  • यह एक सुरक्षित और स्ट्रक्चर्ड माहौल होता है, जहाँ स्टाफ बच्चों की जरूरतों का ध्यान रखने के लिए मौजूद रहते हैं।
  • यह आपके बच्चे के सोशल, लैंग्वेज और दूसरी स्किल को बेहतर करने में मदद करता है।
  • आपका बच्चा अपनी उम्र के दूसरे बच्चों के साथ इंटरैक्ट करेगा और उनके साथ एक्टिविटीज करेगा, इस फॉर्मल एजुकेशन के लिए बच्चा बेहतर रूप से तैयार होगा।
  • बच्चा ज्यादा इंडिपेंडेंट हो जाएगा और सेपरेशन एंग्जायटी यानी अलग होने के डर का अनुभव नहीं करेगा क्योंकि वो काफी कम उम्र से ही अपने पेरेंट्स से अलग होने का आदी हो जाएगा।

अपने बच्चे के लिए केयर सेंटर का चुनाव करते समय याद रखने योग्य बातें

कुछ लोगों का मानना ​​है कि डे केयर सेंटर टॉडलर्स और बड़े बच्चों के लिए उपयुक्त होते हैं, जबकि अन्य लोगों का मानना ​​है कि फैमिली डे केयर में बच्चे को छोड़ना ज्यादा अच्छा होता है। आपका फैसला जो भी हो, अपने बच्चे की उम्र के अनुसार डे केयर सेंटर का चुनाव करने से पहले कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है:

बेबी – 1 – 12 महीने

यदि आप सोच रही हैं कि किस उम्र में शिशुओं के लिए डे केयर का विचार करना सही रहता है, तो आइए हम आपके डाउट क्लियर कर देते हैं। छोटे बच्चों को सिंगल केयर गिवर से वन टू वन केयर की जरूरत होती है, बेहतर यही है कि ये केयर घर पर ही दी जाए। हालांकि, कई डे केयर सेंटर हैं जहाँ छोटे बच्चों या शिशुओं के लिए ज्यादा पर्सनलाइज्ड फैसिलिटी ऑफर की जाती है। बच्चों को एक सुरक्षित और साफ माहौल की आवश्यकता होती है क्योंकि यही वह समय होता है जब वे अपने आसपास के वातावरण का अनुभव करना शुरू करते हैं। डे केयर सेंटर को ध्यान से चुनना और उसका चयन करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि बच्चों को अटैचमेंट डेवलप करने में और एडजस्ट होने में समय लगता है। बड़े बच्चों के लिए सेंटर बदलते रहने का सुझाव नहीं दिया जाता है।

ADVERTISEMENTS

टॉडलर – 1 – 2 वर्ष

टॉडलर के लिए एक डे केयर सेंटर की आवश्यकताएं कहीं न कहीं शिशुओं के समान ही होती हैं। टॉडलर्स थोड़ा ज्यादा एक्सप्लोर करना शुरू कर देते हैं, और उन्हें अपने पास किसी ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो उन्हें खुद को एक्सप्लोर करने दे और उन्हें अच्छी तरह से समझे। टॉडलर्स की देखभाल करने वाले लोगों में धैर्य और एनर्जी का होना आवश्यक है। जिन चाइल्ड केयर सेंटर में केयरर और बच्चों का अनुपात कम होता है, वे ज्यादा बेहतर रूप से काम करते हैं और बच्चे की देखभाल करते हैं। अपने बच्चे को डे केयर में भेजने से जुड़ी सबसे अच्छी चीज यह है कि वह अपनी ही उम्र के बच्चों के साथ इंटरैक्ट करता है और सोशल होता है, जो घर पर रह कर नहीं कर सकता है।

प्रीस्कूलर – 3 – 5 वर्ष

इस एज ग्रुप के बच्चे लर्नर होते हैं और तेजी से लैंग्वेज, सोशल और अन्य स्किल सीख रहे होते हैं। इसलिए, यदि आप अपने 3-5 वर्षीय बच्चे के लिए किसी डे केयर सेंटर की तलाश कर रही हैं, तो एक ऐसी जगह का चुनाव करें, जहाँ वह न केवल सुरक्षित और कंफर्टेबल महसूस करे, बल्कि उसे नई स्किल भी सीखने को मिलती हों। अपने बच्चे के लिए ऐसा सेंटर चुने जहाँ ज्यादा से ज्यादा एक्टिविटीज करवाई जाती हों।

ADVERTISEMENTS

जहाँ तक ​​अपने बच्चे को डे केयर में भेजने का सवाल है, हर माता-पिता की अलग-अलग आवश्यकताएं होती हैं। इस लेख में बताए गए ऑप्शन और टिप्स को ध्यान में रखिए और ये आपको एक सही निर्णय लेने में मदद करेंगे।

समर नक़वी

Recent Posts

प्रिय शिक्षक पर निबंध (Essay On Favourite Teacher In Hindi)

शिक्षक हमारे जीवन में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वह केवल किताबों से ज्ञान नहीं…

2 months ago

मेरा देश पर निबंध (Essay On My Country For Classes 1, 2 And 3 In Hindi)

मेरा देश भारत बहुत सुंदर और प्यारा है। मेरे देश का इतिहास बहुत पुराना है…

2 months ago

शिक्षा का महत्व पर निबंध (Essay On The Importance Of Education In Hindi)

शिक्षा यानी ज्ञान अर्जित करने और दिमाग को सोचने व तर्क लगाकर समस्याओं को हल…

2 months ago

अच्छी आदतों पर निबंध (Essay On Good Habits in Hindi)

छोटे बच्चों के लिए निबंध लिखना एक बहुत उपयोगी काम है। इससे बच्चों में सोचने…

2 months ago

कक्षा 1 के बच्चों के लिए मेरा प्रिय मित्र पर निबंध (My Best Friend Essay For Class 1 in Hindi)

बच्चों के लिए निबंध लिखना बहुत उपयोगी होता है क्योंकि इससे वे अपने विचारों को…

2 months ago

मेरा प्रिय खेल पर निबंध (Essay On My Favourite Game In Hindi)

खेल हमारे जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। ये न सिर्फ मनोरंजन का साधन…

2 months ago