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क्या अपने बेबी को दूध पिलाने के साथ आप एंटीहिस्टामाइन ले सकती हैं

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जब आपका शरीर किसी ऐसी चीज के संपर्क में आता हैं जिससे एलर्जी ट्रिगर होती है तो हिस्टामाइन नामक एक केमिकल रिलीज होता है। यह पॉलेन, धूल या यहां तक कि पालतू जानवरों की रूसी भी हो सकती है। यही कारण है कि जब एलर्जी के इलाज की बात आती है तो एंटीहिस्टामाइन आमतौर पर पहली पसंद होता है। आपकी एलर्जी कई लक्षण पैदा कर सकती है जैसे कि आंखों से पानी आना और नाक का बहना, मुंह के आसपास खुजली जैसा महसूस होना और इससे हाइव्स (पित्ती) भी हो सकती है, जो कि त्वचा पर उभरने वाले काफी तकलीफदेह रैशेस होते हैं। एंटीहिस्टामाइन हिस्टामाइन के प्रभाव को ब्लॉक करने या इसकी बनने वाली मात्रा को कम करने और इसके लक्षणों से राहत प्रदान करने में मदद करता है।

हालांकि, बच्चे को स्तनपान के दौरान एंटीहिस्टामाइन लेने पर कुछ सवाल उठ सकते हैं। यह जानने के लिए इस लेख को पढ़ें कि क्या आप एंटीहिस्टामाइन का उपयोग ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कर सकती हैं।

क्या आप ब्रेस्टफीडिंग करते समय एंटीहिस्टामाइन ले सकती हैं?

ज्यादातर ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मांएं हमेशा किसी भी प्रकार की दवा लेने को लेकर चिंतित रहती हैं, क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता होती है कि यह उनके ब्रेस्ट मिल्क के जरिए बच्चे में न पहुंच जाए। जबकि ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मांओं को सावधान करने के लिए एंटीहिस्टामाइन मेडिसिन पर चेतावनी दी गई होती है, फिर भी ब्रेस्टफीडिंग के दौरान इनमें से कुछ का उपयोग करना सुरक्षित माना जाता है। आपके डॉक्टर बेहतर रूप से जानते हैं कि आपके लिए क्या अच्छा रहेगा और यह भी बताएंगे कि आपको दवा की कितनी खुराक लेनी चाहिए।

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एंटीहिस्टामाइन के प्रकार

हालांकि कई अलग-अलग प्रकार के एंटीहिस्टामाइन हैं, लेकिन उन्हें दो बेस्ट केटेगरी में बांटा गया है, जो आपको नीचे बताए गए हैं:

1. फर्स्ट जनरेशन एंटीहिस्टामाइन

ये एंटीहिस्टामाइन बहुत ज्यादा शक्तिशाली होते हैं। वे रक्त-मस्तिष्क की बाधा को पार करते हैं और आपको नींद का अनुभव कराते हैं। सेडेटिव एंटीहिस्टामाइन के कुछ उदाहरण हाइड्रोक्सिजिन, प्रोमेथाजीन और क्लोरफेनामाइन हैं।

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2. सेकंड जनरेशन एंटीहिस्टामाइन

ये एंटीहिस्टामाइन सेडेटिव की तुलना में नए हैं। वे मस्तिष्क की बाधा को पार नहीं करते हैं, जिससे नींद या सुस्ती होने की संभावना कम होती है। उनमें से कुछ सेट्रीजीन, फेक्सोफेनाडाइन और लोरैटैडाइन हैं।

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कौन से एंटीहिस्टामाइन सुरक्षित है?

यहाँ ब्रेस्टफीडिंग के दौरान उपयोग करने के लिए सबसे बेहतरीन टाइप के एंटीहिस्टामाइन हैं:

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1. आई ड्रॉप

आंखों की तकलीफ के लिए, स्तनपान के दौरान एंटाजोलिन युक्त आई ड्रॉप का उपयोग किया जा सकता है।

2. नेसल स्प्रे

यदि आप बहती नाक से या नाक में जमाव होने कारण परेशान हैं, तो आप इसके लिए एक नेसल स्प्रे का उपयोग कर सकती हैं, जिसमें एक डीकन्जेस्टेंट या एंटीहिस्टामाइन जैसे एजेलास्टाइन हो। चूंकि यह ऊपरी तौर पर इस्तेमाल होता है और सिस्टमैटिक अब्सॉर्प्शन और साइड इफेक्ट्स के बिना काम करता है, इसलिए इसे ब्रेस्टफीडिंग के दौरान सबसे अच्छा एंटीहिस्टामाइन माना जाता है।

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3. ओरल एंटीहिस्टामाइन

सभी एंटीहिस्टामाइन को ब्रेस्टफीडिंग के दौरान उपयोग करने के लिए सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसकी बहुत ही कम मात्रा ब्रेस्ट मिल्क में जाती है और कम समय के लिए लेने पर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराने पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि डॉक्टर, प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान दूसरी जनरेशन के एंटीहिस्टामाइन ज्यादा उपयोग करने की सलाह देते हैं क्योंकि ये ज्यादा सुरक्षित होते हैं। ब्रिटिश सोसाइटी फॉर एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी ब्रेस्टफीडिंग के दौरान एंटीहिस्टामाइन की आवश्यकता होने पर लोरैटैडाइन की न्यूनतम खुराक लेने की सलाह देती है।

नेचुरल एंटीहिस्टामाइन जिनका उपयोग ब्रेस्टफीडिंग के दौरान किया जा सकता है

एलर्जी को रोकने के लिए बेबी को स्तनपान कराते समय नेचुरल एंटीहिस्टामाइन पर भी विचार किया जा सकता है। यहाँ, आपको एंटीहिस्टामाइन के कुछ प्राकृतिक प्रकारों के बारे में दिया गया है, जिन पर आप ब्रेस्टफीडिंग कराते समय विचार कर सकती हैं:

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1. जिन्को

यह चाइनीज हर्ब ज्यादातर आयुर्वेद में उपयोग की जाती है और इसे एंटीहिस्टामाइन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह आमतौर पर टिनिटस, ब्रोंकाइटिस, ग्लूकोमा, ब्लड सर्कुलेशन से संबंधित समस्या और अस्थमा के उपचार में इसका प्रयोग किया जाता है।

2. स्टिंगिंग नेटल/बिच्छू बूटी

हालांकि इसका नाम सुनने अजीब लगता सकता है, लेकिन बिच्छू बूटी एक एंटीहिस्टामाइन है जो ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मांओं के उपयोग के लिए नेचुरल और सुरक्षित होता है। यह आपकी ओवरआल हेल्थ के लिए बहुत अच्छा होता है। यह बहुत उपयोगी होता है क्योंकि यह हिस्टामाइन की एक्टिविटी में बाधा डालता है, और सीजनल एलर्जी के लक्षणों को कम करता है, साथ ही हे फीवर, गठिया, एक्जिमा और जोड़ों के दर्द का इलाज भी करता है।

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3. ज्वेलवीड

पॉइजन आइवी के कारण होने वाले साइड इफेक्ट को कम करने के लिए यह एक प्राचीन अमेरिकी उपाय है, ज्वेलवीड में कॉर्टिकोस्टेरॉइड होता है, जो कांटेक्ट डर्मेटाइटिस, मधुमक्खी के डंक मारने और अन्य एलर्जी रिएक्शन का उपचार करने में मदद करता है।

4. फ्लेवोनोइड्स

क्वेरसेटिन के रूप में प्याज, ब्रोकोली, सेब, लहसुन, चाय, फलियां, अजमोद, वाइन आदि में फ्लेवोनोइड मौजूद होते हैं। क्वेरसेटिन एलर्जी और इससे होने वाली सूजन को कंट्रोल करने में मदद करता है।

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5. विटामिन सी

खट्टे फलों में विटामिन सी मौजूद होता है। जब यह बायो फ्लेवोनोइड्स के साथ मिलता है, तो पॉवरफुल कॉम्बिनेशन बनाता है जो शरीर में हिस्टामाइन एक्टिविटी में बाधा डालता है। यह इम्युनिटी को मजबूत करने के साथ अन्य स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। अपने आप में, विटामिन सी एक बहुत ही फायदेमंद न्यूट्रिएंट  है और शहद, शतावरी, अनानास, पपीता, जलकुंभी, आम, कायेन मिर्च और टमाटर में पाया जाता है।

6. ओमेगा-3 फैटी एसिड

यह सभी जानते हैं कि ओमेगा-3 फैटी एसिड स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है, लेकिन बहुत से लोग इस बात से अवगत नहीं होते हैं कि यह एंटीहिस्टामाइन के रूप में कितना अच्छा होता है। यह एलर्जी से लड़ने में मदद करता है और इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड कैनोला ऑयल, अखरोट, अलसी के तेल, घास खाने वाले जानवर के मीट और ठंडे पानी की मछली में मौजूद होता है।

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यदि आप एंटीहिस्टामाइन लेती हैं, तो ब्रेस्टफीडिंग के दौरान आपके स्तनों में दूध की आपूर्ति नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकती है, जिससे मिल्क सप्लाई में कमी आ सकती है। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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समर नक़वी

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