शिशु

क्या दालचीनी देना शिशुओं के लिए सुरक्षित है?

दालचीनी एक लोकप्रिय मसाला हैं, जिसका उपयोग कई व्यंजनों में किया जाता है और साथ ही इसे औषधि के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। यह वास्तव में दालचीनी के पेड़ की आंतरिक छाल होती है, जिसका उपयोग सैकड़ों वर्षों से मसाले और दवा के रूप में होता आ रहा है।

क्या शिशुओं को दालचीनी देना सुरक्षित है?

बहुत सारी माँएं जब बच्चे को ठोस पदार्थ देना शुरू करती हैं तो उसके भोजन में दालचीनी भी शामिल करती हैं, ऐसा कहा जाता है कि अगर दालचीनी को कम मात्रा में बच्चों को दिया जाए तो यह उनके लिए बिलकुल सुरक्षित है । ज्यादातर बच्चे दालचीनी को आसानी से पचा लेते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि इसे बच्चे के भोजन बहुत कम मात्रा में मिलाएं, क्योंकि यह बच्चे का पेट खराब कर सकती है और उन्हें दस्त या एलर्जी जैसे परेशानी पैदा हो सकती है।

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आप अपने शिशु के भोजन में दालचीनी कब शामिल कर सकती हैं?

वह माँएं, जो यह जानना चाहती हैं कि उनके बच्चे को खाने में दालचीनी कब दे सकते हैं तो आप 6 महीने के बाद इसे अपने बच्चे को दे सकती हैं ।

शिशुओं के लिए दालचीनी के स्वास्थ्य संबंधी लाभ

दालचीनी के स्वास्थ्य लाभ बहुत हैं; इस अद्भुत मसाले से होने वाले कुछ लाभों को यहाँ दिया गया है:

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  • दालचीनी में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो घावों को जल्दी ठीक करने के लिए अच्छे होते हैं और यह बच्चे को बीमार पड़ने से बचाते हैं।

  • यह एक बढ़िया एंटीऑक्सीडेंट हैं जो शरीर को किसी भी मौलिक क्षति से बचाता है। यह शिशुओं की प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाता है, और महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा भी करता है।

  • दालचीनी पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए अच्छी होती है और यह आपके बच्चे की पाचन क्षमता में सुधार करती है। यह पेट की परतों की रक्षा करती है, जो पाचन रस द्वारा इन परतों को होने वाले नुकसान से बचाती है।

  • दालचीनी में मौजूद यौगिक पदार्थ, अस्थमा का इलाज करने में मदद करते हैं, क्योंकि इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह श्वसन मार्ग में होने वाली रुकावटों को कम करता है और अच्छे श्वसन तंत्र को बढ़ावा देता है।

  • यह प्रतिरक्षा वर्धक के रूप में काम करता है, जो बच्चों को बीमारियों से बचाता है। दालचीनी के सेवन से सर्दी जैसे साधारण संक्रमणों और पेट के रोगाणुओं को दूर रखा जा सकता है।

  • दालचीनी का उपयोग करने से घावों को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें रोगाणुरोधी और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।

  • इससे हड्डी के टूट जाने पर इसे जल्दी ठीक करने के लिए जाना जाता है। इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण, रक्त प्रवाह को बढ़ाते है जिससे इसे जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।

  • दालचीनी दाँतों और मसूड़ों की रक्षा करती हैं। भुनी हुई दालचीनी से दाँतों की मालिश करने से दाँतों की सड़न रूक जाती हैं, और मसूड़ों के दर्द से राहत मिलती है साथ ही इससे खून आना भी बंद हो जाता है।

  • दालचीनी बच्चों की त्वचा के लिए भी अच्छी होती है और त्वचा को प्रदूषकों से बचाती है। एक्जिमा जैसी बीमारी से भी राहत देती है।

  • दालचीनी बच्चों की त्वचा के लिए भी अच्छी होती है एक्जिमा होने पर इसे चूर्ण के रूप में ऊपर से लगाया भी जा सकता है।

  • दालचीनी का नियमित रूप से सेवन करने से एलर्जी के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है क्योंकि यह एंटिजन्स से लड़कर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है।

क्या दालचीनी देना उन शिशुओं के लिए अच्छा है जिनके दाँत निकल रहे हैं?

कई मातापिता मसूड़े के दर्द को शांत करने के अपने बच्चे को दालचीनी की स्टिक चूसने को देते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों और स्वाद के कारण यह शिशुओं को होने वाले मसूड़ों के दर्द को कम करता है। जिन बच्चों को दालचीनी की स्टिक चबाने को दी जाती है, उनके दर्द को काफी जल्दी शांत होते देखा गया है। चिंता न करें क्योंकि यह डंडी आसानी से नहीं टूटती हैं। यदि वो छोटे टुकड़े तोड़ भी लेते हैं तो आमतौर पर वे हानिरहित होते हैं। लेकिन आपको यह सलाह दी जाती है कि आप इसे अपने बच्चे को देने से पहले अपने बालरोग विशेषज्ञ से बात करें।

शिशुओं को दालचीनी से एलर्जी

हालांकि यह असामान्य है, लेकिन कुछ बच्चों को दालचीनी से एलर्जी हो सकती है, क्योंकि उनकी अपरिपक्व प्रतिरक्षा प्रणाली इसे शरीर के लिए खतरा मानकर इसके प्रति प्रतिक्रिया दे सकती है। प्रतिरक्षा प्रणाली, एंटीबॉडी का निर्माण करती है और यह हिस्टामाइन को उत्पन्न करती है, जिसके कारण शरीर में सूजन और जलन पैदा होती है। यहाँ कुछ तरीके बताए गए हैं, जिनसे आप बच्चे में एलर्जी की पहचान कर सकती हैं:

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त्वचा पर लक्षण

एलर्जी उत्पन्न होते ही कुछ मिनटों के भीतर, बच्चे की त्वचा पर चकत्ते, लालिमा, और सूजन दिखाई देने लगेगी। इसमें त्वचा पर खुजली, जलन, छाले या झुनझुनी, आदि शामिल हैं।

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जुकाम संबंधी लक्षण

बहती नाक, सांस लेने में तकलीफ, लाल और खुजलीदार आँखें, सूजे हुए होंठ तथा जीभ, किसी खाद्यपदार्थ के प्रति एलर्जी के लक्षण हैं।

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जठरांत्र लक्षण

दालचीनी से होने वाली एलर्जी, जठरांत्र मार्ग में परेशानी पैदा कर सकती हैं जिससे दस्त, पेट में ऐंठन और उल्टी हो सकती है।

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ऐनाफलेक्सिस

एलर्जी के गंभीर मामलों में, बच्चे तीव्रग्राहिता यानि ऐनाफ्लेक्सिस में जा सकते हैं जो जानलेवा होता है। इसके कुछ लक्षणों में सूजे हुए होंठ और गला शामिल है, जो श्वसन मार्ग को अवरुद्ध करते हैं, तथा श्वास नलियों को कसते हैं, जिससे उल्टी और चक्कर आने लगते हैं, रक्तचाप कम होने लगता है और बच्चा होश खोने लगता है। ऐसी हालत में तुरंत अपने बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराएं।

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शिशुओं के लिए दालचीनी स्टोर करने के उपयोगी टिप्स

जब आप बच्चे को देने के लिए कोई भी मसाला चुनती हैं तो, उसे खरीदते वक्त बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि उसमें मिलावट का खतरा रहता है। इस बात का खयाल रखें कि आप जैविक रूप से उगाई गई दालचीनी को किसी अच्छी दुकान से ही खरीदें। संसाधित की गई दालचीनी में पोषक तत्व कम हो जाते हैं कि जैसे कैरोटेनॉइड और विटामिन ‘सी’ आदि, इसलिए प्राकृतिक और अपरिष्कृत दालचीनी का चयन करें। दालचीनी स्टिक और पाउडर दोनों रूप में उपलब्ध होती है। यदि आप इसकी स्टिक को किसी एयर टाइट डिब्बे में संग्रहित करती हैं, तो यह एक साल तक अच्छी रहेगी और इसका पाउडर लगभग 6 महीने तक अच्छा रहता है। दालचीनी के पाउडर में ज्यादा स्वाद और मीठी खुशबू पाई जाती है, हालांकि यह ज्यादा लंबे समय तक नहीं बनी रहती है। यदि आप अपने बच्चे के खाने को पोषक तत्वों के साथ बढ़िया स्वाद देना चाहती हैं, तो आप दालचीनी के चूर्ण को उनकी स्मूदी या प्यूरी में मिलाकर दे सकती हैं।

ध्यान रखने योग्य सावधानियां

यदि आप अपने बच्चे को पहली बार दालचीनी देने जा रही हैं, तो इसे देने से अपने बालरोग चिकित्सक के पास जा कर बच्चे का स्किन पैच टेस्ट करवा लें ताकि यह पता चल सके कि आपके बच्चे को कहीं किसी प्रकार की कोई एलर्जी तो नहीं है। यदि उसमें एलर्जी पायी जाती है, तो आपको उसके आहार में दालचीनी न शामिल करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, अगर बच्चे को पहले से ही खून पतला करने की दवा दी जा रही है, तो उसे दालचीनी देने से बचें। बाजार से खरीदे गए उत्पादों के लेबल की जांच करें जिनमें सामग्री के रूप में दालचीनी शामिल होती है। क्योंकि एलर्जी का इलाज करने के लिए दवाएं नहीं होती है, इसलिए आपको अपने बालरोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही अपने बच्चे को कुछ देना चाहिए । जैसा की हम सभी जानते हैं कि किसी भी हर्ब या मसालों का उपयोग एक सीमित मात्रा में करना चाहिए, ठीक इसी तरह बहुत दालचीनी का उपयोग भी एक सीमित मात्रा में ही करना चाहिए नहीं तो यह बच्चे में गंभीर पेट संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती है ।

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शिशु के आहार में दालचीनी को शामिल करने के तरीके

दालचीनी एक बहुमुखी मसाला है जिसका इस्तेमाल बहुत सारी चीजों के लिए किया जाता है। यह स्वाद देने के साथ बच्चे को पोषक तत्व भी प्रदान करती है। आप इसे बच्चे के आहार में कुछ इस प्रकार शामिल कर सकती हैं:

  • दालचीनी के साथ गाजर और सेब की प्यूरी
  • नारियल के दूध में मसले हुए केले के साथ दालचीनी
  • आड़ू, वनीला और दालचीनी के फ्लेवर के साथ चावल का हलवा
  • घर पर बनाए बादाम के दूध के साथ दालचीनी

जब तक कि आपके बच्चे को दालचीनी से कोई एलर्जी नहीं हो रही है, आप इसे कम मात्रा में सुरक्षित रूप से अपने बच्चे को दे सकती हैं ।

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समर नक़वी

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