गर्भावस्था

गर्भावस्था का चौथा महीना – लक्षण, शारीरिक परिवर्तन और आहार

माँ बनने का मतलब जीवन में ढेर सारी खुशियों का स्वागत करना है, मातृत्व की इस यात्रा में अनेकों उतार-चढ़ाव और बहुत सारे पड़ाव आते हैं। बढ़ते शिशु के अनुकूल शरीर में अधिक परिवर्तन आते हैं और इसके कई संकेत ध्यान देने योग्य हैं।

माता-पिता होने के नाते आपके लिए आगे की योजना बनाना बेहद आवश्यक है और आपको आने वाले शिशु की खुशहाली व स्वास्थ्य के लिए कुछ सावधानियों का भी खयाल रखना ज़रूरी है।

एक आदर्श माता-पिता बनने में कुछ निम्नलिखित सुझाव व संकेत आपकी मदद कर सकते हैं।

गर्भावस्था के चौथे महीने के सामान्य लक्षण

कहा जाता है कि गर्भावस्था की पहली तिमाही सबसे कठिन होती है और आपने मातृत्व की यात्रा के पहले तीन महीने पूरे कर लिए हैं।

गर्भावस्था के चौथे महीने के लक्षण, कुछ इस प्रकार हैं:

  • गर्भाशय में शिशु के बढ़ने के कारण मलाशय की नसों में दबाव पड़ता है और इस वजह से कुछ महिलाएं बवासीर व अत्यधिक पीड़ा का अनुभव करती हैं। यह समस्या हर गर्भवती महिला को नहीं होती है किंतु कुछ महिलाएं इसका अनुभव जरूर करती हैं ।
  • गर्भावस्था के हॉर्मोन में वृद्धि के कारण आपके मसूड़े अधिक नर्म और संवेदनशील हो जाते हैं जिस वजह से कई गर्भवती महिलाओं के मसूड़ों से खून आता है और अक्सर ब्रश करते समय यह खून देखा जा सकता है। आमतौर पर यह लक्षण प्रसव के बाद नहीं दिखता है।
  • मूत्राशय में अत्यधिक दबाव होने के कारण आपको बार-बार पेशाब जाना पड़ सकता है।
  • गर्भावस्था के चौथे महीने में बच्चे की वृद्धि के कारण कई महिलाओं को सांस लेने में समस्या हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शिशु को अधिक जगह देने के लिए गर्भाशय बढ़ता है और यह वृद्धि आस-पास के आवरण व अंगों पर अधिक दबाव डालती है ।
  • ज़्यादातर गर्भवती महिलाओं के लिए सीने में जलन की समस्या एक सामान्य लक्षण है। गर्भावस्था के दौरान पाचन शक्ति में कमी के कारण ही यह समस्या उत्पन्न होती है। इस समस्या से बचने के लिए अधिक से अधिक पानी पिएं और एक बार में बहुत सारा भोजन न खाएं । ऐसा करने से शरीर को भोजन पचाने में सरलता होती है ।
  • गर्भावस्था के दौरान आपकी त्वचा में कई बदलाव होते हैं। हॉर्मोन में वृद्धि के कारण कई महिलाओं की त्वचा में दाग हो सकते हैं। ऐसे समय पर त्वचा की देखभाल के लिए मॉइस्चराइज़र का उपयोग करें।
  • गर्भावस्था के दौरान निप्पल और उसके आस-पास का घेरा गहरे रंग का हो जाता है और स्तनों की नसें भी अधिक स्पष्ट दिखाई देती हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान 4 महीने का शिशु, माँ के शरीर में हो रहे अनेक परिवर्तनों का कारण बन सकता है, नकसीर उनमें से एक है। रक्तस्त्राव कभी भी एक अच्छा संकेत नहीं रहा है लेकिन गर्भावस्था के दौरान, कुछ महिलाओं को नाक में हल्के स्राव का अनुभव होता है। यह मुख्य रूप से गर्भावस्था को प्रबंधित करने के लिए शरीर द्वारा अधिक मात्रा में रक्त निर्माण किए जाने के कारण होता है। यदि यह समस्या अत्यधिक समय तक रहती है, तो कृपया डॉक्टर से परामर्श करें।

गर्भावस्था के चौथे महीने में क्या अपेक्षा करें?

तीसरा महीना पूर्ण होने के बाद आपकी भावनात्मक, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विशेषताओं में बहुत बदलाव आते है। गर्भावस्था के चौथे महीने में अत्यधिक देखभाल और चिकित्सीय जांच शामिल होती है। इस महीने में निम्नलिखित चीजें होने की संभावना है:

  • डॉक्टर शिशु के विकास को जानने के लिए एक अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं।
  • कुछ महिलाएं जांघो पर पतली, लाल रंग की रेखाओं को देख सकती हैं जिन्हें वैरिकाज़ नसें भी कहा जाता है, प्रसव के बाद यह रेखाएं पहले हल्की और फिर पूरी तरह गायब हो जाती हैं।
  • गर्भावस्था के इस महीने में आपका पेट एक ख़रबूज़े के आकार का होता है।
  • मॉर्निंग सिकनेस या मतली खत्म हो जाती है, लेकिन आप अभी भी थकान और चिड़चिड़ापन महसूस कर सकती हैं।
  • आपकी भूख में परिवर्तन आता है किन्तु आपके और शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार लेना महत्वपूर्ण है।

गर्भावस्था के चौथे महीने में शारीरिक परिवर्तन

गर्भावस्था के चौथे महीने में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पेट का आकार होता है, किन्तु बाहरी बदलाव के साथ-साथ शरीर के अंदर भी कुछ बदलाव होते हैं।

  • गर्भाशय बढ़ने पर आप अपनी पीठ, जांघों और पेट व कमर के क्षेत्र में दर्द महसूस कर सकती हैं, यह दर्द अगले 5 महीनों तक रहेगा।
  • गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोनल बदलावों के कारण महिलाओं के स्तन का आकार और पूर्णता बढ़ जाती है।
  • शरीर में हॉर्मोन का उच्च स्तर होने से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और यह कब्ज़ कुछ महिलाओं में कब्ज़ का कारण भी बनती है ।
  • गर्भाशय में शिशु की वृद्धि के कारण मूत्राशय व मूत्रमार्ग में भी दबाव बढ़ता है और इसी वजह से गर्भवती महिलाओं में मूत्र की आवृति और रिसाव होना एक आम बात है।
  • कुछ महिलाएं अपने हाथों में झुनझुनी या कार्पेल टनल सिंड्रोम का अनुभव करती हैं, यह मुख्यतः कलाई के आस-पास के ऊतकों में सूजन के कारण होता है और सर्जरी के बाद यह समस्या ठीक हो जाती है ।
  • शारीरिक रक्त की मात्रा में वृद्धि होने के कारण टांगों की नसें मोटी हो जाती हैं और इसे वैरिकॉज़ वेन्स (नसें) भी कहा जाता है, प्रसव के बाद यह समस्या भी ठीक हो जाती है।
  • गर्भावस्था के दौरान पाचन धीमा होने से सीने में जलन की समस्या भी हो सकती है।
  • शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होने से योनि सराव में बढ़ोतरी होती है जो शिशु को पोषित करता है।

गर्भावस्था के चौथे महीने में सामान्य चिंताएं

गर्भावस्था के दौरान आपकी और आपके साथी की अनेक चिंताएं होती हैं जो आपको परेशान कर सकती हैं, इस बारे में स्त्री रोग विशेषज्ञ से चर्चा अवश्य करें।

कुछ सामान्य चिंताएं इस प्रकार हैं:

  • गर्भावस्था के चौथे महीने में भूख बढ़ने के कारण वजन बढ़ता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि एक गर्भवती माँ अपने साथ-साथ शिशु को पोषित करती है और यह पोषण आवश्यक भी होता है। गर्भावस्था के चौथे महीने में आपकी पसंद में बदलाव आ सकता है, कुछ चीजों को आप बहुत पसंद करेंगी और कुछ चीजें होंगी जिनसे आपको चिड़चिड़ाहट भी हो सकती है।
  • इस दौरान सीने में जलन और कब्ज़ एक सामान्य समस्या है, आवश्यकता पड़ने पर इस बारे में डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
  • गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर टेटनस का टीका भी लगवाने की सलाह देते हैं – पहला टीका 3 महीने के भीतर और दूसरा टीका डिलीवरी से 1 महीने पहले लगाया जाता है।
  • गर्भावस्था के दौरान संभोग करना सुरक्षित है किन्तु यदि आपकी गर्भावस्था में कोई खतरा है या पहले कभी गर्भपात हो चुका है तो इस दौरान संभोग की सलाह नहीं दी जाती है, इस बारे में कोई भी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

शिशु का विकास

जैसे आप अपने शारीरिक परिवर्तनों को अनुभव करती हैं, वैसे ही आपके शरीर के अंदर भ्रूण विकसित हो रहा होता है और स्वयं के परिवर्तनों से गुजर रहा है।

कुछ मुख्य बातें :

  • भ्रूण अब एक इंसान की तरह दिखने लगता है, उसमें कान, नाक, आँख, बाल और मुखाकृति विकसित होने लगते है।
  • गर्भावस्था के चौथे महीने में बाल, भौंहें व पलकें भी विकसित होने लगते हैं।
  • 17वें हफ्ते में शिशु की लंबाई लगभग 13.1 सेमी. (5 इंच) हो जाती है।
  • शिशु के अपने अद्वितीय उंगलियों के निशान होते हैं।
  • इस हफ्ते में शिशु गर्भ में हलचल करने लगता है और लात भी मारना शुरू कर देता है।
  • शिशु की पूर्ण त्वचा पतले बालों से ढकी होती है, इसे गर्भरोम (लानूगो) भी कहते हैं।
  • कान, विकसित होने के कारण शिशु बाहर की आवाजें सुन सकता है।
  • गर्भावस्था के इस महीने तक भ्रूण की पूंछ पूर्णतः गायब हो जाती है।

गर्भावस्था के चौथे महीने में देखभाल

गर्भावस्था की इस बेहतरीन यात्रा के अंत में एक स्वस्थ शिशु के लिए तीसरी तिमाही में पहुँचते ही एक माँ को खुद की खास देखभाल करने की ज़रूरत है, चौथे महीने में आइए जानते हैं कि इस दौरान क्या करें और क्या न करें: ।

क्या करें?

  • माँ और गर्भ में पल रहे शिशु की वृद्धि के लिए अत्यधिक पोषण की आवश्यकता होती है, इसलिए यह सुनिश्चित करें कि आप आहार में महत्वपूर्ण विटामिन का सेवन कर रही हैं। यदि आपको पर्याप्त विटामिन नहीं मिल पा रहा है तो सप्लीमेंट के लिए डॉक्टर से सलाह लें।
  • गर्भावस्था के दिनों में अपनी दिनचर्या सामान्य रखें, नियमित व्यायाम करें, योग के लिए जाएं और जितना हो सके पैदल चलें क्योंकि ऐसा करने से प्रसव के दौरान गतिशीलता में मदद मिलती है।
  • भरपूर नींद लें। गर्भावस्था के इस यात्रा में आपके साथ एक और जीवन है और आपका शरीर दो लोगों के लिए कार्य कर रहा है इसलिए आप 7-8 घंटे की पूरी नींद लें व भरपूर आराम करें।
  • अधिक मात्रा में समुद्री भोजन का सेवन करें, मछली ओमेगा 3 व अन्य खनिजों से परिपूर्ण होती है इसलिए इसे अच्छी तरह से साफ करके पकाएं और साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि मछली ताज़ी हो।
  • आपके और आपके साथी के बीच अंतरंगता होना महत्वपूर्ण है इसलिए संभोग करें क्योंकि यह एक साहसिक कार्य के लिए तैयार हो रहा है, लेकिन पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
  • सुनिश्चित करें कि आप फ्लू का टीका लगवाएं, ताकि गर्भावस्था के दौरान आप किसी भी बीमारी के संपर्क में न आएं।
  • वज़न बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन सुनिश्चित करें कि आप स्वस्थ आहार सेवन कर रही हैं और समझदारी से अपना वज़न बढ़ाएं।
  • मसूड़ों में खून बहने व अन्य संबंधित समस्याओं से बचने के लिए नियमित रूप से जांच करवाएं और दंत-चिकित्सक से सलाह लें।

क्या न करें?

  • बहुत अधिक कैफीन न लें क्योंकि इससे शिशु के हृदय गति बढ़ सकती है।
  • यदि आपके पास पालतू जानवर है तो उसकी सफाई खुद न करें इससे आप सूक्ष्म कीटाणु व हानिकारक कीटाणुओं के संपर्क में आ सकती हैं।
  • आपके लिए अत्यधिक गर्माहट का वातावरण अनुकूल नहीं है इसलिए गर्म टब या सौना में न बैठें ।
  • हानिकारक कीटाणुओं व बीमारियों से बचने के लिए बाहर का मांसाहारी भोजन न खाएं।
  • शराब न पिएं क्योंकि इससे भ्रूण में भ्रूण मद्य सिंड्रोम (एफ.ए.एस.) विकसित हो सकता है।
  • धूम्रपान न करें क्योंकि ऐसा करने वाली माएं कम वज़न के शिशु को जन्म दे सकती हैं और उनके विकलांग होने का खतरा भी अधिक बढ़ सकता है।

गर्भावस्था के चौथे महीने में आहार

आयरन, कैल्शियम और फॉलिक एसिड गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर एक गर्भवती माँ अपने साथ-साथ शिशु को भी स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन करती है तो वज़न बढ़ने की चिंता बिलकुल भी नहीं होनी चाहिए। अपने आवश्यक अंगों को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी सप्लीमेंट जैसे विटामिन डी के बारे में स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। आहार को स्वच्छ रखने के लिए उसे घर पर ही पकाएं और इसमें अनाज, फल और सब्जियाँ शामिल हो सकती हैं। प्रोटीन से भरपूर भोजन, जैसे मछली और चिकन का सेवन भी किया जा सकता है। भ्रूण के सर्वोत्तम विकास को सुनिश्चित करने के लिए गर्भवती मांएं अपने आहार में उपरोक्त 3 चीजों को शामिल कर सकती हैं।

गर्भावस्था के चौथे महीने में जांच व परीक्षण

अपना और शिशु का अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए चौथे माह में आप डॉक्टर से अधिक बार मिलें, इस दौरान मुख्य परीक्षण और जांच कुछ इस प्रकार हैं:

  • शारीरिक जांच – स्त्री रोग विशेषज्ञ आपके गुप्तांग, जैसे योनि, स्तन व पेट की जांच करेंगी ।
  • गर्भावस्था स्कैन – अल्ट्रासाउंड भ्रूण के विकास में परिवर्तन देखने के लिए किया जाता है।
  • भ्रूण के दिल की धड़कन – डॉपलर अल्ट्रासाउंड का प्रयोग करके आपका डॉक्टर यह जांच करता है कि शिशु के दिल की धड़कन बहुत धीमी या बहुत तेज़ तो नहीं है।
  • एडिमा टेस्ट – डॉक्टर टांगों, टखनों और पैरों में सूजन की जांच करता है। असामान्य सूजन प्रीक्लेम्पसिया, गर्भकालीन मधुमेह या रक्त के थक्के का संकेत दे सकती हैं।

ध्यान देने योग्य संकेत

गर्भवती महिलाओं में कुछ असामान्य संकेत होते हैं जिनमें महिलाओं को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है, निम्नलिखित संकेत इस प्रकार हैं:

  • संभोग के बाद यदि आपको रक्त सराव होता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • यदि साधारण दिनों में भी आपको मासिक धर्म के समान रक्त सराव होता है तो गर्भपात या अस्थानिक गर्भावस्था (एक्टोपिक प्रेगनेंसी) का खतरा हो सकता है।
  • खासकर उल्टी या मतली की समस्या के दौरान आप कुछ खा नहीं पा रही हैं तो यह एक गंभीर समस्या हो सकती है।
  • इस माह तक आपका शिशु सक्रीय हो जाता है इसलिए यदि गर्भ में पल रहे शिशु की गतिविधि कम हो जाती है तो यह चिंता का विषय है ।
  • तीसरी तिमाही में बहुत जल्द संकुचन का प्रभाव पड़ने लगेगा।
  • यदि आपके गर्भ में थैली जल्द ही फट जाती है तो यह चिंता का कारण है।
  • यदि आपको लगातार पेट व सिर में दर्द हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।
  • यदि आपको लगातार फ्लू (बुखार, सर्दी या खाँसी) है जो जल्द ठीक नहीं हो रहा है तो यह चिंताजनक बात है।

होने वाले पिता के लिए सुझाव

जैसे-जैसे माँ के अनुभवों में परिवर्तन होता है, पिता को भी कई चीज़ों को समझना और उनका हल निकालना पड़ता है। पिता बनना भी समान रूप से एक महत्वपूर्ण यात्रा है और इस रास्ते में यह कुछ सलाह है, जो मददगार होंगी।

1. सही संतुलन

जब भी काम और घर, दोनों को संभालने में और नवजात शिशु के लिए तैयारी करना मुश्किल हो जाए, तो विराम ले लें। ऐसे में अभिभूत महसूस करना ठीक है, पर उस ऊर्जा को सही दिशा में ले जाना और शांत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। खुद को आराम देने से आप सही संतुलन पा सकेंगे।

2. परिवार पहले आता है

कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि काम पर क्या हो रहा है, परिवार की प्राथमिकता हमेशा सबसे पहले होती है। इन महत्वपूर्ण पलों को न खोएं, प्रयास करके अपने जीवन साथी और अपने बच्चे के साथ समय बिताएं। आप कभी अपने जीवन में अफ़सोस नहीं करेंगे कि जो आप कर सकते थे उसमें चूक गए।

3. आपसी बात-चीत

एक बच्चे के आने पर बहुत सी चीज़ें बदल जाती हैं। इसलिए जब आप पिता बनने वाले हो, तो अपनी पत्नी से खुल के अपने विचार व्यक्त करें, जिससे बच्चे के आने पर आप आपस मेल बिठा सकें। इन महत्वपूर्ण महीनों के दौरान अतिरिक्त धैर्यवान बनें और देखभाल करें और उत्साह बनाए रखने के लिए घूमने जाएं और साथ में समय बिताएं ।

4. अन्य पिताओं से बात करें

अन्य पिताओं के साथ ऑनलाइन या ऑफ़लाइन नेटवर्क बनाएं और अपने शिशु की बेहतर देखभाल करने के तरीकों को समझने के लिए बातचीत करें।अपने डर, चिंताओं और भावनाओं पर चर्चा अवश्य करें और अन्य पिताओं से सुझाव प्राप्त करें।

अब “गोद भराई” की तैयारी शुरू करने का समय है, कई महिलाएं कहती हैं कि पूरी गर्भावस्था की यात्रा में यह सबसे खुशी का समय होता है। चौथा महीना पूर्ण होने के बाद एक माँ जन्म देने के एक कदम और करीब आ जाती है।

सुरक्षा कटियार

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