गर्भावस्था

गर्भावस्था के दौरान क्वाड्रपल मार्कर टेस्ट

गर्भावस्था जीवन में कई बदलाव लेकर आता है। वैसे, जाहिर तौर पर आप जो बदलाव देखती हैं वो शरीर के बाहर से नजर आते हैं, लेकिन सच तो यह है कि गर्भधारण करने के बाद से ही आपके शरीर में बदलाव आना शुरू हो जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले परीक्षण और जाँच शिशु के स्वास्थ और विकास पर नियमित रूप से नजर रखने के लिए किए जाते हैं, लेकिन इसके साथ आपको कई अन्य बातों पर भी विचार करने की आवश्यकता है। क्वाड्रपल मार्कर टेस्ट जैसी प्रक्रियाएं वैकल्पिक है, लेकिन आपके डॉक्टर द्वारा बताए गए जोखिमों के आधार पर आप इस परीक्षण को कराने का फैसला कर सकती हैं। यहाँ परीक्षण से जुड़ी कुछ जानकारियां दी गई हैं, जो इस परीक्षण को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा।

क्वाड स्क्रीन टेस्ट क्या है और यह क्यों किया जाता है

क्वाड्रपल स्क्रीनिंग – जिसे क्वाड्रपल मार्कर टेस्ट, मल्टीपल मार्कर स्क्रीनिंग, एएफपी प्लस, एएफपी मैटरनल, एमएसएएफपी और 4-मार्कर स्क्रीन के रूप में भी जाना जाता है – यह एक रक्त परीक्षण है जो बच्चे को होने वाली कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम का आकलन करने में मदद करती है। यह टेस्ट क्रोमोसोम्स-संबंधी असामान्यताएं जैसे डाउन सिंड्रोम, ट्राइसॉमी 18 और तंत्रिका नली दोष (न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स) जैसे कि स्पाइना बीफिडा की जाँच करता है। क्वाड्रपल स्क्रीनिंग दूसरी तिमाही में की जाती है, यानि कि गर्भावस्था के 15 से 20 सप्ताह के बीच, आदर्श रूप से पहली तिमाही के परीक्षण के बाद। जब हर तिमाही में परीक्षण किए जाते हैं तो इसे अनिवार्य या क्रमबद्ध स्क्रीनिंग कहा जाता है। यदि पहली तिमाही में स्क्रीनिंग न कराई गई हो, तो दूसरी तिमाही में भी क्वाड्रपल स्क्रीनिंग कराई जा सकती है।

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स्क्रीनिंग टेस्ट का उद्देश्य बच्चे में आनुवंशिक रोगों और जन्म दोषों के बारे में पता लगाना है। परिणामों के आधार पर, डॉक्टर बच्चे की स्थिति का आकलन करने के लिए एम्नियोसेंटेसिस (एम्नियोटिक द्रव परीक्षण) करते हैं, जो शरीर को हल्का सा चीरकर किया जाने वाला डायग्नोस्टिक टेस्ट होता है। क्वाड्रपल स्क्रीनिंग टेस्ट केवल जन्म दोष वाले बच्चे के जोखिम को उजागर करता है और इससे माँ व बच्चे के लिए कोई स्वास्थ्य संबंधी खतरा नहीं होता है। दूसरी ओर, एम्नियोसेंटेसिस जैसे परीक्षण यह बता सकते हैं कि बच्चे में क्या जन्म दोष है, लेकिन साथ ही, यह परीक्षण करते समय गर्भपात का खतरा भी बना रहता है।

आपको क्वाड स्क्रीन टेस्ट के लिए किसके पास जाना चाहिए

आपको क्वाड्रपल स्क्रीन टेस्ट से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। माँ और बच्चे को होने वाले जोखिम को ध्यान में रखते हुए, डॉक्टर स्क्रीनिंग की सलाह देते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप किसी आनुवांशिक परामर्शदाता या मातृ-भ्रूण चिकित्सा करने वाली डॉक्टर से परामर्श कर सकती हैं।

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कई महिलाएं पहले स्क्रीनिंग टेस्ट कराती हैं और फिर शरीर में हल्का सा चीरा लगाकर किए जाने वाले परीक्षण का विकल्प चुनती हैं, जबकि अन्य गर्भवती महिलाएं जिनको क्रोमोसोम्स-संबंधी अधिक खतरा होता है, वे सीधे डायग्नोस्टिक टेस्ट का विकल्प चुनती हैं, जिसमें गर्भपात का थोड़ा खतरा होता है। भले ही, आपके आसपास के लोग उनके अनुभव बताए, लेकिन आप केवल एक अनुभवी डॉक्टर की राय और मार्गदर्शन पर अमल करें।

क्वाड्रपल स्क्रीनिंग टेस्ट में कौन से तत्व मापे जाते हैं?

क्वाड्रपल स्क्रीन टेस्ट में रक्त परीक्षण किया जाता है, जो चार तत्वों के स्तर को मापने के लिए रक्त के नमूने का विश्लेषण किया जाता है। जो इस प्रकार हैं:

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  • अल्फा-फेटोप्रोटीन (एएफपी): यह प्रोटीन बच्चे द्वारा निर्माण किया जाता है, जो बच्चे में स्पाइना बिफिडा और एनेस्थली के होने का संकेत देते हैं ।
  • ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी): ये हार्मोन गर्भनाल के जरिए उत्पन्न होता है, जो प्रारंभिक गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक होता है।
  • अन्कॉन्जुगेटेड (विसंयुग्मित) एस्ट्रियोल : गर्भनाल द्वारा उत्पन्न हार्मोन का स्तर कम होने से ये, डाउन सिंड्रोम या एडवर्ड सिंड्रोम (ट्राइसॉमी 18) की संभावना का संकेत देता है।
  • इनहिबिन ए: ये गर्भनाल द्वारा निर्मित एक हार्मोन है जो बच्चे में डाउन सिंड्रोम होने की संभावना को इंगित करता है।

गर्भावस्था में क्वाड्रपल स्क्रीनिंग टेस्ट कब किया जाता है

यह परीक्षण ज्यादातर दूसरी तिमाही में गर्भधारण के 15 से 2 वें सप्ताह के बीच किया जाता है, लेकिन ‘द अमेरिकन कांग्रेस ऑफ ऑबस्टेट्रीशियन और गायनेकोलॉजिस्ट‘ के अनुसार, सभी उम्र की महिलाओं को पहले और दूसरे तिमाही में स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक टेस्ट करा लेना चाहिए। यद्यपि सभी गर्भवती महिलाओं को परीक्षण की राय दी जाती है, लेकिन कुछ महिलाओं को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इनमें शामिल है:

  • जिन महिलाओं की उम्र 35 वर्ष से अधिक होती है
  • जिन महिलाओं का पारिवारिक इतिहास जन्म दोष का है
  • जिन महिलाओं का पिछला बच्चा जन्म दोष के साथ पैदा हुआ है
  • जिन महिलाओं को टाइप 1 डायबिटीज है

यह प्रक्रिया जटिल नहीं है और इसमें होने वाले दर्द का स्तर सामान्य रक्त परीक्षण के समान ही होता है। आपके डॉक्टर इस परीक्षण के लिए आपको डायग्नोस्टिक सेंटर में जाँच कराने की सलाह दे सकते हैं या यदि सुविधाएं अस्पताल के भीतर उपलब्ध हैं तो वहीं पर परीक्षण करने की सलाह दी जाती है। यदि आप खून देखकर डरती हैं तो रक्त परीक्षण से एकमात्र ये परेशानी हो सकती है कि आप इससे बेहोश हो सकती है और आपको चोट लगने का खतरा हो सकता है। आप सटीक परीक्षण परिणाम सुनिश्चित करने के लिए एक भरोसेमंद लैब का प्रयोग करें।

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क्वाड्रपल स्क्रीनिंग कैसे किया जाता है

इसमें माँ का रक्त लिया जाता है, जिसमें लगभग 5 से 10 मिनट लगते हैं। रक्त के नमूने को फिर आगे के परीक्षण के लिए एक प्रयोगशाला में भेजा जाता है और कुछ दिनों के बाद परिणाम आते हैं। क्वाड ब्लड टेस्ट रक्त में चार पदार्थों के स्तर का आकलन करता है, अर्थात्, एएफपी, एचसीजी, एस्ट्रियोल और इनहिबिन ए।हालांकि केवल स्क्रीनिंग टेस्ट द्वारा किए  गए रक्त परीक्षण के परिणामों को प्रमाण नहीं माना जाता है, इसके लिए कई अन्य कारकों की भी तुलना की जाती है और फिर बच्चे में पाई जाने वाली असामान्यता के खतरे का आकलन किया जाता है। इन कारकों में उम्र, नस्ल, रक्त परीक्षण के परिणाम के अलावा अन्य कई कारण शामिल हैं।

नोट: यह याद रखना चाहिए कि ये परीक्षण समस्या का निदान नहीं करते हैं और केवल संभावित जोखिम का संकेत देते हैं जो आगे के परीक्षण करने में मदद करता है।

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परिणाम की गणना कैसे की जाती है

रक्त परीक्षण के परिणामों को बच्चे की गर्भकालीन आयु और माँ की उम्र के साथ एक सूत्र में रखा जाता है। माँ की उम्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि माँ की आयु के साथ बच्चे में डाउन सिंड्रोम जैसे दोष होने का खतरा बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, आपकी 25 वर्ष की आयु में बच्चे को डाउन सिंड्रोम होने की संभावना 1200 में से 1 को होती है, लेकिन 40 वर्ष की आयु तक ये जोखिम लगभग 100 में से 1 तक बढ़ जाते हैं।

वो लोगों के लिए जो क्वाड रक्त परीक्षण का विकल्प चुनते हैं, उनके परिणाम अधिक व्यापक होंगे, क्योंकि दोनों तिमाही के परीक्षण परिणाम संयुक्त होंगे।

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परीक्षण के परिणाम की व्याख्या कैसे की जाती है

चिकित्सीय परीक्षणों का मूल्यांकन करने और गर्भावस्था के दौरान  क्वाड्रपल मार्कर टेस्ट के परिणामों की व्याख्या करने के लिए आपको किसी अच्छे डॉक्टर या आनुवांशिक परामर्शदाता से परामर्श करने की आवश्यकता है। आपकी रिपोर्ट में डाउन सिंड्रोम, ट्राइसॉमी 18 और तंत्रिका नाल दोष (न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स) आदि जोखिम मूल्यांकन किया जाएगा। जो आपको नीचे बताया गया है:

डाउन सिंड्रोम की संभावना 30 में से 1 या 1000 में से 1 तक होती है। 

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30 में से 1 का अर्थ यह है कि इन परिणामों वाली 30 महिलाओं में से किसी एक के बच्चे को डाउन सिंड्रोम होता है। 1000 में से 1 का मतलब है कि इन परिणामों वाली हजार महिलाओं में से किसी एक के बच्चे को डाउन सिंड्रोम होता है। इस प्रकार, संख्या जितनी ज्यादा होगी, उतनी ही कम बच्चों में डाउन सिंड्रोम होने का खतरा होगा।

यह भी याद रखना चाहिए कि परीक्षण केवल जोखिम को दर्शाता है, न कि वास्तविक दोष को। परिणामों में उच्च संख्या का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को कोई दोष नहीं है; दूसरी ओर, कम अनुपात का मतलब यह भी नहीं है कि बच्चा दोष के साथ पैदा होगा। ये परीक्षण केवल जोखिम के संकेत देते हैं।

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1. यदि परिणाम सामान्य है तो इसका क्या मतलब है?

गर्भावस्था के दौरान क्वाड्रपल मार्कर टेस्ट के सामान्य परीक्षण परिणामों से संकेत मिलता है कि बच्चा स्वस्थ है और गर्भावस्था में कम जटिलताएं हैं। हालांकि, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ये प्रसव पूर्व परीक्षण जटिलताओं और बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करेंगे । सभी स्क्रीनिंग परीक्षणों के लगभग 98% परिणाम सामान्य होते हैं। यह परीक्षण आपको गर्भावस्था के दौरान ये जानने में मदद करते हैं कि शिशु सुरक्षित है।

2. यदि परिणाम असामान्य है तो इसका क्या मतलब है

असामान्य परिणाम प्राप्त होने पर दुखी न हो, क्योंकि इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे को जन्मदोष है। बच्चे की गलत गर्भकालीन उम्र के वजह से भी परिणाम असामान्य हो सकते हैं। इस मामले में, अपेक्षा से छोटा या बड़ा होने वाला बच्चा असामान्य परिणाम देगा। असामान्य परिणाम प्राप्त होने पर अगला कदम बच्चे की उम्र की जाँच करने के लिए अल्ट्रासाउंड करवाना है। यदि टेस्ट में कोई परेशानी वाली बात सामने आ जाए तो अपने डॉक्टर से सलाह मशवरा करके आगे के टेस्ट की जानकारी लें । डाउन सिंड्रोम के लिए की जाने वाली सकारात्मक क्वाड स्क्रीन टेस्ट के जोखिम को खत्म करने के लिए कुछ और परीक्षण किए जा सकते हैं एम्नियोसेंटेसिस उनमे से एक है, जिसमे शिशु के आसपास के एमनियोटिक द्रव में एएफपी स्तर की जाँच की जाती है। बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए बेहतर होगा कि आप किसी पेशेवर स्वास्थ्य सेवा से सवाल पूछे, ताकि उनकी सलाह से आप सही कदम उठा सके। यदि आपके मन में थोड़ा भी संदेह है, तो अपने डॉक्टर से बात कर के उसे तुरंत स्पष्ट करें।

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क्वाड टेस्ट से संबद्ध जोखिम

खून निकालने के दौरान होने वाली असुविधा के अलावा, क्वाड टेस्ट में कोई अन्य जोखिम शामिल नहीं है। डॉक्टर सुई के माध्यम से रक्त का नमूना लेंगे और इसे विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला में भेजेंगे। इस परीक्षण में ऐसा कोई जोखिम नहीं है जो आपको या बच्चे को नुकसान पहुँचा सकता है।

क्वाड स्क्रीन टेस्ट कितना सही परिणाम देते हैं?

गर्भावस्था के दौरान  क्वाड्रपल मार्कर टेस्ट केवल जोखिम के स्तर को इंगित करता है। इसके अलावा, यह डाउन सिंड्रोम, ट्राइसोमी 18  और तंत्रिका दोष के सभी मामलों को नहीं इंगित करता है, जबकि बच्चा उनसे प्रभावित हो सकता है। शिशु में दोष होने पर भी जोखिम जाहिर न होना एक गलत नकारात्मक परिणाम कहलाता है। जबकि, शिशु के प्रभावित न होने पर उच्च जोखिम का संकेत देने वाले परिणाम गलत सकारात्मक रिपोर्ट कहलाता है। हालांकि, इस विषय पर डॉक्टर से परामर्श करना अनिवार्य है।

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आमतौर पर ट्राइसोमी 18 के 70 प्रतिशत मामलों में और डाउन सिंड्रोम के 81 प्रतिशत मामलों में स्क्रीनिंग द्वारा इसका पता लगाया जाता है। इसका मतलब यह है कि जब परीक्षण किया जाता है, तो 81 प्रतिशत बच्चे को डाउंस सिंड्रोम होने के अनुमान पर सटीक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इसके अलावा, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि स्क्रीनिंग में गलत सकारात्मक रिपोर्ट आने का दर 5 प्रतिशत है। इसका मतलब यह है, कि जब कोई समस्या सामने नहीं आती तो यह खुद एक समस्या है। 

परीक्षण के परिणामों के आधार पर डॉक्टर आगे के मूल्यांकन के लिए अन्य परीक्षण की सलाह से सकते हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हो सकते हैं:

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  • शरीर में बिना किसी चीरे के अल्ट्रासाउंड करना
  • एम्नियोसेंटेसिस
  • सीवीएस परीक्षण – कोरियोनिक विलस सैम्पलिंग
  • अन्य व्यापक डीएनए परीक्षण

ऐसे कई कारक हैं जो क्वाड टेस्ट परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं जैसे कि एक से ज्यादा गर्भधारणा, विट्रो निषेचन का प्रभाव, मधुमेह और रासायनिक हस्तक्षेप इस प्रकार, एक आनुवंशिक परामर्शदाता से रिपोर्ट को स्पष्ट रूप से समझने और अगले कदम की तैयारी के लिए परामर्श करना आपका एक समझदारी भरा फैसला होगा।

क्या होगा अगर स्क्रीन परिणाम बताता है कि बच्चा जोखिम में है?

आनुवंशिक परामर्शदाता या मातृ-भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञ परिणाम को समझने और आगे के परीक्षणों पर निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं। यदि आप अल्ट्रासाउंड करने का निर्णय लेती हैं, तो ये आपको बच्चे की गर्भकालीन आयु, एक से ज्यादा गर्भधारणा और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक विस्तृत रिपोर्ट देगा। किसी भी विसंगति के मामले में, स्क्रीनिंग को फिर से किया जा सकता है।

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यदि बच्चे में स्पाइना बिफिडा पाया जाता है और माँ गर्भावस्था को जारी रखने का निर्णय लेती है, तो मेडिकल टीम बच्चे की स्थिति की निगरानी करेगी और उसके जन्म के बाद सर्जरी करने के लिए तैयार होगी। डाउन सिंड्रोम या ट्राइसोमी 18 के उच्च जोखिम वाले मामलों में, अल्ट्रासाउंड के जरिए कई मार्कर की जाँच की जाती है जो बच्चे की स्थिति के बारे में अधिक जानकारी देता है। यदि एक ऐसा मार्कर मिल जाता है, तो बच्चे में आनुवंशिक असामान्यता की संभावना अधिक होती है।

प्रसवपूर्व परीक्षण के आधार पर कोई भी कार्यवाही करने से पहले, सुनिश्चित करें कि एक अनुभवी चिकित्सक या आनुवंशिक परामर्शदाता ने परिणामों का अच्छे से मूल्यांकन किया हो। बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर आपको चिंता हो सकती है, लेकिन होने वाली माँ के लिए बहुत जरूरी है कि वो खुद को किसी भी चिंता से मुक्त रखें, अन्यथा उनका चिंता करना बच्चे के स्वास्थ्य को और प्रभावित कर सकता है। स्वस्थ गर्भावस्था को सुनिश्चित करने के लिए इन परिणामों की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करना और इसके बाद तत्काल कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण है।

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यह भी पढ़ें:

गर्भावस्था के दौरान गैर-तनाव परीक्षण (नॉन-स्ट्रेस टेस्ट)
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समर नक़वी

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