गर्भावस्था

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग होना – कारण लक्षण और उपचार

गर्भावस्था के किसी भी चरण में आपको ब्लीडिंग हो सकती है। पहली तिमाही में अक्सर स्पॉटिंग या बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है। योनि से रक्तस्राव (ब्लीडिंग) लगभग 30% तक सभी प्रेगनेंसी के शरुआत में होती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में इससे आपको कोई परेशानी नहीं होती है। हालांकि, तीसरे तिमाही के दौरान योनि से रक्तस्राव का अनुभव करना अलग हो सकता है। इस लेख के जरिए आपको आपको ब्लीडिंग के पीछे का कारण जानने में मदद मिलेगी, जिससे आप इसका बेहतर रूप से ट्रीटमेंट और बचाव कर सकती हैं।

क्या तीसरी तिमाही में योनि से रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होना कॉमन है?

यदि आप तीसरी तिमाही में योनि से रक्तस्राव का अनुभव करती हैं, फिर चाहे वो कम हो या ज्यादा आपको तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाना चाहिए। तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग से जुड़े जोखिम माँ और बच्चे के लिए दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। यह लगभग 10% सभी गर्भवती महिलाओं को प्रभावित करता है जो ज्यादातर यह किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है।

स्पॉटिंग और ब्लीडिंग के बीच क्या अंतर है?

यदि आपको बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है, तो आपको पैंटी लाइनर या पैड का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ सकती है। स्पॉटिंग के दौरान रक्त की कुछ बूंदों का रिसाव होता है, जैसे कि आपके पीरियड्स के शुरू होने या खत्म होने के समय पर होता है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाली ब्लीडिंग होने का कारण

गर्भावस्था के आखरी चरण में ब्लीडिंग होना के पीछे का कारण प्लेसेंटल इशू होता है, लेकिन यह योनि या सर्विक्स की समस्याओं के कारण भी हो सकता है। जिनमें से कुछ कारण इस प्रकार हैं:

1. प्लेसेंटा प्रिविया

प्लेसेंटा प्रिविया वो स्थिति है, जिसमें प्लेसेंटा सर्विक्स के ऊपर आ जाती है, जो गर्भाशय के नीचे स्थित होती है। इसके कारण कभी-कभी डिलीवरी के समय में बाधा आती है, क्योंकि इससे सर्वाइकल ब्लॉकेज हो जाता है, जिससे बच्चे को बाहर आने से रोकता है। गर्भावस्था के आखरी हफ्तों के दौरान, जब आपकी सर्वाइकल वॉल बच्चे के बाहर आने के लिए खुद को तैयार करती है, तो इससे प्लेसेंटा टूट सकती जिसके कारण ब्लीडिंग होने लगती है।

2. वासा प्रिविया

इस कंडीशन में, फीटस के ब्लड वेसल्स सर्वाइकल टिश्यू के अंदर मौजूद होते हैं। जब सर्वाइकल डिलीवरी के लिए फैलने में सक्षम नहीं होती है, तो वेसल्स फट जाती हैं और इसके कारण ब्लीडिंग होने लगती है।

3. प्लेसेंटा रप्चर

कुछ मामलों में, प्लेसेंटा यूटरिन वॉल से अलग हो जाता है, जिसे प्लेसेंटल एब्स्ट्रक्शन के रूप में जाना जाता है। ऐसा सिर्फ लगभग 2% प्रेगनेंसी में होता है लेकिन इसके कारण यह समय से पहले लेबर को प्रेरित कर सकता है।

4. योनि में इन्फेक्शन

आपके हार्मोन में होने उतार-चढ़ाव के कारण आपको से थ्रश, दाद, वेजिनोसिस और क्लैमाइडिया जैसे इन्फेक्शन के होने का खतरा बढ़ जाता है। इन इन्फेक्शन के कारण योनि में सूजन हो सकती है, जिससे आपको ब्लीडिंग हो सकता है।

5. सर्वाइकल एक्ट्रोपियन

इस कंडीशन में, ग्लैंडुलर सेल्स जो सर्वाइकल कैनल के अंदर मौजूद होते है वो लाल पड़ जाते हैं और सर्विक्स के बाहर सूजन हो जाती है। बाहर मौजूद यह सेल्स ज्यादा म्यूकस बनाने लगते हैं और ब्लीडिंग होने लगती है, खासकर शारीरिक संबंध बनाने के बाद या हैवी एक्सरसाइज करने के बाद। इसकी वजह से आपको प्रेगनेंसी के आखरी के दिनों में ब्लीडिंग या दर्द हो सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने के सबसे कॉमन कारणों में से एक है सर्वाइकल एक्ट्रोपियन। हालांकि, इससे आपको लंबे समय तक के लिए को नुकसान नहीं होता है।

6. गर्भाशय का फटना

कुछ दुर्लभ मामलों में, फीटस का दबाव पेट पर ज्यादा पड़ने की वजह गर्भाशय फट सकता है। इस तरह की कंडीशन आप और आपके बच्चे दोनों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है। यदि आपकी पहले कोई सर्जरी हुई हो या सी सेक्शन हुआ हो तो ऐसे केस में इस तरह घटना होने का ज्यादा खतरा होता है।

7. समय से पहले लेबर

गर्भावस्था के 9वें महीने के दौरान ब्लीडिंग होना, समय से पहले होने वाले लेबर का एक संकेत हो सकता है, जिसमें सर्विक्स फैलने या फटने के कारण ब्लीडिंग होने लगती है। समय से पहले होने वाले लेबर के मामले में, आप ब्लड में वजाइनल म्यूकस को नोटिस कर सकती हैं, जिसका मतलब है कि आपका बच्चा जन्म के लिए तैयार है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाली ब्लीडिंग के लक्षण

गर्भावस्था में ब्लीडिंग होने के आपको कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं जिसका आपको फौरन इलाज कराना चाहिए। जिनमें से कुछ लक्षण आपको नीचे बताए गए हैं:

  • बहुत ज्यादा पेट होना, पेल्विक या पीठ में दर्द
  • योनि से फ्लेशी खून आना
  • चक्कर आना और थकान महसूस होना
  • तेज बुखार होना
  • बहुत ज्यादा खून बहना

गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग का निदान कैसे करें

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग के कारणों का निदान करने के लिए दो मेथड हैं जो आपको नीचे बताए गए हैं।

1. मेडिकल हिस्ट्री की जाँच करना

सबसे पहले, आपका डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री की जाँच करेंगे कि कहीं आपको कोई इन्फेक्शन तो नहीं है या हीमोफिलिया जैसी कोई जन्मजात समस्या तो नहीं है, डॉक्टर यह भी जाँच करेंगी कि आप तंबाकू का सेवन करती हैं या नहीं। आप जिन लक्षणों का अनुभव कर रही हैं, वो कितने गंभीर हैं इस विषय पर भी आपके डॉक्टर आपसे पूछ सकते हैं। आपको उन्हें अपनी पहली प्रेगनेंसी, मिसकैरज, प्लेसेंटा  प्रिविया, प्लेसेंटा उसे अपनी पिछली गर्भावस्था, गर्भपात, प्लेसेंटा प्रीविया, प्लेसेंटा रप्चर, अबॉर्शन या सी-सेक्शन के बारे में ठीक से जानकारी दें।

2. शारीरिक जाँच करना

सबसे पहले, डॉक्टर आपका ब्लड प्रेशर की जाँच करेगा। आपके सर्विक्स और योनि की जाँच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके की चोट तो नहीं है, साथ ही पैल्विक क्रैम्प पेन की जाँच की जाएगी। किसी भी इन्फेक्शन की जाँच करने के लिए आपके वजाइनल ट्रैक्ट का माइक्रोबायोलॉजिकल एग्जामिनेशन किया जाएगा। आपकी गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में, प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या जैसे प्लेसेंटा प्रिविया की जाँच करने के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड स्कैन किया जाएगा। अल्ट्रासाउंड के मदद से यह भी पता लगाया जा सकता है कि क्या फीटस गर्भाशय के अलावा कहीं और तो नहीं बढ़ रहा है, जैसे कि एक फैलोपियन ट्यूब। यह एक अस्थानिक गर्भावस्था (एक्टोपिक प्रेगनेंसी) के रूप में जाना जाता है और यह फैलोपियन ट्यूब के फटने पर ब्लीडिंग का कारण बन सकता है। आखिर में आपके डॉक्टर अँगुली से जाँच करेंगे की आपका सर्विक्स कितना फैला है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाली ब्लीडिंग का इलाज

गर्भावस्था के आखरी चरण में ब्लीडिंग होने के पीछे सेप्सिस, एनीमिया और फीटल स्ट्रेस भी हो सकता है जिस पर आपको हर नजर रखने की जरूरत होती है। बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने पर या लगातार ब्लीडिंग होने पर आपको ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त संचार) की भी आवश्यकता हो सकती है। हालांकि हो सकता है कि आप एक वजाइनल बर्थ का विकल्प चुनना पसंद करें, लेकिन आपके डॉक्टर सीजेरियन सर्जरी के लिए कहें, क्योंकि यूटरिन रप्चर से होने वाली ब्लीडिंग को कम किया जा सके। यदि आपने अपनी गर्भावस्था के 36वें सप्ताह को पूरा नहीं किया है, तो आपको प्रीमैच्योर लेबर से गुजरना पड़ सकता है। ऐसे मामले में, आपका डॉक्टर आपके बच्चे के फेफड़ों के विकास को तेज करने के लिए स्टेरॉयडल मेडिकेशन प्रेसक्राइब्ड कर सकते हैं, ताकि जन्म के बाद बाहर बच्चा साँस ले सके। कुछ कंडीशन में तो गर्भाशय को हिस्टेरेक्टॉमी के जरिए से निकालना पड़ सकता है, हालांकि कुछ मामलों में डैमेज यूट्रेस को सर्जरी में मदद से ठीक किया जा सकता है।

उपचार के बाद भी ब्लीडिंग पर ध्यान दें

आपके डॉक्टर डिलीवरी तक आपको रेस्ट करने के लिए कह सकते हैं। यदि ब्लीडिंग बंद नहीं होता है, तो टैम्पोन का इस्तेमाल करना या यौन संबंध बनाने के लिए आपको मना किया जाता है। यदि इलाज के कुछ दिन बाद भी आपको ब्लीडिंग होती है या पेट में दर्द का का अनुभव होता है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

खुद की देखभाल करने के टिप्स

प्रेगनेंसी की शुरुआत में ब्लीडिंग होने पर आपको ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, बस आप हैवी एक्सरसाइज करना बंद कर दें और हाइड्रेटेड रहे। हालांकि, यदि आपको तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग होती है, तो घर पर खुद की देखभाल करने से या होम रेमेडी अपनाने से आपको कोई मदद नहीं मिलेगी। इसके कारण  आपको सीरियस कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं, इसलिए आपको यह सुझाव दिया जाता है कि ऐसे हालात में आपको बिना देर किए अपने डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

आप कैसे बचाव कर सकती हैं

गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग की समस्या को आप नीचे बताई गई टिप्स की मदद से रोक सकती हैं-

  • तंबाकू का सेवन बिलकुल न करें, क्योंकि इससे प्लेसेंटा प्रीविया का खतरा बढ़ सकता है।
  • ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए सॉल्टी फूड्स का सेवन न करें, इससे प्लेसेंटा को नुकसान पहुँच सकता है ।
  • फिजिकल ट्रॉमा से बचने के लिए अपनी अच्छी तरह से देखभाल करें, क्योंकि इससे यूटरिन वॉल फट सकती है।

गर्भावस्था के किसी भी तिमाही में ब्लीडिंग होने से आपको कॉम्प्लिकेशन हो सकती है, इसलिए यदि आप योनि से ब्लीडिंग या स्पॉटिंग को नोटिस करती हैं, तो अपने डॉक्टर से तुरंत जा कर मिले। इसके अलावा, तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग रोकने के लिए आपको तुरंत मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए। अच्छी तरह से देखभाल और सही समय पर कदम उठाने से आप किसी भी आने वाली बड़ी समस्या से खुद को और अपने बच्चे को बचा सकती हैं, इसलिए इस समय पर आपको बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है।

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समर नक़वी

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