गर्भवती होना आसान नहीं होता और यदि कोई महिला गर्भावस्था के दौरान मिर्गी की बीमारी से पीड़ित हो तो उसके लिए गर्भावस्था के नौ महीने और भी कठिन हो सकते हैं। मिर्गी जिसे एपिलेप्सी भी कहते हैं, तंत्रिका तंत्र का एक विकार है और इसे सीजर या दौरे का विकार भी कहा जाता है। मिर्गी के अधिकांश दौरे अपने आप में खतरनाक नहीं होते हैं। हालांकि, मिर्गी का दौरा कब आता है, वह खतरनाक हो सकता है क्योंकि रोगी खुद को या अपने आस-पास के लोगों को घायल कर सकता है। दूसरी ओर, गर्भावस्था के दौरान मिर्गी का दौरा पड़ने से गर्भ में पल रहे बच्चे की हृदय गति धीमी होने या गर्भपात जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान मिर्गी और यह गर्भवती महिला व उसके बच्चे के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती है, इसके बारे में अधिक जानने के लिए आगे पढ़ें।

मिर्गी क्या होती है?

मिर्गी को तंत्रिका तंत्र का एक विकार कहा जा सकता है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ते हैं। ये दौरे या बहुत सौम्य हो सकते हैं और जिसमें इनके कोई लक्षण नहीं दिखते या फिर ये दौरे बहुत लंबे समय तक रह सकते हैं जिससे मांसपेशियों में कंपन हो सकता है।

क्या मिर्गी के दौरे गर्भधारण को और मुश्किल कर देते हैं?

पहले के समय में, मिर्गी से पीड़ित महिलाओं को बच्चे न पैदा करने के लिए कहा जाता था। हालांकि, पिछले कुछ समय में बेहतर देखभाल के चलते इसमें बदलाव आया है। मिर्गी से पीड़ित लगभग 90% महिलाओं में जटिलताएं कम होती हैं और वे स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं।

मिर्गी और गर्भावस्था के कारण निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस): मिर्गी से पीड़ित महिलाओं में पीसीओएस होने की संभावना अधिक होती है, जो बांझपन का एक प्रमुख कारण है।
  • एनोवुलेटरी चक्र: मिर्गी से पीड़ित महिलाओं में ऐसा मासिक धर्म चक्र यानी पीरियड होने की अधिक संभावना होती है, जिसमें अंडे नहीं बनते, इससे गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
  • दौरे-रोधी दवाएं: मिर्गी के उपचार के लिए ली जाने वाली दवाओं से महिलाओं के ओवरी में हार्मोन के स्तर में बदलाव हो सकते हैं जिससे बांझपन हो सकता है।
  • अनियमित पीरियड्स: अगर महिला के पीरियड्स अनियमित हैं तो इससे उसके गर्भधारण की संभावना प्रभावित होती है।
  • हार्मोन सामान्य न होना: मिर्गी से पीड़ित महिलाओं को हार्मोन संबंधी असामान्यताएं हो सकती हैं, जिससे गर्भावस्था में मुश्किलें आ सकती हैं।

इन जटिलताओं और जोखिमों के बावजूद, मिर्गी से पीड़ित अधिकांश महिलाएं सफलतापूर्वक बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

गर्भावस्था में मिर्गी के लक्षण

मिर्गी के लक्षण महिला को होने वाली मिर्गी के प्रकार पर निर्भर करते हैं। मिर्गी के ये लक्षण गर्भावस्था के दौरान महसूस होने वाले लक्षणों के समान ही होते हैं। कुछ सामान्य लक्षण नीचे दिए गए हैं।

  • यदि गर्भवती महिला आंशिक मिर्गी से पीड़ित है, तो दौरे के दौरान उसे चक्कर आ सकते हैं और वह बेहोश हो सकती है।
  • दिमाग के सुन्न होने के कारण महिला 5 से 20 सेकंड तक एकटक देखती रह सकती है, जो गंभीर मामले में 5 मिनट तक रह सकती है।
  • कुछ महिलाओं की याददाश्त जा सकती है।
  • गर्भावस्था में बार-बार मूड बदलना भी मिर्गी का एक लक्षण है।
  • गर्भवती महिला को मतली, उल्टी, एनीमिया और योनि से ब्लीडिंग का अनुभव हो सकता है।
  • यदि माँ बनाने वाली महिला को दौरे ज्यादा आने लगे तो इससे उसके शरीर में परिवर्तन हो सकता है।
  • दौरे ज्यादा आने से महिला में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन कम हो सकता है।
  • हालांकि अधिकांश महिलाओं को एक जैसे ही मिर्गी के दौरे आते हैं, लेकिन कुछ मामलों में उनमें बदलाव भी हो सकता है। ऐसा तब जरूर होता है जब दौरों को ठीक से देखा नहीं जाता।

क्या गर्भावस्था के दौरान मिर्गी में बदलाव होता है?

हालांकि ऐसा माना जाता है कि ज्यादातर गर्भावस्था के मामलों में मिर्गी में कोई बदलाव नहीं होता है, लेकिन कुछ मामलों में दौरों की संख्या ज्यादा हो सकती है। ऐसा दौरों को नियंत्रित करने के लिए दी जाने वाली दवा के कारण होता है। इन्हें एंटी कन्वल्सेन्ट्स के रूप में जाना जाता है। गर्भावस्था के दौरान ये दवाएं अलग तरह से काम करने लगती हैं। इसलिए, डॉक्टर को आपकी गर्भावस्था के दौरान दवा बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

निदान

मिर्गी और दौरों का निदान न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा किया जाना चाहिए। मिर्गी की रोगी महिलाओं को विभिन्न प्रकार की मिर्गी के बारे में जानकारी रखनी चाहिए ताकि वे है ब्लड प्रेशर और समय से पहले प्रसव जैसे जोखिमों से अवगत रहें।

यदि किसी गर्भवती महिला को गर्भावस्था के आखिरी दिनों में दौरा पड़ता है, तो इसके लिए पूरी तरह से मिर्गी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट के पूरी तरह निदान किए जाने तक एक्लेम्पसिया के खतरे को ध्यान में रखते हुए उसका तत्काल इलाज किया जाना चाहिए।

निदान करते समय अन्य समस्याओं जैसे हृदय, मेटाबॉलिज्म, इंट्राक्रेनियल और न्यूरोसाइकिएट्रिक समस्याओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

जटिलताएं

गर्भावस्था के दौरान मिर्गी और इसकी दवाएं मां और बच्चे दोनों को प्रभावित करती हैं। जहां अधिकांश महिलाओं की गर्भावस्था सामान्य होती है, वहीं गर्भावस्था के दौरान मिर्गी से जुड़े कुछ जोखिम भी हो सकते हैं। इन जोखिमों में शामिल हैं:

  • उच्च रक्तचाप

इससे प्लेसेंटा में खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है जिससे बच्चे का प्रीमैच्योर यानी समय से पहले जन्म हो सकता है।

  • आघात

कुछ मामलों में, मिर्गी के दौरे से होश जाने और हिंसक गतिविधि से जुड़े होते हैं जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे को आघात या सदमा पहुंचकर समय से पहले प्रसव हो सकता है।

  • न्यूरल ट्यूब दोष

इनमें मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र से जुड़े जन्म दोष शामिल हैं, जैसे स्पाइना बिफिडा।

  • बहुत अधिक ब्लीडिंग

विटामिन के की कमी के कारण भारी ब्लीडिंग हो सकती है।

  • लत

बच्चे के जन्म के बाद मिर्गी की दवा बंद होने पर उसे इसकी लत होने के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

उपचार

गर्भावस्था को सफल बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात मिर्गी के दौरे पर नजर रखना और उसे संभालना है; इसमें प्रसव के पहले और प्रसव के बाद, दोनों तरह की देखभाल शामिल है।

मिर्गी से पीड़ित महिला को गर्भावस्था के दौरान अपने डॉक्टर से अक्सर मिलते रहना चाहिए। दौरों को रोकने और नियंत्रित करने के लिए दी गई दवाओं की किसी भी जटिलता के लिए सावधानीपूर्वक निगरानी की जानी चाहिए। दवाओं की खुराक कम रहनी चाहिए।

आंकड़ों के अनुसार, 2 से 3% मामलों में मिर्गी की दवाओं के कारण भ्रूण में विकृतियां (फटे होंठ और कटे तालु) विकसित हो जाती हैं। इसलिए पूरी तरह जांच के बाद ही दवा दी जानी चाहिए।

दवाओं के अलावा, महिला अपनी जीवनशैली में बदलाव कर सकती है जैसे कि स्वस्थ आहार लेना, दवाओं से परहेज करना और पर्याप्त नींद लेना।

मिर्गी की दवाएं

गर्भावस्था के दौरान मिर्गी के इलाज के लिए सबसे कम दुष्प्रभाव वाली दवाओं का उपयोग किया जाना चाहिए। वैल्प्रोइक एसिड और लैमोट्रीजीन गर्भावस्था के दौरान मिर्गी के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित दवा हैं, हालांकि यदि वैल्प्रोएट का उपयोग गर्भावस्था के शुरुआती 28 दिनों के दौरान किया जाता है, तो इसमें न्यूरल ट्यूब जन्म दोष का 1 से 2% जोखिम होता है।

मिर्गी और प्रसव (लेबर)

जब महिला अपनी गर्भावस्था के अंतिम चरण में पहुंचती है और उसके प्रसव का समय नजदीक होता है, तो उसके मन में इस संबंध में बहुत सारे प्रश्न और चिंताएं हो सकती हैं कि मिर्गी उस पर क्या प्रभाव डाल सकती है।

अधिकतर मिर्गी की रोगी महिलाओं की डिलीवरी सामान्य और बिना किसी जोखिम के होती है। यदि प्रसव के दौरान या अगले 24 घंटों के भीतर दौरे का खतरा हो, तो प्रसव एक अलग मैटरनिटी यूनिट में गहन देखरेख में होना चाहिए। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि प्रसव के दौरान और बाद में उचित देखभाल और सुविधाएं उपलब्ध हों। हालांकि, यह आपके मिर्गी के पिछले दौरे और आप वर्तमान में जो दवाएं ले रही हैं उस पर निर्भर करता है।

दर्द रहित प्रसव के लिए कुछ विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है:

  • सांस लेने के व्यायाम दर्द से राहत के लिए सहायक हो सकते हैं, लेकिन उन्हें संयमित तरीके से किया जाना चाहिए क्योंकि उनसे दौरा पड़ सकता है।
  • मिर्गी से पीड़ित महिलाओं को एपिड्यूरल दिया जा सकता है।
  • पेथिडीन जो एक दर्द निवारक दवा है, उससे भी दौरा ट्रिगर हो सकता है इसलिए इसे डॉक्टर के परामर्श से लिया जाना चाहिए। इसके बजाय डायमॉर्फिन का उपयोग किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या अन्य गर्भवती महिलाओं की तुलना में मुझे अधिक फोलिक एसिड की आवश्यकता होगी?

जहां मिर्गी के लिए उचित दवा लेना जरूरी है, वहीं फोलिक एसिड की खुराक लेना भी महत्वपूर्ण है। गर्भधारण से पहले, प्रतिदिन 4 से 5 मिलीग्राम फोलिक एसिड लेना चाहिए। यह गर्भावस्था के दौरान लिए जाने वाले अन्य प्रसवपूर्व विटामिनों से अधिक है। आमतौर पर लगभग 50% गर्भधारण अनियोजित होते हैं और महिला को इसके बारे में लगभग 4 सप्ताह के बाद ही पता चलता है। इसलिए, मिर्गी से पीड़ित उन सभी महिलाओं को फोलिक एसिड लेने की सलाह दी जाती है जो बच्चे पैदा करने की उम्र में होती हैं। फोलिक एसिड की खुराक शुरू करने से पहले आपको अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

2. मिर्गी से पीड़ित होने पर क्या मैं स्तनपान करा सकती हूं?

हां, मिर्गी से पीड़ित महिला दवा लेते हुए बच्चे को स्तनपान करा सकती है। इस दवा की कुछ मात्रा स्तन के दूध के माध्यम से बच्चे तक पहुंचती है। हालांकि, स्तनपान के फायदे दवा से जुड़े संभावित जोखिमों से कहीं अधिक हैं।

3. मुझे डॉक्टर को कब बुलाना चाहिए?

निम्नलिखित स्थितियों में मिर्गी से पीड़ित महिला को डॉक्टर को बुलाना चाहिए:

  1. यदि दौरा पड़ने पर महिला 30 सेकंड से अधिक समय तक सांस लेना बंद कर देती है।
  2. यदि दौरा 3 मिनट से अधिक समय तक रहता है, तो यह एक गंभीर, जीवन-घातक स्थिति है जिसे एपिलेप्टिकस कहा जाता है।
  3. यदि 24 घंटे में महिला को एक से अधिक दौरे पड़े हों।
  4. यदि दौरे के एक घंटे बाद भी महिला कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही हो और नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी दिख रहा हो:
  • मतली और उल्टी
  • भ्रम या चक्कर आना
  • यदि महिला में चेतना न हो, यानी न तो पूरी तरह से बेहोश और न ही पूरी तरह से होश में हो।
  1. यदि दौरे के बाद सिर में चोट लगी हो
  2. यदि डायबिटीज से पीड़ित महिला को दौरा पड़ा हो, ब्लड शुगर कम हो या बढ़ गई हो।
  3. यदि दौरा पड़ने के ठीक बाद महिला को तेज सिरदर्द हो।
  4. यदि दौरे में स्ट्रोक के लक्षण हों जैसे बोलने या समझने में समस्या, ठीक से दिखाई न देना और चलने-फिरने में परेशानी होना।

मिर्गी एक विकार है जिसका दवाओं से इलाज हो सकता है। इन दवाओं के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे प्रभावी ढंग से काम करती हैं, अपने डॉक्टर से जांच करवाएं और उनकी सलाह का पालन करें।

श्रेयसी चाफेकर

Recent Posts

डॉ. भीमराव अंबेडकर पर निबंध (Essay On Bhimrao Ambedkar In Hindi)

भारत में कई समाज सुधारकों ने जन्म लिया है, लेकिन उन सभी में डॉ. भीमराव…

2 days ago

राम नवमी पर निबंध (Essay On Ram Navami In Hindi)

राम नवमी हिंदू धर्म का एक अहम त्योहार है, जिसे भगवान श्रीराम के जन्मदिन के…

2 days ago

रियान नाम का अर्थ, मतलब और राशिफल – Riyan Name Meaning in Hindi

आज के समय में माता-पिता अपने बच्चों के लिए कुछ अलग और दूसरों से बेहतर…

1 week ago

राजीव नाम का अर्थ, मतलब और राशिफल – Rajeev Name Meaning In Hindi

लगभग हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे का नाम सबसे अलग और…

1 week ago

35+ पति के जन्मदिन पर विशेस, कोट्स और मैसेज | Birthday Wishes, Quotes And Messages For Husband in Hindi

एक अच्छा और सच्चा साथी जिसे मिल जाए उसका जीवन आसान हो जाता है। कहते…

2 weeks ago

माँ के लिए जन्मदिन पर विशेस, कोट्स और मैसेज – Birthday Wishes, Quotes And Messages For Mother in Hindi

माँ वह इंसान होती है, जिसका हमारे जीवन में स्थान सबसे ऊपर होता है। माँ…

2 weeks ago