34 सप्ताह का बच्चा – विकास, पड़ाव और देखभाल

34 सप्ताह का शिशु - विकास, विकासक्रम और देखभाल

आपके शिशु की वृद्धि बहुत तीव्रता से हो रही है और अब वह अपने 34वें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस समय तक वह अपनी भावनाओं को हँसकर या रोकर व्यक्त कर पाएगा । अब वह थाली में रखे भोजन को देखकर उस तक पहुँचने की कोशिश करेगा और न जाने कितनी नई-नई चीजें करना सीख जाएगा । आप उनमें आने वाले इन बदलावों को देखकर इसका खूब आनंद उठाएंगी। 

34 सप्ताह के शिशु का विकास

इस समय आपका शिशु कई परिवर्तनों से गुजरते हुए विकासात्मक पड़ाव को पार कर रहा होगा जैसे कि उसका घुटनों के बल चलना, सुनना, स्पर्श करना और चीजों की खोज करना आदि। यह एक बेहतरीन समय है जब शिशु को उसके परिवेश और नई चीजों के साथ-साथ विभिन्न खाद्य पदार्थों से परिचित कराया जाना चाहिए। बच्चे में होने वाले विकास पर नजर बनाए रखिए और उनके बेहतर विकास के लिए आपको क्या करना है चाहिए यह जानने के लिए लेख पढ़ें ।

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34 सप्ताह के शिशु की विकासात्मक उपलब्धियां

शिशु के 34वें सप्ताह में होने वाले विकास कुछ इस प्रकार हैं-

  • उभयहस्त-कौशल – अब आपका शिशु अपने बाएँ और दाएँ दोनों हाथों का उपयोग करना पसंद करेगा।
  • बातें करना – आपका शिशु बहुत बड़बड़ाएगा और आपकी बातों पर हँसेगा / मुस्कुराएगा भी। वह आपकी आवाज पर प्रतिक्रिया देगा और आपकी गाए गए गानों और धुनों को सुनना पसंद करेगा।
  • शरीर संबंधी जिज्ञासा – आपका शिशु अपने शरीर के अंगों के कार्य को समझने तथा उसका प्रयोग करने के लिए उत्सुक होगा ।  यह लैंगिकता की एक सामान्य प्रक्रिया है, इस बात का ख्याल रखें कि वह ऐसा तभी करें जब वे अकेले हों, दूसरों के सामने ऐसा ना करें।
  • घुटनों के बल चलना – आपका शिशु घुटनों के बल चलने तथा थोड़ा-थोड़ा खड़े होने का प्रयास करने लगेगा ।

आहार

जहाँ तक शिशु के आहार की बात है तो अब वह ठोस आहार खाना शुरू कर देगा । यह सही समय है कि आप अपने शिशु को वो खाने दें जो वह खाना चाहता है, लेकिन इस बात का ख्याल रहे कि उसे स्तनपान कराना अभी भी जरी रखें । क्योंकि माँ के दूध से बच्चे को सभी आवश्यक पोषण मिलता है जो बच्चे को मिलना बहुत जरूरी है। आपका शिशु को दिन में तीन बार भोजन करना चाहिए और दिन में तीन बार अल्प आहार यानि स्नैक्स खाना चाहिए।

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बच्चे को खाना खिलाते समय बिब का प्रयोग करें ताकि जब वह खुद से खाने के कोशिश करें तो उनका कपड़ा गंदा न हो । आपके बच्चे को नए बर्तनों में खाना पसंद आएगा और आप उनके लिए बाजार से इसे रंग-बिरंगे खाने के बर्तन जैसे उनकी थाली, कटोरी और चम्मच खरीद सकती हैं। थाली खरीदते वक्त इस बात का ख्याल रहे कि उसमें कटोरी वाला भाग भी होना चाहिए ताकि वह शरारत में कोटरी को थाली में न उलटें ।

घर पर बच्चे के द्वारा पसंद किए जाने वाले खाद्य पदार्थों को स्टोर करने के लिए सील किए जा सकने वाले छोटे-छोटे डिब्बे खरीदें। यह बाजार में आसानी से मिल जाएगा। जब कभी जल्दीबाजी में कहीं निकलना हो उसके लिए पहले से ही बच्चे के भोजन व स्नैक्स साथ ले जाने के लिए रीफिल पॉउचेस जरूर खरीद लें और साथ ही 2-4 एक्स्ट्रा चम्मच भी रखें क्योंकि आपका शिशु इन्हें कई बार फर्श पर गिराएगा और उगलेगा।

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आपका शिशु खुद से खाने में दिलचस्पी दिखा सकता है । इसलिए आप बच्चे को फिंगर फूड देना शुरू कर सकती हैं, लेकिन जब वो खा रहा हो तो इस बात का खास ध्यान रखें कि उसके गले में कुछ फँस ना जाए। शिशु को कोई भी खाद्य पदार्थ भाप में पकाकर या मैश करके दें और सुनिश्चित करें कि उसे आसानी से इसे चबा सके और पचा सके। शुरुआत में जब बच्चा अपने आप खाना शुरू करता है, तो उसके लिए ठीक से खाना मुश्किल हो सकता है और वह आधे से ज्यादा खाना नीचे गिरा देता हैं । धैर्य रखें और पहले ही फर्श पर कुछ बिछा दें ताकि इसे साफ करना आसान हो जाए। 

नींद

34 सप्ताह के बच्चे की नींद इस समय बाधित हो सकती है क्योंकि इस चरण वह और नई-नई गतिविधि करना सीख जाएंगे, और यह उनकी नींद पर प्रभाव डाल सकता है। इस आयु में बच्चा घुटनों के बल चलना सीख जाता है और उसके दाँत आना शुरू हो जाता है । बच्चे में लगातार होने वाले विकास के कारण उनकी नींद पर भी इसका प्रभाव पड़ता है और हो सकता उनकी नींद में आने वाले बदलाव लंबे समय तक चलें । आप बच्चे को घड़ी के हिसाब से सुलाने की कोशिश ना करें और उसके नींद के संकेतों पर ध्यान दें। क्योंकि यह एक क्षणिक चरण है इसलिए अपने काम और जीवनशैली की समय सारणी को अपने शिशु के नींद के स्वरुप समायोजित करने की कोशिश करें।

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34 सप्ताह के बच्चे की देखभाल के टिप्स

कुछ शिशुओं का विकास धीमी गति से होता है जबकि कुछ शिशुओं के विकास की गति तीव्र होती है और कुछ की विकास गति औसत भी होती है, लेकिन विचार करने योग्य यह बात यह है कि उन अप्रत्याशित समय और विकास के क्षणों में कुछ जाँच और उपायों को ध्यान में रखा जाना जरूरी है। माता-पिता के लिए 34 सप्ताह के शिशु की देखभाल के लिए सुझाव निम्नलिखित हैं-

  • बेबीप्रूफ अलमारी – चूंकि आपका शिशु घुटनों के बल चलने में निपुण हो गया है, इसलिए वह ऊँचे स्थान पर रखी वस्तुओं तक पहुँचने का प्रयास करने की कोशिश कर सकता है। यदि आप अपनी दवाओं को उनकी पहुँच से दूर नीचे अलमारी में भी रखती हैं और यदि वे नुकसानदेह है तो आप उन अलमारियों को लॉक कर दें। उन्हें खुले स्थान पर ना रखें क्योंकि आप उन्हें उनसे दूर रखने की जितनी कोशिश करेंगे वे स्वाभाविक रूप से उन वस्तुओं के प्रति अधिक आकर्षित होंगे।
  • बातचीत – अपने शिशु को कविता और स्वर के माध्यम से नए शब्द सिखाने के लिए उसे गाना सुनाएं और उसे बिना बोले भी संवाद करने की आदत डालें। आप बच्चे के खिलौने की तरफ इशारा करके जोर से उनका नाम लें ताकि वह खिलौने को उसके नाम से पहचान सकें।
  • आराम – हालांकि बातूनी होना अच्छा है, परंतु बीच में आराम भी दें। उनकी स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए, आप समय-समय पर उन शब्दों को दोहराएं जो उनके लिए नए व कठिन हैं। 
  • बच्चे को खिलाने के लिए आवश्यक सामान खरीदें – आपको बच्चे को खाना खिलते समय इन बर्तनों की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • घर को शिशु के अनुसार व्यस्थित करें– गले में फँसने वाली वस्तुओं को उनसे दूर रखें, धोई जा सकने वाली चादर बिछाएं (ताकि खाना उस पर गिरे) और जब शिशु खाना खा रहा हो तो उसके बगल में एक तौलिया रखें और जब वह खाना गिराएं तो समय समय पर इसे साफ करती रहे । नुकीली वस्तुओं को हटा दें और घर में  स्वच्छता बनाए रखें ताकि वह फर्श से हानिकारक कणों को निगल ना जाए। 
  • खिलौने खरीदें – आपका शिशु अपने हाथों का उपयोग करके वस्तुओं को एक हाथ से दूसरे हाथ में लेने लगेगा, और यहाँ वहाँ फैंकेगा भी।लेकिन उसे ऐसा करने दें । यह उनके शारीरिक और क्रियात्मक विकास में सहायता करेगा ।

जाँच और टीकाकरण

इस आयु में निम्नलिखित जाँच और टीकाकरण किए जाने चाहिए। ध्यान रखें और सुनिश्चित करें कि बच्चों को रोगों से बचाव और विकासात्मक देरी होने से बचने के लिए उन्हें सभी टीकाकरण सही समय पर दिए जाएं-

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  • श्रवण और दृष्टि की जाँच
  • ब्लड ग्रूप की पहचान के लिए रक्त जाँच
  • विभिन्न सामान्य और दुर्लभ बीमारियों के लिए परिक्षण
  • फेफड़ों की जाँच
  • शर्करा, लवण, कैल्शियम और अन्य समान विटामिन / खनिज  जाँच
  • मूत्र  जाँच
  • पीलिया की जाँच के लिए बिलीरुबिन स्तर पर परीक्षण
  • आपके शिशु के अंगों, मस्तिष्क और हृदय के विकास की जाँच करने के लिए अल्ट्रासाउंड जाँच 
  • आर.एस.वी और हेपेटाइटिस ‘बी’ का टीकाकरण- ये महत्वपूर्ण टीकाकरण बच्चे को विशेष रूप से लगवाना चाहिए, यदि आपका शिशु समयपूर्व पैदा हुआ हो ।

खेल और गतिविधियां

खेल और गतिविधियाँ

इस आयु में शिशुओं के लिए निम्नलिखित खेलों और गतिविधियों को करने की सलाह दी जाती हैं-

  • खिलौने का डिब्बा -एक खिलौनों का डिब्बा लें और इसे विभिन्न सामग्री से बनी वस्तुओं से भरें (जैसे प्लास्टिक, लकड़ी और सॉफ्ट टॉयज) आदि । आप देखेंगी कि वह उसमें से अपनी मन पसंद चीजों को डिब्बे से निकालने की कोशिश करेगा ।
  • क्विल्ट मिश्रित कपड़े– अलग-अलग कपड़ों को क्विल्ट करके बच्चे के खेलने के लिए एक चटाई बनाएं। यह उनके संवेदी विकास के लिए बेहतरीन रूप से कार्य करता है जो उनके स्पर्श और टेक्सचर की समझ को बेहतर करने में मदद करता है।
  • दूसरों के साथ घुलना मिलना – आप देखेंगी कि आपका बच्चा अब और लोगों से भी घुलने मिलने लगा है और नए लोगों को देखने पर उनसे मेलजोल बढ़ाने लगता है। अपने बच्चे को लोगों से मिलने दें उनके साथ खेलने दें।
  • लुकाछिपी – बच्चे के साथ लुका-छिपी का खेल खेलने के लिए उनके खिलौने और किसी पसंदीदा वस्तु को छुपा दें और फिर उन्हें इसे ढूढ़ने के लिए कहें। यह उन्हें घुटनों के बल चलने में और निपुण करता है और इससे उनकी चीजों को पहचानने की क्षमता भी विकसित होगी।
  • कारण और प्रभाव – कारण और प्रभाव प्रदर्शित करने के लिए कुछ खिलौने और बिल्डिंग ब्लॉक रखे। अपने बच्चे को चीजों को इधर-उधर फेंकने की अनुमति दें और ध्यान दें कि चीजों को फेंकने पर वह कैसी-कैसी आवाजें निकालते हैं।

डॉक्टर से परामर्श कब करें

एक चिकित्सक से परामर्श करें यदि-

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  • आपका शिशु कुछ खा नहीं रहा है या स्तनपान के दौरान चिड़चिड़ा हो रहा है।
  • खिलौनों के साथ खेलने में कम रुचि दिखाता है।
  • घुटनों के बल चलने की कोशिश नहीं करता है या लंबे समय तक स्थिर बैठा रहता है।
  • इस आयु में आप उसमें असामान्य व्यवहार के किसी भी संकेत को देखती हैं।
  • उसमें विकास के संकेत दिखाई नहीं दे रहे हों।

आपके जीवन में शिशु के आ जाने के बाद बहुत सारे बदलाव आते हैं । बच्चे को अपनी सामने विकास के पड़ाव को पार करते देखना एक माता-पिता के सबसे सुखद पल होता है ।

हर बच्चा अपनी गति से बढ़ता है, इसलिए परेशान न हो। हर बच्चा अलग-अलग समय पर अपने विकास के पड़ाव को पार करता है, थोड़ा धैर्य रखें वह जल्दी और बच्चों की तरह अपने विकास पार कर लेंगे।

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