शिशु

आपका बच्चा बार-बार क्यों छींकता है?

क्या आपका बच्चा बहुत ज्यादा छींकता है? यदि हाँ तो आपको लग रहा होगा कि वह बीमार है। उसकी हर छींक में आप यही सोचती होंगी कि बच्चे को कोई समस्या है और इससे आपको बहुत ज्यादा चिंता होती होगी। पर यदि आपका बच्चा कई बार छींकता है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। छोटे बच्चे बहुत ज्यादा क्यों छींकते हैं और इसके लिए आपको क्या करना चाहिए, जानने के लिए आगे पढ़ें। 

क्या छोटे बच्चों का छींकना नॉर्मल है?

यदि एक नवजात शिशु छींकता है तो आपको यह जरूर जानना चाहिए कि उसका शरीर ठीक से काम कर रहा है। छींकना हेल्दी है और बच्चे को छींक आने पर आपको खुशी होनी चाहिए। यह एक रिफ्लेक्स एक्शन है जिसे नर्वस सिस्टम नियंत्रित करता है और इससे नाक के पैसेज की गंदगी साफ होती है या रेस्पिरेटरी सिस्टम से कंजेशन साफ हो जाता है। जिस हवा में हम सांस लेते हैं उसमें गंदगी, केमिकल, पॉल्यूटेंट्स, कीटाणु और अन्य गंदी चीजें होती हैं जो छींकने पर साफ हो जाती है। इसलिए यदि 2 महीने का बच्चा छींकता या खांसता है पर उसे बुखार या अन्य समस्याएं नहीं हैं तो आपको किसी भी गंभीर समस्या के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए। इससे संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए आप डॉक्टर से संपर्क करें। 

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बार-बार छींक आने पर चिंता करने के बजाय आपको इस बात की खुशी होनी चाहिए कि बच्चे का शरीर प्राकृतिक रूप से रिएक्ट कर रहा है। छींक आने नाक में जमी हुई गंदगी व कंजेशन साफ हो जाता है और बच्चे की नाक से हवा का आदान-प्रदान बहुत आराम से होता है। हालांकि यदि बच्चा लगातार छींक रहा है तो आप डॉक्टर से संपर्क करें। 

बच्चा बहुत ज्यादा क्यों छींकता है?

सभी छोटे बच्चों में सांस लेने का पैटर्न अलग होता है। जैसे कुछ बच्चे पहले तेज और छोटी-छोटी सांस लेते हैं और फिर धीमे-धीमे आराम से सांस लेते हैं। बच्चे को नॉर्मल तरीके से सांस लेना सीखने में समय लग सकता है। बच्चों का छींकना आम है पर यदि वह अधिक छींकता है तो इसके भी निम्नलिखित कारण हो सकते हैं, आइए जानें;

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1. नाक की गंदगी साफ करने पर

छोटे बच्चे अक्सर नाक से सांस लेते हैं और लगभग 3-4 महीने के बाद ही वे मुंह से सांस लेना शुरू करते हैं। बच्चों के लिए नाक से सांस न लेने के बजाय अचानक मुंह से सांस लेना शुरू करने में कठिनाई होती है। इसलिए बच्चों को बार-बार छींक आती है ताकि उनकी नाक साफ रहे और वे नॉर्मल ब्रीडिंग पैटर्न में छींक सकें। 

2. नाक छोटी होने पर

छोटे बच्चों की नाक बहुत छोटी होती है और उनके नाक का पैसेज भी उतना ही छोटा सा होता है। बच्चे की छोटी सी नाक का पैसेज बहुत पतला रहता है जिसमें बाहरी गंदगी आसानी से भर जाती है। इसलिए नाक की नली को साफ करने के लिए बच्चे को छींक आती है।  

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3. ब्लॉक्ड नॉस्ट्रिल साफ करने पर

बच्चों को अक्सर नाक बंद की समस्या हो जाती है। ब्रेस्टफीड के दौरान बच्चे की छोटी सी नाक आपके शरीर से टकराकर दबती है या फ्लैट होती है। जिसकी वजह से उसकी नाक कुछ समय के लिए बंद हो जाती है और कुछ देर के बाद बच्चे के छींकने से वह खुल भी जाती है। 

4. हवा में इरिटेंट्स मौजूद रहने पर

हवा में मौजूद इरिटेंट्स, जैसे सिगरेट का धुंआ, कोलोजेन या पर्फ्यूम की सुगंध, धूल आदि से भी बच्चे को छींक आती है। यदि बच्चा दूध पलटता है तो इसके पार्टिकल्स नाक में जाने से भी उसे छींक आ सकती है या इरिटेशन हो सकती है। चूंकि बच्चा धूल की वजह से सांस नहीं ले पा रहा है या सूंघ नहीं पा रहा है तो उसे अपने आप ही छींक आ जाएगी। इससे बचने के लिए आप अपने घर को वेन्टीलेटेड रखें। आप घर में एग्झॉस्ट फैन लगाएं या हवा के बेहतर बहाव के लिए खिड़कियां खुली रखें। 

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5. बुखार या बीमार होने पर

बच्चे को जुकाम की वजह से भी छींक आती है। इसके सबसे आम लक्षण हैं, रेस्पिरेटरी सिस्टम के ऊपरी ट्रैक्ट में इन्फेक्शन, छींक, खांसी और नेजल डिस्चार्ज। इम्यून सिस्टम मैच्योर न होने से बच्चे को परिवार के किसी भी व्यक्ति से भी जुकाम हो सकता है। इसलिए पेरेंट्स होने के नाते आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे को गोदी में उठाने से पहले ठीक से हाथ धोएं व सैनिटाइज करें। इसके अलावा आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही एंटीहिस्टामाइन का उपयोग भी करें। यदि जुकाम हो जाता है तो इसका भी तुरंत इलाज करना चाहिए ताकि बच्चे को गंभीर इन्फेक्शन न हो सके।  

6. सूखी हवा चलने पर

बच्चे की नाक का पैसेज बहुत छोटा होता है जिसकी वजह से उसकी नाक में मौजूद म्यूकस जल्दी सूख जाता है। यह सर्दियों में ड्राई जगह में या एयर-कंडीशन रूम में अक्सर होता है। जिसके परिणामस्वरूप बच्चा ज्यादा छींकता है। इससे बचने के लिए वैपराइजर का उपयोग करें जिससे बच्चे की नाक नहीं सूखती है। 

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7. एलर्जी होने पर

यदि बच्चा लगातार छींकता है तो यह हे फीवर की वजह से भी हो सकता है। इसे एलर्जिक रायनाइटिस भी कहते हैं जिससे नेजल कंजेशन होता है। वातावरण में अशुद्ध पार्टिकल्स से एलर्जिक रिएक्शन होता है जो हे फीवर का कारण बनता है। यह धूल, कीड़े के काटने या जानवरों के बाल से भी होता है। आप बच्चे को बाहरी गंदगी और एलर्जी से दूर रखें ताकि इससे बचा जा सके। चूंकि यह संभव नहीं है इसलिए आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी-हिस्टामाइन का उपयोग भी कर सकती हैं।  

डॉक्टर से कब संपर्क करें

बच्चे दिनभर में अक्सर छींकते हैं और कभी-कभी लगातार भी छींकते हैं जो एक आम बात है। पर यदि बच्चे की नाक बह रही है और वह हर समय छींकता है व साथ ही उसे बुखार या खांसी होती है तो आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा यदि बच्चे में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है, आइए जानें; 

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  • यदि बच्चा तेज-तेज सांस लेता है या सांस लेते समय हांफता है तो इसका मतलब है कि उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
  • यदि बच्चे के सीने में जकड़न या तनाव होता है तो भी यह बीमारी का लक्षण है और उसे सांस लेने में कठिनाई होगी।
  • यदि बच्चा पहले से कम खाता है और उसमें ज्यादा एनर्जी नहीं है।
  • यदि बच्चा 8-10 घंटे से ज्यादा सोता है और उसकी एनर्जी कम है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

नवजात शिशुओं को अन्य आम अनुभव भी होते हैं जिसमें हिचकियां और सोते व सांस लेते समय अजीब आवाज निकालना भी शामिल है। कुछ बच्चे सोते समय भी आवाज निकालते हैं जिसे बच्चे के घर्राटे कहा जा सकता है। पर इस बात का ध्यान रखें कि जब तक आपको गंभीर बीमारी के लक्षण न दिखाई दें तब तक चिंता करने का कोई भी कारण नहीं है। डॉक्टर से नियमित मिलने व बच्चे के ब्रीदिंग पैटर्न से संबंधित चर्चा करने से आपको चिंता कम होगी। 

नवजात शिशुओं का लगातार छींकना नॉर्मल है। हालांकि यदि इसके साथ बच्चे को बुखार आता है या उसकी नाक बहती है तो वह बीमार हो सकता है। ऐसे में आप बच्चे को डॉक्टर से जांच कराएं। 

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यह भी पढ़ें:

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