बड़े बच्चे (5-8 वर्ष)

बच्चों के लिए 12 सर्वश्रेष्ठ प्रेरणादायक कहानियां

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30जैसे–जैसे बच्चे बड़े होते हैं, आपको उनमें एक अलग ही व्यक्तित्व दिखाई देगा। क्योंकि बच्चे हर दिन नई आदतों को विकसित करने की प्रवृत्ति रखते हैं। जैसे–जैसे दिन आगे बढ़ता जाता है, आपका बच्चा संभवतः एक पुरानी आदत को पीछे छोड़ देगा और किसी नई आदत को अपनायेगा या पुरानी आदत का एक नया रूप लेगा।

कहानी सुनना, हालांकि, एक ऐसी एक्टिविटी है जो बच्चों को कभी उबाऊ नहीं लगती। चाहे वह रात में सोने के समय सुननी हो या स्कूल में सुननी हो। यह आदत बच्चे में धीरे–धीरे किताबें पढ़ने का शौक पैदा करती है और साथ ही उसे अच्छे संस्कार और भविष्य के लिए जरुरी सीख भी मिलती है, कहानी पढ़ना या सुनना हमेशा विशेष होता है।

बच्चों के लिए प्रेरक और प्रेरणादायक लघु कथाएं

यहाँ बच्चों के लिए 12 सर्वश्रेष्ठ प्रेरणादायक कहानियां दी गई हैं जो आपके और आपके बच्चे के बीच एक आनंदमय बॉन्डिंग बनाता है और साथ ही उन्हें शिक्षा भी देता है।

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1.  मोर का दुःख

यह कहानी हमारी लिस्ट में सबसे ऊपर है। यहाँ एक मोर के बारे में एक अद्भुत कहानी बताई गई है जो बच्चों को जरूर जानना चाहिए। 

एक बार एक मोर था जो बहुत सुन्दर था, उसके पंख बेहद खूबसूरत थे। एक दिन खूब झम–झम बारिश हुई और मोर नाचने लगा। नाचते हुए वह अपनी खूबसूरती को निहार रहा था, पर अचानक उसका ध्यान उसकी आवाज पर गया, जो कि बेहद बेसुरा और कठोर था। इस बात का एहसास होते ही वह बेहद उदास हो गया और उसके आंखों में आंसू आ गएं। तभी अचानक, उसे एक कोयल गाती हुए सुनाई दी।

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कोयल की मधुर आवाज को सुनकर, मोर को उसकी कमी एक बार फिर एहसास हुआ। वह सोचने लगा कि भगवान ने उसे सुंदरता तो दी पर बेसुरा क्यों बनाया। तभी एक देवी प्रकट हुई और उन्होंने मोर से पूछा “मोर, तुम क्यों उदास हो?”

मोर ने देवी से अपनी कठोर आवाज के बारे में शिकायत की और उनसे पूछा, “कोयल की आवाज इतनी मीठी है पर मेरी क्यों नहीं? इसलिए मैं दुखी हूँ।

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अब मोर की बात सुनकर, देवी ने समझाया, “भगवान के द्वारा सभी का हिस्सा निर्धारित है, हर जीव अपने तरीके से खास होता है। भगवान ने उन्हें अलग-अलग बनाया है और वे एक निश्चित काम के लिए हैं। उन्होंने मोर को सुंदरता दी, शेर को ताकत और कोयल को मीठी आवाज! हमें भगवान के दिए इन उपहारों का सम्मान करना चाहिए और जितना है उतने में ही खुश रहना चाहिए।”

देवी की बातों को सुनकर मोर समझ गया कि दूसरों से तुलना नहीं करनी चाहिए बल्कि खुद के हुनर की सराहना करनी चाहिए और उसे और निखारना चाहिए। मोर उस दिन समझा कि हर व्यक्ति किसी न किसी तरह से यूनिक होता है।

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कहानी से सीख – खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है। जो कुछ भी आपके पास नहीं है, उसके लिए दुखी होने के बजाय, आपके पास जो है, उसे स्वीकार करें।

2. कछुआ और खरगोश

यह कहानी युगों–युगों से कही और बताई जाती रही है, लेकिन निश्चित रूप से यह एक ऐसी कहानी है जो आपके बच्चे को एक महत्वपूर्ण सीख देती है जो जीवनभर उसके साथ रहता है। आप इस कहानी का क्लासिक रूप भी बच्चों को सुना सकते हैं या कुछ वेरियशन के साथ भी सुना सकते हैं जो कि आपके बच्चे को सीखने के लिए एक मूल्यवान पाठ सबित होगा ।

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खरगोश न केवल एक सुंदर सा पशु है, बल्कि अपनी गति और चतुराई के लिए भी जाना जाता है। दूसरी ओर, कछुए काफी सरल हैं और निश्चित रूप से, जीवन के सभी पहलुओं में धीमे हैं।

एक दिन, खरगोश ने सोचा क्यों न कछुए से दौड़ लगाई जाए। उसने कछुए से पूछा और कछुआ सहमत हो गया, और दौड़ शुरू हो गई।

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दौड़ में खरगोश कछुए से काफी आगे निकल गया क्योंकि वह बहुत तेज रनर था। खरगोश को अपने तीव्रता पर घमंड था और उसने सोचा कि वह एक झपकी लेकर उठ भी जाएगा तब भी वह कछुए से जीत जाएगा। और उसने ऐसा ही किया, फिनिशिंग लाइन से ठीक पहले, कुछ दूरी पर वह एक पेड़ के नीचे सो गया। वह आश्वस्त था कि वह आसानी से जीत जाएगा, भले ही वह कुछ समय के लिए सो गया हो।

दूसरी ओर, कछुआ, खरगोश की तुलना में काफी धीमा था। हालांकि, वह बिना रुके दौड़ लगाता रहा। धीरे–धीरे ही सही पर कछुआ फिनिशिंग लाइन तक पहुँचने में कामयाब रहा, और खरगोश हाथ मलता रह गया।

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कहानी से सीख – जब तक आप नियमित और दृढ़ हैं, आप हमेशा जीतेंगे, चाहे आपकी गति कुछ भी हो। आलस्य और घमंड हमारा सबसे बड़ा शत्रु है, इससे दूर रहा चाहिए।

3. दो माली

यह एक ऐसी कहानी है जो बच्चे और माता–पिता दोनों को ही एक अच्छी सीख दे सकता है। बच्चे बहुत कोमल व संवेदनशील होते हैं, और कई बार आप एक अभिभावक के रूप में यह तय नहीं कर पाते हैं कि स्वतंत्रता की रेखा कहाँ खींचनी चाहिए।

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यहाँ एक कहानी है जो बताती है उन चुनौतियों के बारे में जब आप किसी काम को खुद से करने की चेष्ठा करते हैं।

एक बार, दो पड़ोसी थे, जिनके पास अपना–अपना बागान था और वे उनमें पौधे उगाते थे। उनमें से एक पड़ोसी बहुत सख्त था और अपने पौधों की जरुरत से ज्यादा देखभाल करता था। दूसरा पड़ोसी, उतना ही करता था जितने की आवश्यकता थी, लेकिन वह अपने पौधे की पत्तियों को अपने मन–मर्जी दिशा के बढ़ने देता था।

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एक शाम, बहुत बड़ा तूफान आया, जिसमें भारी बारिश हुई। तूफान ने कई पौधों को नष्ट कर दिया।

अगली सुबह, जब सख्त पड़ोसी उठा, तो उसने पाया कि उसके सारे पौधे उखड़ गए और बर्बाद हो गए। वहीं, जब दूसरा पड़ोसी उठा, तो उसने पाया कि उसके पौधे अभी भी मिट्टी में मजबूती से लगे हुए हैं, इतने तूफान के बावजूद।

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रिलैक्स पड़ोसी का पौधा खुद ही चीजें करना सीख गया था। इसलिए, इसने अपना काम किया, गहरी जड़ें उगाईं, और मिट्टी में अपने लिए जगह बनाई। इस प्रकार, यह तूफान में भी मजबूती से खड़ा रहा। जबकि, उस सख्त पड़ोसी ने अपने पौधों का जरुरत से ज्यादा खयाल रखा था, लेकिन शायद वह भूल गया सिखाना कि बुरे समय में खुद का खयाल कैसे रखते हैं।

कहानी से सीख – अभी या बाद में, आपको खुद से ही सब कुछ करना होगा। जब तक माता–पिता अत्यधिक सख्त होना बंद नहीं करते, तब तक कुछ भी अपने आप काम नहीं करेगा।

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4. चूहा और शेरनी

हमारी अगली कहानी भी एक पुरानी मगर क्लासिक कहानी है। चूहा और शेरनी की यह कहानी कभी पुरानी नहीं होती और बच्चों को एक अद्भुत सीख देती है, जो उन्हें जरूर जानना चाहिए।

शेरनी, जैसा कि हम जानते हैं, एक भयंकर, अभिमानी प्राणी है, और छोटे जानवरों को हमेशा दबाने की प्रवृत्ति रखती है। एक बार एक शेरनी जंगल में भाग रही थी, और तभी उसके पंजे में एक कांटा चुभ गया। क्योंकि शेरनी काफी अभिमानी थी तो उसने किसी से मदद न मांगने का फैसला किया। खून बहता जा रहा था, वह कमजोर हो रही थी।

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तभी, शेरनी पर एक छोटे चूहे की नजर पड़ी। उसने देखा शेरनी बहुत दर्द में थी। चूहा, हालांकि काफी डरा हुआ था, उसने शेरनी से मदद की पेशकश करने के लिए साहस दिखाया। छोटा चूहा, बहुत दर्द झेलने के बाद, शेरनी के पंजे से कांटा निकालने में कामयाब रहा और उसे दर्द से मुक्त किया।

भले ही शेरनी इतनी बड़ी और शक्तिशाली थी, और चूहा इतना छोटा, विनम्र पर साहसी था, चूहे ने दयाभाव दिखाते हुए शेरनी का जीवन बचाया।

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कहानी से सीख – विनम्र रहें और यह कभी न भूलें कि शरीर का आकार मायने नहीं रखता है, बल्कि आपकी अंदर की शक्ति ही जरुरत आने पर काम आती है।

5. तीन मछलियां

मछलियों के बारे में यह एक सुंदर कहानी है। एक बार फिर, यह कहानी आपके बच्चे को यह सिखाने के बारे में है कि किसी समस्या का सामना कैसे करना चाहिए और दूसरों की जरूरत में उनकी मदद करना कभी नहीं भूलनी चाहिए।

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एक तालाब में तीन मछलियाँ रहती थीं। वे काफी अच्छे दोस्त थे और सब कुछ एक साथ किया करते थे।

एक दिन, एक मछुआरा तालाब के पास आया और मछली को देखकर प्रसन्न हुआ। उसने जाल डालने और उन्हें पकड़ने की योजना बनाई।

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तीनों में से सबसे बुद्धिमान मछली ने एक अलग तालाब खोजने की योजना बनाई। बाकि बची दो मछलियों में से एक ने सहमति व्यक्त की, पर दूसरे ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह तालाब उनका घर है और वह इसे छोड़कर नहीं जाएगी। फिर उसने आगे कहा “आज तक इस तालाब में कभी कोई खतरा नहीं था। मुझे नहीं लगता कि हमें यह तालाब छोड़कर जाने की जरुरत है, और छोड़कर जाना कायरता होगी। ”

पहली दो मछलियां अपने दोस्त को समझाने में असमर्थ रहीं, और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने उसे छोड़कर जाने का फैसला किया।

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अगले दिन, जब मछुआरा आया और तालाब में जाल बिछाया, तो पहली दो मछलियां बच गईं क्योंकि वे जा चुकी थी। लेकिन तीसरी मछली पकड़ी गई। वह समस्या की पहचान करने और उस पर कार्रवाई करने में असमर्थ रही और वह खतरे में पद गई।

कहानी से सीखहर समस्याएं अलग होती हैं और उनका समाधान भी अलग होता है। किसी भी मुसीबत का सामना करने के लिए अपनी बुद्धि का इस्तेमाल सही तरीके से करना चाहिए।

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6. सुनहरा स्पर्श

हम सभी ने अपने बचपन में यह अद्भुत कहानी पढ़ी या सुनी है, और अब समय आ गया है कि हम इसे अपने छोटे बच्चों को सुनाएं। यह कहानी एक लालची व्यक्ति के बारे में है, जो अपनी बेटी को भी सोना बना देता है, और बाद में इसके लिए पछताता है।

एक समय की बात है, एक राजा था जिसका नाम मिडास था। वह अच्छे काम करता था। लेकिन एक दिन, उसे एक वरदान मिला कि वह जो कुछ भी छुएगा, वह सोने में बदल जाएगा।

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नई शक्ति पाकर राजा मिडास बहुत उत्साहित हुआ। उसने तरह-तरह की चीजें छूनी शुरू कर दीं, और वे सभी शुद्ध सोने में बदल गईं। 

“मैं बहुत शक्तिशाली हूँ। मैं वस्तुओं को सोने में बदल सकता हूँ।” वह खुशी से चिल्लाने लगा। लेकिन जल्द ही राजा को भूख लगी और उसने खाना उठाया। जैसे ही उसने उसे छुआ, वह भी सोने में बदल गया और अब वह उसे खा नहीं सका। राजा को अब कुछ भी कहते नहीं आ रहा था। तब उसे दुखी देखकर उसकी बेटी ने उसे गले लगाया ताकि वह उसे ढांढस बंधा सके, लेकिन वह भी सोने की मूर्ति बन गई। राजा मिडास बहुत रोया और उसने भगवान से प्रार्थना की कि उसका यह लालच खत्म हो जाए। अंततः उसकी प्रार्थना सुन ली गई और जो कुछ भी सोने में बदला था, वह फिर से पहले जैसा हो गया — उसकी प्यारी बेटी भी।

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“अब मैं कभी भी किसी चीज़ के लिए लालची नहीं बनूँगा,” राजा ने कहा।

कहानी से सीखलालच हमेशा विनाश की ओर ले जाता है। यह एक अभिशाप है जो हमें गलत कार्य करने के लिए मजबूर कर सकता है। लालच हमें स्वार्थी, चिड़चिड़ा, बेचैन और दूसरों से जलने वाला बना देता है।

7. लोमड़ी और अंगूर

यह कहानी आपके बच्चे को मेहनत का महत्व सिखाने के लिए एकदम उपयुक्त है। बच्चों को यह सीखना जरूरी है कि जीवन में कुछ भी आसानी से नहीं मिलता। उन्हें मेहनत करनी होती है, ठीक वैसे ही जैसे लोमड़ी को करनी चाहिए थी।

एक दिन एक लोमड़ी को बहुत जोरों की भूख लगी। वह खाने की खोज में निकल पड़ी। उसने इधर-उधर बहुत ढूंढा, लेकिन खाने के लिए कुछ नहीं मिला। काफी समय बीत गया और लोमड़ी भूख से बेहाल हो गई तभी उसे एक किसान के घर की दीवार दिखी। उस दीवार के ऊपर लोमड़ी को बहुत ही बड़े और रसीले अंगूर लगे हुए दिखे।

“इतने बड़े और रसीले अंगूर! मुझे तो ये चाहिए ही चाहिए,” उसने खुद से कहा।

उन अंगूरों तक पहुंचने के लिए लोमड़ी को बहुत ऊंचा कूदना पड़ा। जैसे ही वह कूदी, उसने अंगूरों को पकड़ने के लिए मुंह खोला, लेकिन अंगूर हाथ नहीं आए। उसने बार-बार कोशिश की, लेकिन हर बार असफल रही।

आखिरकार, थककर उसने हार मान ली और उसने खुद से कहा, “वैसे भी ये अंगूर खट्टे ही होंगे,” और बड़बड़ाते हुए वहां से चली गई।

कहानी से सीख – कभी भी उस चीज को बुरा मत कहो जो तुम्हें नहीं मिल पाई। जीवन में कुछ भी आसानी से नहीं मिलता। अगर कुछ पाना है, तो मेहनत करनी पड़ेगी।

8. घमंडी गुलाब

यह एक बेहतरीन कहानी है जो बच्चों को यह सिखाने में मदद करती है कि किसी को उसकी बाहरी रूप-रंग से आंकना सही नहीं है। किसी इंसान को जानने के लिए हमें उससे बात करनी चाहिए और उसे समझना चाहिए, न कि सिर्फ उसके रूप को देखकर उस पर टिप्पणी करनी चाहिए। 

एक बार की बात है, एक गुलाब का फूल था जो अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड करता था। उसे बस एक ही बात का अफसोस था, कि वह एक बदसूरत से दिखने वाले कैक्टस (कांटेदार पौधे) के पास उग आया था। हर दूसरे दिन गुलाब उस कैक्टस का मजाक उड़ाता और उसकी शक्ल-सूरत को लेकर ताने देता। “यह कैक्टस कितना बदसूरत दिखता है,” गुलाब अक्सर कहता। आसपास के सभी पौधे, फूल और पेड़ गुलाब को समझाते कि वह उस निर्दोष कैक्टस को तंग न करे। लेकिन गुलाब तो अपनी सुंदरता में इतना डूबा हुआ था कि किसी की बात नहीं सुनता।

वसंत का मौसम बीत गया और गर्मी का मौसम आ गया। अब बारिश भी नहीं हो रही थी। जो गुलाब पहले सुंदर और ताजगी से भरा हुआ था, अब धीरे-धीरे मुरझाने लगा और उसका रंग भी उड़ने लगा।

एक दिन गुलाब ने देखा कि एक पक्षी कैक्टस में अपनी चोंच डालकर उसमें से पानी पी रहा है। यह देखकर गुलाब को एहसास हुआ कि अब उसे मदद की जरूरत है, लेकिन कैक्टस से मदद माँगने में उसे शर्म आ रही थी। फिर भी, आखिरकार उसने हिम्मत जुटाई और कैक्टस से कहा, “क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो? मुझे थोड़ा पानी दे दो, नहीं तो मैं जल्द ही मुरझा जाऊँगा।”

दयालु कैक्टस ने बिना किसी गिले-शिकवे के मदद करने के लिए हाँ कह दी, और उस पक्षी ने गुलाब को पानी पिलाया।

कहानी से सीख – कभी भी किसी को उसके रूप-रंग से मत आंकिए। कई बार किसी का बाहरी रूप सामान्य होता है, लेकिन असली खूबसूरती उसके दिल और व्यवहार में होती है।

9. बुद्धिमान उल्लू

क्या आप जानते हैं कि नैतिक कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों को अधिक समझदार बना सकते हैं? आइए पढ़ते हैं एक बूढ़े उल्लू की कहानी, जो केवल दूसरों को देखकर और उनकी बातें सुनकर बुद्धिमान बन गया।

एक बार की बात है, एक बूढ़ा उल्लू एक बलूत के पेड़ पर रहता था। वह अपने आस-पास होने वाली घटनाओं को बड़े ध्यान से देखा करता था। एक दिन उसने देखा कि एक छोटा लड़का एक बूढ़े आदमी की भारी टोकरी उठाने में मदद कर रहा है। अगले दिन उसने देखा कि एक छोटी लड़की अपनी माँ पर चिल्ला रही थी। जितना अधिक वह देखता, उतना ही कम वह बोलता।

दिन बीतते गए। उल्लू ने बोलना और भी कम कर दिया, लेकिन सुनना और अधिक बढ़ा दिया। वह अलग-अलग लोगों की बातें सुनता और उनकी कहानियां समझता।

उसने एक लड़की को कहते सुना, “एक हाथी ने बाड़ कूद ली।”

फिर उसने एक लड़के को कहते सुना, “मैंने कभी कोई गलती नहीं की।”

बूढ़े, बुद्धिमान उल्लू ने इन लोगों की बातें सुनीं और यह भी देखा कि उनके साथ क्या हुआ। कुछ लोग पहले से भी बदतर हो गए, तो कुछ और अच्छे बन गए।

लेकिन उस उल्लू के साथ एक बात निश्चित थी – वह हर दिन और भी बुद्धिमान होता जा रहा था।

कहानी से सीख  – ध्यान से देखना और शांत रहकर अधिक सुनना हमें बुद्धिमान बनाता है। बेवजह की बातें करना सिर्फ हमारी ऊर्जा की बर्बादी है।

10. चींटी और टिड्डा

इस छोटी-सी कहानी की मदद से बच्चों को यह समझाया जा सकता है कि जरूरी कामों पर ध्यान देना क्यों जरूरी है, और कैसे समय को बेकार की बातों में गंवाना नुकसानदायक हो सकता है।

पतझड़ के दिन थे, चींटियों का एक परिवार गुनगुनी धूप में खूब मेहनत कर रहा था। वे गर्मियों में जमा किए गए अनाज को सुखा रही थीं। तभी एक भूखा टिड्डा वहां आया। उसके हाथ में उसकी वायलिन था। वह बड़ी विनम्रता से बोला, “क्या मुझे खाने को थोड़ा कुछ मिल सकता है?”

चींटियों ने उससे पूछा, “तुमने सर्दियों के लिए खाना जमा क्यों नहीं किया?”

टिड्डा बोला, “मैं तो पूरी गर्मियों भर संगीत बजाने में व्यस्त था, इसलिए खाने का इंतजाम नहीं कर पाया।”

यह सुनकर चींटियों ने कंधे उचकाते हुए कहा, “अब जब तुमने गर्मियों में संगीत बजाया है, तो अब सर्दियों में उस पर नाचो भी।”

इतना कहकर चींटियां टिड्डे की ओर पीठ मोड़कर अपने काम में लग गईं।

कहानी से सीख  – हर चीज का एक समय होता है – काम का भी और खेल का भी। हमें अपना समय समझदारी से बिताना चाहिए। शौक पूरे करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है, लेकिन जरूरी कामों को पहले करना चाहिए। समय अनमोल है, और इसका सही उपयोग सकारात्मक कार्यों में ही होना चाहिए।

11. कुएं के पास कुत्ता

बच्चों में अक्सर यह आदत होती है कि वे वही काम करते हैं, जिसे उनके माता-पिता करने से मना करते हैं। इस कहानी को अपने बच्चे को सुनाकर उन्हें यह सिखा सकते हैं कि बड़ों की बात क्यों माननी चाहिए।

एक खेत में एक माँ कुतिया अपने छोटे-छोटे पिल्लों के साथ रहती थी। उस खेत में एक कुआं भी था। माँ कुतिया हमेशा अपने बच्चों से कहती, “कभी भी उस कुएं के पास मत जाना और उसके आसपास मत खेलना।”

एक दिन, एक नटखट पिल्ला माँ की बात न मान सका। उसे बहुत जिज्ञासा हुई कि माँ हमें कुएं के पास जाने से क्यों रोकती है। वह यह जानने के लिए वहां जाने का सोचने लगा।

वह धीरे से कुएं की ओर गया और दीवार पर चढ़कर अंदर झांकने लगा। कुएं में उसे पानी में अपना प्रतिबिंब दिखाई दिया। उसे लगा कि नीचे कोई दूसरा कुत्ता है।

जब उसने देखा कि वह दूसरा कुत्ता उसकी हर हरकत की नकल कर रहा है, तो वह गुस्से में आ गया। उसे लगा कि वह कुत्ता उसे चिढ़ा रहा है, और उसने लड़ने का मन बना लिया।

वह छोटा पिल्ला सीधे कुएं में कूद गया, लेकिन वहां तो कोई दूसरा कुत्ता था ही नहीं। वह जोर-जोर से भौंकने लगा फिर उसकी आवाज सुनकर किसान ने आकर उसे बाहर नहीं निकाला।

उस दिन पिल्ले को अपनी गलती का अहसास हो गया, और उसने फिर कभी कुएं के पास न जाने की ठान ली।

कहानी से सीख  – बड़ों की बात हमेशा माननी चाहिए। वे जीवन का अधिक अनुभव रखते हैं और हमें सही राह पर चलने की सलाह देते हैं।

12. भेड़ और भेड़िया

हम सभी जानते हैं कि अपने आसपास हो रही चीजों पर ध्यान देना कितना जरूरी है। लेकिन यह आदत हमें अपने बच्चों को भी सिखानी चाहिए। उन्हें अपने आसपास के माहौल के प्रति सतर्क रहना चाहिए। नीचे दी गई कहानी इसी बात को सिखाती है कि सतर्क रहना क्यों जरूरी है।

एक बार की बात है, एक भेड़िये की एक भालू से लड़ाई हो गई, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गया। अब वह हिल-डुल भी नहीं पा रहा था और ना ही अपनी भूख या प्यास मिटा सकता था। वह बस एक पेड़ के पास ही पड़ा रहता था। 

एक दिन, एक भेड़ उसी पेड़ के पास से गुजरी। भेड़िये ने उसे देखा तो तुरंत कराहते हुए उससे बोला,

“कृपया मुझे थोड़ा पानी ला दो। शायद इससे मुझे थोड़ी ताकत मिल जाए ताकि मैं कुछ ठोस खाना खा सकूँ।”

जैसे ही भेड़ ने ‘ठोस खाना’ शब्द सुना, वह समझ गई कि यह तो उसे खाने का एक बहाना है – बस एक जाल है।

वह तुरंत वहां से भाग गई।

कहानी से सीख  – अगर हम ध्यान से सुनें और देखें, तो किसी की छुपी हुई मंशा को समझना आसान हो जाता है। हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए और अपने आसपास की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए ताकि किसी भी खतरे से बचा जा सके।

प्रेरणादायक कहानियां पढ़ने के टिप्स

  1. प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए सबसे अच्छा समय, दिन का समय है, क्योंकि इस समय बच्चा सतर्क और एक्टिव रहता है। वहीं रात के दौरान बच्चे थके और बिस्तर पर जाने के लिए उत्सुक होते हैं। इसलिए दिन में बच्चे इन कहानियों को ध्यान देकर एकाग्रता से सुनेंगे और ठीक से समझ पाएंगे।
  2. सिर्फ इसलिए कि यह एक प्रेरणादायक कहानी है, इसका मतलब यह नहीं है कि यह उबाऊ है। इसे किसी सामान्य कहानी के रूप में ही पढ़ें। कहानी को दिलचस्प बनाने के लिए, विभिन्न आवाजों और पिचों को बदलकर सुनाएं।
  3. कहानी के अंत में अपने बच्चे से सवाल पूछें। आप अपने बच्चे से पूछ सकते हैं कि वह अगर उस कैरेक्टर के स्थान पर होता तो क्या करता, या कहानी का नैतिक क्या होगा।
  4. आप अपने बच्चे को और अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए कहानी में थोड़ा ट्विस्ट ला सकते हैं। अपने बच्चे की पसंद और नापसंद के अनुसार काम करें, जो उसे कहानी में अधिक रुचि रखेगा।
  5. यदि आपको लगता है कि आपका बच्चा बीच–बीच में बाहर आ जा है, तो कहानी को रोकें और उससे पूछे की बताओ आगे क्या होगा, उन्हें सोचने का मौका दें। वास्तव में, आप इसे एक नियमित अभ्यास भी बना सकते हैं। आगे क्या हो सकता है पूछना बच्चे की कल्पना को बढ़ावा देने में मदद करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ऐसी कहानी को क्या कहते हैं जो हमें नैतिक शिक्षा देती है?

ऐसी कहानी जो हमें नैतिक शिक्षा देती है, उसे नीतिकथा कहा जाता है। ये कहानियां किसी सच्ची घटना पर आधारित हो सकती हैं और इनमें अक्सर जानवरों को पात्र के रूप में दर्शाया जाता है।

चूंकि इन कहानियों में बात करने वाले कप या परी राजकुमारी जैसे कल्पनात्मक पात्र होते हैं, इसलिए बच्चों का ध्यान इन कहानियों की तरफ जल्दी आकर्षित होता है, और वे उसकी नैतिक शिक्षा को भी आसानी से समझ लेते हैं।

2. सबसे प्रेरणादायक कहानी कौन-सी है?

हम जो भी कहानी पढ़ते हैं, वह हमें किसी-न-किसी रूप में प्रेरणा देती है और कुछ न कुछ सिखाती है।

इस लेख में हमने बच्चों के लिए कुछ प्रेरणादायक कहानियां साझा की हैं, जो उन्हें नैतिक मूल्य सिखाने में मदद करेंगी।

एक बुद्धिमान उल्लू, सुनहरा स्पर्श, भेड़ और भेड़िया आदि। 

तो, ये कुछ बेहतरीन कहानियां हैं, जिन्हें आप और आपका बच्चा दोनों सराहेंगे। हालांकि, यह मत भूलिए कि हम सबके अंदर ढेरों कहानियां छुपी हैं ऐसी कहानियां जो न केवल बच्चों को प्रेरित कर सकती है और उन्हें मूल्यवान सबक सिखा सकती है, बल्कि उन्हें कल्पना और सपने देखने के लिए प्रोत्साहित भी कर सकती है। आप अपने बच्चे को उसकी कल्पनाशीलता और शब्दों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। यहाँ पर एक एक्टिविटी बॉक्स जो बच्चों की रचनात्मक सोच को बढ़ावा दे सकता है व साथ ही इसमें सुपरआकर्षक और मजेदार चीजें भी हैं। हो सकता है, आपका बच्चा भविष्य में अपनी खुद की कहानियों के साथ तैयार हो!

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जया कुमारी

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