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हमें पेरेंट्स के रूप में अक्सर ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है जहाँ बच्चे के साथ कहीं बाहर शॉपिंग, रेस्टोरेंट या पार्क में जाने पर उसे पेशाब आने लगता है। ऐसे में कुछ जगह रेस्टरूम नहीं होते हैं और फिर आपके पास कोई और ऑप्शन नहीं बचता है आपको उन्हें रोड साइड ले जाना पड़ता है और ऐसा करना इतना बुरा लगता है कि आप सोचती हैं कि कोई भी ऐसे न देखे। ऐसे में आप इस चीज के लिए बच्चे को डांटने लगती हैं कि वे बाहर निकलने से पहले घर में वॉशरूम क्यों नहीं गए, तो बेहतर यह है कि बच्चे को डांटने के बजाय ये समझने का प्रयास करें कि वो ऐसा क्यों कर रहा है, इससे आपको खुद ही चीजें डील करने में आसानी होगी।
ओवरएक्टिव ब्लैडर (ओएबी) एक प्रकार का यूरिनरी इंकॉन्टीनेंस होता है, जिसमें यूरिन कंट्रोल नहीं होता है और रिलीज हो जाता है। बच्चे को बार-बार पेशाब लगता है और जब कंट्रोल खोने लगता है, तो बच्चे के वाशरूम जाने से पहले ही पेशाब निकल जाता है। हालांकि यह बच्चों में ज्यादा कॉमन होता है लेकिन ऐसा बड़ों के साथ भी होता है। यह बात उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से सच है जिनकी डिलीवरी हाल ही में हुई है और वो अचानक पेशाब निकल जाने की समस्या से गुजर रही होंगी। ओएबी को बेड-वेटिंग समझने की गलती न करें, जो पूरी तरह से दूसरे फैक्टर के कारण होता है। साइंस की भाषा में बार-बार पेशाब आना पॉलाक्युरिया के रूप में जाना जाता है।
यदि आपका बच्चा बार बार पेशाब के लिए जाता है और इसे बिलकुल भी कंट्रोल नहीं कर पाता है तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए, ताकि आपको इसका कारण पता चल सके।
बच्चों में पॉलाक्युरिया का मुख्य लक्षण यह है कि उन्हें एक दिन में लगभग 10 से 30 बार पेशाब आता है, लेकिन केवल थोड़ी मात्रा में ही पेशाब आता है। यह 3 से 8 साल की उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। हालांकि इस थ्योरी का सपोर्ट करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन कई एक्सपर्ट का मानना है कि यह एक साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम है जहाँ स्ट्रेस की बड़ी भूमिका होती है। बच्चों में बार-बार पेशाब आने के कई कारण हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
बच्चों में पॉलाक्युरिया के लक्षणों में शामिल हैं
एक बार बच्चे में ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी एक लक्षण दिखाई देता है, तो डॉक्टर इसका कारण जानने के लिए कुछ टेस्ट करा सकते हैं फिर चाहे बच्चा ओएबी से पीड़ित हो या किसी और समस्या से पीड़ित से। टेस्ट के रिजल्ट से इसका कारण जानने में मदद मिलेगी। इस दौरान किए जाने वाले टेस्ट में शामिल है:
बच्चों में बार-बार पेशाब आने के कई उपचार हैं। समय के साथ इसकी फ्रीक्वेंसी कम होने लगेगी, जैसे जैसे बच्चा बड़ा होने लगेगा वो अपने ब्लैडर में पेशाब को लंबे समय के लिए रोक कर रख सकता है। यदि यह यूटीआई के कारण हो रहा है, तो कई बार डॉक्टर, बच्चे के लिए एंटीबायोटिक्स देने को कहते हैं। डॉक्टर सही तरीके से बाथरूम हैबिट अपनाने के लिए कहेंगे जैसे कि हर कुछ घंटों में टॉयलेट जाना चाहिए और वॉशरूम जाने तक कंट्रोल करना। इस तकनीक का उपयोग दुनिया भर के बच्चों के लिए किया जाता है और इसे ‘ब्लैडर रिट्रेनिंग’ कहा जाता है। यदि बच्चा एंग्जायटी से जुड़ी समस्या या स्ट्रेस से गुजर रहा है, तो बच्चे को प्रोत्साहित करे कि वह जिस पर विश्वास करता है उससे बात करें या फिर आप साइकोलॉजिस्ट की मदद लें और समझने की कोशिश करें कि बच्चे क्या बात परेशान कर रही है। अगर बच्चे को बार-बार पेशाब आने का कारण डायबिटीज है, तो डॉक्टर हाई ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल को कंट्रोल रखने के लिए इंसुलिन मेडिकेशन लिख सकते हैं।
रोकथाम हमेशा सबसे अच्छा विकल्प है और इस मामले में, आपके बच्चे को ओएबी विकसित करने से बचने के लिए विभिन्न उपाय किए जा सकते हैं, यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:
कई बार आसान घरेलू उपचारों से बच्चे में बार-बार पेशाब आने की समस्या दूर हो जाती है और यह आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। एक शेड्यूल फॉलो करें ताकि आपको पॉजिटिव रिजल्ट मिले, समय समय पर उसे वॉशरूम जाने के लिए कहें। बच्चे को ब्लैडर फ्रेंडली चीजें खाने-पीने के लिए कहें, जिसमें दही, पानी और फाइबर शामिल करें, चॉकलेट, कैफीनयुक्त ड्रिंक से परहेज करें, क्योंकि इससे बच्चे को पेशाब में जलन की समस्या पैदा हो सकती है।
कुल मिलाकर बच्चों में बार-बार पेशाब आना बच्चे और माता-पिता दोनों के लिए ही परेशानी का कारण हो सकता है। इस स्थिति का इलाज किया जा सकता है और ये हानिरहित है। ऊपर बताई गई टिप्स भी मदद करेंगी कि बच्चों में ओवर एक्टिव ब्लैडर न विकसित हो, जो बार-बार पेशाब आने का कारण बनता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसकी मसल्स का कंट्रोल बेहतर होता जाता है और फिर यह समस्या खुद ही ठीक हो जाती है। यह समझना जरूरी है कि ये परेशानी कुछ समय के लिए ही होती है और आप यह बात बच्चे को भी बताएं। अपने बच्चे को पॉजिटिव तरीके से सपोर्ट करें।
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