शिशुओं में कब्ज़ (कॉन्स्टिपेशन)

शिशुओं में कब्ज़ (कॉन्स्टिपेशन)

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विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि दुनिया में 10 से 15% लोग इरिटेबल बावल सिंड्रोम से पीड़ित है और 20% लोग पुरानी कब्ज़ से पीड़ित है। यह आपके बच्चे के लिए परेशानी का कारण बन सकता है और विशेष रूप से इसलिए क्योंकि उनकी पाचन और उत्सर्जन प्रणाली अभी विकसित हो रही होती है। शिशुओं में कब्ज़ के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए, आगे पढ़ें।

कब्ज़ क्या है?

कब्ज़ एक ऐसी स्थिति है जिसमें बेहद कड़ा, मिट्टी जैसा मल बन जाता है जिसके कारण बहुत दर्द होता है या मल त्यागने में मुश्किल होती है। चिकित्सकीय रूप से देखा जाए तो, एक व्यक्ति को कब्ज़ का निदान करना ज़रूरी है अगर वह सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग करता है। कब्ज़ वयस्कों की जीवनशैली के कई कारणों से उन्हें बड़ी संख्या में प्रभावित करता है। इनमें अधिकतर गलत आहार, व्यवहार या कभीकभी अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियाँ शामिल होती हैं। यह स्थिति शिशुओं में भी देखी जाती है।

नवजात शिशु से लेकर बच्चा पैदल चलने लगे, तब तक कब्ज़ कुछ बच्चों को परेशान कर सकता है, जिनमें कब्ज़ होने की उच्च प्राकृतिक प्रवृत्ति होती है। यह उनके पाचन तंत्र के काम करने के तरीके, कुछ खाद्य पदार्थों के प्रति उनके शरीर की प्रतिक्रिया, तरल पदार्थ या आहार सेवन जैसे अन्य कारकों के कारण हो सकता है। हालांकि हमेशा के लिए कब्ज की रोकथाम के साथसाथ उपचार भी संभव है, बेहतर होगा अगर हम बच्चों को वो सकारात्मक आदते सिखाएं जो उनमें एक स्वस्थ आंत्र प्रणाली तैयार करे।

आवर्ती कब्ज़ सिर्फ एक दर्दनाक अनुभव नहीं है। हालांकि बच्चे केवल परेशान रहते हैं लेकिन शिकायत नहीं कर पाते, जब ऐसे बच्चे थोड़े बड़े होते हैं और बारबार कड़े मल के कारण कब्ज़ से बच्चे की मल त्यागने की प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके कारण, दर्दनाक अनुभव से बचने के लिए बच्चा मल त्यागने के बजाए उसे रोके रखता है जो स्थिति को और ख़राब कर देता है।

जिस बच्चे को कब्ज़है, वह लगातार कई दिनों तक मल नहीं त्यागता। कभीकभी लगातार कब्ज़ के कारण मलाशय की मांसपेशियां, या अवरोधिनी गुदा अपनी संकुचन शक्ति खो सकता है, जिससे मलाशयी असंयम हो सकता है। इसका मतलब है कि मलाशय के पास की तंत्रिका क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिससे गैस निकलते समय मल का कभीकभी रिसाव होता है या अत्यधिक गंभीर परिस्थितियों में मल त्यागने पर नियंत्रण पूर्ण रूप से खत्म हो जाता है।

कब्ज़ के कारण

एक शिशु जो कई दिनों से मल नहीं त्याग रहा है, तब भी उसे इस समस्या से पीड़ित संकेत नहीं कह सकते हैं। हालांकि, अगर शिशु मल त्याग के दौरान बहुत परेशान और चिड़चिड़ा हो जाता है, तो मातापिता को अधिक ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है।

मल की बनावट की सावधानीपूर्वक निगरानी मातापिता को समझने में मदद कर सकती है कि बच्चे को कब्ज़ है या नहीं। शिशुओं में, मल त्यागने की आवृत्ति उनके आंत्र क्रिया के बारे में सही जानकारी नहीं दे सकती है।

यह स्थिति कई कारणों से हो सकती है:

1. ठोस खाद्य पदार्थ

जब शिशु को ठोस खाद्य पदार्थ खिलाना शुरू किया जाता है तब आमतौर पर पाचन तंत्र को इसका आदि होने में थोड़ा समय लगता है और परिणामस्वरूप कब्ज़ हो सकता है। जिन खाद्य पदार्थों के कारण बच्चे को कब्ज़ होता है, उनमें केला, चावल, अनाज, चीज़ और गाजर, शामिल होते हैं जो पौष्टिक तो होते हैं, लेकिन इनमें फाइबर की कमी होती है जो मल त्यागने के लिए ज़रूरी है। इसलिए, बेहतर होगा अगर इस प्रकार के खाद्य पदार्थ की मात्रा थोड़ी कम दी जाए और आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाए ताकि आहार में रुक्षांश रहे और कब्ज़ को दूर रखा जा सके।

2. फॉर्मूला दूध

फॉर्मूला दूध में प्रोटीन घटक आपके बच्चे में कब्ज़ पैदा कर सकता है, और ब्रांड को बदलने से कभीकभी स्थिति बदल सकती है। आम धारणा के विपरीत, फार्मूला दूध में लोह को कब्ज़ का कारण नहीं पाया गया है।

3 निर्जलीकरण

निर्जलीकरण

हालांकि आपका नवजात शिशु मुख्य रूप से तरल आहार पर निर्भर हो सकता है, क्योकि वह स्तनपान या फार्मुला दूध लेता है। तब भी हो सकता है कि उसकी आवश्यकता अनुसार उसे पर्याप्त मात्रा में तरल नहीं मिल रहा हो। ऐसे मामलों में, आंत्र से पानी शरीर में अवशोषित हो जाता है, जिसके फलस्वरूप मल कड़ा हो जाता है। सुनिश्चित करने के लिए कि बच्चे में पानी की आवश्यकता पूरी हो दूध पिलाने के बाद उसे कुछ घूंट पानी या जूस दिया जा सकता है। हालांकि छह महीने से छोटे बच्चों के लिए केवल स्तन के दूध या फार्मूले की सलाह दी जाती है, कब्ज़ वाले बच्चे के लिए, यह उपाय कुछ राहत प्रदान कर सकता है।

4. दूध के प्रोटीन के प्रति एलर्जी

माँ द्वारा उपभोग किए जाने वाले दूध के उत्पादों की सामग्री स्तनपान के ज़रिए उस बच्चे में जा सकती है जिसे दूध के प्रोटीन के प्रति असहिष्णुता हो। इसके कारण बच्चे को कब्ज़ हो सकता है।

5. हार्मोनल असंतुलन

कभीकभी जब प्राकृतिक हार्मोन संतुलित तरीके से स्रावित नहीं होते हैं, तो बच्चे और वयस्क भी, कई प्रकार के लक्षणों का सामना करते हैं। बच्चों में, यह सूखी त्वचा, धीमी गति से विकास, थकान और कभीकभी, कब्ज़ जैसे लक्षण पैदा कर सकता है।

संकेत और लक्षण

एक शिशु या बच्चे के मातापिता के रूप में, आप अपने बच्चे में छोटे से छोटे संकेत के प्रति चौकस रहते हैं, और इनमें से, सबसे महत्वपूर्ण है मल त्यागना।

स्तनपान करने वाले शिशुओं को शायद ही कभी कब्ज़ होता है। हालांकि, जब शिशुओं में मल त्याग की बात आती है, तो इसे विस्तार में जाना जा सकता है की क्या सामान्य है। यह ज्ञात है कि स्तनपान करने वाले बच्चे पोषण के रूप में अधिकांश दूध को अवशोषित करते हैं और कभीकभी दस दिनों में एक ही बार मल त्यागते हैं। लेकिन यह, फार्मुला दूध पीने वाले शिशुओं के लिए सही नहीं है। वे एक दिन में 3 से 4 बार तक मल त्याग कर सकते हैं।

आपके बच्चे की दिनचर्या जो भी हो, आप उसी की आदी हो जाती हैं। हालांकि, विकास संबंधी उपलब्धियाँ,उम्र और ठोस खाद्य पदार्थों के शुरू करने के साथ बदलाव आएंगे ही। कभीकभी, आप अपने बच्चे को मल त्याग करते समय ज़ोर लगाते देखेंगी या उसके डायपर में मल के छोटी कड़ी गांठे पाएंगी । यदि कब्ज़ जारी रहता है, तो बच्चा चिड़चिड़ा या रोता रहता है। ज़्यादातर मातापिता सतर्क हो जाते हैं, जब कुछ दिनों तक बच्चे में मल त्याग पूरी तरह से बंद हो जाता है। गंभीर मामलों में, मल के साथ रक्त आ सकता है जो कि मलाशय की दीवारों के फंटने से आ सकता है।

शिशुओं में कब्ज़ को कैसे रोकें?

  • आहार सेवन में परिवर्तन, नियमित विकास संबंधी उपलब्धियाँ और उनके शरीर में परिवर्तन के कारण, शिशुओं को कभीकभी कब्ज़, हो सकता है। हालांकि, मातापिता होने के नाते, आप कब्ज़ को रोकने के लिए एहतियाती उपाय कर सकती हैं।

  • फल और सब्जियों की अच्छी मात्रा स्वास्थ्यकर आहार में सुनिश्चित करें और साथ में तरल पदार्थ का भी सेवन पर्याप्त हो।

  • जैसे जैसे आपका बच्चा बढ़ता है, उसे खेलनेकूदने और व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित करें।

  • अपने बच्चे को पर्याप्त समय के लिए पेट के बल लेटने दें।

  • बच्चे को भोजन के बाद शौच करने के लिए प्रोत्साहित करके शौच संबंधी अच्छी आदते डाले। यह मल त्यागने के लिए, शरीर के प्राकृतिक आग्रह के अनुसार है।

  • यह मल त्यागने से जुड़े किसी भी नकारात्मक आदत को ख़त्म करने और बातों या पुरस्कारों के माध्यम से अच्छी आदतों को प्रोत्साहित करके लंबी अवधि में बच्चे को लाभान्वित करता है। यह विशेष रूप से उयुक्त है, जब बच्चा नियमित रूप से मल त्याग नहीं पाता है और यह उसे भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है।

अपने बच्चे के कब्ज़का इलाज कैसे करें?

हालांकि अधिकांश शिशुओं को कभी न कभी कब्ज़ हो ही जाता है, इसे अक्सर तुरंत ठीक किया जा सकता है अगर सही कदम उठाए जाएं। आप इन घरेलू उपचार का उपयोग करके कब्ज़ को लौटने से रोक सकती हैं।

1. दूध को बदलें

यदि आपका बच्चा केवल स्तनपान कर रहा है, तो अपने आहार को बदलने की कोशिश करें क्योंकि हो सकता है कि आप कुछ ऐसा खा रही हैं जिसके कारण आपके बच्चे को कब्ज़ हो रहा है। यदि बच्चा फार्मुला दूध पीता है तो दूध के ब्रांड को बदलने से कभीकभी मदद मिल सकती है।

2. तरल पदार्थ का सेवन बढ़ाएं

कम मात्रा में आलूबुखारे, नाशपाती या सेब का रस दें। यदि उसकी पसंद के लिए स्वाद बहुत तेज़ है, तो इसे पानी के एक हिस्से के साथ पतला करें। यह आप बच्चे को भोजन के बाद दे सकती हैं, ताकि उसकी भूख से समझौता न हो।

3. व्यायाम

यदि आपका शिशु पहले ही घुटनों के बल चलने लगा है, तो थोड़ा ज़्यादा घूमनेफिरने से उसे मल त्यागने में आसानी होगी। यदि वह अभी भी उस चरण तक नहीं पहुंचा है, तो उसे पीठ के बल लिटा कर उसके पैरों को धीरे से साइकिल चलाने जैसे घुमाएं जो उसके पाचन में मदद करेगा।

व्यायाम

4. मालिश

पेट की हल्की मालिश और नियमित रूप से उसे पेट के बल लिटाने से उसकी परेशानी कम की जा सकती है।

5. ठोस खाद्य पदार्थों का परिवर्तन

बच्चे के आहार में हर दिन दो भाग फल और तीन भाग सब्जियाँ दें। इन खाद्य पदार्थों में फाइबर आपके बच्चे को कब्ज़ से निपटने में मदद करता है और वह नियमित रूप से मल त्याग करता है।

6. खाद्य पदार्थ की प्यूरी बनाएं

फलों और सब्जियों को प्यूरी बनाकर खिलाने से बच्चा आहार फाइबर का सेवन आसानी से पचने योग्य कर पाता है। यह कब्ज़ वाले बच्चे के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो अभी तक ठोस भोजन चबाने में सक्षम नहीं हुआ है।

7. रेक्टल स्टिमुलेशन (मलाशयी उत्तेजन)

जब उपरोक्त उपायों में से कोई भी आपके बच्चे को राहत नहीं देता है, तो इस उपाय से कुछ मदद मिल सकती है। आपकी उंगली, रूई का फाहा या मलाशय थर्मामीटर का उपयोग करके हल्के से मलाशय उत्तेजन से बच्चे की आंत्र में उत्तेजना पैदा निश्चित रूप से होगी जिसके बाद वह मल त्याग करेगा। सुनिश्चित करें कि आप हलके हाथ से करें, और वेसिलीन का उपयोग करके उत्तेजक पर चिकनाई लगाएं, ताकि यह बच्चे को चोट न पहुंचे।

8. सपोसिटरी

अपने बाल रोग विशेषज्ञ के परामर्श के बाद, आप अपने बच्चे को मल त्यागने में मदद करने के लिए सपोसिटरी का उपयोग कर सकती हैं। आपके बच्चे की उम्र और स्थिति के आधार पर, डॉक्टर खुराक निर्धारित कर सकता है। यह मलाशय में डाली जाती हैं, जिससे 15-30 मिनट के भीतर मल त्याग हो जाता है। ये विशेष रूप से सहायक होती हैं यदि बच्चा पहले कड़ा मल त्यागने के कारण एनल फिशर से परेशान है।

9. जुलाब

जब आलुबुखारे का रस जुलाब में काम नहीं करता है, तो आपको खरीदे जाने वाले जुलाब का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करने की आवश्यकता होगी। सावधान रहें कि छोटे बच्चे जल्दी से निर्जलित हो सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल डॉक्टर की देखरेख में दिया जाना चाहिए।

कब्ज़ के बारे में कब चिंता करनी चाहिए?

ऊपर उल्लिखित अधिकांश घरेलू उपचार आपके बच्चे में कब्ज़ से निपटने में मदद करेंगे। लेकिन अगर प्राकृतिक उपचारों में से एक या उससे ज़्यादा उपचार काम नहीं करते हैं, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना ठीक होगा।

यदि आपका बच्चा असहज या बुखार महसूस करता है, तो किसी भी अंतर्निहित बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए एक चिकित्सीय जांच की आवश्यकता हो सकती है। खासकर अगर निम्नलिखित लक्षण बारबार नज़र आते हैं:

  • मल त्यागने के प्रयास में बच्चा चिड़चिड़ा या परेशान हो जाता है।
  • मल त्यागने के लिए, ज़ोर लगाने के बावजूद, भी मल त्याग नहीं होताहै।
  • बच्चे के मल के साथ रक्त निकलता है या आप उसकी गुदा में चीरे या फिशर देखते हैं। ये बच्चे के लिए विशेष रूप से दर्दनाक हो सकते हैं और उन पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
  • यदि बारबार होने वाले, कब्ज़ के परिणामस्वरूप मल असंयम होता है। आपको बहुत बार बच्चे के डायपर में मल लगा मिलता है या जब भी वह गैस निकालता है तो अनजाने में उसके साथ मल भी निकल आता है।

लालनपालन करना आसान नहीं है। लेकिन यह उतना भी मुश्किल नहीं होता जब आप जानते हैं कि आपके बच्चे की भलाई के लिए सबसे अच्छा क्या है। बस यह सुनिश्चित करें कि कब्ज़ आपकी परेशानी का कारण नहीं हो। या आपके बच्चे को परेशान न करें । कुछ सरल चरणों का पालन करें, और अपने बच्चे पर ध्यान दें जिससे किसी भी शुरुआती लक्षणों का पता लग सके।