बच्चों में उल्टी की समस्या – जानें प्रकार, कारण और उपचार

बच्चों में उल्टी की समस्या - जानें प्रकार, कारण और उपचार

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आपका बच्चा सुबह उठता है और अपने नाश्ते को छूने से भी मना कर देता है। यह बच्चा जो आमतौर पर खुश और मस्त रहता है, वह तुनक-मिज़ाज और चिड़चिड़ा हो जाता है। फिर अचानक ही उसने सुबह से जो कुछ खाया है वह सब उल्टी कर बाहर निकाल देता है। भले ही उल्टी, अनपचे भोजन से छुटकारा पाने में मदद करती है लेकिन अगर आपका बच्चा बार-बार उल्टी करता है, तो यह अत्यधिक चिंताजनक बात है। बेशक पेट प्राकृतिक तरीके से साफ हो रहा है लेकिन लगातार उल्टी होना स्वाभाविक रूप से एक गंभीर समस्या है।

उल्टी के दौरान आपका बच्चा मुँह के माध्यम से अपने पेट की सामग्री को बाहर निकाल देता है। उल्टी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे गैस की समस्या, कुछ खराब खा लेना, अत्यधिक खाना या सिर पर चोट लग जाना। कैंसर के कुछ प्रकार भी उल्टी के लिए ज़िम्मेदार माने जाते हैं और इसलिए संभावित कारण का पता तुरंत लगाया जाना चाहिए।

उल्टी के प्रकार जो आपका बच्चा अनुभव कर सकता है

आपका बच्चा निम्नलिखित प्रकार की उल्टी का अनुभव कर सकता है:

1. दूध उलटना

यदि आप अपने बच्चे को स्तनपान कराती हैं, तो हर स्तनपान के तुरंत बाद शिशु का थोड़ी मात्रा में दूध को उलटना एक आम बात है।

2. बलपूर्वक उल्टी

जब आपका शिशु बलपूर्वक उल्टी करता है, तो इसे प्रक्षेप्य उल्टी कहा जाता है। हालांकि इसकी मात्रा काफी ज़्यादा लग सकती है, लेकिन उल्टी में आमतौर पर शिशु को दिया गया आखिरी भोजन ही होता है। इस तरह की उल्टी कभी-कभार हो सकती है लेकिन अगर हर बार खाने के बाद होती है तो यह चिंता का विषय हो सकता है।

3. प्रतिवाह

इस तरह की उल्टी आमतौर पर छोटे बच्चों में होती है। ऐसा तब होता है जब बच्चे के पेट का ऊपरी वाल्व अनायास ही खुल जाता है। इससे पेट की सामग्री भोजन नली में वापस विपरीत दिशा में आने लगती है। शिशुओं में प्रतिवाह आमतौर पर हानिरहित होता है और जब वे सीधे बैठना या चलना शुरू कर देते हैं तब यह रुक जाता है।

बच्चों में उल्टी होने के कारण

निम्नलिखित कुछ सामान्य कारण हैं जिनसे बच्चों को उल्टी हो सकती है:

1. कुछ खाद्य पदार्थों से एलर्जी

आपके बच्चे को दूध, गेहूँ, अंडे, मछली या मूँगफली जैसे कुछ खाद्य पदार्थों से एलर्जी हो सकती है और जब वह इनका सेवन करता है तो उसे मतली, उल्टी और पेट में दर्द का अनुभव हो सकती है।

2. जठरांत्र शोथ

इस संक्रमण से प्रभावित बच्चे अक्सर उल्टी जैसा महसूस करते हैं। जीवाणु, विषाणु और परजीवी, बच्चों में जठरांत्र शोथ के प्राथमिक कारण हैं और इससे दस्त की समस्या भी होती है।

3. पाचन की समस्याएं

यदि आपके बच्चे का उण्डुक (अपेंडिक्स)संक्रमित है या उसकी पाचन प्रणाली में कोई बाधा हो रही है, तो उसे उल्टी की समस्या हो सकती है। बच्चों में उल्टी होने का एक कारण पेट में एसिड प्रतिवाह (रीफ्लक्स) भी है।

4. खाद्य विषाक्तता

विषाक्त भोजन से गंभीर मतली और उल्टियाँ हो सकती हैं जिस कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। खाद्य विषाक्तता अक्सर बासी या ठीक से न पके हुए मांस, मुर्गी या मछली में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं से होता है। जब भी आपको विषाक्त भोजन का संदेह हो तो अपने बच्चे में मतली, पेट में दर्द और दस्त जैसे सामान्य संकेतों पर नज़र रखें।

5. तनाव और भावनात्मक उथल-पुथल

यदि आप एक नए शहर में रहने लगे हैं या यदि आपका बच्चा अब एक नए स्कूल में जाता है, तो यह बदलाव अत्यधिक तनाव के कारण बन सकते हैं। आपका बच्चा परीक्षा से पहले या परीक्षा के दौरान, वाद-विवाद/प्रतियोगिताओं में भाग लेने या नए लोगों से बातचीत करने में भी तनाव महसूस कर सकता है। यह स्थिति भी अक्सर बच्चों में मतली और उल्टी का कारण होती है।

6. फ्लू और अन्य बीमारियाँ

मौसमी एलर्जी, पेट में एसिड प्रतिवाह, स्वाइन फ्लू और कान के संक्रमण कुछ ऐसे रोग हैं जो छोटे बच्चों में उल्टी का कारण हो सकते हैं। एपेंडिसाइटिस से गंभीर पेट दर्द होता है जिससे छोटे बच्चों में उल्टी हो सकती है। ऐसे मामलों में अपेंडिक्स को निकालना पड़ सकता है जिससे उल्टियाँ रुक सकती हैं। लैब्रिंथाइटिस (कान में संक्रमण) से अत्यधिक चक्कर आते हैं और यह बच्चों में उल्टी का कारण होता है।

7. मानसिक तकलीफ

अक्सर देखा गया है कि जब बच्चा भावनात्मक आघात (परिवार में मृत्यु या तलाक या माता-पिता के अलगाव) से गुज़रता है, तो यह अत्यधिक उल्टी का कारण बन जाता है। मस्तिष्क में ट्यूमर, मस्तिष्क में हो रही सूजन की वजह से होता है और यह दबाव बच्चों में उल्टियों का कारण हो सकता है।

बच्चों में उल्टी के लक्षण

बच्चों में उल्टी के लक्षण

माता-पिता को बच्चों में निम्नलिखित संकेतों और लक्षणों पर नज़र रखनी चाहिए और फिर उल्टी का उपचार तदनुसार किया जा सकता है। वे हैं :

  1. तेज़ सिरदर्द
  2. मतली
  3. दिल की धड़कन बढ़ना
  4. त्वचा में पीलापन
  5. थकावट और सुस्ती
  6. भूख कम लगना
  7. शरीर में पानी की कमी
  8. लार टपकना या थूक आना
  9. चिड़चिड़ापन
  10. दस्त
  11. हल्का बुखार
  12. चक्कर आना
  13. तुनक-मिज़ाज और नींद आना
  14. पेट में दर्द या सूजन
  15. बार-बार उबकाई आना (ज़बरदस्ती उल्टी करने की कोशिश करना)

शरीर में पानी की कमी, बच्चों में उल्टी का एक प्रमुख और स्पष्ट दुष्प्रभाव है और शरीर में पानी की कमी के सामान्य लक्षण होते हैं :

  • बहुत ज़्यादा नींद आना
  • क्षीण नेत्र
  • कम या बिलकुल भी आँसू नहीं
  • थकान
  • मुँह सूखना
  • गहरी, तेज़ सांसे
  • पेशाब कम आना
  • दिनभर में डायपर का कम गीला होना
  • हाथ-पैर ठंडे पड़ना

निदान

डॉक्टर बच्चे की विस्तृत जाँच करता है और इसके लिए उसे आपसे अत्यधिक जानकरी की आवश्यकता होती है, जैसे; उल्टियाँ कब शुरू हुई, बच्चे ने कितनी बार उल्टी की है, उल्टी से पहले क्या खाया था । इससे उसे आपके बच्चे की स्थिति का सही तरीके से निदान करने में मदद मिलेगी इसलिए आप सुनिश्चित करें कि आप उचित उत्तर दें।

डॉक्टर अपने निदान को पूरा करने के लिए इन बाहरी परीक्षणों के अलावा नीचे दिए गए चिकित्सीय परीक्षणों का सुझाव देते हैं, इन परीक्षण में शामिल हैं:

  1. पेट का एक्स-रे: यह एक्स-रे, आपके बच्चे के पेट या पाचनतंत्र में उत्पन्न किसी भी समस्या की पहचान करने के लिए उपयोगी होता है। इस प्रकार का एक्स-रे उल्टी के कारणों का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है।
  2. पेट का सी-टी स्कैन: यह परीक्षण किसी ट्यूमर या एपेंडिसाइटिस की उपस्थिति की जाँच करने के लिए किया जाता है। बच्चे के पेट की स्पष्ट छवियाँ कंप्यूटर और एक्स-रे मशीन का उपयोग करके ली जाती हैं।
  3. रक्त परीक्षण: संक्रमणों की जाँच के लिए किया जाने वाला यह सबसे पहला परीक्षण है। पेट, जिगर या मस्तिष्क जैसे अंगों में किसी भी दोष का पता लगाने के लिए भी रक्त परीक्षण की सलाह दी जाती है।
  4. पेट या श्रोणि का अल्ट्रासाउंड: ऐसे परीक्षणों में ध्वनि तरंगों का उपयोग यह दिखाने के लिए किया जाता है कि आंतरिक अंग भीतर से कैसे दिखते हैं। यदि आपका बच्चा पेट, पाचन तंत्र या उण्डुक (अपेंडिक्स) से संबंधित समस्याओं से पीड़ित है, तो अल्ट्रासाउंड इसका पता लगाने में सक्षम है।

उपचार

आमतौर पर परेशान अभिभावक यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि बच्चों की उल्टियों को कैसे रोका जाए क्योंकि उल्टियों के कारण शरीर से तरल पदार्थ कम हो जाता है। इस वजह से आपके बच्चे के शरीर में पानी की कमी हो जाती है और इसलिए इसका त्वरित उपचार शुरू करना आवश्यक है। यदि इसका उपचार शुरू नहीं किया तो स्थिति और खराब हो सकती है और अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

यदि आपका बच्चा उल्टियाँ कर रहा है, तो यहाँ कुछ इसके उपाय बताए जा गए हैं:

  • ओ.आर.एस. या ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन : यदि उसे ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन, जो आमतौर पर ओ. आर. एस. के रूप में जाना जाता है, यह शरीर में पानी की गंभीर कमी को जल्दी ही रोक सकता है। नमक, चीनी और पानी का यह मिश्रण अत्यधिक उल्टियों के कारण खोए हुए तरल पदार्थों की कमी को दूर करने में मदद करता है। आपका बच्चा बेहतर महसूस करे इसलिए इसे बच्चे को नियमित अंतराल में दें ।
  • मतली-विरोधी दवाइयाँ : बच्चे के पेट को आराम देने और मतली की समस्या को खत्म करना अत्यधिक आवश्यक है । मतली की दवाइयाँ बिलकुल वही कार्य करती हैं और आपके बच्चे को उल्टियों की समस्या से राहत देने में मदद करती हैं।
  • प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक्स): डॉक्टर निश्चित रूप से प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) दवाइयों की एक खुराक लिखेंगे ताकि आपका बच्चा फ्लू या जीवाणुओं के हमलों से बच सके। लेकिन, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपका बच्चा डॉक्टर द्वारा सुझाए गए कोर्स को पूर्ण करे, अगर किसी भी कारण से वह ऐसा नहीं कर पाता है तो अपेक्षित परिणाम मिलना संभव नहीं हो सकता है।
  • अंतःशिरा तरल पदार्थ पहुँचाना: यदि आपका बच्चा तरल पदार्थ पीने से मना करता है तो आपको यह कदम उठाना पड़ सकता है। ऐसे में शरीर के लिए आवश्यक तरल पदार्थों को अंतःशिरा द्वारा दिया जाना ही अनिवार्य है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

बच्चों को उल्टियों से बचाव के लिए कुछ सुझाव

बच्चों को उल्टियों से बचाव के लिए कुछ सुझाव

अधिकतर मात-पिता को नहीं पता होता है कि वे अपने बच्चे की उल्टियों का क्या उपाय करें, निम्नलिखित युक्तियाँ उल्टी की समस्याओं को खत्म करने में मदद कर सकती हैं :

  1. अपने बच्चे के आहार पर ध्यान दें : इस अवधि के दौरान आपके बच्चे के आहार की एक महत्त्वपूर्ण और आवश्यक विशेषता होनी आवश्यक है – बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ। ओ.आर.एस. या ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन को आप नियमित रूप से अपने बच्चे को पिलाएं। पानी और फलों का पतला किया हुआ रस, शरीर में पानी की कमी पूरी करने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। कार्बोनेटेड पेय और सेब, नाशपाती या चेरी जैसे फलों के रस से बचें क्योंकि उनमें शर्करा काफी उच्च मात्रा में होती है। अपने बच्चे के आहार में फल, सब्जियाँ, दही, चावल और आलू शामिल करें। वसायुक्त और तैलीय खाद्य पदार्थ जो पचाने में मुश्किल होते हैं, ऐसे खाद्य पदार्थों से पूरी तरह बचें। डॉक्टर की सलाह अनुसार ही शिशु का स्तनपान छुड़वाएंहे। शिशुओं के लिए स्तन का दूध पचाना आसान होता है और इसलिए आमतौर पर उनके लिए ओ. आर. एस. की सलाह नहीं दी जाती है।
  2. ओरल रिहाइड्रेशन चिकित्सा : हालांकि यह चिकित्सा अपने आप से उल्टियाँ रोकने में मदद नहीं करती है, लेकिन यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में सक्षम है। ओ.आर.एस. मिश्रण ज़्यादातर बिना डॉक्टर की सलाह के ही स्थानीय औषधालयों में उपलब्ध होता है। यदि शरीर में पानी की हल्की-सी भी कमी या थोड़े भी दस्त लगें तो अपने बच्चे को तुरंत एक चम्मच ओ.आर.एस. कप या दूध की बोतल में दें। यदि आपका बच्चा अपना सामान्य आहार खाने या पीने से इनकार करता है तो उसे ओ.आर. एस. दें। पैकेट पर छपी अनुशंसित खुराक के बारे में पढ़ें और अपने बच्चे को नियमित अंतराल पर पिलाएं। ओ.आर.एस. घोल ठीक से लिए जाने के बाद ही आपका बच्चा अपना नियमित आहार ले सकेगा।
  3. उल्टी के कारणों कम करें : धूम्रपान, गर्मी, तेज़ गंध, आर्द्रता, भरे हुए और इत्र जैसे बाहरी कारक उल्टी आने के कारण बन सकते हैं, इनसे जितना हो सके बचें। अपने बच्चे के लिए एक हवादार ठंडा कमरा चुनें, कमरे में नमी की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए एक ह्यूमिडिफायर लगाना अच्छा विकल्प है। अचानक हलचल से, उल्टी और मतली की शुरुआत हो सकती है इसलिए अपने बच्चे को यथासंभव लंबे समय तक बिस्तर में ही रहने दें। इत्र, डियोडोरैंट और रूम फ्रेशनर आपके बच्चे को असहज कर सकते हैं, इसलिए जब तक आपका बच्चा पूरी तरह से ठीक न हो जाए, इसके उपयोग से परहेज़ करें। इस अवधि के दौरान तेज़ गंध वाले खाद्य पदार्थों से भी अत्यधिक दूरी बनाए रखें।

बच्चों में उल्टी जैसी समस्याओं के लिए घरेलू उपचार

यदि आपके बच्चे को बार-बार उल्टी होती है, तो नीचे दिए गए घरेलू उपचारों को आज़माएं। यह प्राकृतिक व सरल उपाय आपके बच्चे को उल्टी से राहत देंगे:

  1. नमक और चीनी का घोल : यह सदियों पुराना उपाय है जिसे घरेलू उपायों द्वारा बहुत जल्द बनाया जा सकता है। लगातार उल्टियाँ पेट की परत को नुकसान पहुँचा सकती हैं, शरीर में पानी की गंभीर कमी उत्पन्न कर सकती हैं और बच्चे के शरीर से आवश्यक पोषक तत्वों को बाहर निकाल सकती हैं। यह मिश्रण शरीर में तरल पदार्थों व पानी की कमी को पूरा कर सकता है।
  2. पपीता : अनेक जीवाणुरोधी तत्वों से परिपूर्ण यह फल अत्यधिक सरलता से उपलब्ध होता। है पपीता पाचन में मदद करता है और शरीर में उपलब्ध अम्ल को कम करता है। पपीते में सभी आवश्यक प्राकृतिक किण्वक (एंजाइम) होते हैं जो भोजन के सुचारू और त्वरित पाचन में मदद करते हैं। पपीता, पेट की खराबी का कारण बने हानिकारक कीटाणुओं को दूर करने में भी सहायक होता है।
  3. प्याज़ का रस : एक चम्मच प्याज के रस में, लगभग एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर बच्चे को पिलाएं। प्राकृतिक रूप से प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) गुणों के कारण यह मिश्रण उल्टी और मतली को रोकने के लिए एक अत्यंत उपयोगी है है क्योंकि इसमें । अगर अदरक आसानी से उपलब्ध न हो तो डेढ़ कप प्याज़ का रस लें और उसमें दो चम्मच ऑर्गेनिक शहद मिला लें, उल्टियाँ रुकने तक अपने बच्चे को हर बार आधा चम्मच दें।
  4. जीरा : उल्टी के लिए यह एक बेहतरीन उपचार है और जीरा, अग्नाशय किण्वक (एंजाइम) के स्राव को बढ़ाता है। इस उपचार से पाचन में सुधार आता है और पेट भी ठीक रहता है साथ ही बेचैनी व मतली जैसी समस्याएं भी कम होती हैं। एक कप उबले हुए पानी में ताज़ा पिसा हुआ जीरा डालें और आप इसमें थोड़ा जायफल भी डाल सकती हैं। जायफल, बच्चों की उल्टी को ठीक करने में इसके असर को बढ़ाता है। बच्चों की उल्टी को ठीक करने के लिए एक छोटे कटोरे में आधे छोटे चम्मच जीरे में, इलायची और एक बड़ा चम्मच शहद मिला कर भी बच्चे को दे सकती हैं। सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा इस मिश्रण का सेवन धीरे-धीरे करे, ऐसा करने से उसे उल्टी नहीं होगी।
  5. सेब साइडर सिरका : एक कटोरे में एक बड़ा चम्मच शहद और थोड़ा सा सेब का सिरका निकालें और उसे एक गिलास पानी में मिला लें। इस मिश्रण को नियमित अंतराल में अपने बच्चे को पिलाएं, सिरके में मौजूद सूक्ष्मजीविरोधी (एंटी-माइक्रोबियल) गुण भोजन से होने वाली विषाक्तता ठीक करने में मदद करता है। पानी में सिरका मिलाकर, बच्चे को उसी मिश्रण से कुल्ला करवाएं, यह उल्टी की अम्लीय गंध को खत्म करता है साथ ही सिरका शारीरिक विषहरण (डिटॉक्सीफाई) का भी एक बेहतर तरीका है।
  6. पुदीना : यदि आप उल्टी और मतली से जल्दी राहत पाना चाहते हैं, तो पुदीना एक अद्भुत औषधि है । इस उपाय को करने के लिए, उबलते हुए पानी में एक बड़ा चम्मच सूखे (ऑर्गेनिक) पुदीने के पत्तों को डालें। पुदीने की पत्तियों को 10 मिनट के लिए पानी में भिगो दें और फिर पत्तों से पानी को छान लें। उल्टी से राहत पाने के लिए दिन में तीन बार यह घोल दें। पुदीने की ताज़ा पत्तियाँ चबाना भी मतली की समस्या कम करने का एक सिद्ध तरीका है। एक छोटा चम्मच नींबू का रस, एक छोटा चम्मच पुदीने का रस और एक छोटा चम्मच शहद का मिश्रण उल्टी की समस्याओं में समान रूप से प्रभावी हो सकता है।
  7. अदरक : बच्चों में उल्टियाँ रोकने के लिए अदरक एक सिद्ध उपाय है क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से वमनरोधी गुण होते हैं। यह आपके बच्चे के पाचन तंत्र को शांत करने और जी मिचलाने के लिए प्रभावी रूप से कार्य करता है । एक कटोरी में एक छोटा चम्मच ताज़ा अदरक का रस निचोड़ें और इसमें लगभग एक छोटा चम्मच नींबू का रस डालें, इसे अच्छी तरह मिलाकर हर दो घंटे में अपने बच्चे को पिलाती रहें। यह उसे उल्टी के प्रकरण और मतली को दूर करने में मदद करता है। बच्चों को शहद मिली ताज़ी अदरक की चाय बहुत पसंद होती है तो आप यह भी आज़मा सकते हैं।
  8. चावल का पानी : चावल का पानी मूल रूप से सफेद चावल से निकला स्टार्च होता है। यदि उल्टी होने का कारण गैसट्राइटिस है तो चावल का पानी बहुत प्रभावी हो सकता है। सुनिश्चित करें कि आप सफेद चावल का उपयोग करें और भूरा नहीं क्योंकि सफेद चावल से निकला स्टार्च छोटे बच्चों के लिए आसानी से पचने योग्य होताहै। इसे बनाने के लिए, एक कप सफेद चावल लें और इसमें दो कप पानी डालकर उबाल लें। मिश्रण को छानकर चावल के पानी को एक कप में अलग रख लें।उल्टी से ग्रसित बच्चे को चावल का पानी पिलाएं, जल्द ही यह घरेलू उपचार उसे फायदा पहुँचाएगा।

डॉक्टर से कब जाँच करवाएं?

जब आप अपने बच्चे में निम्नलिखित लक्षणों को देखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना अत्यधिक महत्वपूर्ण है:

  • उल्टी में पित्त या रक्त
  • अनियंत्रित उबकाई और सांस लेने में तकलीफ
  • पेट दर्द
  • लगातार उल्टी होना
  • शरीर का तापमान 104 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा होना
  • मल में खून
  • बल-पूर्वक उल्टी
  • सुस्ती या धीमी प्रतिक्रिया

सावधानी बरतें

यदि बताई गई कुछ सावधानियाँ नहीं बरती गई तो आपके बच्चे को हो रही उल्टियों से गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  • सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा उल्टी करते समय बैठी या खड़ी स्थिति में है, यदि वह लेटी स्थिति में है तो उसका सांस घुट सकती है।
  • बच्चे से कहें कि वह अपना मुँह खुला रखे और उल्टी को किसी भी तरह से रोकने की कोशिश न करें। अगर बच्चा उल्टी को रोकने की कोशिश करता है, तो उल्टी गले में फँस कर दम घोट सकती है।
  • विशेष रूप से शिशुओं के मामले में अनियमित श्वास या सांस लेने में कठिनाई पर नज़र रखें।
  • उल्टियों के कारण शरीर में तेज़ी से पानी की कमी हो जाती है और यह थोड़े ही समय में एक खतरनाक स्थिति में बदल सकती है।
  • अनियमित या तेज़ धड़कन पर नज़र रखें, ऐसी किसी भी स्थिति होने पर तुरंत डॉक्टर से जाँच करवाएं।
  • बच्चे का मल उसके स्वास्थ्य का एक बेहतरीन संकेत होता है, दर्द व बलगम या रक्त के साथ मिश्रित मल एक विकार की ओर इंगित करता है ।

आमतौर पर उल्टी जठरांत्र शोथ (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) के कारण होती है और माना जाता है कि बच्चे के स्वास्थ्य में इससे कोई गंभीर समस्या उत्पन्न नहीं होती है। हालांकि, कभी-कभी यह एक गंभीर विकार का संकेत माना जाता है और इस स्थिति में चिकित्सक से जाँच करवाना अति-आवश्यक है। माता-पिता इस बात का खयाल रखें कि ऐसी कठिन परिस्थिति के संकेतों में सतर्क रहें और समस्या बढ़ने से पहले उपचार की जानकारी रखें ।