गर्भावस्था

गर्भ में बच्चे की पोजीशन और इसके बारे में कैसे जानें

गर्भावस्था के दौरान आपने कई वीडियो देखे होंगे जो गर्भ में बच्चे को दिखाते हैं। आपने सोनोग्राफी के दौरान अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को भी स्क्रीन पर देखा होगा और डिलीवरी के दौरान उसकी पोजीशन के बारे में सोचा होगा। गर्भावस्था की पूरी अवधि के दौरान, बच्चे खुद से ही अपनी पोजीशन को बदलते रहते हैं और डिलीवरी के लिए तैयार होते हैं।

बच्चे की अलग-अलग पोजीशन्स के बारे में समझना

लेबर के दौरान शिशु की स्थिति गर्भावस्था के दौरान आपके द्वारा देखी गई स्थितियों से अलग हो सकती है। आपकी ड्यू डेट से ठीक पहले, बच्चा आपके पेल्विस में नीचे उतर जाएगा और नीचे दी गई चार पोजीशन्स में से कोई एक अपना लेगा।

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1. एंटीरियर पोजीशन

डिलीवरी के लिए आदर्श स्थिति वह कही जाती है, जब बच्चे का सिर बर्थिंग कैनाल की ओर हो जाता है और उसकी ठोड़ी छाती में दब जाती है, और वह माँ की पीठ की ओर मुँह कर लेता है। आमतौर पर बच्चा गर्भावस्था के 3236 सप्ताह के दौरान इस स्थिति में आता है और डिलीवरी तक वैसे ही रहता है। कभी-कभी, ठोड़ी छाती में अंदर की ओर होने के बजाय बाहर की ओर हो सकती है, जिसका पता डॉक्टर को जांच के दौरान लग सकता है। कुछ मामलों में, बच्चे के हाथ भी सिर के साथ बर्थ कैनाल की ओर इशारा करते हुए हो सकते हैं।

2. ऑक्सिपिटो-पोस्टीरियर पोजीशन

यह पोजीशन ऊपर वाली पोजीशन से काफी मिलती-जुलती है। अंतर केवल इतना है कि इस मामले में बच्चा माँ के पेट की ओर मुँह किए होता है। इसे फेस-अप पोजीशन भी कहा जाता है, क्योंकि डिलीवरी के समय बच्चे का चेहरा सबसे पहले दिखाई देता है। अधिकांश बच्चे डिलीवरी से पहले एंटीरियर पोजीशन में आ जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसा नहीं करते। ऐसे मामलों में, लेबर लंबे समय तक जारी रह सकता है, कॉम्प्लीकेशन्स हो सकते हैं या यहाँ तक कि सी-सेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।

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3. ब्रीच

पहली दो स्थितियों के बिल्कुल उलट, इसमें बच्चे के नितंब बर्थ कैनाल की ओर और सिर ऊपर की ओर होता है। 100 में से 4 डिलीवरी के मामलों में यह पोजीशन होती है। बच्चों के पैर घुटनों पर मुड़कर सीधे उसके चेहरे को छू सकते हैं, या सीधे नीचे बर्थ कैनाल में भी हो सकते हैं। इनमें से प्रत्येक पोजीशन में गर्भनाल के साथ जोखिम होता है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे को नुकसान होने की संभावना होती है।

4. ट्रांसवर्स लाइ

इस पोजीशन में, बच्चा गर्भ के अंदर आड़ा होता है। डॉक्टर बच्चे के कंधे को महसूस करके इसका निरीक्षण कर सकते हैं। इस स्थिति में भी, गर्भनाल के आगे बढ़ने का जोखिम होता है और यदि बच्चा आवश्यक स्थिति में आने में विफल रहता है तो सी-सेक्शन की जरूरत पड़ सकती है। कभी-कभी, बच्चे को हाथों से या वैक्यूम का उपयोग करके आइडियल स्थिति में लाया जा सकता है और फिर प्राकृतिक रूप से डिलीवरी करवाई जा सकती है।

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नॉर्मल डिलीवरी के लिए कौन सी पोजीशन सबसे अच्छी होती है?

नॉर्मल डिलीवरी के लिए सबसे अच्छी पोजीशन लेबर के दौरान बच्चे के सिर की स्थिति पर निर्भर करती है। बर्थ कैनाल की ओर उसका सिर और माँ के पेट की ओर थोड़ी सी मुड़ी हुई उसकी पीठ, इस तरह की स्थिति आदर्श होती है और इससे बच्चे का जन्म जल्दी होता है। बच्चे का सिर सर्विक्स पर दबाव डालता है जिससे वह चौड़ा हो जाता है। जैसे ही आप पुश करना शुरू करती हैं, बच्चे के सिर का संकरा भाग पहले कैनाल में जाता है, एवं इसे और चौड़ा करता है। अंत की ओर, पूरा सिर पेल्विस के माध्यम से अपना रास्ता बनाता है और आपकी प्यूबिक बोन में नीचे खिसक जाता है।

स्टेशन और इंगेजमेंट क्या होते हैं?

स्टेशन और इंगेजमेंट जैसे शब्दों से आपको यह कॉम्प्लिकेटेड लग सकता है, जिससे आपको ज्यादा चिंता हो सकती है। लेकिन ये केवल बच्चे की लेबर के दौरान पोजीशन बताते हैं।

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पेल्विस में वह स्थान जहाँ बच्चे का सिर या नितंब हैं, उसे स्टेशन कहा जाता है। इसे -3 से +3 के बीच संख्या द्वारा दर्शाया जाता है। जो बच्चा अभी भी माँ की कूल्हे की हड्डी के ऊपर होता है उसके लिए संख्या -3 होती है। जिस बच्चे का सिर डिलीवरी के दौरान पेल्विस से निकल जाता है, उसके लिए यह +3 होती है। स्टेशन 0 पर, बच्चे का सिर पेल्विस के अंदर रीढ़ की हड्डी के लेवल के रूप में होता है और इंगेज रहता है।

इंगेजमेंट वह है जहाँ एक्टिविटी होती है और बच्चा माँ की पेल्विस के माध्यम से अपनी बाहर आने की शुरुआत कर देता है। जिन महिलाओं का यह पहला बच्चा होता है, वे अक्सर लेबर से एक या दो सप्ताह पहले इंगेजमेंट में आ जाती हैं। दूसरी बार माँ बनने वालों के लिए, इंगेजमेंट तभी होता है जब लेबर सेट हो जाता है।

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फ्लेक्सन क्या है?

फ्लेक्सन एक ऐसा शब्द है जो शायद ही आपने सुना हो, जब तक कि डिलीवरी का कोई विशेष मामला न हो। फ्लेक्सन आमतौर पर यह निर्धारित करने के लिए है कि आपके बच्चे की ठोड़ी उसकी छाती को छू रही है या नहीं। फ्लेक्सन का मतलब यह होता है, जबकि एक्सटेंशन का मतलब है कि बच्चे की गर्दन पीछे की ओर झुकी हुई है। ब्रीच डिलीवरी के मामले में या यदि आपके जुड़वां बच्चे हैं, तो डॉक्टर फ्लेक्सन का आकलन करेंगे और उसके अनुसार डिलीवरी का प्रोसीजर सुझाएंगे।

अपने बच्चे की पोजीशन कैसे जानें?

माएं गर्भ में अपने बच्चे की स्थिति को स्वयं महसूस कर सकती हैं। ऐसा करने के लिए उंगलियों के पोरों का इस्तेमाल करें।

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1. बच्चे की हलचल समझें

कुछ दिनों या एक हफ्ते के लिए निरीक्षण करें और समझें कि बच्चा हेल्दी है या नाजुक है। छोटे मूवमेंट्स का मतलब ज्यादातर बच्चे के हाथों का हिलना होता है, जो आम तौर पर उसके चेहरे के पास होते हैं। तेज मूवमेंट्स, जैसे किक और पुश, ये बच्चा अपने पैरों से करता है।

2. हार्ड सतह टटोलें

पेट पर हाथ घुमाकर कड़ी सतह को टटोलने की कोशिश करें। यदि आप इसे हल्के हाथों से पुश करें या कुछ विशेष जगहों पर ही हलचल होती हो तो वह संभवतः बच्चे का सिर होगा। वहीं अगर आपको अंदर कुछ घूमता हुआ सा महसूस हो तो वह बच्चे के नितंब होंगे।

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3. बच्चे की पीठ को महसूस करें

अपने बच्चे के सिर या नितंबों को समझने के बाद, लंबी और मुलायम सतह ढूंढें। हल्के हाथों से इसे दबाकर देखें, पर ध्यान रहे कि आपको इससे दर्द न हो।

4. दिल की धड़कन सुनें

बच्चे के दिल की धड़कनों को उसकी पीठ से जोर से सुना जा सकता है। यदि आप उन्हें अपने पेट के ऊपरी हिस्से में सुन सकती हैं, तो आपका बच्चा ब्रीच पोजीशन में हो सकता है। यदि ये आपकी नाभि के नीचे से आते हुए लगे, तो शिशु का सिर नीचे की ओर हो सकता है।

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बेली मैपिंग क्या है?

डिलीवरी से पहले बेली मैपिंग आपके बच्चे की पोजीशन को समझने की एक तकनीक है। जब आप अपने डॉक्टर से मिलकर यह जान जाती हैं कि बच्चे का सिर कहाँ है, तो आप एक मार्कर और एक छोटी डॉल का उपयोग करके स्वयं मैपिंग कर सकती हैं। आप बच्चे के सिर के स्थान को चिह्नित करके और अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करके उसके नितंबों का पता लगाकर उस जगह को मार्क कर सकती हैं। दिल की धड़कन को सुनकर आपको ज्यादा अंदाजा मिल सकेगा और जहाँ आप किक महसूस करती हैं, वह जगह पैरों के लिए मार्क करें। इससे आप गर्भ में बच्चे की स्थिति के अनुसार डॉल पर मार्किंग कर सकती हैं।

क्या आप डिलीवरी के लिए अपने बच्चे की पोजीशन में सुधार कर सकती हैं?

आपका बच्चा हमेशा डिलीवरी के लिए सबसे आइडियल स्थिति में नहीं हो सकता है। हालांकि, कुछ ऐसे तरीके हैं जिनका उपयोग करके आप धीरे-धीरे अपने बच्चे को सही स्थिति में ला सकती हैं।

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  • जब भी आप बैठें, तो सुनिश्चित करें कि आपका पेल्विस आगे की ओर झुका हुआ हो
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज बॉल या बर्थ बॉल का उपयोग करें
  • जब भी बैठें तो आपके कूल्हे घुटनों से ऊपर होने चाहिए
  • दिन में कुछ एक बार अपने हाथों और घुटनों को फर्श पर रखकर बिल्ली जैसी स्थिति में खुद को रखें। नेचुरल जड़ता बच्चे को सही स्थिति में स्विंग कराने में मदद करती है

डिलीवरी के लिए अपने बच्चे की पोजीशन सुधारने के टिप्स

इतना सब होने के बाद भी, हो सकता है कि बच्चा लेबर के दौरान सही स्थिति में न हो। ऐसे में, बच्चे को सही स्थिति में लाने के लिए डॉक्टर या नर्स आपकी मदद करते हैं।

  • जब सर्विक्स फैलता है और डॉक्टर यूटरस तक पहुँच पाते हैं, तो वे ज्यादातर हाथों का इस्तेमाल करके बच्चे को सही पोजीशन में ले आते हैं, और फिर नॉर्मल डिलीवरी करवाते हैं।
  • यदि बच्चा ट्रांसवर्स पोजीशन में है, तो डॉक्टर बच्चे के पैरों को मोड़कर आड़ा करके उसे बाहर निकाल सकते हैं।
  • किसी भी मामले में, यदि डॉक्टर बच्चे से जुड़ा कोई जोखिम देखते हैं, तो स्वस्थ, सुरक्षित जन्म के लिए सी-सेक्शन की सलाह दे सकते हैं।

गर्भ में बच्चे की परवरिश और डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया बच्चे की पोजीशन सरल होने पर आसान हो जाती है। जब आप गर्भावस्था में आगे बढ़ती हैं, तो आवश्यक पोजीशन और लेबर की आसानी के लिए एक्सरसाइज और सावधानी के साथ, आप एक बेहद स्वस्थ बच्चे की आसान डिलीवरी की संभावना बढ़ा सकती हैं।

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यह भी पढ़ें:

बेबी मैपिंग – गर्भ में बच्चे की पोजीशन कैसे जानें
गर्भ में बच्चे को कैसे मूवमेंट कराएं – आसान ट्रिक्स
फीटल किक काउंट – गर्भ में बच्चे के मूवमेंट्स कैसे गिनें

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श्रेयसी चाफेकर

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