गर्भावस्था

इन संकेतों से जानें गर्भ में पल रहा बच्चा स्वस्थ है या अस्वस्थ

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अपने बच्चे के लिए किसी भी खतरे की संभावना को दूर करने के लिए, एक अस्वस्थ भ्रूण और एक स्वस्थ भ्रूण के बीच का अंतर समझना महत्वपूर्ण है। अगर इन लक्षणों को दूर न किया जाए तो इससे मिसकैरेज हो सकता है। मिसकैरेज एक अस्वस्थ बच्चा होने के सामान्य परिणामों में से एक है, जिसके कारण 20वें सप्‍ताह से पहले गर्भपात हो सकता है। हम इस लेख में मिसकैरेज के चेतावनी के कुछ संकेतों के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान एक स्वस्थ बच्चे के क्‍या लक्षण हैं?

हर माता-पिता एक स्वस्थ बच्चा चाहते हैं और उसके लिए सब कुछ करने को तत्‍पर रहते हैं। लेकिन, कभी-कभी जानकारी का अभाव, अनएक्सपेक्टेड परिणामों का कारण बन सकता है। इसलिए, एक स्वस्थ भ्रूण के संकेतों को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है। गर्भावस्था के शुरुआती चरण में स्वस्थ बच्चे के कुछ लक्षण नीचे दिए गए हैं:

1. भ्रूण की गतिविधि

गर्भधारण के 5 महीने बाद बच्चा हरकत शुरू करता है। चिकित्सकीय भाषा में, भ्रूण की पहली हरकत को ‘क्वीकेनिंग’ कहा जाता है। एक 6 महीने का भ्रूण हिल-डुल में साउंड के प्रति रिएक्शन देता है। सातवें महीने के आसपास, भ्रूण प्रेरकों जैसे लाइट, साउंड या दर्द के लिए रिएक्शन देता है। आठवें महीने तक, एक बच्चा अपनी स्थिति बदलना शुरू कर देता है और बार-बार लात मारता है। स्टडी से पता चला है कि नौवें महीने तक, कम जगह के कारण हरकत कम हो जाती है। ये सभी संकेत हैं कि गर्भ में आपका बच्चा स्वस्थ है।

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2. सामान्य वृद्धि

भ्रूण की वृद्धि और विकास को मापने के कई तरीके हैं। आपका डॉक्टर आपके बच्चे के स्वास्थ्य और विकास पर नजर रखने के लिए एक अल्ट्रासॉउन्ड करेगा। आमतौर पर, एक भ्रूण हर महीने 2 इंच बढ़ता है। इसलिए, सातवें महीने तक, आपका शिशु 14 इंच लम्‍बा होना चाहिए। तीसरी तिमाही में, एक स्वस्थ भ्रूण का वजन हर सप्‍ताह 700 ग्राम तक बढ़ता है। आमतौर पर, नौवें महीने तक, एक भ्रूण का वजन लगभग 3 किलोग्राम होता है और यह 18-20 इंच लम्‍बा होता है। ये सभी गर्भ में एक स्वस्थ भ्रूण के लक्षण हैं।

3. दिल की धड़कन

गर्भावस्था के पांचवें सप्ताह के दौरान बच्चे का दिल धड़कना शुरू कर देता है। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक माध्‍यम से भ्रूण की निगरानी से पहली तिमाही के अंत में इसका पता लगाना बहुत आसान है। आपके बच्चे के हृदय के स्वास्थ्य की पुष्टि करने के लिए, आपका डॉक्टर एक नॉन-स्ट्रेस टेस्ट कर सकता है। यह परीक्षण भ्रूण की हृदय गति की निगरानी करता है और संभावित खतरों के बारे में, यदि कोई हो, तो जानकारी देता है। वैकल्पिक रूप से, कुछ डॉक्टर आपके पेट को छूकर भी दिल की धड़कन की गिनती कर सकते हैं। एक स्वस्थ दिल की धड़कन 110 से 160 बीट्स प्रति मिनट के बीच होती है।

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4. डिलीवरी से पूर्व भ्रूण की स्थिति

नौवें महीने के दौरान, एक बच्चे की हरकतें समाप्त या न्यूनतम हो जाती हैं। एक स्वस्थ बच्चा पहले सिर बाहर होने की स्थिति में होता है और जन्म नाल की ओर बढ़ने लगता है।

5. गर्भवती माता में बढ़ता वजन और पेट

गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना स्वस्थ गर्भावस्था का एक निश्चित संकेत है। लगभग 12-15 सप्‍ताह की गर्भवती माताओं में वजन बढ़ना शुरू हो जाता है। आप अपने डॉक्टर से अपने वजन की नियमित जाँच करने के लिए कह सकते हैं और जो आपको इस बात की जानकारी दे सकता है कि आपकी गर्भावस्था सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है या नहीं। जैसे-जैसे महीनों गुजरते हैं आपका पेट भी आकार में बढ़ने लगता है।

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एक अस्वस्थ भ्रूण के लक्षण

पाँचवें महीने के दौरान, एक भ्रूण साउंड, प्रकाश और दर्द के प्रति अधिक प्रतिक्रियाशील हो जाता है। यह एक ऐसी अवधि है जब वे विभिन्न खतरों के सम्‍पर्क में आ जाते हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वृद्धि और विकास को प्रभावित कर सकते हैं।

यदि समस्याएं बाहर से दिखाई दे जाती हैं, तो उनसे निपटने के लिए उपाय किए जा सकते हैं। लेकिन आप अपने गर्भ के अन्‍दर एक अस्वस्थ भ्रूण को कैसे पहचान सकते हैं? जवाब सरल है, आपको बस इन चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना होगा।

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1. असामान्य फंडल ऊँचाई

फंडल ऊँचाई डॉक्टर को यह मूल्यांकन करने में मदद करती है कि महिला का गर्भाशय बढ़ रहा है या नहीं। फंडल ऊँचाई मापने के लिए, आपको लेटने के लिए कहा जाएगा और टेप का उपयोग करके, यूट्रस के टॉप से प्यूबिक बोन तक की लम्‍बाई को मापा जाएगा। आमतौर पर, 16 सप्ताह के बाद, फंडल ऊँचाई गर्भावस्था की प्रगति से मेल खाती है।

यदि आपके गर्भाशय की ऊँचाई उतनी नहीं है, तो यह आपकी गर्भावस्था के साथ एक समस्या का संकेत देती है। इसका कारण बहुत अधिक या बहुत कम एमनियोटिक द्रव्‍य या पैर की तरफ से बच्‍चा हो सकता है। सबसे खराब स्थिति में, इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि भ्रूण का विकास सही ढंग से नहीं हो रहा है।

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2. दिल की धड़कन का कम या न होना

यद्यपि पाँचवें सप्‍ताह के बाद एक बच्चे का दिल धड़कना शुरू हो जाता है, लेकिन दसवें सप्ताह के आस-पास इसे पता लगाना आसान हो जाता है। एक भ्रूण के दिल की धड़कन का पता इलेक्ट्रॉनिक भ्रूण निगरानी या कुछ मामलों में, आपके पेट को छूने और प्रति मिनट बीट की संख्या (बीपीएम) की गिनती से लगाया जा सकता है।

कई बार, शिशु की स्थिति में बदलाव या गर्भनाल से जुड़े मुद्दों के कारण दिल की धड़कन का पता लगाना संभव नहीं होता है। ऐसी स्थिति में, आपका डॉक्टर आपको अपनी अगली विजिट पर फिर से कोशिश करने के लिए कह सकता है। हालांकि, अगर वह अभी भी भ्रूण के दिल की धड़कन का पता नहीं लगा सकती है, तो दिल की धड़कन के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए एक अल्ट्रासाउण्‍ड परीक्षण की सलाह दी जा सकती है। कुछ मामलों में, दिल की धड़कन में अभाव भ्रूण के विकास में कमी या सबसे खराब मामलों में, एक बेजान भ्रूण का संकेत देती है।

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3. इन्‍ट्रयूटराइन ग्रोथ रेस्‍ट्रिक्‍शन (आईयूजीआर)

इन्‍ट्रयूटराइन ग्रोथ रेस्‍ट्रिक्‍शन भ्रूण के विकास में हस्तक्षेप करता है। यदि आपकी जाँच में आईयूजीआर पॉजीटिव आता है, तो इसका मतलब है कि आपका भ्रूण अपनी गर्भकालीन आयु की तुलना में 10% छोटा है। यदि आप आईयूजीआर से पीड़ित हैं, तो सांस लेने में कठिनाई, हाई ब्लड शुगर और उच्च शरीर तापमान जैसी जटिलताएं प्रसव के बाद भी पैदा हो सकती हैं। इसलिए, इस स्थिति का बारीकी से निरीक्षण करने की आवश्यकता है। यह एक से अधिक बच्‍चों के मामले में भी हो सकता है, जहाँ कोई एक बच्‍चा आईयूजीआर से पीड़ित हो सकता है, लेकिन दूसरा बच्‍चा अप्रभावित रहता है।

प्लेसेंटा की असामान्य क्रियाशीलता के कारण यह समस्या होती है, जो सामान्य परिस्थितियों में बच्चे को सभी आवश्यक पोषक तत्व सुनिश्चित करती है। अन्‍य कारणों में किडनी की समस्याएं, एनीमिया और डायबिटीज शामिल हैं।

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4. लो एचसीजी लेवल

एचसीजी गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा द्वारा निर्मित एक प्रकार का हार्मोन है। एचसीजी का स्तर तिमाही के आधार पर पूरे गर्भावस्था में बढ़ता-घटता रहता है। आमतौर पर गर्भावस्था के 9वें सप्ताह से 16वें सप्ताह के दौरान एचसीजी का स्तर बहुत अधिक होता है। सामान्य स्तर हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं, इसलिए कम एचसीजी स्तर आपके लिए कोई डर का कारण नहीं है। हालांकि, मिसकैरेज या अस्थानिक गर्भावस्था एचसीजी के निम्न स्तर को प्रेरित कर सकती है और आपकी गर्भावस्था के लिए खतरा बढ़ा सकती है।

5. गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त ऐंठन

गर्भावस्था अपने साथ दर्द और पीड़ा भी लाती है। हालांकि, अत्यधिक दर्द जो मासिक धर्म के ऐंठन की तरह महसूस होता है, चेतावनी का एक और संकेत है। शुरुआती गर्भावस्था में, यह कम ब्लड फ्लो के कारण हो सकता है लेकिन अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो आपको अपने डॉक्टर से परामर्श करने की आवश्यकता हो सकती है।

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6. गर्भावस्था के दौरान रक्तस्राव

महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान स्पॉटिंग का अनुभव होता है, जो काफी सामान्य है। हालांकि, रक्तस्राव निसंदेह चिन्‍ता का विषय है और एक डॉक्टर द्वारा चेकअप किए जाने की आवश्यकता है। यह गर्भपात, हार्मोनल रक्तस्राव या आरोपण रक्तस्राव का संकेत हो सकता है।

7. अत्यधिक पीठ दर्द

गर्भावस्था के दौरान पीठ में दर्द का अनुभव होना आम बात है क्योंकि बढ़ता बच्चा रीढ़ और पीठ के निचले हिस्से में बहुत खिंचाव डालता है। जब आप एक से अधिक बच्‍चों की उम्‍मीद कर रहे हैं तो यह स्थिति बिगड़ जाती है। खैर, उस पीठ दर्द का ध्‍यान रखें जो पीठ में एक सुस्त दर्द के विपरीत गंभीर हो जाता है। इसके अलावा, अगर यह आपके शरीर के आगे के हिस्‍से में शुरू होता है और पीछे की ओर जाता है, तो यह अच्छा संकेत नहीं है। आपको अपने डॉक्टर से तुरन्‍त मिलना चाहिए।

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8. गर्भावस्था के दौरान योनि स्राव

गर्भवती महिलाओं में योनि स्राव एक सामान्य स्थिति होती है, और जैसे-जैसे गर्भावस्था बढ़ती है, यह बढ़ता जाता है। आमतौर पर, एक गर्भवती महिला का योनि स्राव स्पष्ट, पारदर्शी, सफेद और गन्‍धहीन होता है। हालांकि, यदि आप एक तेज गन्‍ध के साथ पीले या हरे रंग का डिस्चार्ज देखती हैं, तो बिना किसी देरी के अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। सर्विक्स की सूजन के कारण एब्नॉर्मल डिस्चार्ज हो सकता है, जो मिसकैरेज के संकेत को दर्शाता है।

9. मॉर्निंग सिकनेस का अचानक बंद होना

मॉर्निंग सिकनेस और गर्भावस्था परस्‍पर सम्‍बन्‍धित हैं। आमतौर पर, मॉर्निंग सिकनेस भ्रूण को प्रभावित किए बिना, पहली तिमाही के अन्‍त तक या उससे पहले ही खत्‍म हो जाती है। हालांकि, कुछ गर्भवती महिलाओं के लिए, मॉर्निंग सिकनेस अचानक कम हो सकती है क्योंकि एचसीजी का स्तर कम होना गर्भपात की ओर इशारा करता है। यह डॉक्‍टर की राय लेने और यह सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती है कि आपके बच्चे को कोई खतरा नहीं है।

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10. गर्भावस्था के दौरान बुखार

गर्भावस्था के दौरान बुखार को नजरअन्‍दाज नहीं करना चाहिए। बुखार से भ्रूण को बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण का खतरा हो सकता है।

11. स्तन का छोटा होना

गर्भावस्था के दौरान, एक महिला का शरीर कई हार्मोनल परिवर्तनों से गुजरता है। स्तन भी परिवर्तन से गुजरते हैं, और अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। जैसे-जैसे गर्भावस्था आगे बढ़ती है, वे भारी और भरे हुए भी महसूस होते हैं। हालांकि, स्तनों के आकार में अचानक कमी गर्भपात का संकेत दे सकती है।

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12. भ्रूण की गतिविधि नहीं होना

भ्रूण हरकतों को 18 सप्ताह के आसपास महसूस किया जा सकता है क्योंकि भ्रूण साउंड, लाइट और दर्द पर प्रतिक्रिया करना शुरू कर देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिला को इस अवधि के दौरान हर दो घंटे में लगभग 10 किक का अनुभव होना चाहिए। यदि भ्रूण असामान्‍य स्थिति में है, तो गिनती में गिरावट आती है। उचित उपचार के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करने का एक स्पष्ट संकेत है। मेडिकल हेल्प में देरी करने से दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो सकती है।

13. ब्लड शुगर का अचानक बढ़ना

गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर और रक्तचाप के स्तर का बढ़ना सामान्य है। वास्तव में, आपको इन स्तरों तीनों तिमाही के दौरान स्थिर रखना चाहिए। हालांकि, ब्लड शुगर लेवल का अचानक बढ़ना प्रीक्लेम्पसिया का कारण हो सकता है और अपरिपक्‍व प्रसव को प्रेरित कर सकता है।

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14. प्लेसेंटा की स्थिति में परिवर्तन

प्लेसेंटा की स्थिति में बदलाव अस्वस्‍थ गर्भावस्था के लक्षणों में से एक है।  जब प्लेसेंटा, गर्भाशय से समय से पहले अलग हो जाती है, तो गर्भपात हो जाता है। इसलिए, हमेशा अपने प्लेसेंटा की स्थिति की जाँच करवाएं।

आप जो भी संकेतों को महसूस करते हैं उनपर ध्यान दें। यहाँ तक कि अगर आपको मामूली सन्‍देह है या कुछ महसूस हो रहा है, तो भी अपने डॉक्‍टर से परामर्श करें। आपकी चिन्‍ता निरर्थक हो सकती है लेकिन पछतावे से सुरक्षित रहना हमेशा अच्छा होता है।

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समर नक़वी

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