शिशु

क्या बच्चों को ग्राइप वाटर देना चाहिए?

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नवजात शिशु और बच्चे अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के रोते हैं। ऐसे मामलों में बच्चों को कोलिक या होने की संभावना रहती है। उदरशूल क्या है, इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है, लेकिन यह एक ऐसा शब्द है जिसका उपयोग तब किया जाता है, जब बच्चे एक लंबी अवधि के लिए अत्यधिक रोते हैं। यह आमतौर पर उन शिशुओं में देखा जाता है जो तीन सप्ताह से तीन महीने के बीच के होते हैं। पेट में गैस के कारण होने वाली बेचैनी को व्यापक रूप से कोलिक का कारण माना जाता है और कई माता-पिताओं के लिए, ग्राइप वाटर पसंदीदा उपाय है।

ग्राइप वॉटर क्या है?

ग्राइप वाटर एक ऐसा घोल है जिसका उद्देश्य बच्चों में पेट फूलना, उदरशूल, अपच, हिचकी और दाँत निकलते समय दर्द के कारण होने वाली बेचैनी को शांत करना है। इस घोल के अलग-अलग प्रकार उपलब्ध हैं, और इनमें विभिन्न जड़ी-बूटियों का मिश्रण है।

ग्राइप वॉटर में क्या पाया जाता है?

सौंफ, अदरक, कैमोमाइल, मुलेठी, दालचीनी, और लेमन बाम कुछ ऐसे तत्व हैं जो ग्राइप वॉटर में पाए जाते हैं। मूल रूप से इस घोल की सामग्री में पानी, अल्कोहल, सोआ बीज का तेल, चीनी और सोडियम बाइकार्बोनेट शामिल होते हैं। कुछ ब्रांडों में ग्लिसरीन का भी उपयोग किया जाता हैं। माता-पिता और डॉक्टरों की आपत्तियों के बाद अब ग्राइप वॉटर में अल्कोहल का उपयोग बंद कर दिया गया है। कुछ ब्रांडों को कृत्रिम मिठास का उपयोग करने के लिए भी जाना जाता है जो बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। पुदीने का तेल कुछ भारतीय ब्रांड में पाया जा सकता है। नारंगी या स्ट्रॉबेरी जैसे विभिन्न स्वादों में ग्राइप वॉटर उपलब्ध है।

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क्या ग्राइप वॉटर बच्चों के लिए सुरक्षित है?

कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह साबित कर सके कि बच्चों के लिए ग्राइप वॉटर सुरक्षित नहीं है। इस बात पर कई अलग-अलग राय है कि क्या ग्राइप वॉटर प्रभावी है क्योंकि कुछ ने इसे अपने बच्चों के लिए उपयोगी पाया है जबकि अन्य ने नहीं। जहाँ तक सुरक्षा की बात है, शिशुओं के लिए अल्कोहल, कृत्रिम मिठास या सोडियम बाइकार्बोनेट की सलाह नहीं दी जाती है।

यहाँ ग्राइप वॉटर के सामग्रियों में कुछ विस्तार से समझाए गए हैं और वे बच्चे को कैसे प्रभावित करते हैं यह भी बताया गया है:

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अल्कोहल: अल्कोहल शिशुओं के लिए उपयुक्त नहीं है और इससे बच्चे को इसकी लत लग सकती है।

सोडियम बाइकार्बोनेट: बेकिंग सोडा के रूप में भी जाना जाता है, इससे दूध-क्षार सिंड्रोम हो सकता है जो खून में कैल्शियम की मात्रा में वृद्धि का कारण बनता है। चूंकि छह महीने से कम उम्र के बच्चों को सिर्फ माँ का दूध या पाउडर वाला दूध दिया जाता है, इसलिए उन्हें इस स्थिति का अधिक खतरा होता है, जिससे किडनी की भी समस्या हो सकती है।

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चीनी: अतिरिक्त चीनी से दाँतों में सड़न हो सकता है और चीनी पर निर्भरता विकसित हो सकती है।

सोआ बीज का तेल: यह एक वनस्पति तेल है जो कि अपच से राहत प्रदान करता है। हालांकि, कुछ शिशुओं को इससे एलर्जी हो सकती है, इसलिए इस प्रकार की सामग्री का उपयोग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

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प्राकृतिक सामग्री और शिशु आहार संरचना के बारे में बढ़ती जागरूकता के बावजूद, कुछ ब्रांडों के निर्माण में पैराबेंस, वनस्पति कार्बन या डेयरी उत्पाद शामिल हो सकते हैं जिनका उपयोग नहीं की जानी चाहिए। डॉक्टरों की राय भी इस बात पर विभाजित है कि क्या शिशुओं को ग्राइप वॉटर दिया जा सकता है। बाजार में विभिन्न ब्रांड हैं और शिशुओं को वही दिया जाना चाहिए जो उनकी स्थिति के लिए सबसे उपयुक्त हो।

ग्राइप वॉटर का क्या उपयोग है

कहा जाता है कि ग्राइप वॉटर शिशुओं में पाचन संबंधी समस्याएं और हिचकियां कम करने में बहुत लाभदायक होता है। जिन शिशुओं को पेट फूलने और साथ ही एसिडिटी जैसी जठरांत्र संबंधी समस्या होते हैं, उन्हें भी इसका सेवन करने से फायदा हो सकता है। जिन बच्चों का दाँत निकलना शुरू होता है वे चिड़चिड़े होते हैं और बहुत रोते हैं। जिस कारण उनके पेट में काफी हवा जाती है जिससे बाद में पेट फूल सकता है। हिचकी जो डायफ्राम उत्तेजित होने से होती है, शिशुओं को परेशान कर सकती है और पेट फूलना, एसिड रिफ्लक्स या अपच के कारण होती है। ग्राइप वॉटर डायफ्राम को राहत दिलाने के लिए जाना जाता है और इस तरह से बच्चों को हिचकी से राहत मिलती है।

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बच्चे ग्राइप वॉटर कब पी सकते हैं?

ग्राइप वॉटर के निर्माता दावा करते हैं कि यह दो सप्ताह के शिशुओं को भी दिया जा सकता है। हालांकि, एक महीने से कम उम्र के बच्चों को इसे देना उचित नहीं है क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी भी विकसित हो रहा होता है और संवेदनशील हो सकता है। ऐसे लोग भी हैं जो यह मानते हैं कि शिशुओं को छह महीने तक माँ के दूध या पाउडर वाले दूध के अलावा कुछ नहीं दिया जाना चाहिए। तो, शिशु को ग्राइप वॉटर देने के संबंध में अपने बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना सबसे अच्छा विकल्प है।

बच्चों को ग्राइप वॉटर कैसे दें?

बच्चे को थोड़ा ग्राइप वॉटर देने का सबसे अच्छा समय दूध पिलाने के लगभग दस मिनट बाद का है। एक ड्रॉपर या एक चम्मच का उपयोग करके बच्चे को दिया जा सकता है और इसके अच्छे स्वाद के कारण, अधिकांश बच्चे बिना कोई उपद्रव मचाए इसे पी जाएंगे। यह आमतौर पर दिन में एक बार दिया जाता है लेकिन अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

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ग्राइप वॉटर के दुष्प्रभाव

चिकित्सीय दृष्टि से ग्राइप वॉटर के कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं। हालांकि, यह संभव है कि आपके बच्चे को किसी विशेष ब्रांड में एक या अधिक सामग्री से एलर्जी हो। बोतल के पीछे लिखे सामग्री की सूची की जाँच करके ही खरीदें। ग्राइप वॉटर के सेवन के बाद पित्ती, आँखों से पानी, सूजे हुए होंठ या जीभ, उल्टी, खुजली और सांस लेने के पैटर्न में कोई परिवर्तन होना एलर्जिक प्रतिक्रिया के संकेत हो सकते हैं। अगर आपके शिशु में इस तरह के दुष्प्रभाव दिखाई देते हैं, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

क्या ग्राइप वॉटर पाउडर वाले दूध के साथ मिलाया जा सकता हैं?

पाउडर वाले दूध के साथ ग्राइप वॉटर मिलाने के लिए पाउडर वाला दूध तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी की जगह थोड़ा ग्राइप वॉटर का इस्तेमाल करें। इससे पाउडर वाले दूध का स्वाद बदल सकता है। आप इसे पानी या माँ के दूध के साथ मिला सकते हैं लेकिन ऐसा हो सकता है कि आपका बच्चा हर समय इस मिश्रण की माँग करना शुरू करें। सर्वोत्तम परिणामों के लिए, इसे बच्चे को उसके मूल रूप में दें।

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ग्राइप वॉटर के अन्य विकल्प

ग्राइप वॉटर के अलावा, कुछ तरीके हैं जिनसे आप अपने बच्चे को शांत कर सकते हैं और उसे बेहतर महसूस करने में मदद कर सकते हैं। पेट के दर्द और गैस से छुटकारा पाने में मदद करने के लिए पेट की हल्की मालिश करें। पाउडर वाले दूध के ब्रांड को बदलना कुछ बच्चों के लिए मददगार साबित हो सकता है। जब आपका बच्चा चिड़चिड़ा होता है तो उसे अपने कंधे के ऊपर रखें और धीरे से उनकी पीठ पर थपथपाएं ताकि उन्हें डकार आ सकें। कई बार सिर्फ इतना ही करना आपके बच्चे को बेहतर महसूस करने में मदद करने के लिए आवश्यक होता है। अपने बच्चे को कपड़े में ठीक से लपेटने (स्वैडलिंग) से वह शांत हो सकता है और उसे आराम मिल सकता है। यदि संभव हो, तो सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा छह महीने की उम्र तक सिर्फ माँ का दूध पी रहा है, क्योंकि जठरांत्र संबंधी मार्ग को स्वस्थ रखने के लिए माँ का दूध सबसे अच्छा होता है।

ग्राइप वॉटर चुनने और पिलाने के टिप्स

यदि आपको अपने बच्चे को ग्राइप वॉटर पिलाना हैं, तो अपने शिशु के लिए सही प्रकार सुनिश्चित करने के लिए इन युक्तियों का पालन करें।

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  • ऐसा ग्राइप वॉटर ने चुनें जिसमें सोडियम बाइकार्बोनेट हो, क्योंकि यह आपके बच्चे के पेट के पीएच स्तर में असंतुलन पैदा कर सकता है।
  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके बच्चे को किसी भी तरह की एलर्जी न हो, सामग्री सूची अच्छी तरह से पढ़ें।
  • किसी भी दुष्प्रभाव या प्रतिक्रिया पर नजर रखें।
  • खुराक और उपयोग किए जाने वाले ब्रांड के बारे में अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
  • एक ऐसा ब्रांड ढूँढने की कोशिश करें जो अधिक से अधिक प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करता हो।
  • वह ग्राइप वॉटर न खरीदें जिसमें अल्कोहल हो।
  • सुक्रोज, वनस्पति कार्बन या चारकोल वाले ग्राइप वॉटर से दूर रहें।
  • निर्देशों को ठीक से पढ़ें और सलाह के अनुरूप प्रबंधित सही खुराक दें।

छोटे बच्चों में चिड़चिड़ापन व उदरशूल हमेशा से बना रहा है! लेकिन हर बार ग्राइप वॉटर समाधान नहीं हो सकता है। आपके लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि आपका शिशु चिढ़ा हुआ या दर्द में क्यों हैं। अगला कदम है किसी भी बाहरी पदार्थ के उपयोग के बिना छोटे बच्चे को शांत करना और आराम पहुँचाना। यदि आप पहली बार माता-पिता बने है तो यह मुश्किल हो सकता है क्योंकि ऐसा लग सकता है कि कुछ भी काम नहीं कर रहा है। हालांकि, एक बार जब आपको इसकी आदत हो जाती है, तो सब ठीक हो जाएगा और आपको पता चल जाएगा कि आपके बच्चे को कैसे शांत करना है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ एक मार्गदर्शिका है और किसी डॉक्टर की चिकित्सक सलाह का विकल्प नहीं है।

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जया कुमारी

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