शिशु

क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान गर्भनिरोधक लेना सुरक्षित है?

आपका बच्चा फाइनली इस दुनिया में कदम रख चुका है और आपकी इस खुशी का अंदाजा हम लगा सकते हैं। जन्म के बाद कुछ हफ्तों तक आपका बेबी पूरी तरह से सेंटर ऑफ अट्रैक्शन होता है और आप अपना सारा समय सिर्फ बच्चे को ही देती हैं, लेकिन जब चीजें रूटीन के हिसाब से एडजस्ट होने लगती है, तो आपका और आपके पति का एक दूसरे के साथ प्यार के पल बिताना स्वाभाविक है। हालांकि, इस दौरान आपको ये डर लगा रहता है कि कहीं आप फिर से गर्भवती न हो जाएं। लेकिन क्या बर्थ कंट्रोल मेथड का ऑप्शन चुनना आपके लिए सही होगा? खासकर जब आप बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करा रही हों? जी हाँ हम इसी विषय पर आगे चर्चा करेंगे कि क्या आपको ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बर्थ कंट्रोल के तरीके अपनाने चाहिए!

क्या ब्रेस्टफीडिंग एक गर्भनिरोधक के रूप में काम करता है?

कई लोग कहते हैं कि बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराना प्रेगनेंसी को रोक सकता है, हालांकि, कुछ का कहना है कि यह एक मिथक है। तो, सच क्या है? प्रोलैक्टिन एक हार्मोन है जो ओवुलेशन में हस्तक्षेप करता है। जब आप गर्भवती होती हैं, तो यह हार्मोन बढ़ने लगता है और नौ महीने के अंदर मल्टिपल प्रेगनेंसी होने से रोकता है। जब आपका बच्चा ब्रेस्टफीडिंग शुरू करता है, तो प्रोलैक्टिन एक बार फिर आपके शरीर द्वारा प्रोडूस होता है। इस तरह, आपका शरीर खुद ही नेचुरल गर्भनिरोधक का उत्पादन करता है। लेकिन इसमें एक मसला है! यह तकनीक, जिसे लैक्टेशन एमेनोरिया मेथड के रूप में जाना जाता है, तभी कारगर हो सकती है यदि आप नीचे दिए गए क्राइटेरिया में आती हों: 

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  • आप बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करा रही हों।
  • इस दौरान आपको कभी भी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग (पीरियड) का अनुभव न हुआ हो।
  • आपका बच्चा किसी अन्य भोजन का सेवन न कर रहा हो, जिसका अर्थ है कि ये ब्रेस्टफीडिंग की मात्रा को प्रभावित न करता हो।
  • आपका बच्चा छह महीने से कम उम्र का हो।

अगर ऊपर बताई गई बातें पूरी होती हैं, तो यह एक अच्छा ऑप्शन है। कई स्टडीज ने पुष्टि की है कि इस तकनीक का उपयोग करने वाली 98 प्रतिशत से अधिक महिलाएं गर्भवती नहीं होंगी।

ब्रेस्टफीडिंग कराते समय सुरक्षित बर्थ कंट्रोल तरीके क्या हैं?

ब्रेस्टफीडिंग कराते समय सबसे अच्छा बर्थ कंट्रोल मेथड क्या है? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आप भी जानना चाहेंगी। नीचे आपको ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली माँ के लिए कुछ प्रकार के बर्थ कंट्रोल दिए गए हैं जो उसके लिए सुरक्षित हैं।

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1. नॉन-हार्मोनल बर्थ कंट्रोल

बर्थ कंट्रोल का यह प्रकार किसी भी हार्मोन को ब्लड फ्लो में शामिल नहीं करता है और इस प्रकार, ये ब्रेस्टफीडिंग को प्रभावित नहीं करता है:

  • कॉपर इंट्रायूटरिन डिवाइस (आईयूडी): आमतौर पर ये कॉपर से बनी होती है, इस डिवाइस को डॉक्टर, नर्स या ट्रेन मेडिकल प्रोफेशनल द्वारा यूट्रस में फिट किया जाता है। हार्मोनल आईयूडी जो प्रोजेस्टेरोन रिलीज करता है, उसके विपरीत इसमें कॉपर गर्भ में रिलीज होता है, जो स्पर्म (शुक्राणु) को अंडे तक पहुँचने की क्षमता को प्रभावित करता है। हालांकि, इस दौरान छोटा मोटा इन्फेक्शन होने का खतरा होता है, लेकिन जब इसे ठीक से अंदर डाला जाता है, तो यह लगभग दस वर्षों तक गर्भावस्था को रोक सकता है। इसका ये फायदा है कि यह हार्मोन को रोकता है और साथ ही इसके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं जैसे चक्कर आना और मतली जैसा महसूस होना। मगर इससे यौन संबंध बनाते समय दर्द, पीठ दर्द और एनीमिया जैसी कुछ समस्याएं पैदा हो सकती हैं ।
  • स्टरलाइजेशन: यह गर्भावस्था को रोकने के लिए गर्भनिरोधक का एक परमानेंट फॉर्म है। पुरुषों में की जाने वाली नसबंदी (स्टरलाइजेशन) को वैसेक्टोमी के रूप में जाना जाता है जिसकी विफलता दर 0.15 प्रतिशत से कम है। इसमें स्पर्म को मूत्रमार्ग तक पहुँचने से रोका जाता है। महिलाओं के लिए, ट्यूबल लिगेशन की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है, जहाँ अंडे को गर्भ तक पहुँचने से रोकने के लिए फैलोपियन ट्यूब को काट दिया जाता है या बांध दिया जाता है। इसकी विफलता दर 2/100 है और रिकवरी पीरियड आमतौर पर एक सप्ताह से भी कम होता है।
  • कंडोम: ये सबसे लोकप्रिय गर्भनिरोधक ऑप्शन में से एक, ये आसानी से उपलब्ध होते हैं और इसकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती है। यह 98 प्रतिशत तक प्रभावी माना जाता है और पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए उपलब्ध हैं। पुरुष कंडोम एक पतले लेटेक्स रबर से बना होता है और स्पर्म को फिजिकली योनि में प्रवेश करने से रोकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इसकी प्रभावशीलता की गारंटी केवल तभी दी जाती है जब इसका सही ढंग से उपयोग किया जाता है। फटे हुए कंडोम के साथ संभोग करना, संभोग के बीच में कंडोम को खिसकाना और पुराने कंडोम का उपयोग करने से इसकी गर्भावस्था को रोकने की क्षमता कम हो जाती है। कंडोम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह यौन संचारित रोगों (एसटीडी) को फैलने से रोकता है।

2. हार्मोनल बर्थ कंट्रोल

गर्भावस्था को रोकने के लिए हार्मोनल बर्थ कंट्रोल के तरीके किसी भी तरह से ब्रेस्टफीडिंग को प्रभावित नहीं करते हैं:

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  • इंजेक्शन: हार्मोन प्रोजेस्टिन को तीन महीने में एक बार इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है।  यह ओवरी से अंडे रिलीज न करके ओवुलेशन की प्रकिया में हस्तक्षेप करता है, जिसका मतलब है कि आपके गर्भवती होने के चांसेस नहीं होते हैं। इसके अलावा, यह स्पर्म को अंडे तक पहुँचने से भी रोकता है क्योंकि यह सर्वाइकल म्यूकस को गाढ़ा करता है। डेपो प्रोवेरा इंजेक्शन इसका एक उदाहरण है।
  • मॉर्निंग आफ्टर पिल: यह ब्रेस्टफीडिंग करते समय इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव के रूप में काम करती है, जिससे ओवुलेशन में देरी होती है या फर्टिलाइजेशन होने से रोकती है। इसमें लेवोनॉर्जेस्ट्रेल होता है, जो एक हार्मोन है, ये प्रोजेस्टेरोन के समान ही इफेक्टिव होता है। जब आप अपने साथी के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाती हैं, तब बाद में इसका सेवन कर सकती हैं।
  • हार्मोनल इंट्रायूटरिन डिवाइस: यह एक प्लास्टिक डिवाइस है जिसमें प्रोजेस्टिन हार्मोन होता है और इसे गर्भाशय में रखा जाता है। यह यूटराइन लाइनिंग में बदलाव करता है जिससे स्पर्म का अंडे तक पहुँचना मुश्किल हो जाता है। डिवाइस लगातार हार्मोन की थोड़ी मात्रा को जारी करता रहता है और तीन से पाँच साल तक गर्भधारण को रोकता है।
  • वेजाइनल रिंग: यह एक ऐसी डिवाइस है जिसे वजाइना के अंदर रखा जाता है और इसकी उम्र लगभग तीन सप्ताह होती है। यह हाथों से खिसकाकर आसानी से अंदर फिट हो जाता है और धीरे-धीरे हार्मोन रिलीज करता है जो स्पर्म को अंडे तक पहुँचने से रोकता है। इसके अलावा, यह अंडाशय को अंडे रिलीज करने से रोकता है।

3. नेचुरल बर्थ कंट्रोल

कुछ नेचुरल बर्थ कंट्रोल मेथड में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बचाव: यह स्वेच्छा से अपने साथी के साथ यौन संबंध न बनाने का तरीका है। अगर संभोग न किया जाए, तो प्रेगनेंसी के चांसेस भी कम होते हैं, इससे आप और बच्चे पर नेगेटिव इफेक्ट नहीं पड़ता है। हालांकि, गर्भनिरोधक का यह मेथड ऐसा है जिस पर दोनों पार्टनर का राजी होना जरूरी है वरना रिश्ता प्रभावित हो सकता है।
  • विड्रॉल: बर्थ कंट्रोल के इस तरीके में वीर्यपात होने से पहले पुरुष योनि से अपना लिंग निकाल लेता है। हालांकि इससे प्लेजर लेवल बढ़ने का अनुभव होता है लेकिन इसमें कुछ चैलेंज शामिल होते हैं। सबसे पहले, सारा दबाव आदमी पर होता है कि वह सही समय पर विड्रॉल करे, जिसका अर्थ है कि संभोग उसकी शर्तों के आधार पर किया जाएगा। दूसरा, इस मेथड को सही ढंग से पूरा करने के लिए ध्यान लगाने और सेल्फ कंट्रोल की जरूरत होती है। हालांकि, इस मामले में प्री-इजैक्युलेशन फ्लूइड यानी वीर्यपात से पहले होने वाला प्रवाह एक डिबेट का विषय है। स्टडी से पता चला है कि इसमें या तो स्पर्म होते नहीं हैं या फिर मृत स्पर्म होते हैं, लेकिन फिर भी इसके द्वारा गर्भ ठहरने की संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।

गर्भ निरोधक का मिल्क प्रोडक्शन पर प्रभाव

क्या बर्थ कंट्रोल ब्रेस्टफीडिंग को प्रभावित कर सकता है? यह सवाल अक्सर नई माएं करती हैं। हालांकि नेचुरल बर्थ कंट्रोल मेथड और नॉन-हार्मोनल मेथड मिल्क प्रोडक्शन को प्रभावित नहीं करता है, मगर हार्मोनल बर्थ कंट्रोल के मामले में बात अलग है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बर्थ कंट्रोल पिल्स में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन या दोनों का कॉम्बिनेशन होता है। एस्ट्रोजन आधारित मेथड मिल्क प्रोडक्शन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है और इससे बचा जाना चाहिए। प्रोजेस्टेरोन आधारित मेथड आमतौर पर मिल्क प्रोडक्शन को प्रभावित नहीं करता है। जो लोग दोनों का कॉम्बिनेशन मेथड यूज करते हैं उन्हें तभी इस मेथड को अपनाना चाहिए जब उनका बच्चा छह महीने का या उससे ज्यादा उम्र का हो और पूरी तरह से ब्रेस्ट मिल्क पर निर्भर न हो।

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बच्चे पर बर्थ कंट्रोल के साइड इफेक्ट

जो महिलाएं बर्थ कंट्रोल मेथड का उपयोग करती हैं, वे खुद में हार्मोनल बर्थ कंट्रोल के साइड इफेक्ट्स महसूस कर सकती हैं, जैसे कि टेंडर ब्रेस्ट (स्तनों में दर्द) और मतली जैसा महसूस होना। हालांकि, किसी भी स्टडी से पता नहीं चलता है कि ब्रेस्टफीडिंग करते समय बर्थ कंट्रोल लेना बच्चे के लिए किसी भी समस्या का कारण होता है।

इसलिए, जहाँ ब्रेस्टफीडिंग अपने आप में बर्थ कंट्रोल का एक ऑप्शन है वहीं इसके लिए दूसरे कई तरीके उपलब्ध हैं। जब तक आप एस्ट्रोजन-आधारित हार्मोन की गोलियों का उपयोग नहीं करती हैं, तब तक आपके लिए कोई समस्या नहीं है।

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यह भी पढ़ें:

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समर नक़वी

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