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क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां का बोटॉक्स लेना सही है?

यदि आप बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं तो इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि इस दौरान आप जो भी दवा लें वो बच्चे के लिए सुरक्षित होनी चाहिए क्योंकि दवा आपके खून से ब्रेस्ट मिल्क में जा सकती है और इससे बच्चे को हानि भी हो सकती है। बोटॉक्स का उपयोग मेडिकल और कॉस्मेटिक कारणों के लिए भी किया जाता है। यदि आप बेबी को स्तनपान कराने वाली मां हैं और बोटॉक्स इंजेक्शन लेने की योजना बना रही हैं तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बोटॉक्स लेना सुरक्षित है या नहीं। 

बोटॉक्स क्या है और इसका क्या उपयोग होता है?

बोटॉक्स क्लॉस्ट्रीडियम बोटुलिनम नामक बैक्टीरिया से निकाला हुआ न्यूरोटोक्सिन है। बोटॉक्स बोटुलिनम टॉक्सिन का संक्षिप्त नाम है, जो इस निर्धारित दवा का स्रोत है। इस दवा का उपयोग ज्यादा मात्रा में करने पर पैरालिसिस होने का कारण माना गया है है। यदि इसे कम मात्रा में लगाया जाए तो यह उस थोड़ी सी जगह पर ही पैरालिसिस का कारण बन सकता है जहाँ पर इंजेक्शन लगाया गया था। 

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बोटॉक्स इंजेक्शन के कुछ मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं, आइए जानें; 

  • बोटॉक्स से झुर्रियां ठीक हो जाती हैं।
  • यह बहुत ज्यादा पसीना आने के लिए भी प्रभावी है।
  • यह माइग्रेन और मतली से लड़ने में मदद करता है।
  • यह मांसपेशियों को आराम देकर और मिस्फायरिंग न्यूरॉन्स से बचाव करके मरोड़ व भेंगेपन की समस्या और बेल्स पाल्सी से लड़ता है।

बोटॉक्स कैसे काम करता है?

शरीर में हर मांसपेशी का टिश्यू न्यूरॉन्स के नेटवर्क के माध्यम से दिमाग से जुड़ा हुआ है। जब बोटॉक्स को सही तरीके से मांसपेशी के टिश्यू में लगाया जाता है तब यह मांसपेशी के टिश्यू और न्यूरॉन्स के बीच एक शील्ड का निर्माण कर देता है। इससे न्यूरॉन्स और मांसपेशी टिश्यू के बीच का संपर्क खत्म हो जाता है। संपर्क खत्म होने की वजह से न्यूरॉन्स शरीर के उस भाग पर ही रह जाते हैं जहाँ पर यह लगाया गया था। यह धूप और ग्रेविटी के कारण होने वाले रिंकल्स को खत्म करने के लिए बहुत उपयोगी है। 

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क्या ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मांओं को बोटॉक्स लेना चाहिए?

यद्यपि बोटॉक्स पर हुई रिसर्च के अनुसार यह पता चलता है कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान इस इंजेक्शन से कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा पर इसे लगवाने से पहले निम्नलिखित कुछ चीजों का ध्यान जरूर रखें, जैसे; 

  • यदि मांसपेशियों के टिश्यू में बोटॉक्स का इंजेक्शन लगाया गया तो भी बोटुलिन टॉक्सिन आपके खून में जा सकते हैं।
  • नर्सिंग के दौरान ब्रेस्टफीडिंग महिलाओं द्वारा ली जाने वाली ज्यादातर दवाएं ब्रेस्ट मिल्क तक पहुँच जाती हैं।
  • चूंकि इससे बच्चे को संभावित जोखिम हो सकते हैं इससे ज्यादातर महिलाएं नर्सिंग के दौरान बोटॉक्स का इंजेक्शन नहीं लगवाती हैं।
  • यदि मेडिकल कारणों से बोटॉक्स का इंजेक्शन लगवाना जरूरी है तो यह सलाह दी जाती है की मां ब्रेस्टफीडिंग कराना बंद कर दे।

बोटॉक्स इंजेक्शन लगवाने के बाद ब्रेस्टफीडिंग पर इसके संभावित जोखिम इसके फायदों से अधिक हैं। इसलिए ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बोटॉक्स का उपयोग करने के जोखिमों और साइड इफेक्ट्स को समझना जरूरी है ताकि आप खुद से सही निर्णय ले सकें।

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ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बोटॉक्स लेने से क्या साइड इफेक्ट्स व जोखिम हो सकते हैं?

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बोटॉक्स का इंजेक्शन लेने के कुछ साइड इफेक्ट्स निम्नलिखित हैं, आइए जानें;

  • बोटॉक्स से बोटुलिज्म हो सकता है जो उन लोगों के लिए खतरनाक है जिनकी इम्युनिटी बहुत कम होती है, जैसे छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग।
  • बोटॉक्स का इंजेक्शन लगवाने के बाद इससे कुछ समय तक मुंह सूखने की समस्या होती है।
  • ब्रेस्टफीडिंग पर बोटॉक्स के प्रभावों की स्टडी के अनुसार यह पता चला है कि बच्चे के वजन और हड्डियों के विकास पर इसका उल्टा असर पड़ता है।
  • बोटॉक्स का बहुत ज्यादा उपयोग करने से यूरोलॉजिकल और दर्द से संबंधित समस्याएं बढ़ सकती हैं, जैसे ओवरएक्टिव ब्लैडर।
  • बोटॉक्स कई सारी न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर का कारण हो सकता है, जैसे सर्वाइकल डिस्टोनिया।
  • बोटॉक्स लगवाने से आंखों और दृष्टि से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
  • बोटॉक्स के इंजेक्शन से लगाई हुई जगह पर कुछ समय के लिए तकलीफ हो सकती हैं।

क्या पंपिंग और डंपिंग से ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बोटॉक्स का प्रभाव कम हो जाता है?

पंपिंग और डंपिंग एक ऐसा मेथड है जो ब्रेस्टफीडिंग माओं द्वारा ब्रेस्ट मिल्क से हानिकारक पदार्थ निकालने के काम आता है। इस मेथड में दूध एक्सट्रेक्ट करके बच्चे को पिलाने के बजाय फेंक दिया जाता है। इससे जरूरी नहीं है कि हानिकारक पदार्थ पूरी तरह से निकल जाएंगे पर यह पदार्थों को खून से दूध में मेटाबॉलिज करता है। रक्त से बोटोक्स को मेटाबॉलिज करने में कितना समय लगता है, इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। इसलिए ब्रेस्टफीडिंग के बाद बोटॉक्स का इंजेक्शन लेने पर हानिकारक पदार्थों को नष्ट करने के लिए पंप और डंप बहुत ज्यादा प्रभावी तरीका नहीं है। 

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बोटॉक्स के गंभीर प्रभावों से बचने के लिए गाइडलाइन्स

बच्चे व मां को बोटॉक्स के गंभीर प्रभावों से बचाने के लिए कुछ बेसिक गाइडलाइन्स निम्नलिखित हैं, आइए जानें;

  • यदि आप बोटॉक्स का इंजेक्शन सिर्फ खूबसूरती बढ़ाने के लिए लेना चाहती हैं तो इसे लगवाने से बचें। यदि आप मेडिकल कारणों की वजह से बोटॉक्स का इंजेक्शन लगवाती हैं तो इस ट्रीटमेंट के बाद बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराने से बचें।
  • ब्रेस्टफीडिंग महिलाओं पर बोटॉक्स के प्रभावों का कोई भी साइंटिफिक प्रमाण नहीं है इसलिए इसकी पूरी जानकारी के लिए आप डॉक्टर से बात करें।

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां के लिए बोटॉक्स के सुरक्षित विकल्प

ब्रेस्टफीडिंग मांओं के लिए कुछ सुरक्षित विकल्प निम्नलिखित हैं, आइए जानें; 

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1. बोटॉक्स के मेडिकल विकल्प

दर्द की आम दवा, जैसे एसिटामिनोफेन या आइबुप्रोफेन।

2. बोटॉक्स के कॉस्मेटिक विकल्प

आप चेहरे का एक्यूपंक्चर आजमा सकती हैं। बोटॉक्स के बजाय आप अच्छी मालिश करवा सकती हैं जिससे मांसपेशियों में आराम मिलता है।

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यद्यपि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बोटॉक्स और फिलर्स का उपयोग करने का कोई भी प्रभाव प्रत्यक्ष नहीं है पर ऐसा करने के संभावित जोखिम बोटॉक्स के उपयोग के लाभों से ज्यादा हैं। बच्चे की सुरक्षा व अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहतर यही है कि आप ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बोटॉक्स इंजेक्शन से दूर रहें। 

यह भी पढ़ें:

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सुरक्षा कटियार

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