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एक अजन्मा बच्चा पोषक तत्वों और विटामिन के लिए पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर होता है, यही कारण है कि गर्भवती महिलाओं को हेल्दी डाइट लेने की सलाह दी जाती है। माँ बनने जा रही महिलाओं को इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि उनके फूड चार्ट में सभी आवश्यक न्यूट्रिएंट्स और विटामिन शामिल हैं जो गर्भावस्था को सेहतमंद बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। ऐसा ही एक आवश्यक विटामिन है बायोटिन। यह पानी में घुलनशील एक बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन है जो खाने को एनर्जी में बदलने में मुख्य भूमिका निभाता है। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा को तोड़ने में मदद करने वाले एंजाइम को बनाने के लिए बायोटिन की जरूरत होती है। यही कारण है कि डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को बायोटिन और फोलिक एसिड की गोलियां जैसे आवश्यक सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं।
बायोटिन को विटामिन एच या बी-7 के रूप में भी जाना जाता है और बायोटिन की निर्धारित मात्रा लेना गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित होता है। बायोटिन के सप्लीमेंट्स शरीर में इसकी कमी को ठीक करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा मात्रा में सप्लीमेंट्स लेना मिसकैरेज की संभावना को बढ़ा सकता है। जानवरों पर की गई एक स्टडी से पता चला है कि बायोटिन टेराटोजेनिक है और इसके परिणामस्वरूप मिसकैरेज हो सकता है। इसलिए, किसी भी बायोटिन सप्लीमेंट को लेने से पहले आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
बायोटिन भोजन को एनर्जी में बदलने में मदद करता है। यह एक कोएंजाइम है जो ग्लूकोज और अमीनो एसिड के मेटाबॉलिज्म के लिए आवश्यक है। हालांकि चूंकि यह पानी में घुल जाता है, अतिरिक्त बायोटिन पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है। बायोटिन का सेवन करने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह नाखूनों और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और बालों के विकास में भी सहायक होता है। यह लिवर, त्वचा और नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। यह ब्लड शुगर के लेवल को रेगुलेट करने में मददगार होता है।
बहुत सी महिलाएं जो माँ बनने वाली होती हैं, वे बायोटिन की कमी से पीड़ित होती हैं क्योंकि गर्भावस्था के दौरान उनका शरीर बायोटिन को अधिक तेजी से तोड़ता है। स्टडीज के अनुसार, 33-50% गर्भवती महिलाओं में बायोटिन की कमी होती है, और यह ज्यादातर गर्भावस्था के आखिरी चरण के दौरान होता है।
सेहत से जुड़ी कई समस्याओं के कारण बायोटिन की कमी हो सकती है, इनमें शामिल हैं:
गर्भवती महिलाओं को प्रति दिन कम से कम 25-30 माइक्रोग्राम बायोटिन का सेवन करना चाहिए। इतनी खुराक से विषाक्तता नहीं होती है। बायोटिन की कमी के कारण होने वाली समस्याओं को रोकने के लिए महिलाओं को इस खुराक के बायोटिन सप्लीमेंट्स मदद कर सकते हैं।
जिन खाद्य पदार्थों में बायोटिन पाया जाता है, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
अंडे की जर्दी में भरपूर बायोटिन होता है। डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, चीज़ आदि में भी अच्छी मात्रा में बायोटिन होता है। इन खाद्य पदार्थों को आप आसानी से अपने नियमित आहार में शामिल कर सकती हैं।
नट्स और होल ग्रेन प्रोडक्ट जैसे पेकान, अखरोट, मूंगफली और बादाम में काफी मात्रा में बायोटिन पाया जाता है।
सार्डिन और सैल्मन मछली एवं ऑर्गन मीट में प्रचुर मात्रा में बायोटिन होता है।
लोभिया, सोयाबीन और अन्य फलियों में भी बायोटिन होता है।
कई ताजे फल और सब्जियां इस विटामिन के बेहतरीन स्रोत होते हैं। एवोकैडो, फूलगोभी, रसभरी, मशरूम, स्विस चार्ड, गाजर, खीरा, प्याज आदि में बायोटिन की काफी मात्रा होती है।
कुछ मामलों में, गर्भवती महिलाओं में बायोटिन की कमी से बच्चे को जन्म दोष भी हो सकता है। जानवरों पर की गई एक स्टडी में, यह साबित हुआ कि बायोटिन की कमी से उनमें जन्म दोष हो सकता है, विशेष रूप से क्लेफ्ट पैलेट, कंकाल विकृति, क्लेफ्ट लिप, आदि। यह संभव है कि इस तरह की समस्याएं मनुष्यों में भी दिखाई दे।
बायोटिन के सप्लीमेंट्स लेना गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित माना जाता है, लेकिन केवल अगर इसे बताई गई मात्रा में लिया जाए। आपको बायोटिन की खुराक लेने की आवश्यकता है या नहीं, यह जानने के लिए अपने डॉक्टर से पूछें। गर्भावस्था के दौरान बायोटिन की अधिकता से कई कॉम्प्लीकेशन्स हो सकते हैं और इससे मिसकैरेज भी हो सकता है।
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