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भारत विविधता का देश है और इस देश की सबसे बड़ी खूबी यहाँ के त्यौहार हैं, यहाँ हर धर्म के लोग बहुत धूम धाम से अपने-अपने अनुष्ठान और परंपराओं का पालन करते हुए त्यौहार मनाते हैं। इन्ही त्योहारों में से एक है बैसाखी का त्यौहार, जो अलग-अलग कारणों से मनाया जाता है, तो आइए जानते हैं कि आखिर क्यों मनाते हैं यह त्यौहार? किन लोगों के लिए यह त्यौहार महत्व रखता है और किन जगहों पर बैसाखी मनाई जाती है।
बैसाखी को वैसाखी के नाम से भी जाना जाता है जो पंजाब और देश के कई जगह पर बहुत शान से मनाया जाता है, ये हर साल अप्रैल यानि वैशाख माह के पहले दिन आता है। रबी फसलों के पकने व तैयार हो जाने की खुशी में इस दिन जश्न मनाया जाता है। खासकर किसानों के लिए बैसाखी का दिन एक बड़ा उत्सव होता है, बैसाखी वाले दिन वो अपनी कामयाब फसलों के तैयार हो जाने पर ईश्वर का शुक्रिया करते हैं, लेकिन जैसे कि हमने आपको पहले भी बताया कि बैसाखी मनाने के पीछे कई मान्यताएं हैं, तो इस कारण से भी बैसाख का दिन बहुत ज्यादा मायने रखता है, क्योंकि ये वही दिन है जब सिखों के 10वें और आखिरी गुरु ‘‘गुरु गोबिंद सिंह जी’’ ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।
बैसाखी के त्यौहार से जुड़ी यह प्रथा काफी सुनने में मिलती है कि इस दिन, 1699 में, मुगलों ने नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर, के सिर को सरेआम काट दिया था। क्योंकि उन्होंने मुगल आक्रमणकारियों का विरोध किया था जो हिंदुओं और सिखों की सांस्कृतिक पहचान को मिटा देना चाहते थे। 1699 को बैसाखी के दिन, उन्ही के बेटे, गुरु गोबिंद सिंह ने सिखों को ललकारा और उन्हें अपने शब्दों और कार्यों के माध्यम से प्रेरित किया। गुरु गोविंद सिंह ने लगभग 1000 लोगों के बीच सिखों को चुनौती दी कि क्या यहाँ कोई ऐसा सिख है जो अपनी जान देने के लिए तैयार है। उनकी इस चुनौती को स्वीकार करते हुए भीड़ में से पाँच लोग अपनी स्वेच्छा से आगे आए। गुरु गोविंद सिंह जी ने उन्हें बाटे से अमृत चखाया और “खालसा” नामक संत-सैनिकों का एक पाँच-सदस्यीय समूह बनाया। खालसा का प्रतिनिधित्व करने वाले इन पाँच लोगों ने केश (बाल), कछैरा (अंडरवियर), कंघा (कंघी), कृपाण (तलवार), और कड़ा (स्टील का छल्ला) को धारण किया। इसके बाद से सिख समाज के लोग अपने उपनाम में सिंह जिसका अर्थ शेर है, इसका उपयोग करने लगे, जो गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम से ही लिया गया है।
इस त्यौहार को मनाने के और भी कई कारण हैं, बैसाखी के दिन लोग पंजाबी न्यू ईयर सेलिब्रेट करते हैं, साथ ही रबीकी फसलें इस माह तैयार हो जाती हैं और ये उनकी कटाई का समय होता है, जो किसानों के लिए एक बहुत बड़ा दिन होता है।
बैसाखी वाले दिन गंगा नहान करने को बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि हिन्दू मान्यता के अनुसार इस दिन गंगा मैया धरती पर पधारी थीं, जो भागीरथ की कठिन तपस्या के बाद उनसे प्रसन्न हो कर धरती पर आई थी। इस दिन आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है और सूर्य मेष राशि में प्रविष्टि करता है। इन कारणों से यह त्योहार लोगों के लिए महत्व रखता है।
हर त्यौहार की तरह ही इस त्यौहार की तैयारियां भी कई दिनों पहले ही शुरू हो जाती है। इस दिन घर की साज सजावट से लेकर गुरुद्वारे को बहुत खूबसूरती के साथ सजाया जाता है। सिख धर्म के मानने वाले सवेरे नहा कर गुरूद्वारे जाते हैं और वहाँ गुरु ग्रंथ साहेब जी का पाठ करते हैं और नगर कीर्तन आयोजित करते हैं। ढोल भंगड़े की ताल से त्यौहार की रौनक और भी बढ़ जाती है। बात की जाए हिन्दू धर्म कि तो इस दिन लोग पवित्र नदी गंगा में स्नान करते हैं, भोग लगते हैं और माँ गंगा से अपनी घर और जीवन में खुशहाली बनी रहे इसकी कामना करते हैं।
बैसाखी के कस्टम और ट्रेडिशन को फॉलो करते हुए हम कुछ एक्टिविटी हर साल करते हैं, और यकीन मानिए यही वो छोटी-छोटी चीजें हैं जो त्योहार को और भी खास बनती हैं :
इस दिन कुछ सामान्य रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब को दूध में स्नान कराया जाता और सभी लोग प्रार्थना सभा में हिस्सा लेते हैं और गुरुद्वारों में जाकर मत्था टेकते हैं। गुरुद्वारे में मौजूद लोगों को मिठाई बाटी जाती है। दोपहर के समय में सिखों द्वारा ग्रन्थ साहिब परेड निकाली जाती। ये वैसाखी के कुछ सामान्य अनुष्ठान हैं।
बैसाखी के दिन सभी बच्चे और बड़े नए कपड़े (ड्रेस) पहनते हैं और त्यौहार को सेलिब्रेट करते हैं, जो चारों ओर खुशी के माहौल को दर्शाता है। पारंपरिक पंजाबी पोशाक में पुरुष पगड़ी के साथ कुर्ता और लुंगी, बंड़ी, रूमाल या स्कार्फ पहनते हैं, वहीं महिलाएं सलवार कमीज के साथ जेवर (आभूषण) पहनती हैं। मल्टी कलर की ये ड्रेस खूब जमती है और आँखों को भाती है और इससे यह पता चलता है कि पंजाबियों का रहन सहन और पहनावा कितना मनमोहक होता है।
बैसाखी में लगने वाले मेलों में खाने पीने का खूब इंतजाम रहता है और तरह-तरह के फूड स्टॉल लगे रहते हैं। मेले में कभी भी छोले भटूरे, अचारी मटन, चिकन साग वाला, सरसों का साग, कढ़ी चावल, ड्राई फ्रूट खीर और लस्सी जैसे पंजाबी पकवान आपको खाने को मिल सकते हैं।
बैसाखी के दिन सभी भांगड़ा डांस करते हैं, इसे फसल नृत्य भी कहा जाता है। पंजाबी न्यू ईयर पर पंजाब के कई जगहों पर, हिमाचल प्रदेश और शिमला में मेले भी लगते हैं।
वैसे तो कई राज्यों में अलग-अलग नाम से बैसाखी का त्यौहार मनाया जाता है मगर नीचे आपको उस जगहों के बारे में बताया गया है, जहाँ की बहुत ही प्रसिद्ध है, खासकर अगर आप उस जगह जाने की सोच रहे हों, जिस जगह लोग दूर-दूर बैसाखी मनाने आते हैं, तो आइए जानते हैं कि जगहों पर खास मनाई जाती है बैसाखी:
तो देखा आपने कैसे और किस प्रकार से बैसाखी का त्यौहार हमारे देश में मनाया जाता है और इस त्यौहार का हमारे लिए क्या महत्व है।उम्मीद है कि इस लेख के जरिए आपको विभन्न पहलुओं बैसाखी से जुड़ी जानकारी प्राप्त हुई होगी । फर्स्टक्राई की ओर सभी देशवासियों को बैसाखी की हार्दिक शुभकामनाएं!
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