शिशु

पहले 24 घंटों में ब्रेस्टफीडिंग – फायदे और टिप्स

बधाई हो! अब आप एक खूबसूरत से बच्चे की माँ बन चुकी हैं। आप सोच रही होंगी, कि माँ बनना आपके लिए शायद एक केक वॉक जैसा होगा। तो, हम आपकी खुशी को कम तो नहीं करना चाहते, लेकिन यह खूबसूरत समय अनगिनत जिम्मेदारियों और चुनौतियों के साथ आता है और इसमें अव्वल नंबर पर आता है, डिलीवरी के बाद ब्रेस्टफीडिंग करवाना। आपने शायद सुना भी होगा, कि जन्म के बाद 24 घंटे के अंदर-अंदर आपके बच्चे को स्तनपान कराना कितना जरूरी होता है। और यहाँ इस लेख में हम पहले 24 घंटों के दौरान ब्रेस्टफीडिंग के बारे में चर्चा करने वाले हैं। इसमें हम इसके कई फायदों के बारे में बात करेंगे और इसके लिए कई टिप्स के ऊपर रोशनी डालेंगे। 

बच्चे के जन्म के बाद पहले 24 घंटों के दौरान क्या होता है?

बच्चे को जन्म देने के बाद वास्तव में क्या होता है? अगर आप यह जानना चाहती हैं, तो हम आपको बताएंगे, कि जन्म के बाद पहले दिन एक माँ और उसका बच्चा क्या अनुभव करते हैं। यहाँ पर ऐसी कुछ बातें दी गई हैं, जो माँ और उसका बच्चा अनुभव करते हैं:

1. माँ के लिए

एक माँ के तौर पर डिलीवरी के बाद आपको अपने पहले दिन में नीचे दी गई कुछ बातों का अनुभव होता है: 

  • आपकी डिलीवरी चाहे नॉर्मल हुई हो या सी-सेक्शन, आपको दर्द का अनुभव होता है। हालांकि, इस दर्द से राहत पाने के लिए आपको दवा दी जाती है।
  • आपको ब्लीडिंग और पेट में दर्द हो सकता है, जो कि सामान्य है और जल्द ही ठीक हो जाता है।
  • आपको बैठने में मुश्किल हो सकती है और दूध पिलाना आपको बहुत ही भारी काम लग सकता है।
  • इन सबके बावजूद आप अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड कराना शुरू करना चाहेंगी।

2. बच्चे के लिए

आपका नन्हा-सा शिशु नीचे दिए गए कुछ अनुभवों से गुजर सकता है:

  • आपका बच्चा एक अंधेरे और आरामदायक वातावरण से निकलकर एक रोशनी भरे और चमकदार वातावरण में आने के एक बहुत बड़े बदलाव का अनुभव करता है।
  • अब तक वह एक ऐसी दुनिया में था, जो कि बहुत ही शांत थी और जहाँ सब कुछ धीमा था, और अब हर तरफ शोर-शराबा होता है।
  • सबसे जरूरी चीज, जो आपका बच्चा अनुभव करता है, वह है भूख।
  • यह बहुत जरूरी है, कि आप बच्चे के रोना शुरू करने से पहले उसका पेट भरने की कोशिश करें, क्योंकि एक रोते हुए परेशान बच्चे को दूध पिलाना बहुत मुश्किल हो सकता है।

जन्म के तुरंत बाद ब्रेस्टफीडिंग के क्या फायदे होते हैं?

जन्म के तुरंत बाद बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराना, न केवल बच्चे के लिए बहुत अच्छा होता है, बल्कि यह माँ के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। जन्म के तुरंत बाद ब्रेस्टफीडिंग कराने के कुछ फायदे नीचे दिए गए हैं: 

  • न्यूबॉर्न बेबी की इम्युनिटी के निर्माण के लिए ब्रेस्टफीडिंग बहुत जरूरी है, जो कि आपके बच्चे को कई तरह की बीमारियों और इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करता है।
  • जैसे ही आप बच्चे को ब्रेस्टफीड कराना शुरू करती हैं, आपका शरीर ऑक्सीटोसिन नामक एक हॉर्मोन रिलीज करता है, जो कि गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है।
  • जब बच्चा आपका दूध पीना शुरू करता है, तो इससे आपके बच्चे के लिए दूध के अधिक उत्पादन में मदद मिलती है और दूध का प्रवाह अच्छी तरह से जारी रहता है।
  • इससे माँ और उसके बच्चे के बीच ब्रेस्टफीडिंग बॉन्ड को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, क्योंकि इस समय बच्चा अधिक चौकन्ना रहता है।
  • त्वचा से त्वचा का संपर्क होने से बच्चा सही तरह से लैच कर पाता है।
  • इससे आपका बच्चा शांति और आराम का अनुभव करता है, क्योंकि स्तनपान से बच्चों को आराम मिलता है।
  • माँ के साथ नजदीकी संपर्क होने से उसे माँ के शरीर से गर्माहट मिलती है और वह गर्म रहता है।
  • ऐसा भी देखा गया है, कि जो माँएं जन्म के कुछ घंटों के अंदर ब्रेस्टफीडिंग करना शुरू कर देती हैं, वह अपने बच्चों को सफलतापूर्वक लंबे समय तक ब्रेस्टफीड करवा पाती हैं।

एक न्यूबॉर्न बेबी को अपने पहले दिन कितने ब्रेस्ट मिल्क की जरूरत होती है?

आपके बेबी का पेट बहुत ही छोटा होता है। इसका आकार एक चेरी के जितना छोटा होता है। यह छोटा सा पेट केवल 5 से 7 मिली कोलेस्ट्रम (गाढ़ा पीला दूध) को रख पाने में सक्षम होता है। इसी कारण से आपको अपने बच्चे को जन्म के बाद के पहले दिन, लगभग 10 से 15 बार दूध पिलाने की जरूरत होती है। आपका बच्चा हर डेढ़ से तीन घंटे में दूध पी सकता है। अगर बच्चा अधिकतर समय सोता रहता है और 3 से 4 घंटे तक दूध पीने के लिए नहीं उठता है, तो हम आपको उसे जगा कर दूध पिलाने की सलाह देंगे। 

पहले 24 घंटों में ब्रेस्टफीडिंग के लिए जरूरी टिप्स:

यहाँ पर कुछ टिप्स दिए गए हैं, जो आपको जन्म के बाद, पहले 24 घंटों के दौरान बच्चे को ब्रेस्टफीड कराने में मदद कर सकते हैं:

  • आरामदायक पोजीशन में बैठें, आपको डिलीवरी की प्रक्रिया के कारण अभी भी दर्द हो रहा होगा और इसलिए, सपोर्ट के लिए आप तकियों का इस्तेमाल कर सकती हैं। आगे की ओर झुकने से बचें। सीधी और आरामदायक स्थिति में बैठें।
  • सुनिश्चित करें, कि बच्चा आपके एरियोला (निप्पल के चारों ओर का गहरे रंग का हिस्सा) के अधिकतर हिस्से को अपने मुँह में ठीक से पकड़ें। सही तरीके से न पकड़ने पर न केवल माँ को दर्द होगा बल्कि बच्चे के पेट में भी कम दूध जाएगा।
  • बच्चे को जबरदस्ती दूध पिलाने से बचें। बच्चे को केवल तब ही दूध पिलाना चाहिए, जब उसे भूख लगी हो।
  • अपने बच्चों को दिन में 10 से 15 बार दूध पिलाने के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार करें, क्योंकि उसका पेट बहुत ही छोटा होता है, जिससे उसकी भूख भी छोटी होती है और बार-बार दूध पिलाने की जरूरत पड़ती है।
  • दूध पिलाते समय बच्चे को अपनी त्वचा से सटाकर रखें। त्वचा से त्वचा का संपर्क आपके और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है।
  • न्यूबॉर्न बेबीज आमतौर पर जन्म के बाद बहुत सोते हैं। लेकिन, आपको बेबी को हर 3 घंटे पर दूध पिलाने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि ब्रेस्ट मिल्क सप्लाई सुचारु रुप से चलती रहे।
  • शुरुआत में, कुछ समय तक बच्चे को ब्रेस्टफीड कराने में आपको 45 मिनट या उससे अधिक का समय लग सकता है, जो कि बहुत उबाऊ और थकावट भरा हो सकता है, लेकिन बच्चे की इम्युनिटी के निर्माण के लिए पहला दूध या कोलोस्ट्रम बहुत जरूरी है।
  • पहली रात को ब्रेस्टफीडिंग कराने में किसी तरह की परेशानी होने पर या आमतौर पर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराने में किसी तरह की समस्या होने पर, आप एक लेक्टेशन कंसल्टेंट की मदद ले सकती हैं।

डिलीवरी के बाद, दूध पिलाने में अड़चन पैदा करने वाली कुछ बातें

ब्रेस्टफीडिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जो आमतौर पर प्राकृतिक रूप से माँ को मिलती है। लेकिन कभी-कभी कुछ समस्याएं आ सकती हैं, जो इस प्रक्रिया में बाधा डाल सकती हैं। नीचे कुछ ऐसी समस्याएं दी गई हैं, जो डिलीवरी के बाद दूध पिलाने में अड़चन पैदा कर सकती हैं:

  • अगर आपकी एक एपिड्यूरल डिलीवरी हुई थी, तो इससे आपका बच्चा बहुत अधिक सोने वाला हो सकता है, जिससे वह ठीक से दूध नहीं पी पाता है।
  • अगर आपकी सी-सेक्शन डिलीवरी हुई है, तो इससे आपका बच्चा बेहद थका हुआ हो सकता है। जिससे वह ब्रेस्टफीडिंग के लिए कोशिश करने में अधिक जोश नहीं दिखाता है।
  • अगर बच्चा प्रीमेच्योर या प्रीटर्म बेबी है, तो इससे ब्रेस्टफीडिंग में रुकावट आ सकती है। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे को दूध पिलाने के बारे में अधिक जानकारी के लिए एक लेक्टेशन एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए।
  • नारकोटिक्स, बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराने में समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
  • अगर बच्चे को नियोनेटल या इंटेंसिव केयर यूनिट में रखना पड़ता है, तो इससे ब्रेस्टफीडिंग में समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, आपसे कहा जा सकता है, कि अपना ब्रेस्ट मिल्क निकालकर बच्चे को पिलाएं।

एक नई माँ का ब्रेस्टफीडिंग करवाने के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना बिल्कुल सामान्य बात है।  और इसके लिए परेशान होने की या घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सही गाइडेंस और मेडिकल हेल्प से, आप अपने प्यारे से बच्चे के साथ, ब्रेस्टफीडिंग के एक बेहतरीन अनुभव को साझा करने में सक्षम हो सकती हैं। 

यह भी पढ़ें: 

ब्रेस्टमिल्क (माँ के दूध) का रंग – क्या नार्मल है और क्या नहीं
माँ के दूध में फैट बढ़ाने के 6 इफेक्टिव टिप्स
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पूजा ठाकुर

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