गर्भावस्था के दौरान योग – आसन, फायदें और सलाह

गर्भावस्था के दौरान योग - आसन, फायदें और सलाह

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गर्भावस्था एक महिला के जीवन का अनमोल और सबसे खुबसूरत अनुभव है! यदि सब ठीक रहे, तो आप वह सब कर सकती हैं जो आपको पसंद है। बस अपने अंदर बढ़ रहे बच्चे की ज़रूरतों के लिए कुछ चीज़ों में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। व्यायाम करना कोई अपवाद नहीं है, और जब गर्भावस्था के दौरान शारीरिक रूप से सक्रिय होने की बात आती है, तो यह जरूरी है कि आप उसपर अतिरिक्त ध्यान दें। योग भी व्यायाम का एक रूप है जो गर्भवती महिलाएं करने की सोच सकती हैं, और गर्भावस्था के दौरान योग का अभ्यास करने का सबसे सुरक्षित तरीका है एक प्रमाणित योग प्रशिक्षक की देखरेख में की जाने वाली प्रसव पूर्व योग अभ्यास, और ये सत्र विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए तैयार किए जाते हैं।

गर्भावस्था के दौरान योग का अभ्यास कैसे करें

गर्भावस्था के दौरान, एक योग्य योग प्रशिक्षक आपको किसी भी डी.वी.डी या इंटरनेट वीडियो से बेहतर तरीके से मार्गदर्शन दे सकते हैं। इसके अलावा विशेषज्ञ प्रशिक्षक आपके योग के रूटीन और योग की मुद्राओं को आपके शरीर की आवश्यकताओं के अनुसार बता सकेंगे। यह आपको योग करने के लिए सभी योजना तैयार करने में मदद करेगा जो आपकी शारीरिक अवस्था और गर्भावस्था के चरण के उपयुक्त हो। इसका एक और बड़ा लाभ है कि आप अन्य गर्भवती महिलाओं से मिल सकेंगी।

यहाँ कुछ बुनियादी नियम दिए गए हैं जिनका पालन गर्भवती महिलाओं को योग का अभ्यास करते समय करना ही चाहिए:

  • ऐसे किसी भी आसन से बचें, जिसमें सिर के बल उल्टे खड़े होने वाली मुद्राएं करने की आवश्यकता होती है, जैसे सिर के बल या हाथ या कंधों के बल खड़ा होना।

गर्भावस्था के दौरान योग करते समय ध्यान देने वाला नियम है कि अपने शरीर की सुनें, और किसी भी असुविधा का अनुभव होने पर तुरंत ही रुक जाएं। योग मुद्राओं में भी आपके बदलते मिजाज और शरीर के आकार के अनुसार परिवर्तन किया जाना चाहिए।

क्या योग करना गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित है?

योग केवल शरीर को घुमाना और मोड़ना ही नहीं है। अगर यह सही तरीके से किया जाए, तो यह बेहद फायदेमंद हो सकता है, खासकर गर्भावस्था के दौरान। वास्तव में, गर्भावस्था के दौरान योग का सबसे अच्छा लाभ है कि यह आपको सांस लेने और आराम करने में मदद करता है। इससे आपको अपने शरीर को गर्भावस्था, प्रसव पीड़ा, शिशु के जन्म और मातृत्व के लिए तैयार करने में मदद मिलती है। योग मन और शरीर को शांत करता है, जिससे शारीरिक और भावनात्मक तनाव से राहत मिलती है, जिसकी आवश्यकता आपके शरीर को पूरी गर्भावस्था में होती है। गर्भावस्था में सामान्य प्रसव के लिए बहुत सी महिलाएं प्रसव पूर्व योग का भी अभ्यास करती हैं।

यहाँ गर्भावस्था के दौरान योग करने पर विचार और अभ्यास करते समय ध्यान में रखने योग्य कुछ दिशा निर्देश दिए गए हैं।

  • प्रसव पूर्व योग कराए जाने वाले सत्रों में जाना बेहतर होगा। यदि आप अपने नियमित योग सत्रों में योग करना जारी रखना चाहती हैं, तो अपने योग प्रशिक्षक को जरूर बताएं कि आप गर्भवती हैं और उन्हें इस बात से अवगत कराएं कि आपकी गर्भावस्था की कौन सी तिमाही चल रही है।

  • शरीर का गुरुत्व केंद्र दूसरी तिमाही के बाद बदल जाता है, इसलिए जब आप ऐसे व्यायाम करें जिसमें आपको एड़ी या पैर की उंगलियों पर संतुलन बना कर रखना पड़े तो किसी प्रकार का टेक इस्तेमाल करना सुनिश्चित करें ।

  • जब आप आगे झुकती हैं, तो कूल्हों से मुड़ें, उरोस्थि को पहले आगे बढ़ाएं और सिर से लेकर टेलबोन तक रीढ़ की हड्डी को तानें। यह आपके लिए सांस लेना आसान बना देगा क्योंकि यह पसलियों को चलने के लिए अधिक जगह देता है।

  • व्यायामों की मुद्राएं करते समय सुनिश्चित करें कि श्रोणि को न्यूट्रल स्थिति में रखते हुए पेट की मांसपेशियों को काम में लगाएं और टेलबोन को नीचे की ओर हल्का दबने दें । यह कटिस्नायुशूल दर्द को रोकने में मदद कर सकता है जो गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाओं को होता है।

  • शरीर को घुमाने वाले आसन करने के लिए, ध्यान रखिए की कमर के बजाय कंधों और पीठ से अधिक मुड़ें, जो आपके पेट पर किसी भी तरह का दबाव नहीं पड़ने देगा । कोई भी अचानक या अधिक मुड़ने वाली क्रियाएं न करें।

यहाँ कुछ मुद्राओं की एक सूची दी गई है जो गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित मानी जाती है। कृपया प्रत्येक तिमाही के लिए सुरक्षित योग आसनों की गहन समझ के लिए गर्भावस्था के दौरान प्रभावी योग वाले खंड पर ध्यान दें।

  • बद्धकोणासन
  • मार्जरासन
  • भुजंगासन (केवल पहली तिमाही में अगर सुविधापूर्ण हों तो)
  • पश्चिमोत्तानासन (सुविधापूर्वक )
  • पार्श्वकोणासन
  • उत्तानासन या हस्तपादासन (कुर्सी की मदद के साथ )
  • त्रिकोणासन (कुर्सी की मदद के साथ)

गर्भावस्था में योग अभ्यासों की शुरुआत करने के लिए सबसे अच्छा समय

योग अभ्यासों की शुरुआत करने से पहले आपकी पहले की स्वास्थ्य जानकारी का पता होना बहुत महत्वपूर्ण है। जिन महिलाओं ने कभी योग नहीं किया है और अपनी गर्भावस्था के दौरान पहली बार योग करने जा रही हैं, उनको डॉक्टर से इसके लिए सलाह लेनी चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्भावस्था के पहले तीन महीने सबसे महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि गर्भपात की संभावना अधिक होती है। यही कारण है कि अत्यंत सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है, खासकर पहली तिमाही के दौरान। ऐसा प्रतीत नहीं होता क्योंकि पेट का उभार नज़र नहीं आता है, लेकिन प्रारंभिक गर्भावस्था के दौरान और गर्भावस्था से पहले योग करते समय देखभाल और मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता होती है।

गर्भावस्था के दौरान योग शुरू करने का सबसे अच्छा समय आपकी दूसरी तिमाही है, जो समय गर्भावस्था के 15 सप्ताह बाद शुरू होता है। आई.वी.एफ गर्भावस्था के मामले में, कुछ योग शिक्षक योग शुरू करने से पहले लगभग 20 सप्ताह तक प्रतीक्षा करने की सलाह देते हैं, लेकिन विश्राम और हल्की साँस लेने संबंधी व्यायाम किसी भी समय किए जा सकते है।

गर्भावस्था के लिए कुछ प्रभावी योग आसन

यहाँ गर्भावस्था के प्रत्येक तिमाही के लिए कुछ प्रभावी योग आसन बताए गए हैं जिनमें इन्हें करने के लिए चरण दर चरण वर्णन शामिल है।

गर्भावस्था की पहली तिमाही मे किए जाने वाले योग आसन

गर्भावस्था की पहली तिमाही वह अवस्था है, जब विकासशील भ्रूण को सबसे अधिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है। यहाँ कुछ आसन बताए गए हैं जो आप इस अवधि के दौरान सुरक्षित रूप से कर सकती हैं:

1. ताड़ासन

ताड़ासन

यह रीढ़ को मजबूत बनाने में मदद करता है और पीठ के दर्द से राहत देता है।

कैसे किया जाए

  • अपने पैरों को फैला कर खड़ी हो जाएं । पैरों को अपने कूल्हों की चौड़ाई के बराबर फैलाएं।
  • अपनी रीढ़ को सीधा रखें । अपने हाथों को शरीर के समानांतर रखें और सुनिश्चित करें कि हथेलियाँ जाँघों की तरफ हों ।
  • अपने हाथों को ऊपर खींचें और नमस्कार मुद्रा मे लाएं।
  • गहरी साँस लेते हुए अपनी रीढ़ को सीधा करें। अपने हाथों को अपने सिर के ऊपर उठाते हुए साँस अंदर लें।
  • अपनी रीढ़ को जितना संभव हो उतना तानें, लेकिन यह अवश्य सुनिश्चित करें कि आपकी पीठ पर कोई दबाव न पडे़।
  • अगला कदम आपके सिर को पीछे की ओर झुकाना है और अपनी आंखों से उंगलियों के नोक की तरफ देखना है।
  • इसी मुद्रा मे बने रहे और धीरेधीरे 10 तक गिनें। गहराई से साँस लेना और छोड़ना न भूलें।
  • फिर गहराई से साँस छोड़ते हुए, अपने शरीर को आराम दें और अपने पैरों को वापस फर्श पर ले आए ।
  • अपने हाथों को नीचे लाएं और हथेलियों को जाँघों की ओर रखें ।

2. मार्जरासन

यह मुद्रा केवल गर्भावस्था के पहले तिमाही में ही करना उचित है, और 26 सप्ताह के बाद इसे करना मना है। यह रक्त परिसंचरण में सुधार करने में मदद करता है, और कंधे और कलाई को भी मजबूत बनाता है।

कैसे किया जाए

  • फर्श पर नीचे झुकें, और एक बिल्ली की तरह हाथ और घुटनों के बल बैठें।
  • अपने सिर को सीधा रखकर गहरी साँस ले और अपनी ठोड़ी को ऊपर उठाएं।
  • इसके साथ ही, अपने सिर को थोड़ा पीछे करें।
  • अपने नितंबों को तान कर स्थिर रखें जब तक कि झुनझुनी महसूस न करें ।
  • गहरी सांस लेते हुए लगभग 30 से 90 सेकंड के लिए मुद्रा में बने रहें।
  • अपनी ठुड्डी को अपनी छाती के पास लाने की कोशिश करें।
  • नितंबों की मांसपेशियों को ढीला करें और पीठ को जितना संभव हो उतना आराम से पीछे झुकाएं।
  • इसी मुद्रा मे बने रहे और धीरेधीरे 10 तक गिनें। पहली स्थिति में लौट आएं।

3. उत्तानासन

उत्तानासन

गर्भावस्था के दौरान आमतौर पर आगे की ओर झुकने की सलाह नहीं दी जाती हैं, लेकिन यह एक अपवाद है और पैरों और पीठ के लिए अच्छा है।

कैसे करें

  • सीधा खड़े होकर अपने पैरों के बीच 3 इंच की दूरी रखें ।
  • अपने हाथों को अपने शरीर के सहारे रखिए और अपनी हथेलियों को जांघों के पास रखें।
  • गहरी सांस लें और अपने हाथों को अपने सिर के ऊपर लाएं अपनी हथेलियों को बाहर फैलाते हुए।
  • सांस छोड़ते हुए आगे झुकें।
  • साथ ही, नमस्कार मुद्रा में अपने हाथ भी मोड़ें।
  • मुद्रा को बनाएं रखें और 10 या 15 तक गिनें। सामान्य रूप से सांस लेती रहें और अपनी सांस को रोककर न रखें।
  • अब गहरी सांस लें, आराम से वापस पहली स्थिति में आएं।

4. शवासन

शवासन

यह विश्राम करने की मुद्रा है जो शारीरिक गतिविधियों के बाद शरीर को शांत करने और आराम करने के लिए एकदम सही है। पहली तिमाही के बाद, शवासन करते समय एक करवट में लेटना उचित है।

कैसे करें

  • फर्श पर अपनी पीठ के बल लेटें।
  • अपनी आँखें बंद करें ।
  • अपने शरीर और दिमाग को आराम करने दें। इस समय खुश करने वाले विचारों के बारे में सोचें और नकारात्मकता को जाने दें। इसमें जल्दबाज़ी न करें और आराम से करें। सामान्य रूप से सांस लें और अपनी सांस को रोककर न रखें।
  • थोड़ी देर के बाद, सीधे खड़े हो जाएं।
  • यह आसन एक योग सत्र का अंतिम आसन है और शरीर को विश्राम देने के लिए अच्छी तरह से काम करता है।

दूसरी तिमाही में किए जाने वाले योग आसन

जैसेजैसे आपका पेट बाहर की ओर निकलने लगता है और वजन बढ़ता है, आपका चलनाफिरना सीमित हो सकता है और आपको ऐसे आसनों का अभ्यास करने की आवश्यकता है जो आपके पेट पर कोई दबाव न डालें। यहाँ कुछ आसन हैं जो आप सुरक्षित रूप से दूसरी तिमाही में कर सकती हैं।

1. वीरभद्रासन

वीरभद्रासन

यह मुद्रा पूरे शरीर को लाभ पहुँचाती है और शरीर को मजबूत भी बनाती है।

कैसे करें

  • अपने पैरों को जोड़ कर खड़ी हो जाएं।
  • अपने हाथों को दोनों तरफ रखें, हथेलियों को अपने शरीर की ओर रखें ।
  • अपने पैरों को इतना फैलाएं जितनी आपके कूल्हों की चौड़ाई है।
  • जमीन पर अपना बाएं पैर रखे हुए अपने धड़ को दाईं ओर मोड़ें।
  • अपने दाहिने घुटने को आगे की ओर मोड़ें।
  • धीरेधीरे, गहरी सांस लें और धीरेधीरे अपने हाथों को अपने सिर के ऊपर उठाएं अपने सिर के उपर हथेलियों को जोड़कर नमस्कार मुद्रा में रखें।
  • पीछे की ओर तनें, लेकिन अपनी पीठ पर ज़ोर दिए बगैर। उपर की ओर देखते हुए अपनी उंगलियों पर अपनी निगाहों को टिकाएं।
  • अब सामान्य रूप से सांस लेते हुए 10 की गिनती तक इस मुद्रा में रहें। अपनी सांस को रोककर न रखें।
  • अपने हाथों को नीचे लाते हुए धीरेधीरे सांस छोड़ें।
  • अपने घुटने को धीरेधीरे सीधा करते हुए अपने पैरों को जोड़े ओर दुसरी तरफ से भी वैसा ही करे ।

2. मेरू आकर्षण आसन

यह आसन आपके पेट की मांसपेशियों, अंदरूनी पैरों और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है। यह शरीर की दोनो तरफ की मांसपेशियों को भी तानता है। जैसेजैसे आपका बच्चा बढ़ता है और अधिक जगह लेता है, यह आसन आपके शरीर को आसानी से इस बदलाव को करने में मदद करता है।

कैसे करें

  • दाहिनी करवट में लेटें और दाहिने पैर पर बाएँ पैर को रखें।
  • फर्श पर अपनी कोहनी रखते हुए, अपने सिर को दाहिनी हथेली पर रखें ।
  • अपने बाएं हाथ को अपनी बाईं जांघ पर रखें।
  • अपने बाएं पैर को जितना संभव हो उतना ऊपर उठाएं और पैर की बड़ी अंगुली को बाएं हाथ से पकड़ें।
  • दूसरी तरफ भी दोहराएं।

3. उत्थानासन

उत्थानासन

यह आसन उन मांसपेशियों को मजबूत करता है जो आपके वजन बढ़ने के कारण तनी रहती हैं, और यह आसन आपको प्रसव के लिए तैयार भी करता है। पीठ का मध्य भाग, जांघ, टखनों और गर्भाशय का व्यायाम भी इससे होता है ।

कैसे करें

  • पैरों के बीच लगभग एक मीटर की दूरी रखते हुए खड़ी हो जाए और पैरों की उंगलियाँ सामने की ओर होनी चाहिए।
  • दोनों हाथों की उंगलियों को जोड़ें और अपनी भुजाओं को अपने सामने शिथिल रूप से लटका दें।
  • अब धीरेधीरे उकड़ू बैठें और खड़े होने की स्थिति पर लौटें।

4. वज्रासन

वज्रासन

यह आसन गर्भावस्था के दौरान एक आम शिकायत से छुटकारा दिलाता है पाचन संबंधी समस्याएं। यह श्रोणि क्षेत्र में रक्त की आपूर्ति को भी बढ़ाता है और श्रोणि की मांसपेशियों को मजबूत करता है, इस प्रकार प्रसव में मदद करता है ।

  • अपने पैर के अंगूठों को जोड़ते हुए और एड़ियों के बीच दूरी बनाएं रखते हुए फर्श पर घुटने के बल बैठें।
  • अपने नितंबों को नीचे की ओर ले जाएं ताकी एड़ी कूल्हों को बाहरी तरफ से छूए।
  • अपनी पीठ और सिर को सीधा रखते हुए, अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें जिसमें हथेलियाँ नीचे की ओर हों।

तीसरी तिमाही में किए जाने वाले योग आसन

1 . प्राणायाम

प्राणायाम

तीसरी तिमाही में किए जाने वाले व्यायाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राणायाम लयबद्ध श्वास पर ध्यान केंद्रित करते हुए विश्राम करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

कैसे करें

  • आराम से बैठ जाएं, बेहतर होगा अगर पालथी मार कर बैठ सकें।
  • अपने बाएं नथुने के माध्यम से गहराई से साँस ले और अपने दाहिने अंगूठे से अपने दाहिने नथुने को बंद करे।
  • बाएं नथुने को बंद करने के लिए अपने दाहिने हाथ की अनामिका का उपयोग करें और दाएं नथुने से सांस छोड़ें।
  • ऐसा 10 बार दोहराएं ।

2. उत्कटासन

स्ट्रेचिंग और सांस लेने का एक संयोजन, यह आसन आपको सांस लेने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करके प्रसव संकुचन के लिए तैयार करता है।

कैसे करें

  • फर्श पर सीधी खड़ी हो जाएं, हाथो को उपर उठाते हुए श्वास लें जब तक आपकी भुजाएं फर्श से लंबवत्त दिशा में हो जाएं।
  • दीवार के सहारे अपनी पीठ रखते हुए अपनी सांस छोड़ें और अपने घुटनों को मोड़ें जब तक आपका धड़ जांघों से लंबवत्त दिशा में हो जाएं।
  • 60 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें, श्वास लें और खड़े होने की स्थिति में वापस लौटें।

3. त्रिकोणासन

त्रिकोणासन

यह गर्भावस्था के दौरान पाचन संबंधी परेशानियों को कम करने के लिए एक अच्छा आसन है और कूल्हों के लचीलेपन में भी सुधार करता है।

कैसे करें

  • सीधी खड़ी हो जाएं और अपने पैरों को आपस में जोड़े रखें।
  • शरीर के दोनों ओर अपने हाथों को रखे। सुनिश्चित करें कि आपकी हथेलियां आपकी जांघों की ओर हो ।
  • धीरेधीरे अपने पैरों को फैलाएं। सुनिश्चित करें कि आपके दोनों पैरों की उंगलियां एक दूसरे के समानांतर हो।
  • अपने हाथों को ऊपर उठाएं, पर हथेलियों नीचे की ओर ही रखे। अपने हाथों को अपने कंधों के समान रखे।
  • एक गहरी सांस लें और अपनी बाईं ओर झुकें। इसी समय, अपने दाहिने हाथ को ऊपर उठाएं ।
  • अपने सिर को बाईं ओर झुकाएं और दाहिने हाथ की उंगलियों पर अपनी नज़र रखे।
  • उसी स्थिति मे रहे और 10 या 20 तक गिनें। ऐसा करते हुए सामान्य रूप से सांस लेते रहें। सांस को रोक कर न रखें।
  • सांस को धीरेधीरे लें और अपने शरीर को पहली स्थिति में वापस लाने के लिए सीधा खड़ी हो जाएं।
  • दूसरी तरफ समान चरणों को दोहराए।

4. उपविष्ठा कोणासन

उपविष्ठा कोणासन

यह आसन पीठ के निचले हिस्से के दर्द को दूर करने में मदद करता है और श्रोणि के चारों ओर जगह बनाता है, इस प्रकार कूल्हे के जोड़ों को खोलकर और रीढ़ की हड्डी को मुक्त करके प्रसव के लिए शरीर को तैयार करता है।

कैसे करें

  • अपनी पीठ को सीधा रखते हुए बैठें और अपने हाथों के सहारे थोड़ा पीछे झुकें ।
  • 90 डिग्री के कोण पर अपने पैरों को रखें।
  • हाथों को फर्श पर मजबूती से दबाएं और अपने नितंब को आगे की ओर खिसकाएं, पैरों को थोड़ा और खोल दें।
  • यदि आप फर्श पर असहज महसूस कर रही हैं तो एक कंबल मोड़ कर प्रयोग करें।

प्रसव पूर्व योग के 10 लाभ

प्रसव पूर्व योग माँ और बच्चे के लिए अच्छा है क्योंकि इसमें व्यायाम के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण शामिल है जिसमें स्ट्रेचिंग, श्वास पर ध्यान केंद्रित करना और मन को शांत करना शामिल है। यहाँ उन लाभों की एक सूची दी गई है जो प्रसव पूर्व योग प्रदान करते हैं।

  • शारीरिक और भावनात्मक तनाव को कम करता है।
  • नींद को बढाता है।
  • सिरदर्द कम करता है।
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द को कम करता है और कटिस्नायुशूल कम होता है।
  • मतली में कमी आती है।
  • समय से पहले प्रसव के खतरे को कम करता है।
  • बच्चे के विकास को धीमा करने वाले इन्ट्रायूटरीन ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन के खतरे को कम करता है ।
  • नसों के दबने के कारण कार्पेल टनेल सिंड्रोम या हाथ और उंगलियों में दर्द की संभावना को कम करता है ।
  • श्वास व्यायाम आपको प्रसव के लिए तैयार करने में मदद करते हैं।
  • गर्भवती महिला की ताकत, सहनशक्ति और लचीलेपन को बढ़ाता है।

गर्भावस्था के दौरान 10 योग आसन जिनसे गर्भवती महिलाओं को बचना चाहिए

यह कुछ योग आसन हैं जो गर्वभती महिलाओं को करने से बचना चाहिए चाहें वे गर्भावस्था के किसी भी चरण में हों। कुछ मुद्राओं का माँ और बच्चे पर प्रतिकूल दुष्प्रभाव पड़ सकता है।जैसे कि;

  • धनुरासन
  • भुजंगासन
  • सर्वांगासन या शीर्षासन
  • शलभासन
  • पश्तिमोत्तानासन
  • नटराज आसन
  • वीरभद्रासन
  • हलासन
  • शवासन
  • उष्ट्रासन

गर्भवती महिलाओं के लिए योग करना जारी रखने के लिए सुरक्षा सबंधी कुछ सुझाव

यह प्रमाणित किया गया है कि योग गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित है; वास्तव में, यह माँ और बच्चे के लिए फायदेमंद है। लेकिन यहाँ कुछ सुरक्षा सबंधी सुझाव दिए गए हैं, जिन्हें प्रसव पूर्व योग का अभ्यास करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

  • प्रसव पूर्व योग शुरू करने से पहले आप चिकित्सकीय सलाह लें। अपने चिकित्सक से परामर्श करें जो आपकी गर्भावस्था की चिकित्सीय देखभाल कर रहा है।
  • आराम से करें। धीरेधीरे व्यायाम करें और कभी भी खुद की क्षमता से अधिक व्यायाम न करें।
  • अच्छी तरह हवादार कमरे में रहे और शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखें ।
  • जानिए किन मुद्राओं से बचें और झुकने, ट्विस्ट करने और मुड़ने मे बेहद सावधानी बरतें।

गर्भावस्था के दौरान नियमित व्यायाम न केवल आपको तंदरुस्त रहने में और प्रसव के समय प्रसव पीड़ा कम करने में मदद करता है, बल्कि प्रसव के बाद शीघ्र स्वस्थ होने में भी सहायता करता है। इससे अधिक क्या अच्छा हो सकता है कि, गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करना बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इसलिए प्रसव पूर्व योग सत्र के लिए नाम लिखाएं और इसके द्वारा दिए जाने वाले कई लाभों का आनंद उठाएं।