गर्भावस्था का पहला महीना – लक्षण, सावधानियां और देखभाल

प्रेगनेंसी का पहला महीना: लक्षण, शारीरिक बदलाव व देखभाल

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गर्भावस्था दुनिया की सबसे बड़ी खुशियों में से एक है, यह समय एक महिला के जीवन को पूरी तरह से बदल देता है। गर्भावस्था के 9 महीने आपके लिए अपने जीवन में सभी भावनाओं को व्यक्त करने का एक मौका होता है। जिसमें आप अपनी उत्सुकता के साथ गर्भावस्था के अनेक लक्षणों को अनुभव कर सकती हैं। इस लेख के माध्यम से हम गर्भावस्था के पहले महीने में होने वाले विभिन्न लक्षणों, सावधानियों व देखभाल के सुझावों के बारे में चर्चा करेंगे जो आपको अपनी इस अवधि को समझने में मदद कर सकता है।

गर्भावस्था के पहले महीने में आप क्या अनुभव करती हैं

हमारे शरीर की संरचना त्रुटिरहित है और शरीर के भीतर होने वाले किसी भी बदलाव को बहुत जल्द ही अनुभव किया जा सकता है। ठीक ऐसा गर्भावस्था के मामले में होता है, अर्थात जब आप गर्भवती होती हैं तो शरीर आपको इसके बारे में संकेत देना शुरू कर देता है। गर्भावस्था के शुरूआती समय में ये लक्षण बहुत सामान्य हो सकते हैं, जैसे कि स्‍तनों में दर्द, थकान और बीमार महसूस करना। हालांकि, गर्भावस्था के शुरूआती लक्षण सभी महिलाओं में नजर नहीं आते हैं। अधिकांश महिलाओं के लिए गर्भावस्था की पहली तिमाही में चूकी हुई माहवारी ही एक लक्षण होती है।

कुछ महिलाएं अपनी गर्भावस्था के पहले महीने में रक्त के थोड़े दाग देखती हैं, ज्यादातर मामलों में इसे सामान्य स्थिति माना जाता है। हालांकि खून के दाग दिखने पर आगे किसी जटिलता से बचने के लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

गर्भावस्था के पहले महीने के संकेत व लक्षण

गर्भावस्था के पहले महीने में प्रवेश करते ही आप इसके कई संकेतों और लक्षणों का अनुभव कर सकती हैं। हालांकि ये लक्षण मासिक धर्म से पूर्व के लक्षणों के समान हो सकते हैं और आपको भ्रमित कर सकते हैं। यहाँ कुछ संकेत दिए गए हैं जो आपको यह समझने में मदद करेंगे कि गर्भावस्था के पहले महीने में क्या होता है:

  1. मासिक धर्म न होना: गर्भावस्था का सबसे पहला संकेत है मासिक धर्म न होना। जैसे ही आप गर्भधारण करती हैं वैसे ही आपके शरीर से प्रोजेस्ट्रोन नामक हार्मोन निकलना शुरू हो जाता है। यह हार्मोन आपके मासिक धर्म को रोकने के लिए जिम्मेदार होता है।  
  2. हल्‍के धब्‍बे: निषेचन की प्रक्रिया में जब डिंब खुद ही गर्भाशय के संपर्क में आता है, तो थोड़ी ऐंठन और रक्त के धब्बे (स्पॉटिंग) का अनुभव हो सकता है और इसे ज्यादातर आप अपने निजी अंगों को साफ करते समय देख सकती हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में गर्भावस्था के पहले महीने में रक्तस्राव या धब्‍बे होना सामान्य माना जाता है यदि आपको असामान्य मात्रा में रक्तस्राव या धब्‍‍‍‍बे दिखाई देते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता है।
  3. स्तनों में संवेदनशीलता: आपको अपने स्तनों को छूने पर दर्द या संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। यह आपके मासिक धर्म से पूर्व के लक्षणों के समान होता है। इस दौरान स्तनों के निप्पल का घेरा (परिवेश) गहरे रंग का हो सकता है और साथ ही स्तनों पर नसें दिखाई देती हैं।
  4. स्वभाव में परिवर्तन: आपके शरीर में होने वाले प्रमुख हार्मोन परिवर्तनों के कारण, आपके मूड में तेजी से बदलाव हो सकता है। एक पल में आप खुश और आनंदित महसूस कर सकती हैं और अगले ही पल आप निराशा की भावना से ग्रसित हो सकती हैं। आप बिना किसी कारण के खुद में ही चिड़चिड़ा महसूस कर सकती हैं, ये सभी गर्भावस्था के सामान्य लक्षण हैं।

स्वभाव में परिवर्तन

  1. बार-बार पेशाब के लिए जाना: हार्मोन में बदलाव के कारण श्रोणि क्षेत्र के आसपास अधिक रक्त प्रवाह होता है। यह भ्रूण की वृद्धि और विकास के लिए गर्भाशय के अस्तर को मोटा करने में सहायक होता है। शरीर में बढ़ते तरल पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए गुर्दे तेजी से कार्य करते हैं। यह पूरी प्रक्रिया आपके गर्भाशय को भरा हुआ महसूस करा सकती है और इसलिए आपको बार-बार पेशाब के लिए जाना पड़ सकता है।
  2. थकान: गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में बहुत कुछ हो सकता है इसलिए आप में ऊर्जा की कमी हो सकती है और आप सामान्य से अधिक थका हुआ महसूस कर सकती हैं। अत्यधिक शारीरिक थकान अनिद्रा व असुविधा कारण भी बन सकती है। 
  3. खाने की आदतों में बदलाव: आपको कुछ खाद्य पदार्थ अत्यधिक पसंद आ सकते हैं और इसके विपरीत कुछ खाद्य पदार्थों से आपको घृणा भी हो सकती है। इस दौरान आपके लिए अपने पसंदीदा खाद्य पदार्थ के प्रति अरुचि दिखाना बहुत सामान्य है और इस अवस्था में आप उन खाद्य पदार्थों को भी बड़े चाव से खा सकती हैं जो आपको कभी पसंद नहीं थे।
  4. मॉर्निंग सिकनेस: ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में मतली या उल्टी का अनुभव हो सकता है। इसका अनुभव आपको गर्भधारण करने के लगभग 3 सप्ताह में शुरू हो सकता है । कुछ महिलाओं को पूरे दिन भी मतली महसूस हो सकती है जबकि अन्य को दिन के किसी विशेष समय के आसपास महसूस हो सकता है।
  5. सीने में जलन: गर्भावस्था के दौरान सीने में जलन एक आम समस्या है। गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में शारीरिक बदलाव, एसिड रिफ्लक्स और सीने में जलन के कारण होती है।गर्भावस्था के बाद के चरणों में भी सीने में जलन बहुत आम समस्या है जब गर्भ में विकसित होता आपका बच्चा आंतों और पेट पर दबाव डालता है।
  6. सूंघने की क्षमता में वृद्धि: गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं में सूंघने की क्षमता बढ़ जाती है। कुछ महक आपको अच्छी लग सकती हैं और अन्य कई तरह गंध से आपको घृणा भी हो सकती है।

 

सूंघने की क्षमता में वृद्धि

  1. अनियमित मल त्याग: शरीर में प्रोजेस्टेरोन का बढ़ा हुआ स्तर विभिन्न मांसपेशियों के कार्य करने के तरीकों में बदलाव लाता है। यह परिवर्तित हार्मोनल स्तर, मांसपेशियों की कार्य प्रक्रिया को धीमा करता है जिस वजह से भोजन आंतों से धीरे-धीरे गुजरता है और इससे अनियमित मल त्याग या कब्ज हो सकता है। 
  2. चक्कर आना: प्रोजेस्टेरोन की उपस्थिति खून के दबाव को कम कर सकती है जिस कारण से आपको चक्कर आ सकते हैं या घबराहट महसूस हो सकती है।
  3. कमर दर्द: शरीर में प्रोजेस्ट्रोन के स्तर की वृद्धि के कारण आपके श्रोणि क्षेत्र को ढकने वाले स्नायुबंधन ढीले हो जाते हैं और आपकी पीठ या कमर के स्नायुबंधन ढीले होने के कारण कमर में दर्द हो सकता है।
  4. भूख लगना: गर्भावस्था में आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आपका शरीर भी इससे संबंधित आवश्यकताओं की ओर संकेत कर सकता है। इस दौरान आपको सामान्य से अधिक भूख लग सकती है।
  5. सिर दर्द: गर्भावस्था के दौरान शरीर में बहुत कुछ होता है और शरीर के बढ़ते हार्मोन के कारण रक्त में कमी आ सकती है जिससे कभी भी सिर में दर्द हो सकता है। 

ऊपर दिए हुए संकेत गर्भवस्था की पहली तिमाही के शुरूआती लक्षण हो सकते हैं। इस लक्षणों के साथ आपके शरीर में अनेक बदलाव आ सकते हैं।

गर्भावस्‍था के पहले महीने में शारीरिक बदलाव

यद्यपि गर्भावस्था के पहले महीने में आपको शरीर में कोई स्पष्ट बदलाव नहीं दिखाई देगा परंतु कुछ शारीरिक परिवर्तन अवश्य हो सकते हैं:

  • स्राव में वृद्धि के कारण स्तनों के आकार में भी वृद्धि होती है।
  • इस समय आपको थोड़ा सा मोटापा महसूस हो सकता है व आपके कपड़े कमर के आस-पास थोड़े टाइट हो सकते हैं।
  • निप्पल व उसके चारों ओर का क्षेत्र बड़ा और गहरे रंग का हो जाता है।
  • योनि स्राव में वृद्धि हो सकती है।
  • कभी-कभी रक्त के धब्‍बे भी दिखाई दे सकते हैं (सभी महिलाओं में नहीं)।
  • आपको घबराहट हो सकती है और चक्कर भी आ सकते हैं।
  • आप सुस्त और थका हुआ महसूस कर सकती हैं।

गर्भावस्‍था के पहले महीने में शारीरिक बदलाव

ये कुछ बदलाव हैं जो आप गर्भावस्था के पहले महीने में महसूस कर सकती हैं। अभी आपका बेबी बंप दिखने में कुछ और महीने लग सकते हैं क्योंकि गर्भावस्था के पहले महीने में पेट दिखाई नहीं देता है।

गर्भावस्था के पहले महीने में भ्रूण का विकास

गर्भावस्था के पहले महीने में गर्भस्थ शिशु के विकास की शुरूआत होती है, उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं;

  1. निषेचन की प्रक्रिया: निषेचन की प्रक्रिया संभोग के बाद 48 से 70 घंटों के भीतर कभी भी हो सकती है। जैसे ही डिंब और शुक्राणु, एक दूसरे के संपर्क में आते हैं वैसे ही आपका शिशु अस्तित्व में आने लगता है। इस चरण में, आपके बच्चे को समुचित रूप से युग्मनज (जाइगोट) कहा जाता है। युग्मनज बहुत तेजी से बढ़ता है और यहीं से आपके अजन्मे बच्चे के विकास की शुरुआत होती है।
  2. प्रत्यारोपण की प्रक्रिया: युग्मनज निर्मित होने के बाद यह फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से गर्भाशय की ओर प्रवेश करता है। युग्मनज लगभग 4 दिनों में मोरुला – एकत्रित मांसपेशियों में विभाजित होता है। अगले कुछ दिनों में मोरुला ब्लास्टोसिस्ट में विभाजित हो कर पोषण के लिए गर्भाशय दीवार से जुड़ जाता है। जैसे ही यह खुद को प्रत्यारोपित करता है, जब तक गर्भनाल का निर्माण नहीं होता तब तक भ्रूण पोषण प्राप्ति के लिए योक सैक व कुछ रक्त वाहिकाओं से घिर जाता है। 
  3. विकास प्रक्रिया: तीसरे से चौथे सप्ताह में, भ्रूण के हृदय ही धड़कन सुनाई देने लगती है। हालंकि इस दौरान भ्रूण सिर्फ एक मटर के आकार का होता है, उसके हाथ, पैर और फेफड़े बनने शुरू हो जाते हैं। अब तक गर्भस्थ शिशु के चेहरे का निर्माण भी शुरू हो जाता है, जिसमें उसके कान, आँखें, मुँह व नाक शामिल हैं।

निदान व जांच

यदि आपको संदेह होता है कि आप गर्भवती हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलने की योजना बनाएं। डॉक्टर आपकी गर्भवस्था की पुष्टि करने के लिए निम्नलिखित निदान व जांच की सलाह दे सकते हैं;

1. पहले की स्वास्थ्य स्थिति और शारीरिक परीक्षण

  • आपको अपने पिछले मासिक धर्म की अवधि, रक्तस्राव और आवृत्ति के बारे में बताने को कहा जा सकता है।
  • डॉक्टर आपके द्वारा उपयोग की जाने वाली गर्भ निरोधक विधियों (यदि कोई है) के बारे में पूछ सकते हैं।
  • गर्भावस्था से संबंधित अतीत की किसी भी जटिलताओं, जैसे अस्थानिक गर्भावस्था, क्षय रोग, क्षय बंधाव, क्षय परिचालन और सूजन-संबंधित बीमारी के बारेे में पता लगाने के लिए आपको शारीरिक परीक्षण करवाने की आवश्‍यकता हो सकती है।
  • यदि आपने कोई प्रजनन उपचार करवाया है, तो आपसे आपकी गर्भनिरोधक विधियों के बारे में विस्तार से पूछा जा सकता है।

2. परीक्षण

  • एच.सी.जी. हार्मोन की उपस्थिति का पता लगाने के लिए आपके मूत्र का सैंपल लिया जा सकता है। यदि परिणाम संतोषजनक नहीं हैं तो रक्त परीक्षण की सलाह दी जा सकती है। 
  • एच.सी.जी. हार्मोन में यह जांचने के लिए बारीकी से निरीक्षण किया जाता है कि कहीं वे धीरे-धीरे या बहुत कम दर से विकसित तो नहीं हो रहे हैं, जो अस्थानिक गर्भावस्था का संकेत दे सकते हैं।
  • एच.सी.जी. के उच्च स्‍तर का मतलब गुणसूत्र असामान्यता, मोलर गर्भावस्था या एक से अधिक गर्भधारण हो सकता है।
  • गर्भावस्था में किसी भी तरह की असामान्यता या जोखिम का पता लगाने के लिए, डॉक्टर सीरम प्रोजेस्टेरोन की जांच कर सकते हैं।
  • शरीर में प्रोजेस्टेरोन के स्तर का पता लगाने के लिए, ‘एलिसा’ का उपयोग किया जाता है। 

3. अल्ट्रासाउंड स्कैन

गर्भावस्था का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन अत्यधिक प्रभावी होता है। गर्भावधि मधुमेह और अंतर्गर्भाशयी गर्भधारण का पता लगाने में ट्रान्सवजाइनल अल्ट्रासोनोग्राफी बहुत फायदेमंद होती है। उच्च आवृत्ति और छवि की बेहतर गुणवत्ता के लिए वजाइनल स्कैन पेट के सामान्य स्कैन से बेहतर है।

अल्ट्रासाउंड स्कैन

गर्भावस्था के पहले महीने में देखभाल

जब डॉक्टर आपकी गर्भावस्था को सुनिश्चित करते हैं तो आप देखभाल के लिए निम्नलिखित टिप्स आप अपना सकती हैं;

  1. प्रसवपूर्व देखभाल: आप नियमित प्रसवपूर्व देखभाल से शुरुआत कर सकती हैं, जिसमें विटामिन भी शामिल हैं। फोलिक एसिड सबसे महत्‍वपूर्ण पूरक हैं जिसे आप गर्भवती होने की योजना बनाने से लेकर प्रसव होने तक ले सकती हैं। फोलिक एसिड एक स्वस्थ गर्भावस्था को सुनिश्चित करता है और आपके बच्चे के किसी भी न्यूरल ट्यूब से संबंधित दोष के जोखिम को भी कम करता है।
  2. प्रसवपूर्व नियुक्तियां: आप अपने डॉक्टर के साथ प्रसव पूर्व नियुक्तियों की योजना बनाना शुरू कर सकती हैं। इनमें आप उपलब्ध विभिन्न विकल्पों का चयन और तुलना कर सकती हैं और अपनी आवश्यकताओं के अनुकूल सबसे बेहतर चुन सकती हैं । सही डॉक्टर का चयन थका देने वाली प्रक्रिया लग सकता है, लेकिन यह बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए आप अपने परिवार और दोस्तों से भी सलाह ले सकती हैं।
  3. देखभालकर्ता का चयन: आप अपने लिए देखभालकर्ता का चयन भी कर सकती हैं। दोस्‍त और परिवारजनों की सलाह भी अत्यधिक मददगार साबित हो सकती है। 
  4. अपनी मर्जी से दवा लेने से बचें: यह सलाह दी जाती है कि किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श कर लें। यदि आपको संदेह होता है तो किसी भी संभावित जटिलताओं से बचने के लिए डॉक्‍टर से चर्चा अवश्य करें।
  5. स्‍वास्‍थ्‍य बीमा: अधिकांश कार्यस्थलों में कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजनाएं होती हैं जो प्रसवपूर्व देखभाल और प्रसव की लागत को वहन करती हैं। बीमा में मिलने वाले मातृत्व भत्तों के बारे में विस्तार से जानने के लिए मानव संसाधन (एच.आर.) विभाग से संपर्क करने का सुझाव दिया जाता है।

गर्भावस्था का पूरा खयाल रखने के लिए डायरी रखना और उमसें सभी नियत तारीख लिखकर कहना बेहतर विचार है। इसकी सहायता से न केवल आप बल्कि आपकी देखभाल करने वाला भी, आपकी प्रगति और समग्र स्वास्थ्य पर नजर रख सकेगा।

गर्भावस्था के पहले महीने में बरती जाने वाली सावधानियां

स्वस्थ गर्भावस्था और प्रसव के लिए आपको जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की आवश्यकता होती है। इन परिवर्तनों में क्‍या करने और क्‍या न करने योग्‍य निम्नलिखित बातें शामिल हैं जो गर्भावस्था की स्वस्थ प्रगति में आपकी मदद करेंगी।

क्या करें

निम्नलिखित कुछ बातें जो गर्भावस्था के पहले महीने में आपको करनी चाहिए, वे इस प्रकार हैं;

  1. तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं: गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है क्योंकि पानी की कमी कई परेशानियों को उत्पन्न कर सकती है। शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाने के लिए सबसे अच्‍छा उपाय ज्‍यादा से ज्‍यादा पानी पीना है। पानी पीने की याद दिलाने के लिए आप अलार्म लगा सकती हैं। इसके अलावा, अपने शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाने के लिए आप फलों के रस, सब्जियों के रस या सूप भी ले सकती हैं।
  2. अपने आहार में पर्याप्त फाइबर शामिल करें: कब्ज के कारण आपके हार्मोन में बदलाव हो सकते हैं। इसलिए, यह सुझाव दिया जाता है कि गर्भावस्था के पहले महीने के दौरान अपने आहार में अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। रेशेदार खाद्य पदार्थों के लिए फलियां, पत्तेदार सब्जियां, अनाज और अंकुरित दालें सर्वोत्तम मानी जाती हैं।
  3. व्यायाम: स्वस्थ और तंदरुस्त रहने के लिए व्यायाम जरूरी है और यही दिनचर्या गर्भावस्था पर भी लागू होती है गर्भावस्था के दौरान अपने शरीर को ठीक से काम करने में मदद करने के लिए आपको हल्का व्यायाम करना चाहिए। पैदल चलना, शरीर के लिए किसी भी अनावश्यक परिश्रम के बिना, व्यायाम करने का आदर्श तरीका है। हालांकि, किसी भी व्यायाम दिनचर्या का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है।
  4. पर्याप्त नींद लें: गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में बहुत बदलाव हो रहे होते हैं, और ये आपको बहुत थका सकते हैं। इसलिए गर्भवती होने पर अपनी खोई हुई ऊर्जा को पुन: प्राप्‍त करने के लिए, पर्याप्त आराम और नींद लेना बहुत महत्वपूर्ण है।

पर्याप्त नींद लें

  1. सकारात्‍मक बनें: आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही आपके अजन्मे बच्चे को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए ऐसी गतिविधियां अवश्‍य करें जैसे अच्छा संगीत सुनना, अच्छी किताब पढ़ना या ऐसी कोई गतिविधि जो आपको खुश करती है।
  2. योनि की स्वच्छता बनाए रखें: गर्भावस्था में आपके हार्मोनल स्तर में अचानक वृद्धि के साथ, योनि संक्रमण जैसे वजाइनल कैंडिडिआसिस की अधिक संभावना हो सकती है। इसलिए, इस तरह के किसी भी संक्रमण को दूर रखने के लिए योनि की स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

 

 

क्या न करें

यहाँ कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं, जिन्हें आपको गर्भावस्‍था में करने से बचना चाहिए:

  1. कैफीनयुक्त पेय पदार्थों से बचें: गर्भावस्था में चाय, कॉफी या कोला जैसे कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन न करें। कैफीन – अनिद्रा, सीने में जलन और व्‍याकुलता का कारण बन सकती है और यह आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा हो सकती है। आपको समय से पहले प्रसव पीड़ा हो सकती है, या आपके बच्चे का जन्म के समय वजन कम हो सकता है।
  2. अस्वस्थ भोजन से बचें: अस्वस्थ या जंक फूड खाने से आपका वजन बढ़ने की संभावना अधिक हो जाती है और इस प्रकार, गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप और मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है। तला भुना भोजन आपकी इम्युनिटी को प्रभावित करता है और अस्वस्थ वसा भी आप और आपके बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्छा नहीं है। इसलिए, गर्भावस्था के पहले महीने के दौरान इन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
  3. शराब का सेवन न करें: गर्भावस्था के पहले महीने के दौरान शराब का सेवन करने वाली माताओं द्वारा, जन्मजात दोष से ग्रसित शिशुओं को जन्म देने की संभावना अधिक होती हैं। जन्म के समय बच्चे के जन्मजात विकृति होने का जोखिम सबसे ज्‍यादा होता है।
  4. धूम्रपान से बचें: धूम्रपान आपके गर्भ में पल रहे बच्चे में गम्‍भीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकता है। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने वाली माताओं को जन्म के समय कम वजन या सांस लेने में तकलीफ होने का जोखिम बना रहता है। सक्रिय धूम्रपान के साथ-साथ निष्क्रिय धूम्रपान भी आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है।
  5. तंग या कसे हुए कपड़ों से बचें: गर्भावस्‍था के दौरान आपके शरीर में कई बदलाव हो रहे होते हैं। अपने शरीर को आरामदायक स्थिति में बनाए रखने के लिए, आपको ढीले कपड़े पहनने चाहिए। खासकर अपने पेट क्षेत्र के आसपास, कसे हुए कपड़े पहनने से बचें।
  6. कठोर शारीरिक श्रम करने से बचें: भारी वजन उठाना गर्भावस्था में सख्त वर्जित है। ऐसी गतिविधियां आपके पेट के हिस्से पर अनावश्यक दबाव डाल सकती हैं, जो आपके बच्चे को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
  7. लम्‍बी यात्राओं से बचें: गर्भावस्था का पहला महीना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है और इसलिए, आपको अपने शरीर को किसी भी तरह के तनाव से मुक्‍त रखना चाहिए। पहली तिमाही में लम्‍बी यात्रा से बचना चाहिए।
  8. सॉना बाथ और अत्याधिक गर्म स्नान से बचें: गर्भावस्था के पहले महीने में आपको सॉना या अत्याधिक गर्म पानी के स्नान से बचना चाहिए। आपके शरीर को ऐसे तापमान के संपर्क में लाना जो आपके शरीर के तापमान से अधिक हो, आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए घातक हो सकता है। उच्च तापमान भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है।

गर्भावस्था के पहले महीने की अन्य सावधानियां

ऊपर दिए गए ‘क्‍या करना चाहिए’ और ‘क्‍या नहीं’ के अलावा, आप निम्नलिखित कुछ सावधानियों का भी पालन कर सकती हैं:

  • गर्भावस्था के शुरुआती दो महीनों में संभोग करने से बचना चाहिए अन्यथा सुरक्षित तरीकों का पालन करें (इस बारे में अपने डॉक्टर से परामर्श लें)।
  • कठोर रसायनों का उपयोग न करें।
  • अपने रक्तचाप और ब्लड शुगर के स्तर की निगरानी करते रहना बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए, आपको उपयुक्‍त भोजन लेना चाहिए।
  • पालतू जानवरों (बिल्लियों, कुत्तों, पक्षियों आदि) के संपर्क में आने से बचें। 
  • अपने किचन गार्डन या लॉन में काम करते समय सावधानी बरतें। दस्ताने पहनना उचित है।
  • वीडियो टर्मिनल डिस्प्ले के संपर्क में आने से बचें।

होने वाले पिता के लिए सुझाव

जिस तरह एक माँ को अपने गर्भ में पल रहे बच्चे की भलाई के लिए सावधान रहने की ज़रूरत होती है, उसी तरह पिता को भी कुछ सावधानियां बरतनी होती है। यहाँ होने वाले पिताओं के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं:

  1. प्रसवपूर्व और प्रसव के बाद की देखभाल के बारे में जानें: पिता बनने वाले व्‍यक्ति के लिए गर्भावस्था के बारे में जानना बहुत महत्वपूर्ण है। यह आपको अपने साथी की मदद करने में मार्गदर्शन करेगा। गर्भावस्था के ज्ञान को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका प्रसिद्ध लेखकों द्वारा लिखित पुस्तकें हैं। हालांकि, आप इंटरनेट से इस बारे में जान सकते हैं। अपने डॉक्टर से अपनी चिंताओं के बारे में चर्चा करना भी गर्भावस्था के बारे में जानने का एक अच्छा तरीका हैं।
  2. कागजी कार्रवाई करना: गर्भावस्था में कागजी कार्रवाई शामिल हो सकती है, खासकर जब बीमा की मांग की जाती है। आप कागजी कार्रवाई करने में अपने साथी की मदद कर सकते हैं, और इससे उसके वित्तीय पहलुओं को संभालने में बहुत मदद मिलेगी।
  3. धैर्य रखें: गर्भावस्था महिलाओं को भावुक, चिड़चिड़ा या कर्कश बना सकती है। यह बहुत सामान्य है क्योंकि उनके शरीर में एक बड़ा हार्मोनल बदलाव हो रहा है। हो सकता है कि आपको उसके खाने की तीव्र इच्छा भी अनुचित लगे। लेकिन आपको अपने साथी के साथ शांत रहने और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जाती है। आपको ऊंची सोच रखनी होगी और ऐसी परिस्थितियों में सहानुभूतिशील होना एक अच्छा विचार होगा।

होने वाले पिता के लिए सुझाव

पहले महीने में आप गर्भावस्था की यात्रा की शुरुआत में हैं, आपको अभी आठ महीने और इस यात्रा से गुजरना है। हो सकता है इस दौरान आपको काफी थकान हो, लेकिन बच्चे का पहला स्पर्श आपके सभी दर्द और थकान भुला देगा।

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