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प्लेसेंटा यानि नाल गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में विकसित होती है। चपटा, पैनकेक जैसा यह अंग गर्भाशय की दीवार से जुड़ा होता है और विकासशील बच्चे को ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है, साथ ही साथ गर्भनाल (अम्बिलिकल कॉर्ड) के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थों को भी हटाता है। डिंब कहाँ निषेचित हुआ है, इस बात पर निर्भर करते हुए नाल की स्थिति गर्भाशय के आगे, पीछे या किनारे पर हो सकती है। एंटीरियर प्लेसेंटा अर्थात ‘अग्रभाग गर्भनाल’ तब होती है जब नाल गर्भाशय के आगे की तरफ स्थित हो जाती है।
आपके शिशु के रूप में विकसित होने वाला निषेचित डिंब फैलोपियन नली से गुजरकर गर्भाशय की दीवार के साथ खुद को अन्तःस्थापित करता है । जहाँ कहीं भी यह अंडा स्थापित होता है – गर्भाशय की ऊपरी सतह, किनारे या आगे और पीछे की दीवार के साथ, गर्भनाल वहीं पर बनती है। जब अंडा खुद को गर्भाशय के सामने की दीवार के साथ जोड़ता है, तो यह एक एंटीरियर प्लेसेंटा बनाता है। यदि आपका एंटीरियर प्लेसेंटा है, तो गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के आसपास की गई अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान आपको यह पता चल जाएगा।
एक एंटीरियर प्लेसेंटा का भ्रूण किसी अन्य भ्रूण जितना ही सुरक्षित होता है क्योंकि इसका विकास किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होता है। अग्रभाग गर्भनाल गर्भावस्था आपके भ्रूण को पोषण देने का काम करती है।
गर्भाशय की दीवार के साथ-साथ सभी तरह की स्थितियां नाल के विकास के लिए सामान्य जगहें हैं। गर्भनाल सम्बन्धी स्वास्थ्य और शिशु का विकास उसकी स्थिति पर निर्भर नहीं करता है। इसलिए अग्रभाग गर्भनाल का होना कोई समस्या नहीं है।
हालांकि, यदि प्रसव के समय एंटीरियर प्लेसेंटा गर्भाशय में बहुत नीचे की तरफ है, तो यह गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स को आंशिक या पूरी तरह से अवरुद्ध कर सकती है। इस स्थिति में सिजेरियन प्रसव आवश्यक हो जाता है। यह स्थिति, जिसे प्लेसेंटा प्रेविया कहा जाता है, एक दुर्लभ समस्या है।
एंटीरियर प्लेसेंटा का कोई विशिष्ट लक्षण नहीं है। यह केवल एक निश्चित लक्षण की अनुपस्थिति से पता लगाया जाता है, जो कि भ्रूण की गतिविधि होती है।
हालांकि यदि माँ को 23वें सप्ताह तक कोई हलचल महसूस नहीं होती है, तो एक बार भ्रूण के स्वास्थ्य का आंकलन और एक अल्ट्रासाउंड एक अच्छा विचार है।
एंटीरियर प्लेसेंटा सामान्य रूप से गर्भावस्था के दौरान किसी भी जटिलता को प्रकट नहीं करता है। हालांकि, अपनी स्थिति के कारण यह असुरक्षित लग सकता है और जटिलताओं की संभावना हो सकती है। तथापि यह कोई नियम नहीं है अपितु अपवाद है । नाल, चूंकि एक वाहिकीय और रक्त-समृद्ध अंग है, इसलिए किसी भी तरह से फटने, टूटने, काटने या सुई लगाने के अतिरिक्त रक्तस्राव का खतरा होता है। कुछ एंटीरियर प्लेसेंटा जन्म संबंधी जटिलताएं हैं:
प्रसव से काफी पहले इन सभी स्थितियों का निदान करने हेतु अल्ट्रासाउंड और एम.आर.आई. स्कैन का प्रयोग करके एक सुरक्षित सिजेरियन प्रसव की योजना बनाई जा सकती है।
यदि किसी को एक एंटीरियर प्लेसेंटा है, तो जन्म देते समय सिजेरियन एकमात्र विकल्प नहीं है। यदि योनिद्वार बंद नहीं है, तो अग्रभाग गर्भनाल के बाद भी महिला के सामान्य प्रसव करने की पर्याप्त संभावना होती है।
एंटीरियर प्लेसेंटा आपकी त्वचा और भ्रूण के बीच एक तकिये की तरह काम करता है, भ्रूण की गतिविधियों का पता गर्भावस्था के बाद के दिनों में लगेगा और यह नाभि के पास के बजाय पेट के नीचे और किनारों पर अधिक स्पष्ट होगा। अग्रभाग नाल वाली गर्भावस्था में पहली और दूसरी तिमाही में हाथ में पकड़े जाने वाले डॉपलर या फीटोमीटर द्वारा भ्रूण की हलचल और उसके दिल की धड़कन का पता लगाया जा सकता है। भ्रूण के अच्छे स्वास्थ्य की पुष्टि करने के लिए 23 सप्ताह के बाद अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता हो सकती है। गर्भावस्था के आगे के चरणों में भी आपके बच्चे की गतिविधियों को महसूस करना थोड़ा कठिन हो सकता है। किसी भी स्तर पर भ्रूण की हलचल में कोई भी परिवर्तन होने पर या वे अचानक रुक जाने पर जांच की जानी चाहिए।
गर्भावस्था में गर्भनाल कैल्सीकरण और परिपक्व होने की प्रक्रिया से गुजरती है। यह कैल्शियम के जमाव को विकसित करती है और बाद में इसके कुछ हिस्से नष्ट होना शुरू हो जाते हैं। इनकी जगह रेशेदार ऊतक ले लेते हैं। यह कैल्सीकरण गर्भनाल के श्रेणीकरण का आधार है, जो इस प्रकार है:
यह गर्भावस्था की शुरुआत में होता है
यह गर्भावस्था के 31 से 32 सप्ताह के आसपास होता है
यह लगभग 36 से 37 सप्ताह की गर्भावस्था में होता है
यह गर्भावस्था के लगभग 38 सप्ताह पर होता है, 37 सप्ताह से पहले नहीं।
ग्रेड III में, गर्भनाल बहुत अधिक कैल्सीकृत हो चुकी होती है। यह कैल्सीकरण गर्भावस्था का एक सामान्य हिस्सा माना जाता है, और किसी तरह की चिंता की वजह नहीं होता।
एंटीरियर प्लेसेंटा अपने आप में जटिलता का कारण नहीं है। जटिलताएं केवल तभी होती हैं, जब इसके साथ अग्रभाग में नीचे की तरफ स्थित गर्भनाल, प्लेसेंटा प्रेविया य गर्भनाल के टूट जाने जैसी अन्य स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। यदि सिजेरियन की सलाह दी जाती है या यदि गर्भनाल गर्भ की दीवार से अलग हो जाती है, तो इन सभी मामलों में जटिलताएं होती हैं।
गर्भनाल संबंधी स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वयं की सहायता हेतु विभिन्न वेबसाइट और किताबें गर्भवती माताओं के लिए प्रसव के दौरान चीजों को आसान बनाने के लिए तकनीक सिखाती हैं । अग्रभाग में नीचे की तरफ स्थित गर्भनाल की स्थिति में जो सावधानियां बरतनी चाहिए, वे हैं:
एक अच्छी तरह से पोषण प्राप्त की हुई गर्भनाल स्वस्थ होती है।
आपके बढ़ते हुए भ्रूण के अपशिष्ट उत्पादों को संसाधित करने के लिए आपकी गर्भनाल को तरल पदार्थों की आवश्यकता होती है।
अपनी गर्भावधि में अपने लिए अदल-बदल के किये जा सकने वाले आदर्श व्यायाम और स्ट्रेचिंग के उपाय का पता लगाएं और इन्हें करने की कोशिश करें।
सबसे खराब स्थिति आने की बहुत अधिक संभावना नहीं है। इससे पहले कि आप सबसे खराब परिस्थिति की कल्पना कर लें, आप अपने लक्षणों को लिख लें जो इस स्थिति की तरफ इशारा करते हैं और पता लगाएं कि क्या ये लक्षण आपके डर से मेल खाते हैं।
तनाव, अधिक काम, शराब, ड्रग्स इत्यादि से और ज्यादा या कम खाना खाकर अपने शरीर के साथ दुर्व्यवहार न करें।
जब एक बार डॉक्टर इस बात की पुष्टि कर दें कि आपको एंटीरियर प्लेसेंटा है, तो सतर्क रहना आवश्यक है। किसी भी प्रकार की जटिलता से जुड़े संकेतों और लक्षणों पर ध्यान रखें। निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर अपने डॉक्टर से संपर्क करें:
यदि आपको रक्त के धब्बे (स्पॉटिंग) या रक्तस्राव दिखाई दे तो डॉक्टर से तत्काल संपर्क करें।
अचानक पेट में उठा कोई दर्द अथवा एक्सीडेंट या गिरने आदि से पेट पर लगी चोट को अनदेखा न करें और डॉक्टर को दिखाएं।
यदि आपकी नियत तारीख से काफी पहले गर्भाशय में संकुचन महसूस हो तो इसे प्रसव पीड़ा न समझें। किसी भी प्रकार की जटिलताओं से बचने और समस्या के निदान के लिए डॉक्टर से जांच कराएं।
गर्भावस्था के दौरान पीठ व कमर में दर्द होना सामान्य होता है लेकिन यदि यह दर्द असहनीय हो जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
निष्कर्ष – सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप खुश रहें, गर्भनाल की स्थिति या किसी भी चिकित्सकीय हस्तक्षेप से अधिक, प्रसन्न मनःस्थिति होने से खुशहाल और स्वस्थ बच्चे पैदा होते हैं।
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