गर्भावस्था के दौरान काली मिर्च का सेवन – फायदे और साइड इफेक्ट्स

प्रेगनेंसी के दौरान काली मिर्च का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सारी महिलाओं को मसालेदार भोजन खाने की क्रेविंग होती है और यह कॉमन है। लेकिन क्या मसालेदार भोजन का सेवन करना प्रेगनेंसी के दौरान सुरक्षित होता है। गर्भावस्था के दौरान आपको तेज मसाले जैसे, हरी मिर्च और लाल मिर्च का सेवन करने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि इससे आपको एसिडिटी, सीने में जलन और पाचन संबंधी कई अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके बजाय गर्भवती महिलाएं काली मिर्च का विकल्प चुन सकती हैं। काली मिर्च में औषधीय गुण होते हैं जो आपकी हेल्थ के लिए बहुत अच्छे होते हैं। लेकिन जब गर्भावस्था की बात आती है, तो आपको रिस्क नहीं लेनी चाहिए। इसलिए यदि आप अपनी प्रेगनेंसी डाइट में काली मिर्च को शामिल करना चाहती हैं तो आपको सबसे पहले यह जानने की जरूरत है कि यह आपके लिए सुरक्षित है या नहीं।

क्या गर्भावस्था के दौरान काली मिर्च खाना सुरक्षित है?

हाँ, गर्भावस्था के दौरान काली मिर्च का सेवन करना सुरक्षित है, लेकिन इसका सेवन कम मात्रा में किया जाना चाहिए। बाकी खाद्य पदार्थों की ही तरह इसका सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए, इससे यह आप और आपके बच्चे को कोई नुकसान नही पहुँचाती है। इसे आप अकेले भी इस्तेमाल कर सकती हैं और जीरा पाउडर के साथ मिलाकर सलाद, फ्रूट्स और वेजिटेबल में इसे ऊपर से डालकर भी प्रयोग कर सकती हैं। हालांकि, काली मिर्च का बहुत ज्यादा सेवन करने से एसिडिटी, मिसकैरज, अपच और जलन की समस्या पैदा हो सकती है।

काली मिर्च की न्यूट्रिशनल वैल्यू

काली मिर्च पोषक तत्वों का एक बेहतरीन स्रोत है। इसमें विटामिन सी और विटामिन के मौजूद होता है। इसके अलावा काली मिर्च में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, कॉपर जैसे मिनरल भी पाए जाते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट का भी एक बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है।

गर्भावस्था के दौरान काली मिर्च का सेवन करने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान सीमित मात्रा में काली मिर्च को अपनी डाइट में शामिल करना आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे आपको क्या फायदा हो सकता नीचे बताया गया है।

1. इम्युनिटी बेहतर करती है

काली मिर्च का सेवन करने से शरीर की इम्युनिटी बेहतर होती है। गर्भावस्था के दौरान, अपनी डाइट में काली मिर्च का रेगुलर और सीमित मात्रा में सेवन करने से यह प्राकृतिक रूप से आपकी इम्युनिटी बेहतर करने में मदद करती है।

2. पाचन में सुधार करती है

गर्भावस्था में यूटरस के लगातार बढ़ने के कारण आपके पाचन तंत्र पर इसका प्रभाव पड़ता है जिससे आपको एसिडिटी, अपच और सीने में जलन की समस्या होने लगती है। गर्भावस्था के दौरान इस परेशानी से निपटने के लिए आप सीमित मात्रा में काली मिर्च को अपने आहार में शामिल कर सकती हैं। यह गर्भावस्था के दौरान पेट फूलने और गैस की समस्या को कम करने में मदद करती है।

3. खांसी और जुकाम से राहत मिलती है

यदि आपको गर्भावस्था के दौरान सर्दी और खांसी होती है, तो इसके लिए आपको दवाएं लेने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि प्रेगनेंसी मेडिसिन के साथ मिलकर इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं जो आप और आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकते हैं। लेकिन आप खांसी और सर्दी को दूर करने के लिए कुछ सरल घरेलू उपचार आजमा सकती हैं। सूप में काली मिर्च डालकर इसका सेवन करने से आपकी सर्दी जल्दी ठीक हो जाएगी।

4. डिप्रेशन से लड़ने में मदद करती है

गर्भावस्था के दौरान और डिलीवरी के बाद गर्भवती महिलाओं में डिप्रेशन होना कॉमन है। यदि आप कम मात्रा में काली मिर्च का सेवन करती हैं तो यह आपकी मेंटल और इमोशनल हेल्थ के लिए बहुत अच्छा होता है, लेकिन इसका सेवन रोज नहीं करना चाहिए क्योंकि यह आपकी हेल्थ पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।

5. ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखती है

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए ब्लडप्रेशर की समस्या काफी हानिकारक हो सकती है, क्योंकि यह तीसरी तिमाही में और डिलीवरी के दौरान परेशानी पैदा कर सकती है। काली मिर्च का सेवन करने से यह हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करती है।

6. कैंसर से बचाती है

काली मिर्च में एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं जो गर्भवती महिला के शरीर में तेजी से होने वाले बदलाव बैलेंस करते हैं और कैंसर का कारण बनने वाले फ्री रेडिकल को हेल्दी टिश्यू पर अटैक करने से रोकते हैं। काली मिर्च में पिपेरिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो कैंसर सेल्स को मारने में मदद करता है और यहाँ तक ​​कि ये कैंसर सेल्स के विकास को भी रोकता है। हल्दी के साथ काली मिर्च का सेवन करने से ब्रेस्ट कैंसर सेल्स के विकास को भी रोका जा सकता है।

Adding pepper to salad

गर्भावस्था के दौरान काली मिर्च का सेवन करने के साइड इफेक्ट्स

गर्भावस्था के दौरान काली मिर्च का सेवन किया जा सकता है और यदि आप इसे सीमित मात्रा में अपने आहार में शामिल करती हैं तो यह आपको नुकसान नहीं पहुँचाएगा। लेकिन, कुछ महिलाओं को काली मिर्च का कम मात्रा में सेवन करने के बावजूद, इसके कुछ साइड इफेक्ट्स का अनुभव हो सकते हैं।

1. एलर्जी हो सकती है

कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों से एलर्जी होती है। काली मिर्च के सेवन से कुछ महिलाओं को एलर्जी की समस्या हो सकती है। यदि आप ऐसे किसी रिएक्शन का अनुभव करती हैं, तो बेहतर होगा कि आप काली मिर्च का सेवन न करें, खासकर गर्भावस्था के दौरान। स्पाइसी फ्लेवर के लिए आप बस चुटकी भर काली मिर्च को अपने खाने में डाल सकती हैं और फिर देखें कि कहीं आपको इससे कोई रिएक्शन तो नहीं हो रहा है। एलर्जी के लक्षण गंभीर होने पर आपको अपने डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

2. जलन हो सकती है

काली मिर्च के सेवन के बाद आपको पेट या गले में जलन का अहसास हो सकता है जो नॉर्मल है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान, जब आपको अपच और सीने में जलन की समस्या हो, तो ऐसे मामलों में काली मिर्च का सेवन हालात और भी खराब कर सकता है। ऐसे मामलों में, मसालेदार भोजन से बचना ही सबसे बेहतर है।

3. शरीर में गर्मी बढ़ती है

यदि आप गर्मियों के समय में प्रेग्नेंट हैं, तो बेहतर होगा कि आप मसालेदार चीजों का सेवन न करें, क्योंकि इससे बॉडी हीट और भी बढ़ती है। अपने आहार में काली मिर्च या अन्य मसाले शामिल करने से आपके शरीर की गर्मी बढ़ सकती है और आपको अपच, मुँह में छाले जैसी अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

चेतावनी

यदि आप सीमित मात्रा में काली मिर्च का इस्तेमाल अपने खाने में करती हैं, तो इससे कोई नुकसान नहीं होता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए इसके कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। पाचन और पेट से संबंधी समस्याओं को पैदा करने के कारण यह आपकी गर्भावस्था को मुश्किल बना सकती है।आपको काली मिर्च के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इससे आपको जल्दी संकुचन पैदा हो सकता और सीने में जलन जैसी समस्या भी हो सकती है। इसके अलावा, अगर काली मिर्च के तेल का उपयोग त्वचा पर किया जाता है, तो यह गर्भाशय को उत्तेजित करने का कार्य कर सकती है और जिससे आपको समय से पहले संकुचन का अनुभव हो सकता है।

काली मिर्च को मसालों का राजा कहा जाता है और यह आपकी हेल्थ के लिए भी बहुत शानदार होती है। हालांकि, इसका सीमित मात्रा में ही सेवन किया जाना चाहिए। इसे अपनी प्रेगनेंसी डाइट में शामिल करने से यह आपकी गर्भावस्था संबंधी कई समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। लेकिन इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले आपको अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।

यह भी पढ़ें:

प्रेगनेंसी के दौरान लेमनग्रास
प्रेगनेंसी में शतावरी यानी ऐस्पैरागस का सेवन