गर्भावस्था के दौरान मछली का सेवन करना – क्या यह सुरक्षित है

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गर्भावस्था के दौरान मछली खाने के बारे में आपको बहुत सारी जानकारियां मिली होंगी, जिससे आप शायद इस दुविधा में पड़ सकती हैं कि मछली का सेवन करना चाहिए या नहीं। हालांकि, मछली खाने के बहुत से लाभ हैं, लेकिन मछली की कुछ किस्में हैं जिन्हें खाने से बचना भी चाहिए, गर्भावस्था के दौरान मछली का सेवन करना सुरक्षित और पौष्टिक माना जाता है।

मैं गर्भवती हूँ, तो क्या मुझे मछली खानी चाहिए?

यह एक ऐसा सवाल है जिसे लेकर ज्यादातर गर्भवती महिलाएं चिंतित रहती हैं। जवाब एकदम सीधा है – हाँ। बेशक, आपको मछली को सावधानी से चुनने और उसका सीमित मात्रा में सेवन करने की आवश्यकता होती है। आपके गर्भस्थ शिशु को शुरुआती विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की बेहद जरूरत होती है और मछली द्वारा पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में प्राप्त होते हैं। मछली में संतृप्त वसा का स्तर कम होता है लेकिन आवश्यक पोषक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं जैसे कि विटामिन डी और प्रोटीन, जो कि गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए और एक स्वस्थ गर्भावस्था के लिए बहुत मददगार होते हैं। यही कारण है कि आपके डॉक्टर भी गर्भावस्था के दौरान विशेष रूप से पहली तिमाही के दौरान आपको मछली खाने के लिए कहते हैं।

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इसके अलावा, मछली में दो आवश्यक तत्व ओमेगा-3 फैटी एसिड, ईपीए और डीएचए मौजूद होते हैं जिनका अन्य किसी खाद्य पदार्थ में मिलना मुश्किल होता है और ये गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए आवश्यक होते हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान आप अपने आहार में मछली शामिल कर सकती हैं।

मछली में पाया जाने वाला पारा

पारा न केवल पानी में बल्कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं, उसमें भी पाया जाता है। हालांकि औद्योगीकरण की बढ़ती दर के कारण, केमिकल इंडस्ट्री, पॉवर प्लांट, सीमेंट प्लांट और अन्य औद्योगिक निर्माण द्वारा अधिक मात्रा में पारा छोड़ा जा रहा है। दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे थर्मामीटर, फ्लोरोसेंट लाइट, थर्मोस्टैट्स, आदि में भी पारा मौजूद होता है जो कि अशुद्ध रूप से नदियों और समुद्र में मिलने पर, पानी को प्रदूषित करता है। पानी में घुले पारे को बैक्टीरिया, मिथाइल-मर्करी में बदल देते हैं। जब मछलियां इस पानी में तैरती हैं और अन्य जीवों का भोजन करती हैं, तो यह पारा उनके शरीर में मिल जाता है। हालांकि, सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह पारा मछली की मांसपेशियों में बैठ जाता है और मछलियों को पकाने पर भी नहीं जाता है।

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मछली में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं जिसकी आवश्यकता एक गर्भवती महिला को उसके भ्रूण को पोषण प्रदान करने के लिए होती है। हालांकि पानी के अलग-अलग स्रोतों के जरिए विषाक्त पदार्थ और प्रदूषण मछलियों को प्रभावित करते हैं और जब हम इन मछलियों को खाते हैं तो इसका सीधा प्रभाव हम पर भी पड़ता है। हालांकि यदि पारे की मात्रा कम हो तो यह हमारे स्वास्थ्य पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं डालता है, लेकिन अध्ययनों से पता चला है कि अगर पारे का स्तर ज्यादा है तो इससे बच्चे के न्यूरोलॉजिकल विकास पर गंभीर रूप से प्रभाव पड़ सकता है। माँ होने के नाते आप यह कभी नहीं चाहेंगी कि आपके बच्चे को इससे कोई खतरा हो, इसलिए गर्भावस्था के दौरान कम पारा युक्त मछली का सेवन करना ही सबसे अच्छा है।

गर्भावस्था के दौरान आपको कितनी मात्रा में मछली का सेवन करना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान आपको कितनी मात्रा में मछली का सेवन करना चाहिए? एफडीए (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ) और ईपीए (एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी) जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा, हर हफ्ते कम पारे वाली मछली का दो से तीन बार सेवन करना चाहिए, यानी 8 से 12 औंस (226 से 340 ग्राम) तक का सेवन करने की सलाह दी जाती है। स्तनपान कराने वाली मांओं को भी अपने बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व देने के लिए समान निर्देशों का पालन करना चाहिए।

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गर्भावस्था के दौरान पारे की बहुत अधिक मात्रा का सेवन करने का जोखिम

मछली खाने से उसमें पाया जाने वाला मिथाइल-मर्करी, हमारे शरीर द्वारा अवशोषित हो जाता है जिससे यह गर्भनाल द्वारा गर्भस्थ शिशु तक पहुँच जाता है। मिथाइल-मर्करी की कम मात्रा भी गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर असर डाल सकती है। जिससे बच्चे की महत्वपूर्ण क्षमताएं जैसे दृष्टि, बोली, संचालन कौशल, ध्यान और स्मृति भी प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए इसकी जांच करना बहुत जरूरी है कि आप किस प्रकार की मछली का सेवन कर रही हैं।

अगर आप अधिक पारे का सेवन करती हैं तो क्या करें

अगर आपने अनजाने में अधिक मात्रा में पारा युक्त मछली का सेवन किया है, तो घबराए नहीं। सबसे पहले इसका सेवन बंद करें और अपने डॉक्टर को इस बारे में सूचित करें। डॉक्टर आपके शरीर से इसे हटाने के लिए दवाओं द्वारा केलेशन थेरेपी का सुझाव दे सकते हैं। केलेशन आपके शरीर से पारे को खत्म करने में मदद करेगा और इसके प्रभाव को भी कम करेगा।

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गर्भावस्था के दौरान मछली खाने के स्वास्थ्य लाभ

वास्तव में किसी गर्भवती महिला के दैनिक आहार में मछली शामिल करने के काफी लाभ हैं। इनमें शामिल हैं:

  • मछली कम वसायुक्त प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है, जिसमें आवश्यक अमीनो-एसिड मौजूद होता है जो भ्रूण के विकास में मदद करता है। यह बालों, हड्डियों, त्वचा और मांसपेशियों के लिए गर्भस्थ शिशु की कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है।
  • सालमन मछली डीएचए (ओमेगा-3 फैटी एसिड) का एक बड़ा स्रोत है, जो गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क विकास और उनकी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। तीसरी तिमाही के दौरान गर्भस्थ शिशु की वृद्धि अत्यधिक तेज होती है और इस दौरान मछली का सेवन करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • गर्भवती महिलाओं में ओमेगा-3 की आपूर्ति उनके गर्भस्थ शिशु की स्मरण-शक्ति को बढ़ाने और मस्तिष्क की गतिविधियों में सुधार के लिए भी बहुत सहायक होती है।
  • मछली के जरिए ओमेगा-3 फैटी एसिड का अधिक मात्रा में सेवन करना, गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद आपको मूड स्विंग और डिप्रेशन से बचाने में भी सहायक होता है।
  • अगर गर्भवती महिला, उच्च रक्तचाप से पीड़ित है, तो मछली खाने से रक्तचाप कम हो सकता है। मछली से युक्त आहार, ब्लड क्लॉटिंग और रक्त में वसा के स्तर को कम करते हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है।
  • जो गर्भवती महिलाएं मछली या अन्य सप्लीमेंट आहार के माध्यम से अच्छी मात्रा में ओमेगा-3 का सेवन करती हैं, उनमें समय पूर्व प्रसव का कम जोखिम होता है।

वो मछलियां जिन्हें आप गर्भावस्था में खा सकती हैं

गर्भावस्था के दौरान आप जब भी मछली का सेवन करें, चाहे बाहर या घर पर, तो हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि आप केवल उन्हीं मछिलयों का सेवन करें जो आपके लिए सुरक्षित हों। आप सालमन, झींगा, कैट फिश, केकड़ा, कॉड, झींगा, क्लैम और ट्राउट का विकल्प चुन सकती हैं। हैलिबट, श्रिम्प और स्नैपर का प्रति सप्ताह 1 बार से अधिक सेवन नहीं किया जाना चाहिए, जबकि ऊपर बताई गई अन्य प्रजाति की मछलियों का सेवन करना तब सुरक्षित माना जाता है जब इन्हें प्रति सप्ताह 2-3 बार से ज्यादा न खाया जाए । मछली की मात्रा, उसके आकार, प्रकार और पकाने के तरीके के आधार पर भिन्न हो सकती है, लेकिन आमतौर पर एक वक्त में आप लगभग 3-6 औंस (85 से 170 ग्राम) का सेवन कर सकती हैं। यह सुनिश्चित करें कि उपलब्ध मछलियां ताजी हों और अगर संभव हो तो जैविक रूप से फार्म की गई मछलियों को खरीदें।

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हाल ही में, सालमन मछली के बारे में कई असंगत जानकारियां मिली है। जिसमें फार्म की गई सालमन मछलियों में अधिक मात्रा में पीसीबी (पॉलीक्लोराइज्ड बाइफिनाइल) पाया गया है। पीसीबी जहरीले रसायन होते हैं जिनसे कैंसर होने का भी खतरा होता है। सुरक्षित रहने के लिए, जंगली सालमन या जैविक फार्म वाली सालमन मछली का ही सेवन करें।

गर्भावस्था के दौरान किस मछली का सेवन नहीं करना चाहिए

मछली में पारे की अधिक मात्रा मछली खाने वाले लोगों के लिए एक बड़ी समस्या है। मिथाइल-मर्करी एक न्यूरोटॉक्सिन है जिसका ज्यादा मात्रा में सेवन करने से तंत्रिका तंत्र को नुकसान हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान शार्क, किंग मैकेरल, स्वोर्डफिश और टाइल जैसी मछलियों को बिलकुल न खाएं। आपको सभी प्रकार की कच्ची मछलियों वाले आहार का सेवन करने से भी बचना चाहिए, जिनमें सुशी, सेविचे और साशिमी शामिल हैं, क्योंकि इससे फूड पॉइज़निंग होने का खतरा होता है। इसी तरह से, फ्रिज में रखी हुई स्मोक्ड फिश में लिस्टेरिया का खतरा होता है (एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण) और इसे गर्भावस्था के दौरान बिलकुल नहीं खाना चाहिए।

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उन मछलियों को खाने से बचें जिनके बारे में आपको पता न हो और यदि संभव हो तो सेवन करने से पहले इसके बारे में जान लें। इन मछलियों का सेवन करते समय इनकी ऊपरी त्वचा को निकाल देना चाहिए और अतिरिक्त वसा हटा देना चाहिए।

क्या गर्भावस्था के दौरान डिब्बाबंद टूना मछली का सेवन करना सुरक्षित है

डिब्बा बंद मछली का सेवन करना सुरक्षित नहीं है। हालांकि, यदि यह सीमित मात्रा में खाया जाए तो गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक नहीं है। टूना मछली को कभी-कभार खाने से आपके गर्भस्थ शिशु को कोई नुकसान नहीं होता है। जो कमर्शियल फिशिंग इंडस्ट्री है वो इन्हें अच्छी तरह से विनियमित करती है और इसलिए डिब्बाबंद मछली जो रेस्टोरेंट और सुपरमार्केट में उपलब्ध होती हैं, आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान सेवन करने के लिए सुरक्षित होती हैं।

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अगर आप अपने गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा के बारे में चिंतित हैं, तो किसी भी प्रकार की मछली का सेवन करने से पहले उसके फायदे और नुकसान को भली भांति जान लें, या अपने चिकित्सक से इस बारे में बात करें। एल्बाकोर टूना जिसे सफेद ट्यूना भी कहा जाता है, उसे खाने से बचें क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में पारा होता है। इसके बदले आप लाइट टूना मछली को प्राथमिकता दें।

क्या मैं स्थानीय जल स्रोतों से पकड़ी हुई मछली का सेवन कर सकती हूँ?

स्थानीय जल स्रोतों में मिलने वाली मछलियों को असुरक्षित माना गया है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इंडस्ट्री द्वारा छोड़े जाने वाले रसायन नदियों और समुद्रों को लगातार प्रदूषित कर रहे हैं । इसलिए गर्भावस्था के दौरान, ऐसी जगहों से पकड़ी गई मछलियों के सेवन करने से बचना ही बेहतर है, क्योंकि आपको नहीं पता होता है की इन मछलियां में पारा मौजूद है या नहीं।

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ओमेगा-3 प्राप्त करने के लिए मैं मछली के बजाय अन्य कौन-सा आहार ले सकती हूँ?

यदि आप उन लोगों में से हैं जो स्वाद या धार्मिक कारणों से मछली का सेवन नहीं करती हैं और गर्भावस्था के दौरान ओमेगा-3 के सेवन को लेकर चिंतित हैं, तो आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है। मछली और मछली के तेल के अलावा, आप प्राकृतिक रूप से क्षतिपूर्ति करने के लिए निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकती हैं:

  • अखरोट, ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक बेहतरीन स्रोत है, गर्भावस्था के दौरान दोपहर के नाश्ते के रूप में एक मुट्ठी भर अखरोट खाना फायदेमंद है।

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड का संतुलित मात्रा में सेवन करने के लिए भोजन पकाने के दौरान जैतून के तेल का उपयोग करें, विशेष रूप से हल्के-तले हुए या भुने व्यंजनों को बनाते समय । हालांकि, इस तेल का अधिक उपयोग न करें क्योंकि इस तेल में बहुत कैलोरी होती है।

  • अलसी के बीज ओमेगा-3 का एक बेहतरीन स्रोत हैं। नाश्ते या शाम के भोजन के दौरान कुटी हुई अलसी के बीज का सेवन दही या ओट्स के साथ किया जा सकता है।

सही तरीके से मछली पकाने के टिप्स

सही तरीके से मछली पकाने से संभावित दूषित पदार्थों से होने वाले किसी भी प्रकार के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। मछली के खाने को पौष्टिक और स्वादिष्ट तरीके से तैयार करने के लिए यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं:

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  1. केंकड़ा, झींगा मछली और सीप सहित सभी समुद्री भोजन को तब तक पकाया जाना चाहिए जब तक कि यह 75 डिग्री सेल्सियस के तापमान तक न पहुँच जाए और मछली में मौजूद दूषित पदार्थों को अच्छी तरह से खत्म न कर दे।
  2. यदि सीप, क्लैम और मसल्स का शेल खुला हो तो ये अच्छी तरह से पकते हैं। यदि ऐसा नहीं होता है, तो उनका सेवन न करें।
  3. हमेशा ताजे, अच्छी तरह से फ्रिज में रखे गए सी फूड का ही सेवन करने की सलाह दी जाती है। अगर आप मछली का तुरंत उपयोग नहीं करने वाली हैं तो इसे एक एयरटाइट कंटेनर में रख कर फ्रिज में रखें।
  4. सब्जियों और मांस/मछली के लिए अलग-अलग कटिंग बोर्ड का उपयोग करें।
  5. कच्चे भोजन के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए क्योंकि इससे संदूषण की अधिक संभावना होती है। गर्भावस्था के दौरान सुशी और अन्य कच्ची मछलियों का सेवन बिलकुल न करें ।

निष्कर्ष

गर्भावस्था के दौरान आपको इस लेख में बताई गई मात्रा के अनुसार मछली का सेवन करना चाहिए। हमेशा ताजी मछली का ही सेवन करें। इस बात का ख्याल रखें कि किसी भी चीज को अपने आहार में शामिल करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें। याद रखें, आपको और आपके गर्भस्थ शिशु को इस समय विभिन्न पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है और मछली का सेवन निश्चित रूप से प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व प्रदान कर सकता है, यदि इसे सावधानी के साथ खाया जाए।

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समर नक़वी

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