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प्लेसेंटा गर्भावस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो कि पेट में पल रहे बच्चे तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने के लिए और बच्चे के खून से गंदगी को बाहर निकालने के लिए गर्भाशय में बनता है। यह एक चपटा गोलाकार अंग होता है, जो कि गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है। यह बच्चे के लिए जरूरी सभी न्यूट्रिएंट्स उपलब्ध कराता है और गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए कई अन्य काम करता है। प्लेसेंटा बच्चे से अंबिलिकल कॉर्ड (गर्भनाल) द्वारा जुड़ा होता है। आमतौर पर, प्लेसेंटा गर्भाशय के ऊपर की ओर या किनारे की ओर जुड़ता है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में यह गर्भाशय के निचले हिस्से में जुड़ जाता है, जिसे ‘लो लाइंग प्लेसेंटा’ कहा जाता है। प्लेसेंटा बच्चे के जन्म के बाद जल्द ही बाहर आ जाता है।
यदि आप गर्भवती हैं, तो प्लेसेंटा, इसके महत्व और प्रेगनेंसी के दौरान इसके काम के बारे में अधिक जानकारी के लिए आगे पढ़ें।
प्लेसेंटा गर्भ में बेबी का सपोर्ट सिस्टम होता है। मां से ऑक्सीजन और पोषक तत्व, ब्लड स्ट्रीम के द्वारा प्लेसेंटा तक पहुंचते हैं। प्लेसेंटा से जुड़ी अंबिलिकल कॉर्ड इसे बच्चे तक पहुंचाती है। इसी प्रकार अंबिलिकल कॉर्ड बच्चे की गंदगी को प्लेसेंटा में छोड़ता है और फिर अंतिम निकासी के लिए मां के खून में छोड़ देता है। फीटस को पोषण देने के अलावा, प्लेसेंटा फीटस को किसी भी तरह के बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन से भी सुरक्षित रखता है।
प्लेसेंटा किस तरह काम करता है? प्लेसेंटा गर्भधारण से डिलीवरी तक कई जरूरी काम करता है। यहां पर प्लेसेंटा और उसके कामों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:
फीटस के विकास के लिए स्वस्थ प्लेसेंटा बहुत जरूरी है। हालांकि ज्यादातर मामलों में प्लेसेंटा बिना किसी जटिलता के सभी कामों को अच्छी तरह से करता रहता है, लेकिन ऐसे कुछ फैक्टर हैं, जो कि प्लेसेंटा के उचित काम में रुकावट पैदा कर सकते हैं और गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा में समस्या का कारण बन सकते हैं।
जो महिलाएं 40 वर्ष या इससे अधिक उम्र की हैं, उन्हें प्लेसेंटा संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं और उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
गर्भवती महिला के पेट के हिस्से में किसी तरह का ट्रॉमा जानलेवा हो सकता है और इसके कारण प्लेसेंटा में भी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
ब्लड प्रेशर का स्तर यदि सामान्य से अधिक हो, तो यह प्लेसेंटा के लिए खतरनाक हो सकता है और बेबी के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
जिस महिला के गर्भ में जुड़वां या उससे अधिक बच्चे हों, उसे प्लेसेंटा के कॉम्प्लिकेशंस होने का खतरा होता है।
जिन मांओं को ब्लड क्लॉट बनने में रुकावट पैदा करने वाली मेडिकल हिस्ट्री रही हो, उनमें प्लेसेंटा संबंधी समस्याएं पैदा होने की संभावना होती है।
एमनियोटिक सैक बच्चे को कुशनिंग देता है। लेकिन अगर यह लेबर से पहले फट जाए, तो इससे प्लेसेंटा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
कुछ खास दवाओं और ड्रग्स आदि का इस्तेमाल प्लेसेंटा के लिए गंभीर रूप से खतरनाक हो सकता है, जिसके बदले में कई तरह की जटिलताएं पैदा हो सकते हैं।
जिन महिलाओं में पहले की गर्भावस्था में प्लेसेंटा संबंधी समस्याएं रही हों, उनमें आने वाली गर्भावस्थाओं में भी ऐसा खतरा होने का डर अधिक होता है।
जो महिलाएं गर्भाशय के हिस्से में सर्जिकल प्रक्रिया से गुजर चुकी हों, उनमें प्लेसेंटा संबंधी समस्याएं होने का खतरा अधिक होता है।
जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज का शिकार हो जाती हैं, उनमें प्लेसेंटा से संबंधित समस्याएं होने का खतरा अधिक होता है।
गर्भ में बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए पूरी गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा के स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। आमतौर पर प्लेसेंटा के साथ कोई भी समस्या नहीं देखी जाती है, लेकिन कुछ मामलों में गर्भावस्था में कई कारणों से प्लेसेंटा संबंधित समस्याएं खड़ी हो सकती है। ये जटिलताएं मां और बच्चे दोनों के लिए ही गंभीर चिंता का कारण बन सकती हैं।
आमतौर पर प्लेसेंटा गर्भाशय के ऊपर की ओर या किनारे की ओर स्थित होता है। लेकिन जब प्लेसेंटा गर्भाशय में असामान्य ढंग से नीचे की ओर स्थित हो और सर्विक्स को कवर कर रहा हो या उसके नजदीक हो, तब इस स्थिति को प्लेसेंटा प्रीविया कहा जाता है। गर्भावस्था के अंतिम चरणों में प्लेसेंटा प्रीविया के कारण गंभीर परेशानियां हो सकती हैं। कंप्लीट या टोटल प्रिविया के मामलों में प्लेसेंटा सर्विक्स को पूरी तरह से ढक लेता है। ऐसे मामलों में बच्चे का जन्म नॉर्मल डिलीवरी के द्वारा नहीं हो सकता है और सिजेरियन सेक्शन का चुनाव करना पड़ता है। पार्शियल प्रीविया के मामलों में वेजाइनल डिलीवरी की कुछ संभावना होती है। यह स्थिति अधिक उम्र की महिलाओं में, गर्भाशय की सर्जरी से गुजर चुकी महिलाओं में, सिजेरियन डिलीवरी से गुजर चुकी महिलाओं में और गर्भपात से गुजर चुकी महिलाओं आदि में आम होती है।
प्लेसेंटा का मुख्य काम होता है, बच्चे को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराना। जब प्लेसेंटा फीटस को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं होता है, तब प्लेसेंटल इंसफिशिएंसी देखी जाती है। यह स्थिति बच्चे के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है, जैसे – जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, प्रीमैच्योर लेबर, स्टिलबर्थ आदि। हालांकि यह स्थिति महिला के लिए जानलेवा नहीं होती है, पर अगर वह हाइपरटेंशन या डायबिटीज की मरीज हो, तो यह उसके लिए खतरनाक हो सकता है।
जब प्लेसेंटा प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय से अलग हो जाता है, तब उसे प्लेसेंटल अब्रप्शन कहा जाता है। अलग हो चुके ब्लड वेसल के कारण वेजाइनल ब्लीडिंग हो सकती है, पेट में दर्द हो सकता है और कॉन्ट्रैक्शन हो सकते हैं। यह स्थिति बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती है, प्रीमैच्योर जन्म का कारण बन सकती है या फिर स्टिलबर्थ (बच्चे की मृत्यु) भी हो सकती है। जो महिलाएं हाइपरटेंशन और डायबिटीज, यूटेराइन कॉम्प्लिकेशन, एब्डोमिनल ट्रॉमा जैसी मेडिकल स्थितियों से जूझ रही हों और पहले उन्हें प्लेसेंटल अब्रप्शन हो चुका हो और जो महिलाएं स्मोकिंग या ड्रग्स का सेवन करती हों, उनमें गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटल अब्रप्शन होने का खतरा अधिक होता है।
हाई ब्लड प्रेशर प्लेसेंटा में समस्याएं पैदा कर सकता है। हाइपरटेंशन के कारण प्लेसेंटा की ओर जाने वाला ब्लड फ्लो कम हो जाता है, जिसके कारण फीटस तक ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स कम मात्रा में पहुंच पाते हैं। इसके कारण धीमा विकास, प्रीमैच्योर जन्म या जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं।
जब प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से काफी गहराई से जुड़ा होता है, तब इस स्थिति को प्लेसेंटा एक्रेटा कहा जाता है। इस स्थिति के कारण समय से पहले जन्म हो सकता है। इस तरह के प्लेसेंटा को गर्भाशय की दीवार से अलग होने में कठिनाई होती है। सर्जिकल या मैनुअल रिमूविंग से गंभीर रूप से खून निकल सकता है या फिर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
प्लेसेंटा में मौजूद इन्फ्रैक्ट्स या मृत टिशू फीटस तक जाने वाले ब्लड फ्लो में रुकावट पैदा कर सकते हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में यह माइनर इन्फेक्शन मां या पेट में पल रहे बच्चे के लिए किसी तरह का खतरा पैदा नहीं करता है, लेकिन गंभीर इन्फेक्शन के कारण फीटस को संकट या अन्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा भी बाहर आ जाता है। लेकिन कभी-कभी इसका कुछ हिस्सा गर्भाशय के अंदर रह जाता है और जिसे रीटेंड प्लेसेंटा कहते हैं और इससे गंभीर परेशानियां पैदा हो सकती हैं। अगर प्राकृतिक तरीका फेल हो जाए, तब बचे हुए प्लेसेंटा को बाहर निकालने के लिए सर्जिकल प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।
एक नए जीवन को इस दुनिया में लाना एक अनूठा अनुभव होता है। हर गर्भवती महिला की यात्रा अलग होती है और उसका अनुभव भी अलग होता है। गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक, महिला को अपनी हेल्थ का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। इस बात का खयाल रखें, कि आप अपनी उचित देखभाल करें और सावधानी बरतें और प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी परेशानी या तकलीफ का अनुभव होने पर अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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