गर्भधारण

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी

ज्यादातर कपल्स के लिए पहले बच्चे को कंसीव करना बहुत ही सिंपल और आसान होता है। एक बेबी हो जाने के बाद जब आप अपने परिवार में एक और सदस्य जोड़ने का निर्णय लेती हैं और कंसीव करने में कठिनाई महसूस करती हैं, तो यह आपके लिए शॉकिंग हो सकता है। दूसरा बच्चा करने में होने वाली परेशानी से आप कंफ्यूज हो सकती हैं और आपको संदेह होने लगता है, कि आप अपने बच्चे को भाई या बहन देने में सक्षम हैं या नहीं। 

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी क्या है?

एक स्वस्थ बच्चे के पेरेंट्स होने के बावजूद जब दूसरे बच्चे को कंसीव करने में जोड़े असफल होते हैं, तब इसे सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कहा जाता है। पहला बच्चा उन दोनों का अपना भी हो सकता है या किसी दूसरे साथी के साथ भी हो सकता है। पहले बच्चे को सफलतापूर्वक जन्म देने के बाद, जब आप दूसरी बार गर्भधारण नहीं कर पाती हैं, तब इससे शारीरिक और भावनात्मक रूप से कई तरह के असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि आपको यह नहीं पता होता है, कि सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कितनी आम है। इस बात का एहसास होना बहुत दुखदाई हो सकता है, खासकर अगर आपके सभी दोस्तों ने दूसरे बच्चे के साथ अपने परिवार को पूरा कर लिया हो तो। 

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ऐसे समय में यह जानना जरूरी है, कि महिलाओं में पहली बार प्रेग्नेंट होने में अक्षमता की तुलना में दूसरी बार बांझपन आना अधिक आम है। लगभग हर 7 में से एक जोड़े इस समस्या का सामना करते हैं। जैसा कि आपको अनुमान हो गया होगा, बड़ी उम्र की महिलाओं को उम्र और फर्टिलिटी समस्याओं के कारण यह समस्या अधिक होती है। 

पहले बच्चे के जन्म के बाद गर्भधारण करने में कितना समय लगता है?

पहले बच्चे को जन्म देने के बाद, दोबारा गर्भवती होने में कितना समय लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है, कि आप ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं या नहीं। चूंकि ब्रेस्टफीडिंग और दूध के प्रोडक्शन के लिए जरूरी हॉर्मोंस ओवुलेशन की क्वालिटी को प्रभावित करते हैं, ऐसे में ओवुलेशन धीमा पड़ सकता है। अगर एक महिला अपने बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा रही है, तो ऐसे में ओवुलेशन को शुरू होने में कम से कम 6 सप्ताह का समय लग सकता है। लेकिन आदर्श रूप से गर्भावस्थाओं के बीच 1 साल से 18 महीने के बीच का अंतर होना चाहिए। इससे पहले गर्भधारण का प्रयास करने से प्रीमैच्योर डिलीवरी और जन्म के समय बच्चे के कम वजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

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सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के कारण

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के कई कारण हो सकते हैं। यही कारण है, कि दूसरी बार गर्भवती होना कठिन हो सकता है। आपको पहले का कोई कॉम्प्लिकेशन हो सकता है, जो कि इस दौरान बढ़कर बड़ा रूप ले सकता है। इस दौरान किसी नए इंफेक्शन या किसी सर्जिकल प्रक्रिया की संभावना भी हो सकती है, जिसके कारण गर्भधारण की क्षमता प्रभावित हो सकती है। 

आपकी फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाले कुछ अन्य कारण इस प्रकार हैं: 

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  • एंडोमेट्रियोसिस के कारण क्षतिग्रस्त गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब
  • फाइब्रॉएड के कारण ब्लॉकेज
  • (पीसीओएस) पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम के कारण ओवुलेशन डिसऑर्डर
  • पहले की एक्टोपिक प्रेगनेंसी की कारण फटी हुए फैलोपियन ट्यूब
  • पीआईडी – पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिसऑर्डर जो कि यौन संबंधों से आए इंफेक्शन के कारण होती है
  • पहले की डिलीवरी के दौरान सिजेरियन सेक्शन के कारण यूटराइन एडहेशन या गर्भाशय में निशान
  • स्पर्म की खराब क्वालिटी
  • वजन कम या अधिक होना

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के लिए टेस्ट

फीमेल इनफर्टिलिटी के लिए किए जाने वाले टेस्ट इस बात का पता लगाने में मदद कर सकते हैं, कि आपका रीप्रोडक्टिव ट्रैक्ट अंडों को फैलोपियन ट्यूब में जाने और स्पर्म के साथ मिलाने में सक्षम हैं या नहीं। ये टेस्ट इस बात का भी पता लगाते हैं, कि आपकी ओवरी स्वस्थ अंडों का उत्पादन कर रही है या नहीं। सामान्य गाइनेकोलॉजिकल परीक्षणों के अलावा, आपको अस्पष्ट सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के लिए अन्य टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं, जो कि इस प्रकार हैं:

  • हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी: फैलोपियन ट्यूब और गर्भाशय की स्थिति को समझने के लिए यह टेस्ट किया जाता है। यह किसी ब्लॉकेज की उपस्थिति की भी जांच करता है। इस टेस्ट में गर्भाशय में एक्सरे कंट्रास्ट को इंजेक्ट किया जाता है और कैविटीज अच्छी तरह से भरे हैं या नहीं, यह जानने के लिए एक्सरे किया जाता है।
  • ओवुलेशन टेस्टिंग: यह एक ब्लड टेस्ट होता है, जो कि आपके हॉर्मोन के स्तर का पता लगाकर यह जानने की कोशिश करता है, कि आप ठीक तरह से ओवुलेट कर रही हैं या नहीं।
  • हॉर्मोन टेस्टिंग: ये टेस्ट पिट्यूटरी हॉर्मोन और ओवुलेटरी हॉर्मोन के स्तर की जांच करते हैं, जो कि रिप्रोडक्टिव प्रक्रियाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • ओवेरियन रिजर्व टेस्टिंग: ओवुलेशन के लिए जरूरी अंडों की संख्या और गुणवत्ता की जांच के लिए यह टेस्ट किया जाता है।
  • इमेजिंग टेस्ट: इस टेस्ट में पहले पेल्विक अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जो कि फैलोपियन या यूटेराइन बीमारियों और इन्फेक्शन के बारे में बताता है।
  • जेनेटिक टेस्टिंग: यह टेस्ट यह जानने के लिए किया जाता है, कि इनफर्टिलिटी के लिए कोई अनुवांशिक दोष जिम्मेदार तो नहीं है।
  • लेप्रोस्कोपी: यह एक छोटी सर्जरी होती है, जो कि फैलोपियन ट्यूब में किसी अनियमितता, गर्भाशय या अंडाशय से संबंधित समस्याओं, एंडोमेट्रियोसिस और स्कारिंग ब्लॉकेज को पहचानने में मदद करती है। नाभि के ठीक नीचे एक छोटा कट लगाया जाता है और एक अल्ट्रा थिन व्यूइंग डिवाइस को इसमें डाल कर गर्भाशय, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब की जांच की जाती है।
  • हिस्टेरोस्कोपी: हिस्टोरोस्कॉपी में रोशनी वाला एक छोटा उपकरण सर्विक्स के द्वारा गर्भाशय तक पहुंचाया जाता है। यह किसी तरह की असामान्यता को देखने और गर्भाशय की बीमारियों को पहचानने में मदद कर सकता है।

इलाज

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी से संबंधित समस्याओं को ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पारंपरिक तरीके की दवाएं नीचे दी गई हैं: 

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1. इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन (आईयूआई)

इस प्रक्रिया के दौरान स्वस्थ स्पर्म को सीधा गर्भाशय में डाल दिया जाता है। यह उस दौरान किया जाता है जब अंडाशय फर्टिलाइजेशन के लिए अंडे रिलीज कर रहा होता है। आमतौर पर, आईयूआई के समय को नियमित ओवुलेशन साइकिल के साथ और फर्टिलिटी दवाओं को सूट करने के लिए मैच किया जाता है। 

2. फर्टिलिटी दवाएं

जो महिलाएं ओवुलेशन डिसऑर्डर के कारण बांझ होती हैं, उनका इलाज फर्टिलिटी दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं ओवुलेशन को प्रेरित और नियमित करने में मदद करती हैं। आप विभिन्न प्रकार की उपलब्ध दवाओं के बारे में डॉक्टर से बात कर सकती हैं और इनसे होने वाले खतरों और फायदा को समझ सकती हैं। 

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3. हिस्टोरोस्कोपी सर्जरी

यह सर्जरी युटेराइन सेप्टम, इंट्रायूटरिन घाव, एंडोमेट्रियल पॉलीप जैसी गर्भाशय की समस्याओं का सफलतापूर्वक इलाज कर सकती है। 

क्या आहार और लाइफस्टाइल में बदलाव करके कुछ मदद मिल सकती है?

हां बिल्कुल, आपकी मौजूदा लाइफस्टाइल, खानपान की आदतें, डाइट और आपके सोने की आदतें, आपकी सेकेंडरी इनफर्टिलिटी के लिए बराबर रूप से जिम्मेदार होती हैं। अगर आपकी पहली डिलीवरी के बाद आपका वजन बहुत बढ़ गया है या कम हो गया है, तो आपके लिए प्रेग्नेंट होना बहुत कठिन हो सकता है। यदि आप और आपके पति एक ऐसा जीवन जीते हैं, जिसमें स्मोकिंग, शराब का सेवन और देर रात तक जागना शामिल है, तो इससे आपको नुकसान हो सकता है। एक स्वस्थ जीवन शैली गर्भधारण करने की आपकी क्षमता में बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है। 

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सेकेंडरी इनफर्टिलिटी से कैसे निपटें?

अगर आप सेकेंडरी इनफर्टिलिटी से जूझ रही हैं, तो यहां पर ऐसे कुछ खास तरीके दिए गए हैं, जिनसे आप सफलतापूर्वक इनसे निपट सकती हैं: 

1. पहली डिलीवरी के बाद से अपने शारीरिक और भावनात्मक बदलावों को समझें

उम्र के साथ आपके शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और आपके अंडों की क्वालिटी और फर्टिलिटी कम होती जाती है। दवाएं, वजन का बढ़ना, तनाव आदि भी गर्भधारण करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। 

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2. एक प्लान बनाएं

अगले कदम के बारे में अपने साथी के साथ मिलकर प्लान बनाएं। आप अपने विकल्पों पर विचार कर सकती हैं, जैसे आईवीएफ, एग डोनर या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट और देखिए कि आपके पास इसके लिए बजट है या नहीं। 

3. पहले से मेडिकल अटेंशन

अगर आप अपनी फर्टिलिटी को लेकर चिंतित हैं, तो आपको एक फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से मिलना चाहिए। उम्र के साथ आपकी फर्टिलिटी कम होती जाती है और इसलिए एक डॉक्टर से परामर्श लेना और इलाज के तरीके अपनाना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। 

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4. आगे किए जाने वाले टेस्ट के बारे में जानें

बांझपन के कारण का पता लगाने के लिए जरूरी अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, एक्सरे आदि जैसे टेस्ट के बारे में जानकारी हासिल करें। आपके पार्टनर को भी सीमेन एनालिसिस करना पड़ सकता है, जो कि स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या की जांच करता है। 

5. अगर आप इलाज कराने की योजना बना रही हैं, तो सारी बातें अच्छी तरह देख लें

फर्टिलिटी के इलाज में बार-बार टेस्ट करने की और डॉक्टर से मिलने की जरूरत पड़ सकती है। इस दौरान इस बात का ध्यान रखें, कि आप अपने दूसरे कामों के लिए भी अच्छी तरह से प्लानिंग करें, जैसे आपका काम और बच्चे।

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6. अपनी भावनाओं को स्वीकार करें

इसे लेकर गुस्सा, उदासी या परेशान होना स्वाभाविक है। लेकिन इस बात का ध्यान रखिए, कि इसमें मदद पाने के लिए आप एक प्रोफेशनल से मदद लें या कोई सपोर्ट ग्रुप ज्वाइन करें। 

7. कठिन सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहें

दूसरे बच्चे के बारे में परिवार और दोस्तों के द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के लिए अपने जवाब तैयार रखें। 

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8. इस पल पर फोकस करें और अपने बच्चे के साथ समय अच्छा समय बिताएं

अपने कल की चिंताओं के लिए आज की खुशी को खराब न होने दें। अपने पहले बच्चे के साथ समय को अच्छी तरह से बिताएं। 

आपको अपने डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

अगर आप 1 साल से बिना गर्भनिरोधक इस्तेमाल किए अपने पति के साथ सामान्य शारीरिक संबंध बना रही हैं और फिर भी गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत है, क्योंकि यह आप दोनों की जिम्मेदारी है। इसलिए इस वक्त आपके पति को भी आपके साथ डॉक्टर के पास जाना चाहिए। अगर आपकी उम्र थोड़ी अधिक है या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजर रही हैं, जिससे आपकी फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है, तो ऐसे में सेकेंडरी फर्टिलिटी का इलाज करना भी जरूरी है। ऐसे मामलों में आपको जल्द ही डॉक्टर से मिलना चाहिए। 

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इसमें सफलता की कितनी संभावना होती है?

अक्सर ही इसकी सफलता महिला की उम्र पर निर्भर करती है। अगर महिला की उम्र 36 वर्ष से कम है, तो संभावना अधिक होती है। लेकिन अगर महिला की उम्र 38 या इससे अधिक है, तो सफलता की संभावना कम होती है। इलाज के 2 महीने पूरे होने के बाद भी उम्मीद न छोड़ना ही सफलता की चाबी है। याद करें, जब आप पहली बार गर्भधारण करने की कोशिश कर रही थीं, तो आपने शुरुआती कुछ महीनों के बाद उम्मीद नहीं छोड़ी थी, है न!

ज्यादातर मामलों में पहले बच्चे के जन्म के बाद कुछ वर्ष बीत चुके होते हैं। यह सभी जानते हैं, कि आपकी उम्र जितनी अधिक होती है, आपके लिए गर्भधारण करना उतना ही कठिन होता है। हो सकता है, कि आपका वजन बढ़ गया हो, आपकी सर्जरी हुई हो या आपके साथी के स्पर्म की क्वालिटी और संख्या भी कम हो गई हो। अगर आपकी सेक्स-लाइफ अच्छी है और फिर भी आप कंसीव करने में अक्षम हैं, तो डॉक्टर से मिलने के लिए यह सही समय है। इस समय आपको साथ मिलकर आने वाले महीनों में जो कुछ होने वाला है, उसके लिए एक समय सीमा तैयार करने की जरूरत है। इसमें कितने पैसों की जरूरत होगी और आपके पास कौन-कौन से विकल्प हैं, इन पर भी विचार करने की जरूरत है। 

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यह भी पढ़ें: बांझपन (इनफर्टिलिटी) के लिए बेहतरीन आयुर्वेदिक उपचार

पूजा ठाकुर

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