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शिशुओं और बच्चों में त्वचा संबंधी एलर्जी

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बच्चों की त्वचा संवेदनशील होती है और उनका इम्युनिटी सिस्टम अभी भी विकसित हो रहा होता है, इसलिए उनका शरीर विभिन्न एलर्जी और संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील होता है। बच्चे की त्वचा पर होने वाली थोड़ी भी समस्या रैशेस का कारण बन सकती है और इससे उनमें चिड़चिड़ापन पैदा होने लगता है । हम जानते हैं कि आप अपने बच्चे को हर संक्रमण और बीमारी से सुरक्षित रखना चाहती हैं, लेकिन इसके बावजूद भी आपको बच्चे में त्वचा संबंधी कई सामान्य एलर्जी देखने को मिल सकती है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि आप इसके लक्षण को पहचाने और उनसे अवगत हो। त्वचा संबंधी एलर्जी कुछ लोगों में अधिक होती है, इसके बारे में पर्याप्त जानकारी आपके बच्चे को एलर्जी से बचाने में मदद करेगी। इसलिए त्वचा की विभिन्न प्रकार की एलर्जी को जानने व इनका इलाज कैसे कर सकते हैं यह जानने के लिए लेख पढ़ना जारी रखें ।

त्वचा की एलर्जी (स्किन एलर्जी) क्या है

त्वचा की एलर्जी तब होती है जब त्वचा किसी एलर्जी पैदा करने वाले तत्व के संपर्क में आती है और परिणामस्वरूप त्वचा में खुजली, जलन व रैशेस हो जाती है। फिर उस एलर्जिक तत्व के प्रतिरोध के लिए शरीर एक रासायनिक हिस्टामिन को छोड़ता है, जो एक इन्फ्लेमेटरी प्रतिक्रिया देता है। और इस प्रकार एलर्जी रैशेस या सूजन के रूप में त्वचा पर दिखाई देने लगती है। जिन बच्चों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील होती है उन्हें एलर्जी ज्यादा होती है। ऐसे कई कारण हैं जिनसे बच्चों को एलर्जी होने का खतरा रहता है, जैसे कि गंदे डायपर, मुँह से निकला लार, भोजन, साबुन, और डिटर्जेंट आदि।

बच्चों में त्वचा संबंधी होने वाली आम एलर्जी की सूची

बच्चों में त्वचा की एलर्जी होना और रैशेस पड़ना काफी आम बात हैं और इसमें दवा या उपचार की आवश्यकता कम या न के बराबर होती है। त्वचा की अधिकांश समस्याएं समय के साथ दूर हो जाती हैं, लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है, तो आपको अपने बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना पड़ सकता है। नीचे त्वचा की कुछ सामान्य एलर्जी बताई गई हैं जो अक्सर बच्चों को प्रभावित करती हैं:

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1. एक्जिमा

एक्जिमा एक त्वचा संबंधी समस्या है, जो 1 और 5 वर्ष की आयु के बच्चे में विकसित हो सकती है। हालांकि, यह समस्या तीन से चार महीने की उम्र के बच्चे में भी होती है। एक्जिमा से पीड़ित बच्चों में खुजली वाले लाल चकत्ते नजर आते हैं, जिसके कारण त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने आ जाते हैं। एक्जिमा के विभिन्न प्रकार होते हैं, लेकिन बच्चों में आमतौर पर विकसित होने वाला एटोपिक एक्जिमा है।

कारण

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एक्जिमा होने का एक कारण आनुवांशिक हो सकता है, लेकिन कुछ प्रकार के कपड़े पहनने और साबुन का प्रयोग करने से भी एक्जिमा होता है। कभी-कभी, खाद्य एलर्जी और पर्यावरण प्रदूषक जैसे धूल तथा धुएं आदि से भी एक्जिमा की समस्या हो सकती है। बहुत गर्म या ठंडे मौसम में पसीने का जमाव भी इस समस्या का कारण बन सकता है।

लक्षण

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एक्जिमा शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है या फिर यह पूरे शरीर में भी दिखाई दे सकता है। रूखी, मोटी त्वचा या खुजली वाले लाल चकत्ते इस एलर्जी के कुछ लक्षण हैं।

उपचार

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यदि आपके बच्चे को एक्जिमा जैसी एलर्जी की समस्या है, तो आप उसकी साफ-सफाई का और ज्यादा खयाल रखें और उसे अच्छी तरह से नहलाएं। किसी सौम्य स्किन-क्लीन्जर का उपयोग करें जो खुशबू रहित हो और केवल बाल रोग विशेषज्ञ या त्वचा विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित किया गया हो। डॉक्टर की सलाह के बगैर कोई मलहम न खरीदें। यदि स्थिति गंभीर है, तो अपने बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ के पास जाँच के लिए ले जाएं; इस बात की अधिक संभावना है कि सूजन को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर स्टेरॉयड मलहम निर्धारित करेंगे, जो बच्चे को एक्जिमा से राहत प्रदान करने में सहायक होते हैं।

2. शीतपित्ती/पित्ती या अर्टिकेरिया

यह दाने आमतौर पर हाथ, चेहरे और गर्दन जैसी खुली जगहों पर दिखते हैं। यह समस्या बच्चों में काफी सामान्य है और इससे बच्चे के पूरे शरीर में पित्ती नजर आने लगती है जिससे आपको यह आभास होगा कि बहुत से कीड़ों ने काट लिया है। यह आमतौर पर 2 से 6 साल के बच्चों को अधिक प्रभावित करता है, लेकिन यह बड़े बच्चों में भी हो सकता है।

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कारण

अर्टिकेरिया कीड़े के काटने से होने वाली एक त्वचा संबंधी एलर्जी है। पालतू बिल्लियों में पाए जाने वाले पिस्सू इस एलर्जी का मुख्य कारण होते है।जबकि, विभिन्न कीट जैसे कि बर्ड माइट्स (पक्षियों के स्थान पर मौजूद कीट), खटमल, मच्छर, काटने वाली मक्खी, कैटरपिलर और कालीन में पाया जाने वाला कीट के काटने से भी यह एलर्जी हो सकती है।

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लक्षण

यह त्वचा पर चकत्ते के रूप में दिखाई देता है जो बाद में दाने जैसा दिखने लगता है और कुछ समय बाद लाल-भूरे रंग में बदल जाता है। इन चकत्तों में काफी खुजली हो सकती है।

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उपचार

चूंकि ये त्वचा संबंधी एक सामान्य एलर्जी है, इसलिए खुजली से राहत पाने के लिए आमतौर पर एक टॉपिकल स्टेरॉयड क्रीम का उपयोग करने का सुझाव दिया जाता है। इस मामले में एंटीहिसटामाइन भी राहत प्रदान करता है और इसे रात में दिया जाना चाहिए। यदि यह समस्या संक्रमित है, तो डॉक्टर बच्चे के लिए एंटीबायोटिक क्रीम का प्रयोग करने की सलाह दे सकते हैं।

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3. घमौरी

घमौरी आमतौर पर बच्चे के चेहरे, गर्दन, पीठ, अंडरआर्म या कूल्हों पर दिखते हैं। यह त्वचा पर लाली के रूप में तब दिखाई देती है जब त्वचा अत्यधिक गर्म हो जाती है। जिन बच्चों की त्वचा संवेदनशील होती है या वो गर्म मौसम में अधिक रहते हैं, उनमें यह समस्या विशेष रूप से ज्यादा होती है।

कारण

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घमौरी का मुख्य कारण त्वचा के नीचे पसीने का जमा होना है। चूंकि बच्चों की पसीने की ग्रंथियां छोटी होती हैं, इसलिए उनमें अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है, जिससे उन्हें घमौरियों के होने का खतरा रहता है। यदि आप अपने बच्चे को तंग कपड़े पहनाती हैं या उसे नमी वाले मौसम में लंबी यात्रा के दौरान उसे कार की सीट पर बाँध कर बैठाए रखती हैं, तो इससे घमौरी निकलने की समस्या हो सकती है।

लक्षण

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यह छोटे लाल चकत्तों या छाले के रूप में त्वचा पर दिखाई देता है, जिसके परिणामस्वरूप पसीने की नलिकाएं अवरुद्ध हो जाती हैं।

उपचार

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यह आमतौर पर अपने आप ही ठीक हो जाता है और इसके लिए किसी विशिष्ट उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन अगर आपके बच्चे को घमौरी है, तो उसे आरामदायक कपड़े पहनाएं – इससे बच्चे को जल्दी ठीक होने में मदद मिलेगी।

4. दाद

यह फंगल इन्फेक्शन बच्चे के शरीर पर किसी भी अन्य अंग की तुलना में उनके सिर, पैर और निजी अंगों को अधिक प्रभावित करता है। यह संक्रामक है, लेकिन दर्दनाक या खतरनाक नहीं है। यह ज्यादातर संक्रमित चादर, तौलिया, कपड़े और खिलौनों के माध्यम से फैलता है।

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कारण

त्वचा पर पसीने का जमाव होने के कारण बच्चों में दाद संक्रमण होता है खासकर शरीर के मुड़ने वाले अंगों में अधिक होता है। यह संक्रमण किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपर्क में आने के बाद त्वचा के कटने या खरोंच लगने के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है।

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लक्षण

प्रभावित भाग पर यह लाल चकत्ते दाने की तरह दिखाई देते हैं और इसमें खुजली भी होती है। दाद बीच से चिकना और बाहर की तरफ टेढ़ा-मेढ़ा दिखाई देता है।

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उपचार

एंटी-फंगल मलहम बच्चों में दाद के संक्रमण का इलाज करने में मदद करते हैं। मलहम प्रभावित हिस्सों को धोने और सुखाने के बाद लगाना चाहिए। सिर की त्वचा पर दाद के संक्रमण का इलाज करने के लिए मलहम की बजाय डॉक्टर द्वारा बताए गए हर्बल शैम्पू का इस्तेमाल करें ।

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5. हीव्स

पित्ती/हीव्स संक्रामक नहीं है और कुछ घंटों के भीतर गायब हो जाती है या कुछ हफ्तों तक भी रह सकती है। पित्ती में खुजली होती है, त्वचा के ऊपर उभरे हुए चकत्ते दिखाई देते हैं। यह आकार और दिखने में अलग-अलग हो सकते हैं और शरीर के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकते हैं।

कारण

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पित्ती की समस्या तब होती है जब शरीर का इम्युनिटी सिस्टम रासायनिक हिस्टामिन का उत्पादन करने लगता है, जो संक्रमण होने, कीड़े के काटने, कुछ प्रकार के खानों से या अचानक तापमान में आए बदलाव के कारण होता है। जब बच्चे को पित्ती होती है, तो उसे त्वचा पर खुजली या जलन महसूस हो सकती है।

लक्षण

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यदि आपके बच्चे के शरीर का कोई अंग लाल नजर आए या सूजन दिखाई दे, खासकर जब साथ में सर्दी या बुखार हो, या किसी कीड़े ने काट लिया हो, मूंगफली, अंडे, या समुद्री भोजन खाने के बाद, तापमान में आए बदलाव के कारण आदि, तो यह पित्ती के संकेत हो सकते हैं।

उपचार

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एंटीहिसटामाइन दवा आपके बच्चे को इस समस्या से राहत प्रदान कर सकती है। यदि यह अक्सर होता है, तो आपका डॉक्टर बच्चे से जुड़ी हर चीज नोट करने के लिए कह सकते हैं, ताकि पता चल सके कि उनमें होने वाली इस एलर्जी का कारण क्या है। हो सकता है डॉक्टर इसके लिए आगे खून और पेशाब की जाँच करवाने के लिए भी कहें।

6. रूसी (सेबोर्रोहिया) 

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त्वचा की यह समस्या आमतौर पर छह महीने या उससे कम उम्र के बच्चों में ज्यादा होती है। सिर, भौं, कान, गर्दन, गाल और छाती पर सेबोर्रोहिया के लक्षण दिखाई देते हैं। जब यह सिर और भौं पर होता है, तो इसे क्रेडल कैप के रूप में भी जाना जाता है। यह दर्द रहित होते हैं और बच्चे को किसी भी तरह से परेशान नहीं करते हैं।

कारण

सेबोर्रोहिया की समस्या का कोई विशिष्ट कारण का पता नहीं लगाया जा सका है, हालांकि यह माना जाता है कि यह स्थिति तब होती है जब सीबम बहुत ज्यादा हो जाता है, जो त्वचा ग्रंथियों द्वारा निर्मित एक तैलीय पदार्थ है।

लक्षण

पीला या पपड़ीदार गुच्छे सेबोर्रोहिया के संकेतक होते हैं। इसके सिर और भौं पर होने से लोग इसे गलती से रूसी समझ सकते है। जब यह एलर्जी कानों के पीछे होती है तो त्वचा फटी हुई नजर आती है, जबकि छाती और गर्दन वाले हिस्सों में होने पर ये लाल और उभरा दिखाई दे सकता है।

उपचार

अपने बच्चे की सिर पर पपड़ी जमने का इलाज करने के लिए, जैतून के तेल से बच्चे के सिर पर मालिश करें और फिर कंघी से पपड़ी को हटाएं। सिर या कान के पीछे के हिस्से को धोने के लिए थोड़ा सा रूसी-रोधक शैम्पू का उपयोग करना भी फायदेमंद साबित हो सकता है।

7. इंटरट्रिगो

अक्सर यह मोटे बच्चों में देखा जाता है, यह चकत्ते गर्दन के मुड़ने वाले भाग में सबसे ज्यादा दिखाई देते हैं । यह दर्द रहित होता है, हालांकि त्वचा-से-त्वचा के घर्षण होने से इसमें थोड़ा दर्द हो सकता है।

कारण

यह चकत्ते तब दिखाई देते हैं, जब अत्यधिक नमी होती है जैसे कि लार और थूक टपक कर बच्चे की त्वचा में इकट्ठा हो जाते हैं। चूंकि त्वचा के ये हिस्से हवा के संपर्क में नहीं आते हैं, इसलिए नमी के सूखने की बहुत कम संभावना होती है, जिससे आपके बच्चे को संक्रमण होने का खतरा रहता है।

लक्षण

यह लाल या भूरे रंग का दिखता है। इससे खुजली होने की और दुर्गंध आने की संभावना होती है जबकि त्वचा पपड़ीदार या फटी हुई नजर आती है।

उपचार

आपको बच्चे की त्वचा की परतों को पानी से धोना और साफ करके इसे अच्छी तरह से सुखाना चाहिए। फिर इसे ठीक जल्दी ठीक करने के लिए पेट्रोलियम जेली या जिंक ऑक्साइड मलहम लगाएं । एक टॉपिकल स्टेरॉयड गंभीर मामलों में भी मौखिक दवा के रूप में निर्धारित किया जा सकता है।

बच्चों में त्वचा संबंधी एलर्जी को रोकने के लिए टिप्स

बच्चों में ज्यादातर त्वचा संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए आपको कुछ सावधानी बरतनी होगी और कुछ सरल उपायों को अपनाना होगा। बच्चे की त्वचा को साफ और नमी युक्त रखना इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहाँ कुछ ऐसी चीजें दी गई हैं, जो आपको बच्चे में होने त्वचा संबंधी एलर्जी को रोकने में मदद करेगा:

  • हर दिन अपने बच्चे को नहलाते समय साबुन का प्रयोग ना करें। साबुन का प्रयोग त्वचा में रूखापन पैदा करता है, जिससे बच्चे की त्वचा को पपड़ीदार हो जाती है, इसकी वजह से त्वचा का प्राकृतिक चिकनापन या तेल खत्म हो जाता है अगर इसका उपयोग लगातार किया जाए तो।
  • हर बार बच्चे को स्नान करने के बाद भी बेबी लोशन या क्रीम का उपयोग करके उनकी त्वचा को मॉइस्चराइज करें।
  • अपने बच्चे को कीटों और खटमल से दूर रखें। आप कीटों को दूर रखने के लिए अपने घर की खिड़कियों पर जालियों का उपयोग कर सकती हैं और बाहर जाते समय अपने बच्चे को पैंट और लंबी आस्तीन के कपड़े पहनाएं, खासकर अगर आप बच्चे को पार्क या खुली जगहों पर ले जा रही हों।
  • अपने बच्चे को एक ही मोटा गर्म कपड़ा न पहनाएं बल्कि एक से ज्यादा पतले गर्म कपड़े पहनाएं, ताकि जब उसे ज्यादा गर्मी लगे तो आप एक कपड़े का लेयर उतार सकें और इस तरह उसे पसीने के संपर्क में आने से बचाएं।
  • भोजन में शामिल होने वाले घटक की जरूर जाँच कर लें, ये बच्चे को भोजन से होने वाली एलर्जी से बचाने में मदद करेगा। इस तरह से आप, काफी हद तक बच्चे को कई सामान्य खाद्य एलर्जी से बचने में सक्षम होंगी।
  • अपने बच्चे के कमरे का तापमान ऐसा रखें कि वो आरामदायक महसूस करे। यह ना तो बहुत गर्म होना चाहिए और ना ही बहुत ठंडा होना चाहिए।
  • यदि आपके परिवार में किसी को किसी भी तरह की त्वचा संबंधी एलर्जी है, तो बच्चे को उनके सीधे संपर्क में आने से रोके और बच्चे को उनसे दूर रखें।
  • अपने बच्चे को हर समय मुलायम, सूती कपड़े पहनाएं। सिंथेटिक मटेरियल से बने कपड़े एलर्जी का कारण हो सकते हैं इसके अलावा यह खुजली पैदा करने वाले और खुरदरे होते हैं।

डॉक्टर से परामर्श कब करें

जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, त्वचा की ज्यादातर समस्याएं समय के साथ हल होती है और घर पर भी इसका इलाज किया जा सकता है। फिर भी, कुछ मामलों में, डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक हो जाता है। यदि आपके बच्चे में एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो आपको उसे बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना चाहिए। कभी-कभी, त्वचा पर दिखने वाला एक दाना भी किसी बीमारी का संकेत हो सकता है – इस लिए ऐसे मामलों में तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता होती है। यदि आपके बच्चे को बुखार है और वह लगातार रो रहा है या सुस्त है, तो आपको डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

बच्चों में त्वचा की एलर्जी से निपटने के लिए बहुत धैर्य रखने की आवश्यकता होती है। जब त्वचा की एलर्जी की बात आती है, तो इसकी रोकथाम करना बहुत जरूरी होता है। अपने बच्चे को त्वचा की एलर्जी से बचाने के लिए स्वच्छता बनाए रखें और बच्चे की त्वचा को जितना संभव हो साफ और सूखा रखें।

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समर नक़वी

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