गर्भावस्था के दौरान पेशाब में ल्यूकोसाइट

प्रेगनेंसी के दौरान पेशाब में ल्यूकोसाइट होना
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प्रेगनेंसी के दौरान आपके गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास आप पर निर्भर करता है। बच्चे के विकास में कोई कमी न रह जाए इसके लिए आपको बहुत सारी बातों का ध्यान रखना होता है, जैसे आपको रेगुलर चेकअप के लिए अपने डॉक्टर के पास जाना चाहिए और इस दौरान आपके लिए टेस्ट किए जाएंगे। हालांकि हर चेकअप  के दौरान आपको यूरिन टेस्ट कराने की आवश्यकता पड़ सकती है। इस टेस्ट की मदद से पेशाब में  ल्यूकोसाइट या वाइट ब्लड सेल्स के लेवल का पता लगाया जाता है और साथ ही ये डॉक्टर को इन्फेक्शन के बारे में पुष्टि करता है, अगर ऐसा होता है तो आपको ट्रीटमेंट की जरूरत होगी, ताकि आगे किसी भी मेडिकल  कॉम्प्लिकेशन से बचा जा सके। इस लेख में, आप जानेंगी कि ल्यूकोसाइट क्या हैं, इसका क्या कारण है और इसके लेवल को बैलेंस करने के लिए कौन से ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं।

पेशाब में ल्यूकोसाइट होना क्या है?

ल्यूकोसाइट, वाइट ब्लड सेल्स होते हैं जो आपके इम्यून सिस्टम में मौजूद होते हैं। यह आपके शरीर को इन्फेक्शन और बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। जब यह पेशाब में दिखाई देने लगता है, तो यह ज्यादातर इस बात का संकेत होता है कि आपकी किडनी या यूरिनरी सिस्टम में इन्फेक्शन है। शरीर के बाकी हिस्सों में भी ल्यूकोसाइट लेवल के बढ़ने से यह इन्फेक्शन का संकेत होता है।

यूरिन में मौजूद ल्यूकोसाइट का एवरेज लेवल 2 से 5 डब्ल्यूबीसी/एचपीएफ के बीच होता है। हालांकि, अगर ल्यूकोसाइट लेवल बढ़ जाता है और 5 डब्ल्यूबीसी/एचपीएफ से ऊपर चला जाता है, तो यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है जिसे जांच और उपचार की जरूरत होती है।

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गर्भावस्था के दौरान पेशाब में ल्यूकोसाइट मौजूद होने का क्या कारण होता है?

गर्भवती महिलाओं के पेशाब में वाइट ब्लड सेल्स काउंट बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

1. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन 

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन या यूटीआई गर्भावस्था के दौरान ल्यूकोसाइट होने का सबसे आम कारण होता है। यह प्रेगनेंसी के कारण आपके शरीर में होने वाले फिजिकल चेंजेस के कारण होता है। यदि आप यूटीआई से पीड़ित हैं, तो ल्यूकोसाइट आमतौर पर पेशाब में मौजूद होता है। जब एक महिला गर्भवती होती है, तो उसके ब्लैडर का वॉल्यूम भी बढ़ जाता है, लेकिन टोन घट जाती है, क्योंकि हार्मोन लेवल (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) बढ़ जाता साथ ही मूत्रवाहिनी (यूरेटर) भी फैलने लगता है।urinary tract infection in women

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इस कंडीशन में ब्लैडर को पूरी तरह से खाली करना संभव नहीं होता है और इसलिए बैक्टीरिया आपके शरीर से बाहर नहीं निकल पता है। इसके बजाय यह और ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे कारण इन्फेक्शन होता है।

2. एसिम्प्टोमैटिक बैक्टीरिया 

जब पेशाब में बैक्टीरिया होते हैं और रोगी को कोई लक्षण नहीं होता है, तो इसे एसिम्प्टोमैटिक बैक्टीरियूरिया कहा जाता है।

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लगभग 30% गर्भवती महिलाओं को यूरिनरी ट्रैक्ट में बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो सकता है, लेकिन इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसकी वजह से पेशाब  में ल्यूकोसाइट आने लगता है। यदि गर्भवती महिलाओं में इसे बिना उपचार किए छोड़ दिया जाता है, तो इससे पायलोनेफ्राइटिस (किडनी इन्फेक्शन) जैसी बीमारी हो सकती है। इसलिए, डॉक्टरों के लिए नियमित रूप से यूरिन टेस्ट लेना जरूरी होता है।

3. जेनिटल इन्फेक्शन 

सेक्शुअल और नॉन-सेक्शुअल तरीके से ट्रांसमिट होने वाले इन्फेक्शन से आपके पेशाब में वाइट ब्लड सेल्स  दिखाई दे सकते हैं। गर्भवती महिलाओं के पेशाब में ल्यूकोसाइट का कारण बनने वाले इन्फेक्शन कुछ इस प्रकार हैं: क्लैमाइडिया, यीस्ट वजाइनल इन्फेक्शन, बैक्टीरियल वैजिनाइटिस, गोनोरिया और जेनिटल हर्पीस।

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4. किडनी में इन्फेक्शन 

किडनी इन्फेक्शन या पायलोनेफ्राइटिस, तब विकसित होता है जब गर्भवती महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का इलाज नहीं किया जाता है। यह एक सीरियस कंडीशन होती है जिसका इलाज जल्द से जल्द किया जाना चाहिए, ताकि समय से पहले होने वाले लेबर या प्रीमैच्योर मेम्ब्रेन के फटने से बचा जा सके। किडनी इन्फेक्शन की वजह से ल्यूकोसाइट पेशाब  में दिखाई दे सकता है और इसके कारण आपको बुखार, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और उल्टी का अनुभव हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाले फिजिकल चेंजेस के कारण गर्भवती महिलाएं इससे ज्यादा पीड़ित होती हैं और जैसे-जैसे फीटस का विकास होता है, यह किडनी पर बहुत ज्यादा प्रेशर डालना शुरू कर देता है, जिससे इन्फेक्शन की संभावना और बढ़ जाती है।

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5. सिस्टिटिस

इस तरह के यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन से आपके ब्लैडर में सूजन हो जाती है और पेशाब में वाइट ब्लड सेल्स काउंट भी बढ़ जाता है । यह एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण होता है और इसके लक्षण भी यूटीआई के समान होते हैं, लेकिन इसके अलावा आपको पीठ के निचले हिस्से में दर्द और असुविधा भी महसूस हो सकती है। यदि सूजन गंभीर है, तो पेशाब में ल्यूकोसाइट के साथ ब्लड भी आ सकता है।

Cystitis

गर्भावस्था के दौरान पेशाब में वाइट ब्लड सेल्स के संकेत और लक्षण 

ज्यादातर, संकेत और लक्षण अलग अलग होते हैं जो ल्यूकोसाइट लेवल में होने वाली वृद्धि पर निर्भर करते हैं। गर्भावस्था के दौरान पेशाब में ल्यूकोसाइट के कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

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  • पेशाब करते समय जलन होना
  • लगातार पेशाब आना
  • ब्लैडर को खाली न कर पाना 
  • पेशाब से बदबू आना
  • पेशाब में धुंधलापन नजर आना 
  • कमर के निचले हिस्से में दर्द होना 
  • कमजोरी और थकान
  • हल्का बुखार
  • मतली और उल्टी

निदान

ल्यूकोसाइट लेवल बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होता है। इसके अलावा एक गर्भवती महिला जिन लक्षणों का अनुभव करती हैं, उसमें यूरिन में पाए जाने वाले ल्यूकोसाइट लेवल का अलग तरह से  निदान किया जाता है। यह निदान कैसे किया जाता है, इसके बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें।

1. ल्यूकोसाइट लेवल को कैसे मापें

यूरिन रूटीन माइक्रोस्कोपी के साथ यूरिन कल्चरल टेस्ट और सेंसिटिविटी टेस्ट किया जाता है, यह इस बात की जांच करता है कि आपके यूरिनरी सिस्टम में बैक्टीरिया मौजूद हैं या नहीं।

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गर्भवती महिलाओं में 4 से 5 डब्ल्यूबीसी/एचपीएफ ल्यूकोसाइट लेवल तक बढ़ने की इजाजत होती है, ऐसा  सिर्फ तभी होता है जब अन्य सभी संकेतक चेंज नहीं होते हैं। ल्यूकोसाइट लेवल 5 डब्ल्यूबीसी/एचपीएफ से ऊपर जाने पर यह इस बात का संकेत होता है कि आपकी किडनी या यूरिनरी सिस्टम में सूजन आ गई है।

2. ऐनलाइज कैसे करें

पहली तिमाही के दौरान, आपका यूरिन रूटीन और माइक्रोस्कोपी टेस्ट किया जाता है जो हर तीन से चार हफ्तों के बाद किया जाता है। दूसरी तिमाही के दौरान, यह टेस्ट हर दो हफ्ते में किया जाता है और तीसरी तिमाही के दौरान, यह टेस्ट हर हफ्ते किया जाता है। टेस्ट एनालिसिस के लिए सुबह के पहले पेशाब का सैंपल लिया जाता है और इसे जार में कलेक्ट का लिया जाता और फिर इसे स्टरलाइज किया जाता है ताकि पेशाब का सैंपल दूषित न हो। इसके अलावा आपके डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, आपके मेडिकेशन और लक्षण के आधार पर इसके कारण का पता लगाएंगे।

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3. इंस्ट्रुमेंटल निदान 

यह आमतौर पर एक अल्ट्रासाउंड होता है, जिसमें ब्लैडर, यूरिनरी ट्रैक्ट और किडनी की स्टडी की जाती है। पेल्विक रीजन में किसी भी वृद्धि का स्कैन के दौरान स्पष्ट रूप से पता चल जाता है। अल्ट्रासाउंड की मदद से न्यूरोजेनिक ब्लैडर, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज, किडनी स्टोन और ऑब्सट्रक्टिव यूरोपैथी जैसी समस्या का पता लगाया जा सकता है।

4. डिफ्रेंशियल निदान

इसमें पेशाब का क्लिनिकल एनालिसिस किया जाता है जहाँ वाइट ब्लड सेल्स काउंट में वृद्धि देखी जा सकती है। इन एनालिसिस को गर्भवती महिलाओं की जनरल कंडीशन और शिकायतों से कम्पेयर किया जाता है। इस कंडीशन के पीछे का कारण जानने के लिए यह एनामनेसिस उपलब्ध होता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें यूरिन कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्ट किया जाता है और मुख्य रोगाणु का पता लगाया जाता है, जिससे आपको सही थेरेपी दी जा सके। यह प्रक्रिया परिणाम सटीक होता है।

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Leukocytes diagnosis

एनालिसिस के बाद, किसी भी कॉम्प्लिकेशन से बचने के लिए आपको इसका तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए आवश्यक है कि किसी भी गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं से बचने के लिए उपचार तुरंत शुरू किया जाए। यहाँ इससे जुड़े कॉम्प्लिकेशन के बारे में भी आपको बताया गया है।

इफेक्ट्स और कॉम्प्लिकेशन 

जैसा कि पहले बताया गया है, यदि आपके पेशाब  में ल्यूकोसाइट का हाई लेवल पाया जाता है, तो आपको इसका उपचार तुरंत शुरू कर देना चाहिए। अगर आपके डॉक्टर इसके कारण का पता लगा लेते हैं, जैसे कि आपके टेस्ट में पायलोनेफ्राइटिस को देखा गया है, जो कि किडनी में सूजन की समस्या होती है और बैक्टीरियल इन्फेक्शन  के कारण होती है, तो डॉक्टर ट्रीटमेंट के लिए कुछ एंटीबायोटिक्स लिख सकते हैं जिन्हें बेहद सावधानी से निर्देशों का पालन करते हुए लेना चाहिए।

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एक्लेमप्सिया एक और समस्या है, जो पेशाब में ल्यूकोसाइट लेवल बढ़ने के कारण उत्पन्न हो सकती है, जिससे आपका ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना होती है। गर्भावस्था के दौरान आपकी कंडीशन को बहुत सावधानी से मॉनिटर किया जाता है ताकि बच्चे के विकास से जुड़े कोई सीरियस कॉम्प्लिकेशन न पैदा हों।

यदि निदान में सिस्टिटिस पाया जाता है, तो यह एक सीरियस कंडीशन हो सकती है और आपको पेशाब में तकलीफ हो सकती है। आगे चलकर यह समस्या गैंग्रीनस सिस्टिटिस में बदल सकती है, जिसमें आपको तेज दर्द महसूस हो सकता है और ठीक से पेशाब करने में परेशानी हो सकती है, और साथ ही ब्लैडर और पेरिटोनिटिस के फटने का खतरा होता है।

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कुछ इन्फेक्शन की वजह से किडनी स्टोन हो जाता है। इसलिए, समय पर इसका इलाज करना बहुत जरूरी होता है, ताकि इससे आपको ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े और न ही यह किसी सीरियस कॉम्प्लिकेशन का कारण बने। आइए जानते हैं पेशाब में ल्यूकोसाइट लेवल बढ़ने पर आप इसका कैसे इलाज कर सकती हैं।

पेशाब में ल्यूकोसाइट का इलाज कैसे होता है

पेशाब में ल्यूकोसाइट लेवल को बैलेंस करने या कम करने का कोई सटीक तरीका नहीं है। ल्यूकोसाइट के अलग-अलग लेवल के आधार पर इसका ट्रीटमेंट किया जाता है, जिनमें से कुछ आपको नीचे बताए गए हैं:

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1. नेचुरल डिसइंफेक्टेंट 

यदि सूजन बहुत ज्यादा गंभीर नहीं है, तो इसका इलाज नेचुरल डिसइंफेक्टेंट और डाइयुरेटिक्स से किया जा सकता है। अधिकांश गर्भवती महिलाओं को क्रैनबेरी जूस और बहुत सारा पानी पीने की सलाह दी जाती है।

बार बार पेशाब करने से गंभीर इन्फेक्शन होने का खतरा कम हो जाता है।

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2. एंटीबायोटिक्स

यदि सूजन बहुत ज्यादा गंभीर हो गई है, तो एंटीबायोटिक दवाओं को लेने की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन इस बात का खयाल रहे कि आपके द्वारा ली जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं डॉक्टर द्वारा निर्धारित होनी चाहिए, जो आपके बच्चे के लिए भी सुरक्षित हो। एंटीबायोटिक दवाएं, प्रेगनेंसी के दौरान इन्फेक्शन को खत्म करने और किसी भी सीरियस कॉम्प्लिकेशन को रोकने में मदद करती हैं।

3. सर्जरी

यदि किडनी स्टोन जैसी समस्या है जो ल्यूकोसाइट लेवल बढ़ने के कारण है, तो आपकी इस समस्या को दूर करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता होगी। किडनी स्टोन से छुटकारा पाने के लिए खूब सारा पानी पिएं, हालांकि इसका नेचुरल तरीके से बाहर आना काफी तकलीफदेह हो सकता है।

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4. साउंड-वेव, कीमोथेरेपी, और रेडिएशन 

बड़े किडनी स्टोन के लिए, साउंड वेव का उपयोग करके इसे तोड़ना पड़ता है।

तो, गर्भावस्था के दौरान पेशाब में ल्यूकोसाइट को रोकने के लिए आप क्या कर सकती हैं? यह जानने के लिए आगे पढ़ना जारी रखें।

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बचाव 

पेशाब में ल्यूकोसाइट लेवल को बढ़ने से रोकने के लिए आपको कुछ तरीके बताए गए हैं:

  • रेगुलर यूरिन टेस्ट करवाएं।
  • शरीर से बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने के लिए बहुत सारा पानी पिएं।
  • बार-बार पेशाब के लिए जाएं।
  • टॉयलेट का उपयोग करने से पहले अपने हाथों को धोएं और पर्सनल हाइजीन का खयाल रखें, साथ ही पेशाब कर लेने के बाद अपने जेनिटल को साफ करें।
  • क्लीनिंग के दौरान आप वाइप का इस्तेमाल करते हुए आगे से पीछे तक क्लीन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेशाब में ल्यूकोसाइट की उपस्थिति और इसका लेवल बढ़ने से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल यहाँ दिए गए हैं:

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1. क्या पेशाब  में वाइट ब्लड सेल्स बढ़ने से यह ब्लड ल्यूकेमिया की ओर इशारा करता है?

नहीं, पेशाब में वाइट ब्लड सेल्स बढ़ने से यह कभी ब्लड ल्यूकेमिया का संकेत नहीं देता है।

2. क्या डब्ल्यूबीसी काउंट बढ़ने से एसटीडी इन्फेक्शन होता है?

पेशाब में वाइट ब्लड सेल्स बढ़ने से यह कभी भी एसटीडी का कारण नहीं बनता है, एसटीडी क्लैमाइडिया इन्फेक्शन के कारण होता है।

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3. क्या पेशाब में ल्यूकोसाइट लेवल बढ़ने के कारण बच्चे की मृत्यु हो सकती है, यदि इसका इलाज न किया जाए?

ऐसे कई मामले हैं जहाँ पेशाब में ल्यूकोसाइट काउंट बढ़ने से टॉक्सिन्स और गंभीर सूजन की समस्या जुड़ी हुई है। जिन गर्भवती महिलाओं में ये कंडीशन पाई जाती है, उन्हें जल्दी थकावट हो जाती है और उनके ब्लैडर पर बहुत पर दबाव बढ़ जाता है। ये सभी चीजें बच्चे के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं क्योंकि इससे प्रेगनेंसी के दौरान प्री-एक्लेमप्सिया जैसी समस्या के होने का खतरा होता है।

यदि गर्भावस्था के दौरान पेशाब में ल्यूकोसाइट एस्टरेस होता है और साथ में सूजन भी देखी जाती है, तो कोई खतरा नहीं होता नहीं होता है, लेकिन अगर इसका इलाज समय पर नहीं किया जाता है, तो यह बच्चे के जन्म के दौरान कॉम्प्लिकेशन को बढ़ा सकता है।

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गर्भावस्था के दौरान सबसे जरूरी चीज जिसका आपको पालन करना चाहिए वो यह है कि पेशाब में ल्यूकोसाइट लेवल की किसी भी वृद्धि की पहचान करना और इलाज कराना, यह प्रेगनेंसी के दौरान आप और आपके बच्चे की सुरक्षा के लिए बहुत अहम है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो आप दोनों की हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। अक्सर, एब्नोर्मल डब्लूबीसी काउंट की जांच शुरूआती रेगुलर यूरिन टेस्ट में ही हो जाती है। लेकिन, अगर इसका ठीक से ट्रीटमेंट नहीं किया जाता है और सही तरह से देखभाल नहीं की जाती है, तो यह कंडीशन और भी खराब हो सकती है। इसलिए, इस बात का खयाल रखें कि आप अपनी प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी चेकअप को मिस न करें और अपने डॉक्टर के निर्देशों का ध्यानपूर्वक पालन करें।

स्रोत और संदर्भ:
स्रोत १
स्रोत २
स्रोत ३
स्रोत ४

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