20 प्रकार के भारतीय प्रसवोत्तर आहार

20 प्रकार के भारतीय प्रसवोत्तर आहार

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गर्भावस्था से पहले, ज्यादातर महिलाओं को कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करने के लिए कहा जाता है। मसालेदार खाद्य पदार्थों को बिलकुल ‘न’ कहें और तैलीय वसायुक्त खाद्य पदार्थों को खुद से बहुत दूर रखें, यह परहेज कई गर्भवती महिलाओं में इन्हीं खाद्य पदार्थों के सेवन की अत्यधिक इच्छा उत्पन्न करता है। लेकिन, प्रसव हो जाने का मतलब यह कदापि नहीं है कि आप तुरंत जो चाहे खाना शुरु कर दें। गर्भावस्था के बाद भारतीय आहार का पालन, इसकी अपनी सावधानियों के साथ किया जाता है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि कौन से खाद्य पदार्थ का खासकर प्रसवोत्तर आहार के रूप में सेवन किया जाना चाहिए या किया जा सकता है,

प्रसव के बाद पोषण महत्वपूर्ण क्यों है?

प्रसव के साथ एक महिला के शरीर में अनेक हानियां भी होती हैं, खुद का खयाल रखना भी उतना ही जरूरी है जितना एक नवजात शिशु का खयाल रखना। यहाँ बताया गया है कि प्रसवोत्तर पोषण क्यों महत्वपूर्ण है:

1. ऊर्जा प्रदान करता है

तीसरी तिमाही के दौरान और यहाँ तक कि प्रसव के बाद भी, कमजोरी होना एक सामान्य बात है। कई महिलाएं रक्तहीनता से पीड़ित (एनेमिक) हो जाती हैं या उनमें लौह तत्व की कमी हो जाती है जिसके कारण उनमें थकान और कमजोरी होती है और वे लगातार सिर में दर्द का अनुभव भी करती हैं। लौह तत्वों से परिपूर्ण खाद्य पदार्थ का सेवन, जैसे मांस, पालक, फलियां और इत्यादि एक महिला को ऊर्जा प्रदान करता है।

2. माँ के दूध को बढ़ाता है

स्वास्थ्यवर्धक वसा और पोषण तत्व, माँ के दूध की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं जबकि अस्वास्थ्यकर वसा फास्ट फूड या अस्वास्थ्यकर भोजन में पाया जाता है और इत्यादि, प्रमाणित करता है कि यह भोजन शिशु को दिए जाने वाले, माँ के दूध को प्रभावित कर सकता है। इसलिए स्वस्थ आहार का सेवन शिशु को भी स्वस्थ रखता है।

3. मनोदशा में वृद्धि

हम पहले से ही जानते हैं कि प्रसवोत्तर तनाव बहुत आम है। हालांकि, स्वस्थ आहार का सेवन करने से शरीर को सही पोषण मिलता है, आप स्वस्थ व ऊर्जावान महसूस करती है और पूर्णतः अधिक खुश रहती हैं। यह निश्चित ही प्रसवोत्तर तनाव को रोकने या उसका इलाज करने में मदद करता है।

प्रसव के बाद क्या खाएं नई माँओं के लिए 20 प्रकार के भारतीय खाद्य पदार्थ

यहाँ कुछ खाद्य पदार्थ दिए गए हैं, जिनका आप प्रसव के बाद सेवन कर सकती हैं।

1. सहजन (मोरिंगा) की पत्तियां

प्रसव के बाद नई माँओं को सहजन (मोरिंगा) की पत्तियों को खाने की अत्यधिक सलाह दी जाती है। इसमें विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘बी,’ और विटामिन ‘सी’, अच्छी मात्रा में होता है और साथ ही इसमें कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन जैसे अन्य पोषक तत्वों और खनिजों की भी एक अच्छी मात्रा होती है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

गर्भावस्था के बाद 4 महीने तक जानेमाने शतावरी कल्प के रुप में सहजन के पत्तों का सेवन किया जा सकता है। ताजा सहजन के पत्तों का उपयोग सूप, तली हुई सब्जियों आदि में भी किया जा सकता है।

2. अंकुरित साबुत अनाज/स्प्राउट्स

अंकुरित अनाजों के लाभ के बारे में हमें बचपन से ही जानकारी मिलती रही है। सूखे अनाज में आमतौर पर अंकुरित अनाज की अपेक्षा कम पोषण होता है। अंकुरित अनाज/जैसे गेहूं, बाजरा, ज्वार, रागी आदि सूखे की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

अंकुरित अनाज/स्प्राउट्स को सूखे अनाजों के साथ मिश्रित करके पीस कर आटा बनाया जा सकता है। इस आटे का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है, जिसमें सबसे लोकप्रिय उपयोग दलिया है।

3. बादाम

गाजर के हलवे में डालकर खाने से लेकर साबुत खाने तक, बादाम हमेशा से ही एक लोकप्रिय मेवा और स्वस्थ स्नैक का बेहतर विकल्प रहा है। आपके आहार में प्राकृतिक बादाम काफी जरूरी होते हैं, क्योंकि यह बड़ी मात्रा में पोषण और विटामिन प्रदान करते हैं जो इसमें मौजूद हैं।

इन्हें अपने आहार में कैसे शामिल करें

एक कटोरी में पानी लें और उसमें बादाम भिगो दें। इसे रात भर के लिए छोड़ दें और सुबह उठने के बाद सबसे पहले भीगे हुए बादाम का ही सेवन करें। यह न केवल आपको स्वस्थ रखता है, बल्कि यह बच्चे की बुद्धिमत्ता को विकसित करने में भी मदद करता है।

4. लौकी

लौकी से मिलने वाले फायदे हैं, जैसे उचित जलयोजन (हाईड्रेशन), स्तनपान के लिए बेहतर दुग्धउत्पादन और स्तनपान छोड़ने के बाद वजन घटाने में आपकी सहायता। लौकी विटामिन ‘सी’, विटामिन ‘ए’, सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, फोलेट, लौह तत्व और कई अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ ही इसमें लगभग 95% पानी होता है, जो शरीर में पानी की कमी को दूर करने वाले पदार्थ के रुप में जाना जाता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

अपने भोजन के लिए मानक स्तर में तली हुई सब्जी बनाना सबसे आसान है और यह जल्दी भी बन जाती है । यदि आपको मीठा पसंद है, तो लोकप्रिय दूधी हलवा के रूप में लौकी के सेवन का कोई और बेहतर तरीका नहीं हैं। अतिरिक्त पोषण के लिए इसमें कुछ बादाम मिला सकती हैं।

5. लहसुन

लहसुन

लहसुन में भले ही गंध होती है, लेकिन इसमें ऐसे गुण भी होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली की मदद करते हैं। यह सामान्य बीमारियों को दूर करता है साथ ही विभिन्न पेस्ट और आयुर्वेदिक दवाओं में भी इसका उपयोग किया जाता हैं।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

किसी भी सब्जी की करी बनाते समय या किसी सूप को पकाते समय, थोड़ी मात्रा में लहसुन का उपयोग करने से व्यंजन का स्वाद बेहतर होता है और साथ ही यह एक स्वास्थ्यपरक विकल्प भी है।

6. मेथी के दाने

मेथी के पत्तियों और बीज, दानों को कई तरीकों से भोजन में और पोषण के सप्लीमेंट की तरह उपयोग किया जाता है। स्तनपान के दौरान, अंकुरित मेथी के बीज के उपयोग से लगभग आधे साल या 6 महीने तक माँ को ऊर्जा के रूप में काफी मदद और राहत मिलती है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

भोजन और उसके लिए बनाई गई मुख्य सब्जी के साथ अंकुरित मेथी का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। इतना ही नहीं प्याज और लहसुन के साथ मेथी के अंकुरित बीज को तल कर एक स्नैक्स के रुप में भी खाया जा सकता है।

7. जीरा

जीरा का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है, हालांकि उसमें अनेक स्वास्थ्य लाभ होते हैं। वह शरीर के कई हिस्सों में जैसे, पाचन तंत्र से लेकर प्रतिरक्षा क्षमता के साथसाथ रक्त परिसंचरण तक में सुधार करता है। चूंकिइसमें एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, यह शारीरिक ऊर्जा बनाए रखने के साथ ही स्वस्थ और तरोताजा रखने में भी मदद करता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

जीरे को पाउडर के रूप में सेवन करना सबसे अच्छा होता है। इसे रोजाना थोड़े दूध के साथ भी सेवन करना लाभदायक है। यह स्तनपान के दौरान दुग्ध उत्पादन और सकी आपूर्ति को प्रभावित करता है, जिससे नई माँओं को मदद मिलती है।

8. तिल के बीज

भारत में यह लोकप्रिय है, इनमें बहुत सारे घटक, जैसे लौह तत्व, तांबा (कॉपर), मैग्नीशियम और कैल्शियम आदि होते हैं, जो सीधे माँ के स्वास्थ्य को लाभ पहुँचाते हैं। इन बीजों के सही उपयोग से मलत्याग की प्रक्रिया दुरुस्त होती है और साथ ही यह पाचन की परेशानियों में भी मददगार होते हैं।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

कई व्यंजनों में तिल का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है और उन तरीकों से तिल का सेवन करना आसान है। इन बीजों का उपयोग लड्डू, चिक्की और अन्य मीठे पदार्थ बनाने के लिए भी किया जा सकता है जो आपकी मीठा खाने की इच्छा को पूर्ण करने के साथ ही आवश्यक पोषण भी दे सकते हैं।

9. हरी सब्जियां और फल

खट्टे फलों की बात करें तो यह स्तनपान के लिए दुग्धउत्पादन को बढ़ाने के साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करने में मदद करते हैं। इसी तरह हरी सब्जियों को बेहतर लौह तत्व प्रदान करने के लिए जाना जाता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

अधिकांश फलों को कच्चा खाया जा सकता है या रस के माध्यम से भी लिया जा सकता है। हरी सब्जियों का उपयोग सलाद में या पकाकर भोजन के दौरान किया जा सकता है।

10. रागी

रागी

रागी में काफी मात्रा में कैल्शियम और लौह तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य को बेहतर करने में मदद करते हैं। खासतौर पर, अगर आपको दुग्धशर्करा (लैक्टोस इन्टॉलरेंस) से परेशानी है, तो रागी से आपको आवश्यक पोषण मिल सकते हैं, जिससे प्रसव के बाद आपको अपनी स्फूर्ति और ताकत दोबारा वापस मिल सकती है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

रागी से विभिन्न खाद्य पदार्थ, जैसे डोसा, इडली, चपाती आदि बनाई जा सकती हैं और इसे दैनिक भोजन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

11. ओट्स

ओट्स उच्च मात्रा में लौह तत्व, प्रोटीन, कैल्शियम और कार्बोहाइड्रेट प्रदान करते हैं और यह पोषण का एक बेहतर माध्यम भी होता है। इसके अलावा इसमें अच्छी मात्रा में रेशा (फाइबर) होता हैं जो पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने और कब्ज़ को कम करने में मदद करता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

आमतौर पर इसे दूध या पानी के साथ पकाकर सेवन किया जाता है। इस मिश्रण में कटे हुए फल और मेवे भी डाले जा सकते हैं ताकि स्वाद और पोषण में सुधार हो सके।

12. दाल

दाल, प्रोटीन का एक सर्वोत्तम स्रोत है और यह कुछ दुर्लभ खाद्य पदार्थों में से एक है जो अतिरिक्त वसा के बिना प्रोटीन को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

सिर्फ दाल को पकाकर खाया जा सकता है या कुछ सब्जियों के साथ मिलाकर इसका लजीज व्यंजन बनाया जा सकता है।

13. गोंद के लड्डू

सर्दियों के दौरान गोंद के सेवन की अत्यधिक सलाह दी जाती है क्योंकि यह शरीर के लिए गर्मी का एक अच्छा स्रोत है। नई माँओं को गोंद का सेवन करने पर जोर दिया जाता है क्योंकि यह माँ के दुग्ध उत्पादन में मदद करता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

गोंद के लड्डू अधिक लोकप्रिय हैं और यह जल्दी भी बनते हैं।

14. अजवाइन

अजवाइन के सेवन से नई माँओं की परेशानियां आश्चर्यजनक रुप से समाप्त हो जाती हैं। दो चम्मच अजवाइन खाने से गैस और अपच की समस्याओं का तेजी से समाधान होता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

अजवाइन को पानी में उबालने के बाद आप इसे छानकर पी सकती हैं।

15. हल्दी

घावों को ठीक करने में उपयोगी और सामान्य स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हल्दी के गुणों से सभी वाकिफ हैं। यह यकृत की विषाक्तता को कम करने और वजन घटाने में मदद करता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

दूध या अपने भोजन की अन्य सामग्रियों के साथ, आधा चम्मच हल्दी का सेवन जरुर करना चाहिए।

16. पंजीरी

पंजीरी

पंजीरी, पंजाब में बनाया जाने वाला एक पौष्टिक सप्लीमेंट है जिसमें स्वास्थ्यवर्धक घटक होते हैं, और एक नई माँ के चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को बेहतर बनाने और वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

पंजीरी का इसके सामान्य रूप में इस्तेमाल करें या इसका लड्डू बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

17. सोंठ

सोंठ, सूखा अदरक होता है जिसमें कई एंटीइंफ्लेमटरी गुण होते हैं और यह प्रसवोत्तर सूजन को कम करने अथवा जल्दी ठीक होने में भी मददगार है। और साथ ही साथ दुग्धउत्पादन को बढ़ाने में भी मदद करता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

सूखे अदरक के पाउडर को एक महत्वपूर्ण मसाले के रूप में कई व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

18. अंडे

अंडे प्रोटीन के बेहतर स्रोत हैं और शरीर में अपेक्षाकृत तेजी से आत्मसात हो सकते हैं। इसी तरह डी.एच.ए फोर्टिफाइड अंडे, माँ के दूध में वसायुक्त अम्ल को बढ़ाते हैं और साथ ही इसे शिशु के लिए पौष्टिक बनाने में मदद करते हैं।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

अंडे का सेवन नाश्ते में आमलेट बनाकर, उबाल कर या भुर्जी बनाकर किया जा सकता है।

19. सैल्मन (सामन) मछली

सैल्मन (सामन) मछलीसामन मछली में डी.एच.. होता है, जो वसायुक्त अम्ल के स्तर को बेहतर बनाने और आपके शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करता है। यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने और खुश मिजाज रखने के साथ ही अवसाद को दूर रखने में भी मदद करता है।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

सामन मछली से बने व्यंजन आपके आहार का एक हिस्सा होना चाहिए, लेकिन सप्ताह में दो बार से अधिक नहीं।

20. कम वसायुक्त मांस

कम वसायुक्त मांस को लौह तत्व, प्रोटीन, विटामिन ‘बी12’ और अन्य बेहतर तत्वों के लिए जाना जाता है, जो ऊर्जा के स्तर को उच्च बनाए रखने में मदद करते हैं।

इसे अपने आहार में कैसे शामिल करें

कम वसायुक्त मांस आपके भोजन का एक हिस्सा हो सकता है, जिसे आप अपने तरीके से अतिरिक्त व्यंजन या करी के रुप में पका सकती हैं।

प्रसव के बाद भारतीय माँओं के लिए भोजन के बहुत सारे विकल्प हैं, साथ ही कुछ सावधानियां भी रखनी पड़ती हैं। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि एक माँ के प्रसवोत्तर आहार में वो सभी पोषण हो, जिसकी उसे और शिशु को आवश्यकता होती है।