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अक्सर गर्भवती महिलाओं को किसी भी कठिन एक्टिविटी से दूर रहने की सलाह दी जाती है और जब हम ऐसी एक्टिविटी के बारे में सोचते हैं, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में एक्सरसाइज का नाम ही आता है। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान एक्सरसाइज ना करना चाहे कितना भी उचित लगे, लेकिन गर्भवती होने पर व्यायाम बहुत सुरक्षित होता है, बशर्ते सही प्रकार की एक्सरसाइज चुनी जाएं और इन्हें प्रशिक्षित व्यक्ति के निर्देशन के अंदर किया जाए। हाय इंपैक्ट एक्सरसाइज, जो आपके पेट या कमर पर जोर डालें या तनाव पैदा करें, उनसे बचना चाहिए, क्योंकि ये पेट में पल रहे बेबी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
प्रेगनेंसी के दौरान हर दिन हल्की एक्सरसाइज करना सुरक्षित होता है। तनावपूर्ण और झटके वाली एक्सरसाइज से बचकर और कुछ सिंपल एक्सरसाइज अपनाकर आप स्वस्थ और फिट रह सकती हैं। हल्के व्यायाम करते रहने से न केवल आपको स्टैमिना और एनर्जी मिलती है, बल्कि आपको अच्छी नींद भी मिलती है, तनाव भी कम होता है और शरीर भी डिलीवरी के लिए तैयार होता है।
आमतौर पर, ऐसी कुछ एक्सरसाइज होती हैं, जिन्हें पहली तिमाही के दौरान नहीं करना चाहिए और कुछ ऐसी एक्सरसाइज होती हैं, जो कि दूसरी और तीसरी तिमाही के लिए उचित नहीं होती हैं। किसी ऐसे एक्सपर्ट से एक्सरसाइज सीखना बेहतर होता है, जिसे इस बात की समझ हो, कि कौन सी एक्सरसाइज करने से शरीर की किन मांसपेशियों पर असर होता है। अगर आप डायबिटीज, दिल की समस्याओं, लो-प्लेसेंटा, कमजोर गर्भाशय या ब्लीडिंग जैसी समस्याओं से ग्रस्त हैं, तो आपको कोई भी एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है।
प्रेगनेंसी के दौरान किन एक्सरसाइज से बचना चाहिए, इसका फैसला करने के लिए आपके मन की आवाज सबसे बेस्ट जज होती है। गर्भावस्था के दौरान बढ़ता हुआ पेट बड़े पैमाने पर सेंटर ऑफ ग्रेविटी को शिफ्ट कर देता है और शरीर के मूवमेंट को प्रभावित करता है। यहां पर कुछ ऐसी एक्टिविटीज दी गई हैं, जिनसे आप प्रेगनेंसी के दौरान बच सकती हैं:
वो एक्सरसाइज जिनमें जोर से कूदना, जॉगिंग करना और झटके शामिल होते हैं, उन्हें इस दौरान नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने के दौरान संतुलन खोने का खतरा होता है।
वो एक्सरसाइज, जिनमें भारी वजन उठाए जाते हैं, उनमें गर्भाशय पर दबाव पड़ता है और पेट पर खिंचाव आता है। ओवरहेड शोल्डर प्रेस भी कमर पर जोर डालते हैं।
पेट के बल लेटकर एक्सरसाइज करना भी गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदायक होता है। पहली तिमाही के बाद पीठ के बल लेटना भी थोड़ा असुविधाजनक हो सकता है। इन दोनों ही पोजीशन में एक्सरसाइज करने से असुविधा हो सकती है और इनसे बचना चाहिए।
वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, घुड़सवारी जैसे तेज एक्टिव स्पोर्ट्स में चोट लगने का बहुत खतरा होता है। प्रेगनेंसी के दौरान लिगामेंट्स और हड्डियां अधिक नाजुक हो जाती हैं और उन्हें नुकसान होने का खतरा अधिक होता है।
साइकिलिंग एक बहुत ही अच्छी एक्सरसाइज है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान पेट के बढ़ते आकार के कारण आपको साइकिल पर बैलेंस बनाने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे में सेंटर ऑफ ग्रेविटी के बदलने के कारण गिरने का डर अधिक होता है।
पेट के आसपास के हिस्से को आकार देने के लिए क्रंचेस बहुत अच्छी एक्सरसाइज हैं। लेकिन पहली तिमाही के दौरान, विशेष रूप से इस एक्सरसाइज से बचना चाहिए। पेट की निचली मांसपेशियों में खिंचाव के कारण गर्भाशय और शिशु पर अनचाहा दबाव बढ़ सकता है।
अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आना विकसित हो रहे शिशु के लिए नुकसानदायक होता है और इसी कारण हॉट सौना बाथ या हॉट योगा तकनीक प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करनी चाहिए।
प्रेगनेंसी के दौरान योगा करना बहुत अच्छा होता है, बल्कि ऐसे कई गर्भावस्था के योगा कोर्स हैं, जिन्हें आजमाकर आप अपने आपको रिलैक्स और तनाव मुक्त कर सकती हैं। लेकिन ऐसे कुछ योगासन हैं, जिनमें शरीर को बहुत घुमाने और झुकाने की जरूरत होती है। अगर आपने प्रेगनेंसी के पहले भी योगासन किए हैं, तो गर्भावस्था के दौरान इन योगासनों को जारी रखने से पहले डॉक्टर या एक प्रशिक्षित योगा इंस्ट्रक्टर से परामर्श लें।
जिन एक्सरसाइज और योगासन में पीछे की ओर झुकना पड़ता है, उदाहरण के लिए सूर्य नमस्कार, उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए। इन योगासनों से गर्भाशय पर अनचाहा खिंचाव पड़ता है, जो कि शिशु को प्रभावित कर सकता है।
गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करते समय यह बहुत जरूरी है, कि आप अपने शरीर में आने वाले बदलावों को समझें। लिगामेंट्स और हड्डियों को कमजोर बनाने वाले हॉर्मोनल बदलाव, बढ़ी हुई रेस्टिंग हार्ट रेट के साथ-साथ असंतुलन की एक भावना, आपके एक्सरसाइज रूटीन के लिए उपलब्ध विकल्पों को कम कर देती है। यहां पर कुछ ऐसी सावधानियां दी गई हैं, जिन्हें प्रेगनेंसी के दौरान एक्सरसाइज करते समय आपको ध्यान रखना चाहिए:
हमेशा याद रखें:
अगर डॉक्टर आपको एक्सरसाइज करने की अनुमति देते हैं, तो आप सप्ताह में 4 दिनों के लिए हर दिन लगभग 30 मिनट के एक्सरसाइज रूटीन को फॉलो कर सकती हैं, जिसमें हल्की एक्सरसाइज की जाएं। हालांकि वॉकिंग और अन्य शारीरिक गतिविधियां पहले की तरह सामान्य रूप से की जा सकती हैं।
मां बनने के सफर में फिट रहना किसी भी महिला के लिए बहुत जरूरी है। रोज के काम के अलावा कुछ मिनटों के लिए की जाने वाली स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज आपके शरीर को आसान और सुरक्षित डिलीवरी के लिए तैयार करने में बहुत मदद करती हैं। सही तरह के व्यायाम को चुनकर किसी भी तरह की जटिलता को दूर रखा जा सकता है।
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